2 मई को पश्चिम बंगाल में सिर्फ डबल इंजन की सरकार ही नहीं बनेगी, बल्कि डबल बेनिफिट, डायरेक्ट बेनिफिट देने वाली सरकार बनेगी : प्रधानमंत्री मोदी
तृणमूल सरकार अपने आप में पश्चिम बंगाल के लिए आपदा सिद्ध हुई है : तारकेश्वर में प्रधानमंत्री मोदी
बंगाल के किसानों को केंद्र सरकार की योजनाओं के सभी लाभों से वंचित किया गया है: प्रधानमंत्री मोदी
चुनाव के मैदान में कोई कभी EVM को गाली दे, कभी चुनाव आयोग को, तो समझो उसका 'खेला' शेष है : चुनाव आयोग के खिलाफ ममता के आरोपों पर पीएम मोदी

बोल बम !!! ताड़क बम !!!
बोल बम !!! ताड़क बम !!!
बोल बम !!! ताड़क बम !!!

एइ देबोत्तो भूमि ते एशे आमी, बाबा तारकनाथ आ माहाप्रोभु जगन्नाथ देब के शौतो-शौतो प्रोनाम जानाई!

मैं, रामकृष्ण परमहंस, क्रांतिवीर कनाईलाल दत्त, राजा राममोहन राय, नागेन्द्र नाथ चट्टोपाध्याय, ब्रजेन्द्रनाथ शील जैसे अनगिनत राष्ट्रनायकों को भी आज इस पवित्र धरती से नमन करता हूं। ऐसे ही ऋषियों और मनीषियों के आशीर्वाद के कारण पश्चिम बंगाल हमेशा संस्कृति और संसाधनों के मामले में समृद्ध रहा है।

साथियो,
पश्चिम बंगाल को क्या चाहिए, क्या करना है, इसे लेकर बंगाल की महान जनता में कभी भी कोई भ्रम नहीं रहा है। इसी वजह से बंगाल के लोगों ने चुनाव में हमेशा स्पष्ट बहुमत को प्राथमिकता है। यहां का बौद्धिक वर्ग, यहां की अध्ययनशील प्रतिभाएं, हमेशा स्पष्ट सोच को लेकर चली हैं। बंगाल के लोग हमेशा अपनी परीक्षा में पास हुए हैं। फेल वो लोग हुए हैं, जिन्होंने बंगाल के लोगों की अपेक्षाओं को, उनकी आकांक्षाओं को पूरा नहीं किया। फेल वो लोग हुए जिन्होंने बंगाल का विकास नहीं किया, बंगाल को बरसों पीछे धकेल दिया। इसलिए, आज बंगाल के लोगों ने, यहां के जन-जन ने, यहां की माताओं-बहनों ने, यहां के नौजवानों ने, फिर एक बार परिवर्तन की कमान संभाल ली है। आशोल पोरिबोरतोन...। आशोल पोरिबोरतोन के उद्घोष में और शोनार बांग्ला के विजन में, बंगाल के लोगों की यही आकांक्षा है। इसलिए, उन्होंने पहले दो चरण के चुनाव से ही बीजेपी के प्रचंड बहुमत का रास्ता तय कर दिया है।

साथियो,
2 मई को क्या नतीजे आने वाले हैं, इसकी झलक हम दो दिन पहले नंदीग्राम में देख चुके हैं। मुझे पक्का पता है, हर चरण के चुनाव के साथ दीदी की ये बौखलाहट बढ़ती जाएगी, मुझ पर गालियों की बौछार भी बढ़ती जाएगी। और अब तो इलेक्शन कमीशन कहो… सुरक्षा प्रबंध वाले लोग हों, हर किसी पर, हम सब जानते हैं, क्रिकेट के मैदान में अगर कोई खिलाड़ी बार-बार अंपायर पर सवाल उठाए तो समझो उसके खेल में खोट है। चुनाव के मैदान में कोई कभी EVM को गाली दे, कभी चुनाव आयोग को गाली दे, तो समझो- उसका खैला शेष है।

दीदी, ओ दीदी, दीदी हार आपके सामने है। अब इसे स्वीकार करिए। हुगली के लोगों की ये आवाज सुनिए। दीदी...

