www.bharatrajya.com वेबसाइट पर आप आसानी से जान सकते हैं कि उस समय भारत के किस हिस्से पर किसका शासन था: पीएम मोदी
'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत' अभियान इस समय पूरे देश में तेजी से आगे बढ़ रहा है: पीएम मोदी
'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत' अभियान का लक्ष्य नशा मुक्त युवा और नशा मुक्त भारत है: पीएम मोदी
आइए, भारत के युवाओं को नशे से दूर रखने और नशा मुक्त रखने के इस पवित्र कार्य में हम सब अपनी भूमिका निभाएं: पीएम मोदी
'PM स्वनिधि योजना' के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं हैं: पीएम मोदी
बाबा बर्फानी की इस पवित्र यात्रा में स्वच्छता भी सेवा और आस्था का एक रूप बन गई: पीएम मोदी
मैथिली जी और देबरीगढ़ की बहनों ने दिखाया है कि प्रकृति की रक्षा भी हो सकती है और जीवन में समृद्धि भी आ सकती है: पीएम मोदी
कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में कुछ किसान भाई-बहनों ने कॉफी प्लांटेशन के बीच एवोकाडो लगाया है: पीएम मोदी
महानायक उत्तम कुमार जी एक बहुमुखी अभिनेता थे, जो अपने अभिनय से लोगों के दिलों में रच-बस गए: पीएम मोदी
महानायक उत्तम कुमार जी अपनी सहजता के साथ-साथ परोपकार के लिए भी जाने जाते थे: पीएम मोदी
हम अपने घर के लिए जो भी सामान खरीदते हैं, उसे एक बार जरूर देख लें कि वह भारत में बना हो: पीएम मोदी
भारत के आत्मनिर्भर बनने का मार्ग, भारत में बनी चीजों पर गर्व करने से ही प्रशस्त होगा: पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो,

नमस्कार! ‘मन की बात’ के इस नए एपिसोड में आप सभी का मैं एक बार फिर स्वागत करता हूँ | आप सब जानते हैं कि ये एक ऐसा मंच है जहां हम नए प्रयासों को सामने लाते हैं | देशवासियों के Innovative Ideas पर चर्चा करते हैं | इनमें से कितने ही Ideas ऐसे होते हैं जिनके पीछे लोगों ने जीवन की अथक ऊर्जा लगाई होती है |

साथियो,

कुछ समय पहले social media पर किसी ने लिखा था “आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि इतिहास को रोचक बनाने के अपने प्रयास का शुभारंभ कर रहा हूँ |” उन्होंने आगे बताया ये idea बहुत ही simple है |

आप इस website पर जाएँ और कोई भी एक वर्ष चुन लें | यहाँ आपको आसानी से पता चलेगा कि उस समय भारत के किस हिस्से पर किसका शासन था | मुझे भी यह काफी दिलचस्प लगा | मैंने सोचा कि इसके बारे में और अधिक जानकारी ली जाए | मुझे पता चला कि ये काम मुंबई में रहने वाले श्रीमान कृष्णा शेषाद्री जी ने किया है | मजे की बात ये है कि कृष्णा जी ने website का नाम भी बहुत simple रखा है www.bharatrajya.com उन्होंने जो प्रयास किया है, उसकी जानकारी आप लोगों तक भी जरूर पहुंचनी चाहिए |

इसलिए, मैंने सोचा कि क्यों न सीधे श्री कृष्णा जी से ही बात की जाए |

साथियो, कृष्णा जी हमारे साथ फोन पर जुड़ रहे हैं |

प्रधानमंत्री : कृष्णा जी नमस्ते |

कृष्णा शेषाद्री : नमस्ते sir नमस्ते |

प्रधानमंत्री : भाई, मुझे पता चला है, न आप tech की दुनिया से हो, न आप history teacher हो, फिर भी, आपने technology का प्रयोग करके history की site बना डाली | तो मुझे बहुत उत्सुकता है, ये सब कैसे हुआ?

