प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज आदरणीय अटल जी की जयंती के अवसर पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें उन्होंने अटल जी के जीवन से प्रेरणा लेने पर बल दिया।

“यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।

स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥"

इस सुभाषित का अर्थ है कि एक श्रेष्ठ व्यक्ति जैसा आचरण करता है, सामान्य जन भी ठीक वैसा ही आचरण करते हैं। अन्य शब्दों में, एक नेता या आदर्श व्यक्ति का व्यवहार पूरे समाज और अनुयायियों के लिए मार्गदर्शक की तरह कार्य करता है।

श्री मोदी ने कहा कि अटल जी का आचरण, शालीनता, वैचारिक दृढ़ता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का उनका संकल्प भारतीय राजनीति के लिए एक आदर्श मानक है। श्री मोदी ने आगे कहा, “अपने जीवन के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि श्रेष्ठता किसी पद से नहीं, बल्कि आचरण से स्थापित होती है और यही वह आचरण है जो समाज का मार्गदर्शन करता है।“

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा:

“आदरणीय अटल जी की जन्म-जयंती हम सबके लिए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का एक विशेष अवसर है। उनका आचरण, शालीनता, वैचारिक दृढ़ता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प भारतीय राजनीति के लिए एक आदर्श मानक है। उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि श्रेष्ठता पद से नहीं, आचरण से स्थापित होती है और वही समाज को दिशा देती है।

इस अवसर पर मैं इस सुभाषित को साझा कर रहा हूं, जो उनके जीवन के एक पहलू को परिभाषित करता है:

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।

स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥"

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