निर्बाचोन खैला नॉय,
गोनोतोन्त्रो खैला नॉय,
गोनोतोन्त्रो होलो, मानुषेर शेबार पॉथ,
गोनोतोन्त्रो होलो, मानुषेर उन्नोतीर पॉथ।
आप ये सब भूल गईं दीदी, इसलिए बंगाल के लोगों के साथ आपने विश्वासघात किया।

मेरे प्यारे भाइयो-बहनो, आपका उत्साह, आपका प्यार मेरे सिर आंखों पर, लेकिन जगह नहीं है, आप जहां हैं वहीं रहिए, आगे आने की कोशिश मत कीजिए, जगह छोटी पड़ गई। आपका प्यार उससे भी अनेक गुना ज्यादा है। आप जहां हैं, वहीं से सुनिए। और मुझे विश्वास है मेरी आवाज तो जरूर पहुंचती होगी। आप मुझे देख नहीं पाते होंगे, बहुत बड़ी तादाद में आपलोग आए हैं।

भाइयो-बहनो,

हद तो इस बात की है, अब दीदी आप बंगाल की जनता के अपमान पर उतर आई हैं। साथियो, दीदी ने कहा है कि बीजेपी की रैली में जो भीड़ जुटती है, वो पैसे के लिए जुटती है। मैं जरा आपसे पूछना चाहता हूं, जो भी सच हो जवाब देना। मैं आपसे जानना चाहता हूं भाइयो-बहनो, क्या आप इतनी गर्मी में, इतने घंटों से, इतनी परेशानी उठाकर यहां आए हैं, क्या पैसे के लिए आए हैं क्या? पैसे के लिए आए हैं क्या? क्या कोई बंगाल का नागरिक बिक सकता है क्या, कोई उसको खरीद सकता है क्या? अरे ये तो स्वाभिमानी लोग हैं, पूरी अंग्रेजी सल्तनत कुछ नहीं कर पाई बंगाल के लोगों को। ये बंगाल के लोगों का स्वाभिमान है। दीदी बंगाल के लोग पैसे लेकर के रैली में जाते हैं, ये कहकर आपने बीजेपी को नहीं, मोदी को नहीं, आपने बंगाल की जनता का अपमान किया है। और इससे बड़ा अपमान हो नहीं सकता। अपनी बौखलाहट में आप मेरा अपमान करिए, लेकिन बंगाल की जनता, यहां की महिलाएं, यहां के गरीब, बंगाल के हमारे भाइयों-बहनों का अपमान मत करिए दीदी, अपमान मत करिए। यही वो लोग हैं, जिन्होंने दस साल पहले सिर-आंखों पर बिठाया था, आज आप उनको गाली दे रही हैं।


साथियो,
मुझ जैसे करोड़ों भारतवासी कालीघाट, तारोकेश्शोर, दक्खिनेश्शोर, गंगा सागर और बेलूरमठ जैसे पुण्य स्थानों पर आकर खुद को बहुत भाग्यशाली समझते हैं। ऐसे में, कोई जब इस पवित्र बंग-भूमि की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मर्यादाओं के विपरीत आचरण करता है तो हर हिन्दुस्तानी को बहुत दुख होता है। बंगाल में एक विशेष मधुरता है, मिठास है। यहां की भाषा में मिठास है। यहां के भाई-बहनों की भावना में मिठास है, व्यवहार में मिठास है। यहां की मिष्टी दोई और मिठाइयों की तो बात ही अलग है। फिर इतनी कड़वाहट कहां से लाती हैं दीदी? कोथाय थेके पाच्चेन ऐतो तिक्तोता, दीदी? आप बंगाल के प्रतिभाशाली युवाओं के आचार-विचार में कड़वाहट घोल रही हैं। अब दीदी, आपको बंगाल के भविष्य के साथ ऐसा अन्याय नहीं करने दिया जाएगा।

भाइयो और बहनो,
दीदी की बौखलाहट का एक बहुत बड़ा कारण है, उनके 10 साल का रिपोर्ट कार्ड। मैं पहले दिन से कह रहा हूं दीदी, आपने क्या काम किया, बताइए न लोगों को। रिपोर्ट कार्ड मांग रहे हैं, बस यही उनकी परेशानी है। पुरानी इंडस्ट्री बंद, नई इंडस्ट्री का रास्ता बंद, नए निवेश, बिजनेस और चाकरी की संभावनाएं मंद। हुगली देश के सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में से एक रहा है। लेकिन आज क्या हालत हो गई है, आप भी जानते हैं। एक समय भारत के अनेक राज्यों से लोग बंगाल की फैक्ट्रियों में काम करने आते थे। आज बंगाल के लाखों लोग चाकरी के लिए पलायन करने को मजबूर हैं।

 

साथियो,
तृणमूल सरकार तो अपने आप में पश्चिम बंगाल के लिए आपदा सिद्ध हुई है। मानवता कहती है कि जब भी किसी पर मुसीबत आए तो मदद का हाथ आगे बढ़ाना चाहिए। लेकिन, तृणमूल के लोगों ने तो मुसीबत को ही कमाई का साधन बना दिया। बार-बार आने वाले चक्रवातों से पश्चिम बंगाल परेशान होता है, चारों तरफ तबाही आती है, गरीब की बाड़ी मिट्टी में मिल जाती है। लेकिन, तृणमूल के तोलाबाजों की बाड़ी और उनकी गाड़ी का साइज बढ़ता ही जाता है।

दीदी, ओ दीदी,
एखोन बांग्लार मानुष बिस्शाशघातो कोतार जोबाब देबे!