कृष्णा शेषाद्री: धन्यवाद sir आपसे बात करके बहुत मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है तो sir मेरे बारे अगर मैं थोड़ा बताऊँ, तो sir मैं एक engineer था, फिर मैंने MBA किया, फिर मैं marketing field में चला गया लेकिन ये सब जब भी करता था तब भी मेरे को बचपन से इतिहास (History) में बहुत interest था | तो I always wanted to do something on History, how to make it interesting and मेरे को ये भी लगता था कि हम जैसे History सिखाते हैं उसमें हम बहुत improvement कर सकते हैं उसमें हम बहुत बदलाव लेकर आ सकते हैं History को एक कहानी बनाकर लोगों तक पहुंचा सकते हैं |

प्रधानमंत्री : कृष्णा जी, भारतीय इतिहास का ऐसा कौन-सा पहलू है, जिसके बारे में आपको लगा कि इसकी जानकारी ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को होनी चाहिए ?

कृष्णा शेषाद्री: Sir, अगर हम भारतीय इतिहास जैसे हमारे स्कूलों या कॉलजों में सिखाया जाता है जैसा आप देखते हो वो एक कोई एक empire या कोई एक kingdom उसके दृष्टिकोण से, उसके नजरिए से सिखाया जाता है और वो empires को disproportionate attention भी मिलता है | इस चक्कर में बाकी के बहुत सारे जो हमारे साम्राज्य थे जो महान साम्राज्य थे जैसे cholas, pallavas, karkota dynasty था कश्मीर में Ahoms थे जिन्होंने कम से कम 600 साल असम में अपनी संस्कृति, अपनी values system को बरकरार रखा ये सबके बारे में हम नहीं जानते | तो मैंने सोचा कि कोई ऐसा कोई site बनाएं जो ऐसे महान साम्राज्य को भी लोगों से इनको introduce किया जाए |

प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आप इतनी मेहनत करते हैं, मैं ऐसे ही आपको hypothetical सवाल पूछता हूँ | अगर आपको Indian History के किसी भी तीन लोगों से बातचीत का अवसर मिले, तो आप किनसे बात करना चाहेंगे और क्यों ?

कृष्णा शेषाद्री: हाँ सर, तो पहले मैं बात करूंगा, राजाराजा चोला या राजेन्द्र चोला सर जो चोला साम्राज्य के सबसे most powerful या सबसे important राजाओं में से थे, तो मैं उनसे ये जानना चाहूँगा कि पहले उनको ये vision कैसे आया जैसे उन्होंने बृहदेश्वर temple या गंगईकोंडा चोलपुरम जो बड़े बड़े मंदिर हैं, शिवजी के मंदिर हैं, वो execute करने के लिए वो vision कहाँ से आया वो planning कैसे की, उनको वो thought कैसे आया कि हम ऐसा कुछ बना के जाएं जो अगले हजार या दो हजार साल तक दूसरे लोगों को प्रेरित कर सके | तो वो मुझे उनसे जानना है | और दूसरी जो personality हैं ये actually मेरे हिसाब से Indian history में एक बहुत under rated personality है | सर उनका नाम है हेमू, तो हम उनके बारे में ज्यादा-से-ज्यादा Indian इतिहास में दो या तीन line पढ़ते हैं | हमको ये नहीं पता है कि वो जो हेमू जो थे वो एक common man थे, एक साधारण इंसान थे, वो एक व्यापारी थे, उधर से उन्होंने एक empire खड़ा किया और वो not only वो एक empire builder थे वो एक military thinker भी थे, military genius थे जिन्होंने अपने carrier में 23 लड़ाईयाँ लड़ीं उसमें से उन्होंने 22 लड़ाईयां जीतीं, तो उनका thought process कैसा था, और वो कैसे एक आम आदमी से इतने बड़े राजा बने, वो उनका वो journey मैं जानने की बहुत दिलचस्पी रखता हूँ सर | और तीसरी जो है ये this is a very interesting personality, she is a women sir, त्रिभुवन महादेवी, तो ये जो है एक ओडिसा में एक kingdom है जिसका नाम था भौमाकारा dynasty तो इनकी भी कहानी बहुत दिलचस्प है | उन्होंने जब 850 ईस्वी के आसपास जो साल में उनके जो neighbor पाला empire ने, इनके empire पर धावा बोल दिया था सर, और इनके राजा जो इनके husband थे वो उस लड़ाई में शहीद हो गए थे | और इसकी वजह से वो empire बहुत छोटा हो गया और उसके जो सरदार थे, उसके जो leaders थे वो empire छोड़कर जाने लग गए थे तो ये जो त्रिभुवन महादेवी जो lady थी इन्होंने वो सरकार संभाली and she became one of the first independent rulers in the history of India और उन्होंने सरकार को not only stabilize किया but इतना उसको powerful बना दिया कि वो अगले सौ साल तक कलिंगा और वो area में राज करते रहे | तो these are three interesting personalities whom I would like to meet in history sir.

