भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) 4 जुलाई, 2020 को धर्म चक्र दिवस के रूप में आषाढ़ पूर्णिमा मनाएगा। यह दिवस उत्‍तर प्रदेश में वाराणसी के निकट वर्तमान समय के सारनाथ में ऋषिपटन स्थित हिरण उद्यान में आज ही के दिन महात्मा बुद्ध द्वारा अपने प्रथम पांच तपस्वी शिष्यों को दिए गए ‘प्रथम उपदेश’ को ध्‍यान में रखकर मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर के बौद्धों द्वारा धर्म चक्र प्रवर्तन या ‘धर्म के चक्र के घूमने’ के दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन बौद्धों और हिंदुओं दोनों ही के द्वारा अपने-अपने गुरु के प्रति सम्‍मान व्‍यक्‍त करने के लिए ‘गुरु पूर्णिमा’ के रूप में भी मनाया जाता है।

भगवान बुद्ध के ज्ञान एवं जागृति, उनके धर्म चक्र के घूमने तथा महापरिनिर्वाण की भूमि होने के नाते भारत की ऐतिहासिक विरासत के अनुरूप माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन से धम्म चक्र दिवस पर आयोजित समारोह का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी इस अवसर पर एक वीडियो संबोधन देंगे जिस दौरान वह भगवान बुद्ध की शांति एवं न्याय के उपदेशों और सचेतन प्राणियों की पीड़ा को दूर करने के लिए उनके द्वारा दिखाए गए उच्च अष्टमार्ग पर चलने पर विशेष जोर देंगे। संस्कृति मंत्री श्री प्रह्लाद पटेल और अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू भी उद्घाटन समारोह को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर मंगोलिया के राष्ट्रपति का एक विशेष संबोधन भी पढ़ा जाएगा और मंगोलिया में सदियों से संरक्षित भारतीय मूल की एक बहुमूल्य बौद्ध पांडुलिपि भारत के माननीय राष्ट्रपति को भेंट की जाएगी।

इस दिन जो शेष अन्‍य महत्‍वपूर्ण आयोजन किए जाएंगे उनमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों के शीर्ष बौद्ध धर्मगुरुओं, विशिष्‍ट जानकारों और विद्वानों के संदेशों को सारनाथ एवं बोधगया से प्रसारित (लाइव स्‍ट्रीमिंग) किया जाना भी शामिल है।

कोविड-19 महामारी के कारण इस वर्ष 7 मई को आयोजित अत्‍यंत सफल ‘वर्चुअल वैशाख (बुद्ध पूर्णिमा)’ की भांति ही यह पूरा कार्यक्रम भी वर्चुअल ढंग से ही आयोजित किया जा रहा है। 4 जुलाई को होने वाले इस कार्यक्रम को ‘लाइव वेबकास्ट’ के माध्यम से दुनिया भर में लगभग 30 लाख भक्तों द्वारा देखे जाने की संभावना है।

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प्रधानमंत्री ने सांसदों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन के पक्ष में मतदान करने का आग्रह किया, इसे ऐतिहासिक अवसर बताया
April 17, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने बताया कि संसद में इस समय नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा चल रही है और कल रात ही 1 बजे तक चर्चा चली है।

उन्होंने कहा कि संशोधन से संबंधित जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब देकर समाधान कर दिया गया है और सदस्यों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों का हल निकाल लिया गया है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जहां भी जानकारि‍यों का अभाव था, वहां सभी सदस्यों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा दी गई है, जिससे विरोध के मुद्दों को स्पष्ट किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा लगभग चार दशकों से राजनीतिक बहसों का विषय रहा है और अब समय आ गया है कि देश की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिले।

उन्होंने कहा कि आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत की महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में कम प्रतिनिधित्व उचित नहीं है और इसे सुधारने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि लोकसभा में जल्द ही मतदान होने की उम्मीद है और उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सोच-विचार करके पूरी संवेदनशीलता से महिला आरक्षण संशोधन के पक्ष में मतदान करने का आग्रह किया।

देश की महिलाओं की ओर से अपील करते हुए, उन्होंने सभी सांसदों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि कुछ भी ऐसा न करें, जिससे नारी शक्ति की भावनाएं आहत हों। उन्होंने कहा कि करोड़ों महिलाएं संसद, उसके उद्देश्य और उसके निर्णयों की ओर देख रही हैं।

प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्‍नी सबका स्‍मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने का आह्वान किया।

उन्होंने इस संशोधन को देश की महिलाओं की सेवा और सम्मान करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया और सदस्यों से आग्रह किया कि वे उन्हें नए अवसरों से वंचित न करें।

प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह संशोधन सर्वसम्मति से पारित हो जाता है, तो यह नारी शक्ति के साथ-साथ देश के लोकतंत्र को और मजबूत करेगा।

इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए, उन्होंने सभी सदस्यों से भारत की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व प्रदान करके इतिहास रचने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पोस्‍ट में लिखा;

“संसद में इस समय नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा चल रही है। कल रात भी एक बजे तक चर्चा चली है।

जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब दिया गया है। हर आशंका का समाधान किया गया है। जिन जानकारियों का अभाव था, वो जानकारियां भी हर सदस्य को दी गई हैं। किसी के मन में विरोध का जो कोई भी विषय था, उसका भी समाधान हुआ है।

महिला आरक्षण के इस विषय पर देश में चार दशक तक बहुत राजनीति कर ली गई है। अब समय है कि देश की आधी आबादी को उसके अधिकार अवश्य मिलें।

आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत की महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में इतना कम प्रतिनिधित्व रहे, ये ठीक नहीं।

अब कुछ ही देर लोकसभा में मतदान होने वाला है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं… अपील करता हूं...

कृपया करके सोच-विचार करके पूरी संवेदनशीलता से निर्णय लें, महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें।

मैं देश की नारी शक्ति की तरफ से भी सभी सदस्यों से प्रार्थना करूंगा… कुछ भी ऐसा ना करें, जिनसे नारीशक्ति की भावनाएं आहत हों।

देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि हम सभी पर है, हमारी नीयत पर है, हमारे निर्णय पर है। कृपया करके नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का साथ दें।”

“मैं सभी सांसदों से कहूंगा...

आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए ...

देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है।

उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं करिए।

ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त होगी… देश का लोकतंत्र और सशक्त होगा।

आइए… हम मिलकर आज इतिहास रचें। भारत की नारी को… देश की आधी आबादी को उसका हक दें।”