इन लोगों ने पंचायतों को लूटा, पंचायत चुनावों को लूटा। हालत ये है कि शासन-प्रशासन की कमान भी टीएमसी के दफ्तरों को दे दी गई है।

साथियो,
विकास के लिए, किसी भी क्षेत्र के उन्नयन के लिए, विजन और पॉलिसी जितनी जरूरी होती है, उतनी ही आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति भी होती है। बीते 10 साल में पश्चिम बंगाल ने इसका बहुत बड़ा अभाव देखा है। ऐसी सरकार आपने कहां देखी, जो इस बात पर गर्व करती हो कि उन्होंने शिल्प को रोका है, उद्योग को रोका है? सिंगूर के साथ इन्होंने कितना बड़ा धोखा किया, ये बात मुझसे ज्यादा आप जानते हैं। सिंगूर का राजनीतिक उपयोग करने के बाद इन लोगों ने यहां के लोगों को अधर में छोड़ दिया। आज सिंगूर में न उद्योग हैं, न उतनी चाकरी है, और जो कृषक हैं वो बिचौलियों से परेशान हैं।

साथियो,
हुगली का आलू बड़ी मात्रा में सिर्फ और सिर्फ इसलिए बर्बाद होता है, क्योंकि दीदी की सरकार ने यहां पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज नहीं बनाए। जो कोल्ड स्टोरेज हैं भी, वो सिंडिकेट चला रहे हैं। आलू किसान औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर है। ये स्थिति तब है जब केंद्र सरकार इसके लिए राज्यों को हर संभव सहायता देती है, इसके लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाया गया है। यही स्थिति यहां जूट किसानों, जूट मिलों में काम करने वाले साथियों की है। केंद्र सरकार ने 6 सालों में जूट का MSP 85 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाया है।
गेहूं की पैकेजिंग जूट में हो, देश में प्लास्टिक की जगह जूट बैग का उपयोग हो, इसके लिए हमने कदम उठाए, जूट की डिमांड को बढ़ाया। लेकिन, यहां की सरकार जूट मिलों को प्रोत्साहित ही नहीं कर रही। इसलिए, आज आलू किसान, जूट किसान, श्रमिक हर कोई डबल इंजन की भाजपा सरकार के लिए वोट कर रहा है। बीजेपी सरकार बनने के बाद यहां कोल्ड स्टोरेज के साथ ही फूड प्रोसेसिंग में निवेश को और बढ़ाया जाएगा।

साथियो,
बंगाल के गरीब किसानों के साथ तो दीदी ने अपनी विशेष नफरत दिखाई है। पूरे देश में 10 करोड़ से ज्यादा किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिल चुका है। देश भर में किसानों के बैंक खाते में सीधे सवा लाख करोड़ रुपए जमा कराए गए हैं। न कोई कटमनी, न कोई रिश्वत। एक-एक टका, सीधा किसानों के बैंक खाते में पहुंचा है। लेकिन, ये लाभ बंगाल के किसानों को नहीं मिला। दीदी ने बंगाल के लाखों कृषकों को भारत सरकार के इस पैसे से वंचित रखा।

भाइयो और बहनो,
2 मई को यहां सिर्फ डबल इंजन की सरकार ही नहीं बनेगी, बल्कि डबल बेनिफिट, डायरेक्ट बेनिफिट देने वाली सरकार बनने वाली है। बंगाल में BJP सरकार आने के बाद सबसे पहला काम किसानों के हित में फैसला लेना होगा। पहली कैबिनेट में ही बंगाल में पीएम किसान सम्मान निधि को लागू करने का निर्णय लिया जाएगा। और जब भाजपा के मुख्यमंत्री के बंगाल में भाजपा की सरकार का शपथ समारोह होगा, मैं उस दिन जरूर आऊंगा। और आकर के जो नए मुख्यमंत्री बनेंगे, उनसे जरूर कहूंगा कि भाई दिल्ली से मुझे पैसा भेजना है, आप जल्दी इस काम को पहली कैबिनेट में लागू कीजिए, मैं कहूंगा। और सुनिए भाइयो, बंगाल के हर-एक किसान को जो दीदी ने नहीं देने दिया है, वो भी, जो पिछला बकाया पैसा है, उसको जोड़कर के हर किसान के खाते में 18 हजार टका मिलेगा। और मैं तो आग्रह करूंगा कि दस साल से सरकार को जरा सो जाने की आदत पड़ी है। नई सरकार को सारी मशीनरी को दौड़ाना पड़ेगा और इसलिए मैं तो कहूंगा कि दुर्गापूजा के पहले हर किसान के खाते में रुपया पहुंच जाना चाहिए। और इसलिए, मेरा आग्रह है कि बंगाल के किसान भाई- बहन और ये जो सरकार के मुलाजिम हैं, आज उनसे भी आग्रह करता हूं कि भाई दस साल जो हुआ सो हुआ, जितना बर्बाद होना था कर लिया, अब बंगाल की सेवा करने का आपके सामने मौका आ रहा है। अभी दो मई को नतीजा आने के बीच में समय है, जहां चुनाव पूरा हो गया है, वहां अधिकारी जरा किसानों की सूची बनाना चालू कर दें, उनके बैंक खाते चेक कर लें, उनका आधार नंबर चेक कर लें, ताकि जैसे ही निर्णय करें, फटाफट पैसा जाना शुरू हो जाए। बंगाल की बीजेपी सरकार जल्द से जल्द हरेक किसान के बैंक खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर करना चाहती है। टीएमसी सरकार ने किसानों के साथ जो इतना बड़ा अन्याय किया है, वो दूर करने का समय बहुत ही निकट दिख रहा है भाइयो।

