प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने धरती माता की शाश्वत भावना को प्रकट करने वाले एक संस्कृत एक सुभाषितम् को साझा किया:

"यस्यां वृक्षा वानस्पत्या ध्रुवास्तिष्ठन्ति विश्वहा।

पृथिवीं धेनुं प्रदुहां न उदिच्छन्तु नमोऽस्तु पृथिव्यै॥"

सुभाषितम का अर्थ है, "जिस भूमि पर वृक्ष और वनस्पतियां सदा दृढ़ और स्थिर खड़ी रहती हैं, वह पृथ्वी हमें सभी सुख-सुविधाएं और संसाधन प्रदान करे। हम धरती माता को प्रणाम करते हैं।"

श्री मोदी ने कहा कि पृथ्वी हमारी माता है और इसके संरक्षण में मानवता का कल्याण निहित है। इसकी रक्षा करना हम सबका केवल दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा पवित्र संकल्प भी है।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

“पृथ्वी हमारी माता है और इसके संरक्षण में मानवता का कल्याण निहित है। इसकी रक्षा करना हम सबका केवल दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा पवित्र संकल्प भी है।

यस्यां वृक्षा वानस्पत्या ध्रुवास्तिष्ठन्ति विश्वहा।

पृथिवीं धेनुं प्रदुहां न उदिच्छन्तु नमोऽस्तु पृथिव्यै॥"

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प्रधानमंत्री ने प्रग्नानंद को उनकी असाधारण उपलब्धि पर बधाई दी
June 06, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रग्नानंद को उनकी असाधारण उपलब्धि पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वास्तव में एक अविश्वसनीय उपलब्धि है जो उनकी निरंतर उत्कृष्टता को दर्शाती है। श्री मोदी ने उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया:

"इस असाधारण उपलब्धि के लिए प्रग्नानंद को बधाई!"

यह वाकई एक अविश्वसनीय उपलब्धि है जो उनकी निरंतर उत्कृष्टता को दर्शाती है। उनके भविष्य के प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं।

@rpraggnachess"