प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आपको अब लगता है कि इतिहास को जी रहे हैं | आप पूरी तरह इतिहास में डूब चुके हैं | देखिये मैंने भी बड़े उत्सुकता के साथ आपकी site देखी है और मुझे सबसे interesting ये लगा कि आपकी site पर एक ऐसा tab है, जहां लोग corrections और suggestions भी दे सकते हैं | ऐसे constructive feedback के लिए open रहना ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है | क्या आपको लोगों से सुझाव मिलना शुरू हुआ है क्या? और आप उन पर कैसे काम करते हैं ?

कृष्णा शेषाद्री: हाँ सर इन लोगों से बहुत सुझाव आते हैं सर | सुझाव दो प्रकार के आते हैं | एक सुझाव ऐसे आते हैं जो हमको correction suggest करते हैं – इस प्रदेश में, इस time में, इस राष्ट्र में ये राजा थे या इस time में ये युद्ध हुआ था तो ऐसे कुछ suggestion आते हैं | दूसरे suggestion आते हैं कि आप इस website में ये feature भी डाल सकते हैं या वो feature भी डाल सकते हो तो हमको दोनों प्रकार के suggestion आते हैं तो जैसे अगर हमको ऐसा एक suggestion आए कि इस प्रदेश में, इस राजा ने, इस time पे राज किया था तो हम वो suggestion को लेते हैं, तो हमारे जो sources हैं | जैसे हमको किसी ने suggestion में दिया था कि आपने India को तो दिखा दिया अगर प्रदेश के level पर भी दिखा सकते हैं तो और अच्छा होगा तो हमने वो feature implement किया और फिर हमने दूसरे feature आया था जिसमें हमने एक trump card जैसा बनाया था सारे empire के data statistics देके ताकि वो बच्चों तक पहुँच सके तो किसी ने एक suggestion दिया था कि उसको आप एक जगह पर लेकर आइए ताकि हम सब download करके हम सब share कर सके तो वो हम feature implement कर रहे हैं | तो हमे इतना जानना important है कि हम गलती करेंगे, हम क्योंकि हम सर्वश्रेष्ठ नहीं हैं और वो जानके ही हमने वो correction का tab लगाया ताकि ये हम सबकी site हो और आगे जाके सारे contributions के हिसाब से हम एक ऐसा site बनाए जो अगले कुछ साल तक इतिहास एक मजेदार subject बनाए |

प्रधानमंत्री : कृष्णा जी आपने सचमुच में एक बहुत बड़ा काम किया है | अच्छा History के अलावा आपकी कई सारी Hobbies होगी और भी बहुत कुछ करते होंगे आप ?

कृष्णा शेषाद्री: हाँ, नहीं sir हम थोड़े boring type आदमी हैं sir.