साथियो,
अपने ही अहंकार में दीदी, केंद्र की हर योजना के रास्ते में दीवार बनकर खड़ी होती रही हैं। केंद्र सरकार ने शहरों में काम करने आए रिक्शा, रेहड़ी, ठेला चलाने वाले साथियों के लिए बिना गारंटी का बैंक लोन देने की जब भारत सरकार ने शुरुआत की, हिन्दुस्तान के हर शहर में शुरू हुआ। लेकिन, पता नहीं दीदी को क्या हो गया, दीदी ने, यहां की पश्चिम बंगाल की सरकार ने इसको भी लागू नहीं किया। पूरे देश में आयुष्मान भारत के तहत गरीबों को 5 लाख मुफ्त इलाज मिल रहा है। लेकिन, दीदी ने आयुष्मान भारत का लाभ किसी गरीब को मिलने नहीं दिया। और दीदी क्या कहती है, मेरी तो योजना इससे भी बड़ी है। अरे दीदी, आपकी योजना मानो बड़ी है, उसमें पांच लाख और जुड़ जाता है, तो गरीब का भला होगा कि नहीं होगा, गरीब का लाभ होगा कि नहीं होगा। अच्छा दूसरा दीदी, आपको पता भी नहीं है, आप पढ़ती तो हैं नहीं। इस योजना का एक दूसरा लाभ क्या था कि कोई भी बंगाल का व्यक्ति, अगर मानो किसी काम से दिल्ली गया है, जयपुर गया है, चेन्नई गया है, और वहां बीमार हो गया तो वहां के अस्पताल में भी इस योजना से लाभ मिलता है, आपकी योजना से नहीं मिलता है दीदी। लेकिन, उनको बंगाल के लोगों की चिंता नहीं है। बंगाल का संवेदनशील समाज, इस कठोरता को, इस निर्ममता को देख भी रहा है, समझ भी रहा है। और मौके के इंतजार में था कि चुनाव में मौका पा लिया है।

साथियो,
दीदी और उनकी पार्टी की रुकावटी सोच ने इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी को भी प्रभावित किया। यहां रेल लाइन को लेकर टीएमसी के नेता कितनी रुकावट डाल रहे हैं, ये आप भलीभांति जानते हैं। भाजपा की डबल इंजन सरकार, यहां कनेक्टिविटी के कामों को तेजी से आगे बढ़ाएगी। इससे Ease of Living भी बढ़ेगी और Ease of doing business भी। Dedicated Freight Corridor तो पश्चिम बंगाल सहित पूरे पूर्वी भारत को विकास की नई बुलंदी देने वाला है। बहुत जल्द ही डानकुनी तक का पूरा कॉरिडोर राष्ट्र को समर्पित कर दिया जाएगा। कोलकाता मेट्रो का विस्तारीकरण भी तेज़ी से किया जा रहा है। कुछ समय पहले ही नाओपाड़ा से दक्षिणेश्वर तक के सेक्शन का उद्घाटन करने का अवसर मुझे मिला था। हुगली के अनेक हिस्सों में भी मेट्रो के पहुंचने से यहां के गरीब, मध्यम वर्ग को बहुत लाभ होने वाला है।

भाइयो और बहनो,
पश्चिम बंगाल की पहचान यहां की धरोहरें हैं, आस्था-अध्यात्म के स्थान हैं। तारोकेश्शोर नाथ- हमारी आस्था का ऐसा ही स्थान है।
लेकिन तृणमूल ने इस पावन स्थान को भी पॉलिटिक्स का, तुष्टिकरण का माध्यम बना दिया।

