प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वामी विवेकानन्द के इस विश्वास पर बल देते हुए एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया कि युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है और भारत के युवा अपने उत्साह और जुनून के साथ हर संकल्प को साकार कर सकते हैं:
"अङ्गणवेदी वसुधा कुल्या जलधिः स्थली च पातालम्।
वल्मीकश्च सुमेरुः कृतप्रतिज्ञस्य वीरस्य॥"
सुभाषितम का तात्पर्य है कि साहसी और मजबूत इरादों वाले लोगों के लिए संपूर्ण धरा उनके अपने आंगन की तरह है, समुद्र तालाबों की तरह हैं और आकाश-ऊंचे पहाड़ की तरह हैं। जिनकी इच्छाशक्ति दृढ़ है उनके लिए पृथ्वी पर कुछ भी असंभव नहीं है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा;
“स्वामी विवेकानंद का मानना था कि युवा शक्ति ही राष्ट्र-निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है। भारतीय युवा अपने जोश और जुनून से हर संकल्प को साकार कर सकते हैं।
अङ्गणवेदी वसुधा कुल्या जलधिः स्थली च पातालम्।
वल्मीकश्च सुमेरुः कृतप्रतिज्ञस्य वीरस्य॥"
स्वामी विवेकानंद का मानना था कि युवा शक्ति ही राष्ट्र-निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है। भारतीय युवा अपने जोश और जुनून से हर संकल्प को साकार कर सकते हैं।
— Narendra Modi (@narendramodi) January 12, 2026
अङ्गणवेदी वसुधा कुल्या जलधिः स्थली च पातालम्।
वल्मीकश्च सुमेरुः कृतप्रतिज्ञस्य वीरस्य॥ pic.twitter.com/6cliyTstvE