प्रधानमंत्री : हँसते हुए

कृष्णा शेषाद्री: हम technology में बहुत दिलचस्पी रखते हैं और इतिहास में रखते हैं और जब अब technology और इतिहास मिल गया इसी में हम डूबे रहते हैं पूरा दिन |

प्रधानमंत्री : चलिए कृष्णा जी आपको मेरी बहुत-बहुत शुभकामना है आपने एक अच्छी शुरुआत की है और आपका तरीका भी ऐसा है कि लोग जुड़ेंगे मुझे पूरा विश्वास है मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ |

साथियो,

कृष्णा जी का ये प्रयास सिर्फ इतिहास के विद्यार्थियों को नहीं, ये हम सबको अपने अतीत को रोचक तरीके से जानने में मदद करेगा | आपके पास भी ऐसे प्रयासों के बारे में जानकारी हो, तो उसे जरूर share करें |

मेरे प्यारे देशवासियो

‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ यह अभियान इस समय पूरे देश में तेजी से आगे बढ़ रहा है | इसका लक्ष्य बिल्कुल साफ है – नशा मुक्त युवा, Drug Free India. बहुत सारे लोग, विशेषकर हमारे युवा बहुत बड़ी संख्या में इसका हिस्सा बन रहे हैं | आखिर यह भारत के युवाओं की health, उनकी happiness और उज्ज्वल भविष्य के लिए ही हमारा सामूहिक संकल्प है |

साथियो,

नशे की लत सिर्फ एक व्यक्ति को अपने लपेटे में नहीं लेती, इसके दुष्परिणाम पूरे परिवार और समाज को भी झेलने पड़ते हैं | मैं उन लोगों की सराहना करूंगा जो drugs के खिलाफ दूसरों को जागरूक करते हैं और नशे की लत से जूझ रहे लोगों की मदद में आगे आते हैं | नशा मुक्त भारत के लिए क्या आप कोई powerful slogan बना सकते हैं? क्या हमारे young musicians ऐसे songs बना सकते हैं, जिनमें drug free life का message हो? क्या students और theatre groups दिल को छू लेने वाले short plays लिख सकते हैं जिनमें drugs के खतरों के साथ-साथ उनसे बाहर निकलने का रास्ता भी हो | हमारे देश में बेहतरीन content creaters की कमी नहीं हैं | मेरा आग्रह है कि वे अलग-अलग भाषाओं में ऐसा content बनाएं जिससे इस दिशा में समाज को मदद मिले | आप अपने प्रयासों को Hashtag के साथ social media पर भी जरूर share करें | कई बार creative effort formal campaign से ज्यादा असरदार होते हैं | आइए, भारत के युवा को नशे से दूर रखने, नशे से मुक्त रखने - इस पवित्र कार्य में हम सब अपनी भूमिका निभाएं | आप अपने प्रयास को #नशा मुक्त युवा के साथ social media पर भी जरूर share करें |

मेरे प्यारे देशवासियो,

अगस्त के महीने में हमें हर तरफ देशभक्ति के अनेक रंग देखने को मिलते हैं | इस समय हर व्यक्ति के मन में राष्ट्र-प्रेम की भावना और प्रबल हो जाती है | ‘National Handloom Day’ और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की वर्षगांठ से लेकर विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस इसे खास बनाते हैं | ‘स्वतंत्रता दिवस’ और ‘National Space Day’ इसके अवसर तो हर देशवासी को गर्व से भर देते हैं | ‘हर घर तिरंगा अभियान’ इस भावना को और मजबूत करता है | ‘वंदे मातरम्’ के डेढ़-सौ वर्ष पूरे होने से यह साल और भी विशेष बन गया है | इस बार 8 करोड़ से अधिक तिरंगा selfie upload की गई और तिरंगे का ये उत्सव केवल भारत तक ही सीमित नहीं रहा - इस साल ‘सूर्यपथ तिरंगा’ के जरिए हमारा तिरंगा दुनिया-भर की एक अनोखी यात्रा पर निकला | Fiji के सुवा में सूरज की पहली किरण के साथ तिरंगा फहराया गया | इसके बाद Asia, Africa, Europe और फिर America के San Francisco तक Indian Missions और Posts पर तिरंगा लहराता गया | आप कल्पना कर सकते हैं, ये दृश्य कितने अद्भुत रहे होंगे | जैसे-जैसे दुनिया-भर में सूरज आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे भारतीय तिरंगा भी लहराता गया | ऐसे प्रयास समाज को एक सूत्र में पिरोते हैं | इनसे देश के साथ भी हमारा जुड़ाव और गहरा होता है | इन प्रयासों में शामिल सभी लोगों को मेरी बहुत-बहुत बधाई |