साथियो,
हमने भोले बाबा के आशीर्वाद से ही काशी में विश्वनाथ मंदिर के परिसर और आस-पास के क्षेत्र का विकास बड़े पैमाने पर शुरू किया है। उसी तरह यहां तारोकेश्शोर में भी बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बदलाव लाया जा सकता है। बंगाल की जनता के आशीर्वाद से हम ऐसा जरूर कर पाएंगे।

साथियो,
तारोकेश्शोर नाथ जी के साथ-साथ यहां की पहचान हुगली नदी को भी तृणमूल के सिंडिकेट ने बर्बाद कर दिया है।
अवैध निर्माण, औद्योगिक कचरे के खिलाफ कोई प्रभावी नीति लागू ही नहीं की, क्योंकि सरकार सिंडिकेट चलाती है। यहां सीवेज वॉटर ट्रीटमेंट के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन कई ट्रीटमेंट प्लांट आज भी काम नहीं कर रहे। आज अगर गंगा जी की निर्मलता को लेकर बेहतर काम हो सकता है, तो हुगली की स्वच्छता के लिए क्यों नहीं हो सकता?

अगर देश के दूसरे हिस्सों में आधुनिक रिवरफ्रंट बन सकते हैं, तो हुगली में भी उतना ही खूबसूरत रिवरफ्रंट बन सकता है। भाजपा के पास हमारी धरोहरों, हमारी नदियों की स्वच्छता और नदियों के सुंदरीकरण, दोनों का बेहतरीन अनुभव है। यही अनुभव 2 मई के बाद हुगली में काम आएगा, शोनार बांग्ला के निर्माण में काम आएगा !

शोनार बाङ्गलार शोनार गोउरब, आमरा फिरिए आनबोई !

भाइयो और बहनो,

आशोल पोरिबोरतोन की शुरुआत के लिए अब 30 दिन से भी कम का समय बच गया है !

पोद्दो फूल खिलेगा- हर बूथ में खिलेगा।

ईबार- बीजेपी सरकार !
ईबार- बीजेपी सरकार !

ईबार- जोर से छाप, कमल छाप !

इतनी बड़ी संख्या में आप यहां हमें आशीर्वाद देने आए, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं !

और पूरे विश्वास के साथ, पूरे आत्मविश्वास के साथ उज्ज्वल भविष्य के लिए आप भारी संख्या में मतदान कीजिए और पहली बार जो मतदान हुआ, दूसरी बार उससे ज्यादा हुआ, तीसरी बार उसका भी रिकॉर्ड तोड़ने का काम आपके पास है, करोगे न...घर-घर जाओगे, लोगों से मिलोगे, मतदान कराओगे, एक-एक को लाओगे। मुझे पूरा विश्वास है ये सारे चुनाव का नेतृत्व बंगाल की जनता कर रही है, हम तो आपके उत्साह को प्रणाम करने के लिए आते हैं। मेरे साथ पूरे जोर से बोलिए...

भारत माता की... जय !
भारत माता की... जय !

बहुत-बहुत धन्यवाद !

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April 18, 2026

आज मैं एक बेहद महत्वपूर्ण विषय पर विशेष कर देश की माता बहनों और बेटियों से बात करने के लिए आया हूं! आज भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया। उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया है। हमारे भरसक प्रयास के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया! और मैं इसके लिए सभी माताओं-बहनों, उनसे मैं क्षमा प्रार्थी हूं।

साथियों,

हमारे लिए देश हित सर्वोपरि है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दल हित सब कुछ हो जाता है, दल हित, देश हित से बड़ा हो जाता है, तो नारी शक्ति को, देश हित को, इसका खामियाजा उठना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ है। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश के नारी शक्ति को उठाना पड़ा है।

साथियों,

कल देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी, देश की नारी शक्ति देख रही थी, मुझे भी यह देखकर बहुत दुख हुआ, कि जब ये नारी हित का प्रस्ताव गिरा, तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, सपा, जैसी परिवारवादी पार्टियां, खुशी से तालियां बजा रही थीं। महिलाओं से उनके अधिकार छिनकर ये लोग मेजें थपथपा रहे थे। उन्होंने जो किया वो केवल टेबल पर थाप नहीं थी, वो नारी के स्वाभिमान पर उसके आत्मसम्मान पर चोट थी और नारी सब भूल जाती है, अपना अपमान कभी नहीं भूलती, इसलिए संसद में कांग्रेस और उसके सहयोग के उन सबके व्यवहार की कसक हर नारी के मन में हमेशा रहेगी। देश की नारी जब भी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी, तो वो याद करेगी कि इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने, संसद में महिला आरक्षण को रोकने का जश्न मनाया था, खुशियां मनाई थीं। कल संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन का जिन दलों ने विरोध किया है, उनसे मैं दो टूक कहूंगा, ये लोग नारी शक्ति को फॉर ग्रांटेड ले रहे हैं, वो ये भूल रहे हैं, कि 21वीं सदी की नारी देश की हर घटना पर नजर रख रही है, वो उनकी की मंशा भाप रही है और सच्चाई भी भली भांति जान चुकी है। इसलिए महिला आरक्षण विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है, इसकी उन्हें सजा जरूर मिलेगी। इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है और जनता द्वारा इसकी सजा से भी वो बच नहीं पाएंगे।

