प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 1 जनवरी, 2021 को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से छह राज्यों में छह स्थानों पर ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज- इंडिया (जीएचटीसी- इंडिया) के तहत हल्के मकान से जुड़ी परियोजनाओं (लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स) की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री अफोर्डेबल सस्टेनेबल हाउसिंग एक्सेलेरेटर्स- इंडिया (एएसएचए- इंडिया) के तहत विजेताओं की भी घोषणा करेंगे और प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी (पीएमएवाई-यू) मिशन के कार्यान्वयन में उत्कृष्टता के लिए वार्षिक पुरस्कार देंगे।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री एनएवीएआरआईटीआईएच (न्यू, अफोर्डेबल, वैलिडेटेड, रिसर्च इनोवेशन टेक्नोलॉजिज फॉर इंडियन हाउसिंग) नाम से नवोन्मेषी निर्माण प्रौद्योगिकी पर एक सर्टिफिकेट कोर्स और जीएचटीसी- इंडिया के जरिये पहचान किए गए 54 नवोन्मेषी आवास निर्माण प्रौद्योगिकी के एक संग्रह का विमोचन भी करेंगे। इस अवसर पर आवास एवं शहरी कार्य मंत्री (स्वंतत्र प्रभार) के अलावा त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री उपस्थित रहेंगे।

लाइटहाउस प्रोजेक्ट्स

लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स (एलएचपी) देश में पहली बार निर्माण क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर नए जमाने की वैकल्पिक वैश्विक प्रौद्योगिकी, सामग्रियों और प्रक्रियाओं का बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं। इनका निर्माण जीएचटीसी- इंडिया के तहत किया जा रहा है जो आवास निर्माण के क्षेत्र में नवीन तकनीकों को अपनाने के लिए एक समग्र परिवेश तैयार करने की परिकल्पना करता है। इन एलएचपी का निर्माण इंदौर (मध्य प्रदेश), राजकोट (गुजरात), चेन्नई (तमिलनाडु), रांची (झारखंड), अगरतला (त्रिपुरा) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में किया जा रहा है। इसमें प्रत्येक स्थान पर संबद्ध बुनियादी ढांचा सुविधाओं के साथ लगभग 1,000 मकानों को शामिल किया गया है। ये परियोजनाएं पारंपरिक तौर पर ईंट एवं कंक्रीट वाले निर्माण के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से यानी महज बारह महीने के भीतर रहने के लिए तैयार मकानों को प्रदर्शित और वितरित करेंगी। इसके अलावा ये मकान उच्च गुणवत्ता के साथ किफायती और टिकाऊ भी होंगे।

हल्के मकानों की ये परियोजनाएं कई प्रकार की तकनीकों का प्रदर्शन करती हैं। इनमें इंदौर के एलएचपी में प्रीफैब्रिकेटेड सैंडविच पैनल सिस्टम, राजकोट के एलएचपी में टनल फॉर्मवर्क का उपयोग करते हुए मोनोलिथिक कंक्रीट कंस्ट्रक्शन, चेन्नई की परियोजना में प्रीकास्ट कंक्रीट कंस्ट्रक्शन सिस्टम, रांची के एलएचपी में 3डी वॉल्यूमेट्रिक प्रीकास्ट कंक्रीट कंस्ट्रक्शन सिस्टम, अगरतला की परियोजना में लाइट गेज स्टील इन्फिल पैनलों के साथ ढांचागत स्टील फ्रेम और लखनऊ के एलएचपी में पीवीसी स्टे इन प्लेस फॉर्मवर्क सिस्टम शामिल हैं। हल्के मकानों की परियोजनाएं संबंधित जगहों पर प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण एवं उसके अनुकरण की सुविधा के लिए एक लाइव प्रयोगशाला के रूप में काम करेंगी। इसमें योजना, डिजाइन, उपकरणों का उत्पादन, निर्माण प्रथाओं और परीक्षण के लिए आईआईटी, एनआईटी, अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों और प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर कॉलेजों के संकाय एवं छात्रों के अलावा बिल्डर, निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों के पेशेवर एवं अन्य हितधारक शामिल हैं।

एएसएचए- इंडिया

अफोर्डेबल सस्टेनेबल हाउसिंग एक्सेलेरेटर्स- इंडिया यानी (एएसएचए- इंडिया) का उद्देश्य भविष्य की संभावित प्रौद्योगिकी को तैयार करने में सहायता प्रदान करते हुए घरेलू अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। एएसएचए- इंडिया पहल के तहत प्रौद्योगिकी को तैयार करने में सहायता प्रदान करने के लिए पांच एएसएचए- इंडिया केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके तहत संभावित प्रौद्योगिकी विजेताओं की घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा की जाएगी। इस पहल के माध्यम से पहचान की जाने वाली प्रौद्योगिकी, प्रक्रियाओं और सामग्रियों से रचनात्मक दिमाग वाले युवाओं, स्टार्ट-अप, इनोवेटर और उद्यमियों को एक मदद मिलेगी।

पीएमएवाई- यू मिशन

प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी (पीएमएवाई- यू) मिशन को '2022 तक सभी के लिए आवास' के दृष्टिकोण के साथ डिजाइन किया गया है। इसमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शहरी स्थानीय निकायों और लाभार्थियों के उत्कृष्ट योगदान को मान्‍यता देने के लिए आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने पीएमएवाई- यू के कार्यान्वयन में उत्कृष्टता के लिए वार्षिक पुरस्कार देने की योजना बनाई है। पीएमएवाई (शहरी) पुरस्कार- 2019 के विजेताओं को इस कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया जाएगा।

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प्रधानमंत्री ने पटना पक्षी अभयारण्य और छारी-ढांड में नए रामसर स्थलों का स्वागत किया
January 31, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एटा (उत्तर प्रदेश) में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थल के रूप में शामिल किए जाने का स्वागत किया है। श्री मोदी ने स्थानीय लोगों और आर्द्रभूमि के संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि ये पहचान जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं।

प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की पोस्ट का जवाब देते हुए एक्‍स पर पोस्ट किया:

“यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि एटा (उत्तर प्रदेश) में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थल के रूप में शामिल‍ किया गया है। वहां के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ आर्द्रभूमि के संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को हार्दिक बधाई। ये पहचान जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। आशा है कि ये आर्द्रभूमियां असंख्य प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में फलती-फूलती रहेंगी।”