मेरे प्यारे देशवासियो,

हमारे शहरों और कस्बों की सड़कों पर रोज सुबह से शाम तक, लाखों महिलाएं अपने-अपने काम में जुटी रहती हैं | कोई सब्जी बेचती है, कोई फल, कोई चाय का ठेला लगाती है, तो कोई फूल, दिये और पूजा की सामग्री बेचती हैं | कई बार, बस थोड़ी सी पूंजी की कमी, इनके कारोबार को आगे बढ़ने से रोक देती है | लेकिन अब ऐसी लाखों माताओं-बहनों को ‘PM स्वनिधि योजना’ से नई ताकत मिल रही है | ‘महिला सशक्तिकरण’ के इस पहलू की उतनी चर्चा नहीं होती, जितनी होनी चाहिए | ‘PM स्वनिधि योजना’ की लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं | यानी देशभर में लगभग 35 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं |

साथियो,

गाजियाबाद की बबीता शर्मा जी, इसका बहुत अच्छा उदाहरण है | बबीता जी, पूजा की सामग्री का एक छोटा सा stall लगाती थीं | फूल, दिये, अगरबत्ती, नारियल जैसी चीजें बेचकर, वो अपने परिवार की आजीविका में हाथ बंटाती थीं | मेहनत खूब थी, लेकिन कारोबार बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत थी | ‘PM स्वनिधि’ से उन्हें आर्थिक मदद मिली | उन्होंने अपने stall पर सामान बढ़ाया, कारोबार का विस्तार किया | ग्राहक बढ़े, आमदनी बढ़ी और धीरे-धीरे सड़क किनारे का उनका छोटा सा stall एक दुकान में बदल गया |

साथियो,

बेंगलुरू की टी.एस. निन्गम्मा जी की मिसाल भी बहुत प्रेरक है | निन्गम्मा जी और उनके पति ने मिलकर इडली, डोसा और सांभर बेचने का छोटा सा काम शुरू किया | काम चल पड़ा, लेकिन इसे आगे बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत थी | निन्गम्मा जी को भी ‘PM स्वनिधि’ से सहयोग मिला | उन्होंने अपनी Cart बेहतर की | सामान थोक में खरीदना शुरू किया और Menu में भी कई नई चीजें जोड़ीं | ग्राहक बढ़े, कमाई बढ़ी और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई | आज वो अपने तीन बच्चों को बेहतर Education देने में सक्षम हुई हैं |

साथियो,

जब एक महिला का कारोबार बढ़ता है, तो उसके साथ पूरे परिवार का भविष्य आगे बढ़ता है | बच्चों की Education बेहतर होती है, घर की जरूरतें पूरी होती हैं, और महिला के भीतर आत्मविश्वास और मजबूत होता है | यही तो है ‘महिला सशक्तिकरण’ का एक जीवंत रूप | मैं रेहड़ी-पटरी के काम से जुड़ी सभी बहनों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए बहुत शुभकामनाएं देता हूं |