साथियों,

सदन में नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से भी कुछ छिनने का नहीं था। नारी शक्ति वंदन संशोधन हर किसी को कुछ ना कुछ देने का था, देने के लिए संशोधन का था। ये 40 साल से लटके हुए नारी के हक को, 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से उसका हक देने का संशोधन था।

नारी शक्ति वंदन संशोधन 21वीं सदी के भारत की नारी को नए अवसर देने, नई उड़ान देने, उसके सामने से बाधाएं हटाने का महायज्ञन था। देश की 50% यानी आधी आबादी को उसका अधिकार देने का साफ नियत के साथ, ईमानदारी के साथ किया गया एक पवित्र प्रयास था। नारी को भारत की विकास यात्रा में सहयात्री बनाने और सबको जोड़ने का प्रयास था। नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है। नारी शक्ति वंदन संशोधन उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम, सभी राज्यों की हर राज्य की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था। ये संसद में सभी राज्यों की आवाज को अधिक शक्ति देने का प्रयास था। राज्य छोटा हो, राज्य बड़ा हो, राज्य की आबादी कम हो या राज्य की आबादी ज्यादा हो। सब की समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी। लेकिन इस ईमानदार प्रयास की कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने भ्रूण हत्या कर दी है, भ्रूण हत्या कर दी है। ये कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, टीएमके जैसे दल, इस भ्रूण हत्या के गुनहगार हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं, ये देश की नारी शक्ति के अपराधी हैं।

साथियों,

कांग्रेस महिला आरक्षण के विषय से ही नफरत करती है, उसने हमेशा से ही महिला आरक्षण को रोकने के लिए षड्यंत्र किए हैं। इस दिशा में पहले जितनी बार भी प्रयास हुए, हर बार कांग्रेस ने इसमें रो़ड़े अटकाए हैं। इस बार भी कांग्रेस और उसके साथियों ने महिला आरक्षण को रोकने के लिए एक के बाद एक नए झूठ का सहारा लिया। कभी संख्या को लेकर, कभी किसी और तरीके से, कांग्रेस और उसके साथियों ने देश को गुमराह करने की कोशिश की। ऐसा करके इन दलों ने भारत के नारी शक्ति के सामने अपना असली चेहरा सामने ला दिया है। अपना मुखौटा उतर दिया है।

साथियों,

मुझे व्यक्तिगत तौर पर आशा थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेंगी। कांग्रेस अपने पापों का प्रायश्चित करेगी, लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने का, महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का, अवसर खो दिया। कांग्रेस खुद देश के अधिकांश हिस्सों में अपना वजूद खो चुकी है। कांग्रेस परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों के पीठ पर सवार होकर खुद को जिंदा रखे हुए है। लेकिन कांग्रेस, ये भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़े, इसलिए कांग्रेस ने इस संशोधन का विरोध करवारकर अनेक क्षेत्रीय दलों के भविष्य को अंधकार में धकेलना का राजनीतिक षड्यंत्र किया है।

साथियों,

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और दूसरी पार्टियां, इतने वर्षों से हर बार वही बहाने, वही कुतर्क गढ़ते आए हैं, बनाते आए हैं, कोई ना कोई टेक्निकल पेंच फंसाकर, ये महिलाओं के अधिकारों पर डाका डालते रहे हैं। देश राजनीति का यह भद्दा पैटर्न बराबर समझ चुका है, और उसके पीछे की वजह भी जान चुका है।

भाइयों बहनों,

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध की एक बड़ी वजह है, इन परिवारवादी पार्टियों का डर। इन्हें डर है, अगर महिलाएं सशक्त हो गईं, तो इन परिवारवादी पार्टियों का नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा। ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके परिवार के बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें। आज पंचायतों में, लोकल बॉडीज में, जिन हजारों लाखों महिलाओं ने अपनी क्षमता को साबित किया है, जब आगे बढ़कर लोकसभा और विधानसभाओं में आना चाहती हैं, देश की सेवा करना चाहती हैं, परिवारवादियों के भीतर उनसे असुरक्षा की भावना बैठी हुई है। परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए कहीं ज्यादा सीटें होंगी, महिलाओं का कद बढ़ेगा, इसीलिए, इन लोगों ने नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध किया है। देश की नारीशक्ति कांग्रेस और उसके सहयोगियों को इस पाप के लिए कभी माफ नहीं करेगी।

मेरे प्रिय देशवासियों,

कांग्रेस और उसके साथी दल, डिलिमिटेशन पर लगातार, लगातार झूठ बोल रहे हैं। ये इस बहाने विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं। क्योंकि, बांटो और राज करो, काँग्रेस ये पॉलिटिक्स अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है। और, कांग्रेस आज भी उसी के सहारे चल रही है। कांग्रेस ने हमेशा देश में दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा दी है। इसलिए, ये झूठ फैलाया गया कि डिलिमिटेशन यानी परिसीमन से कुछ राज्यों को नुकसान होगा! जबकि, सरकार ने पहले दिन से स्पष्ट किया है, कि न किसी

राज्य की भागीदारी का अनुपात बदलेगा, न किसी का representation कम होगा। बल्कि,सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में ही बढ़ेंगी। फिर भी काँग्रेस,DMK,TMC और समाजवादी पार्टी जैसे दल इसे मानने को तैयार नहीं हुए।

साथियों,

ये संशोधन बिल सभी दलों, और सभी राज्यों के लिए एक मौका था, एक अवसर था। ये बिल पास होता तो तमिलनाडु, बंगाल, यूपी, केरलम, हर राज्य की सीटें बढ़तीं। लेकिन अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से इन दलों ने, अपने राज्य के लोगों को भी धोखा दे दिया। जैसे कि, DMK के पास मौका था कि वो और ज्यादा तमिल लोगों को सांसद, विधायक बना सकती थी, तमिलनाडु की आवाज़ और मजबूत कर सकती थी! लेकिन, उसने वो मौका खो दिया। TMC के पास भी बंगाल के लोगों को आगे बढ़ाने का मौका था। लेकिन TMC ने भी ये मौका गवां दिया। समाजवादी पार्टी के पास भी मौका था कि वो महिला विरोधी छवि होने के दाग को कुछ कम कर सके। लेकिन सपा भी इसमें चूक गई। समाजवादी पार्टी लोहिया जी को तो पहले ही भूल चुकी है। सपा ने नारीशक्ति वंदन संशोधन का विरोध करके, लोहिया जी के सारे सपनों को पैरों तले रौंद दिया है। सपा महिला आरक्षण विरोधी है, ये यूपी की और देश की महिलाएं कभी नहीं भूलेंगी।

साथियों,

महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके, कांग्रेस ने फिर एक बात सिद्ध कर दी है। कांग्रेस, एक एंटी रिफॉर्म पार्टी है। 21वीं सदी के विकसित भारत के लिए, जो भी निर्णय, जो भी रिफॉर्म्स ज़रूरी हैं, जो भी निर्णय देश ले रहा है, कांग्रेस उन सबका विरोध करती है, उसे खारिज कर देती है, उस काम के अंदर खलल डालती है। यही कांग्रेस का इतिहास है और यही कांग्रेस की नेगेटिव पॉलिटिक्स है।

साथियों,

ये वही कांग्रेस है, जिसने जनधन-आधार-मोबाइल की त्रिशक्ति का विरोध किया। कांग्रेस ने, डिजिटल पेमेंट्स का विरोध किया, कांग्रेस ने, GST का विरोध किया, कांग्रेस ने, सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का विरोध किया, कांग्रेस ने, ट्रिपल तलाक के विरुद्ध कानून का विरोध किया। कांग्रेस ने, आर्टिकल 370 हटाने का विरोध किया। हमारा संविधान, हमारे कोर्ट, जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड, समान नागरिक आचार संहिता को, यूसीसी को ज़रूरी बताते हैं, कांग्रेस उसका भी विरोध करती है। Reform का नाम सुनते ही कांग्रेस, विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है। ऐसा कोई भी काम जिससे देश मजबूत होता है, कांग्रेस उसमें बाधाएं खड़ी करने के लिए पूरी शक्ति लगा देती है। कांग्रेस, वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध करती है, कांग्रेस, देश से घुसपैठियों को भगाने का विरोध करती है, कांग्रेस, मतदाता सूची के शुद्धिकरण, SIR का विरोध करती है, कांग्रेस, वक्फ बोर्ड में Reform का विरोध करती है।

साथियों,

कांग्रेस ने, शरणार्थियों को सुरक्षा देने वाले CAA कानून तक का विरोध किया। इस पर झूठ बोलकर-अफवाहें फैलाकर देश में बवंडर खड़ा कर दिया। कांग्रेस, माओवादी-नक्सली हिंसा को समाप्त करने के देश के प्रयासों में भी रुकावटें डालती है। कांग्रेस का एक ही पैटर्न रहा है, कोई भी Reform आए तो झूठ बोलो, भ्रम फैलाओ। इतिहास साक्षी है, कांग्रेस ने हमेशा यही नेगेटिव रास्ता चुना है।

साथियों,

जो भी कार्य देश के लिए जरूरी फैसला होता है, कांग्रेस इसको कार्पेट के नीचे डाल देती है। कांग्रेस के इसी रवैये की वजह से भारत विकास की उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया, जिसका भारत हकदार है। आजादी के समय, उस दौर में हमारे साथ और भी कई देश आजाद हुए थे। ज्यादातर देश हमसे बहुत आगे निकल गए, और इसकी वजह थी, कि कांग्रेस हर Reform को रोककर बैठी रही। लटकाना-भटकाना- अटकाना यही कांग्रेस का सिद्धांत रहा है, यही कांग्रेस का वर्क कल्चर रहा है। कांग्रेस ने पड़ोसी देशों के साथ सीमा-विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने पाकिस्तान के साथ पानी के बंटवारे से जुड़े विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने ओबीसी आरक्षण के निर्णय को 40 साल तक लटकाए रखा। कांग्रेस ने सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन को 40 साल तक रोके रखा।

साथियों,

कांग्रेस के इस रवैये ने हमेशा देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है। कांग्रेस के हर विरोध, हर अनिर्णय, हर छल-प्रपंच का खामियाजा देश ने भुगता है, देश की पीढ़ियों ने भुगता है। आज देश के सामने जितनी भी बड़ी चुनौतियां हैं, वो कांग्रेस के इसी रवैये से उपजी हुई हैं। इसलिए, ये लड़ाई सिर्फ एक कानून की नहीं है, ये लड़ाई, कांग्रेस की उस एंटी-रिफॉर्म मानसिकता के साथ है, जिसमें सिर्फ नेगेटिविटी है, नकारात्मकता है। और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है, कि देश की सभी बहनें-बेटियां, कांग्रेस की इस मानसकिता को करारा जवाब देकर रहेगी।

साथियों,

कुछ लोग देश की महिलाओं के सपने टूटने को सरकार की नाकामी बता रहे हैं। लेकिन, ये विषय कामयाबी या नाकामयाबी क्रेडिट का था ही नहीं। मैंने संसद में भी कहा था, आधी आबादी को उनका हक मिल जाने दीजिये, मैं इसका क्रेडिट, विज्ञापन छपवाकर विपक्ष के सभी लोगों को दे दूँगा। लेकिन, महिलाओं को दक़ियानूसी सोच से देखने वाले फिर भी अपने झूठ पर अड़े रहे, कायम रहे!

साथियों,

नारीशक्ति को भागीदारी दिलाने की लड़ाई दशकों से चल रही है। वर्षों से मैं भी इसके लिए प्रयास करने वालों में से एक हूं। कितनी ही महिलाएं ये विषय मेरे सामने उठाती रही हैं। कितनी ही बहनों ने पत्र के द्वारा मुझे सारी बातें बताई हैं। मेरे देश की माताएं-बहनें-बेटियां, मैं जानता हूं, आज आप सब दुखी हैं। मैं भी आपके इस दुःख में दुःखी हूँ। आज भले ही, बिल पास कराने के लिए जरूरी 66 परसेंट वोट हमें नहीं मिला हो, लेकिन मैं जानता हूं, देश की 100 परसेंट नारीशक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है। मैं देश की हर नारी को विश्वास दिलाता हूं, हम महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाले हर रुकावट को खत्म करके रहेंगे, हटाकर के रहेंगे। हमारा हौसला भी बुलंद है, हमारी हिम्मत भी अटूट है और हमारा इरादा भी अडिग है। महिला आरक्षण का विरोध करने वाली पार्टियां, ये देश की नारी शक्ति को संसद और विधानसभाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने से कभी भी रोक नहीं पाएंगे, सिर्फ वक्त का इंतजार है। नारी शक्ति के सशक्तीकरण का बीजेपी-एनडीए का संकल्प अक्षुण्ण है। कल हमारे पास संख्याबल नहीं था, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम हार गए। हमारा आत्मबल अजेय है। हमारा प्रयास रुकेगा नहीं, हमारा प्रयास थमेगा नहीं। हमारे पास आगे अभी और मौके आएंगे, हमें आधी आबादी के सपनों के लिए, देश के भविष्य के लिए, इस संकल्प को पूरा करना ही है। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।