मेरे प्यारे देशवासियो,

स्वच्छता की एक बहुत बड़ी खूबी होती है | जब किसी जगह को स्वच्छ रखने का संकल्प वहां के लोगों का अपना संकल्प बन जाता है, तो बदलाव केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहता | इससे उस जगह की पूरी पहचान ही बदल जाती है | देश के अलग-अलग हिस्सों में स्वच्छता के लिए ऐसे प्रयास, हमें निरंतर प्रेरणा देते हैं | उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक गांव है- पटवाई | वहां आकाश और रोहन नाम के दो दोस्तों ने देखा कि उनके आसपास का इलाका गंदगी से भर गया है | बस, फिर क्या था, आकाश और रोहन ने कचरे के बैग उठाए और सफाई के लिए निकल पड़े | धीरे-धीरे दूसरे युवा भी उनके साथ जुड़ने लगे | एक Team भी बन गई | जिसका नाम है- ‘क्लीन-अप पटवाई’ | ये युवा अब तक चार गंगा घाटों को साफ कर चुके हैं | एक टन से अधिक Plastic कचरा हटा चुके हैं | इन्होंने कितने ही तालाबों और सार्वजनिक जगहों की सफाई की है |

साथियो,

इस बार श्री अमरनाथ जी की यात्रा में भी, स्वच्छता और जनभागीदारी की ऐसी ही प्रेरक तस्वीर देखने को मिली | कठिन रास्तों पर, हजारों स्वच्छता कर्मी दिन-रात सेवा में जुटे रहे | इस वर्ष यात्रा के दौरान, 400 Metric टन से ज्यादा कचरे को collect और process किया गया | मुझे इस प्रयास की एक बात विशेष रूप से अच्छी लगी | स्वच्छता के इस अभियान में श्रद्धालु भी भागीदार बने | 16 हजार से अधिक यात्रियों ने स्वच्छता का संकल्प लिया | 10 हजार से अधिक यात्रियों को ‘Responsible Yatri’ Certificate भी दिया गया | यहां एक बहुत अनोखा प्रयोग भी हुआ | यात्रा में घोड़ों और खच्चरों के गोबर को, Biogas में बदला गया और उसी Clean Energy से, ‘स्वच्छ ज्योत’ प्रज्ज्वलित की गई | यानी बाबा बर्फानी की इस पवित्र यात्रा में, स्वच्छता भी सेवा और आस्था का एक रूप बन गई |

साथियो,

हमारे गाँव हो या शहर, हमारी नदियां हों या तीर्थस्थल | इनकी पहचान हमारे व्यवहार से भी बनती है | और जब स्वच्छता इस व्यवहार में शामिल हो जाती है, उस स्थान की शोभा और बढ़ जाती है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

कभी–कभी हमारा एक छोटा सा शौक, जीवन में एक बड़ी संभावना का रास्ता खोल देता है । नागालैंड के फेक(Phek) जिले की वेसालु पुरो जी की यात्रा भी कुछ ऐसी ही है । वेसालु जी किसान परिवार में पली-बढ़ीं । बचपन से उन्होंने अपने माता–पिता को खेती करते देखा था और उन्हें खुद फूलों से बहुत लगाव था । साल 2021 में उन्होंने इसी शौक के साथ छोटे स्तर पर फूल उगाने की शुरुआत की । धीरे–धीरे उन्हें इसमें एक संभावना दिखाई देने लगी । उन्होंने देखा कि शादी-विवाह हों या फिर अन्य त्योहार, फूलों की मांग हमेशा बनी रहती है । वेसालु जी ने अपने इस शौक को आगे बढ़ाने का फैसला किया । इस सफर में उन्हें स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से फूलों की वैज्ञानिक खेती की training मिली, फिर उन्होंने केवल एक चौथाई एकड़ जमीन पर, gladiolus के हजारों पौधे लगाए । पहले ही प्रयास में 5 हजार से ज्यादा फूल खिल उठे । साथियो, ये सफलता वेसालु जी के लिए एक नई शुरुआत बन गई । उन्होंने फूलों की खेती को और आगे बढ़ाया । जो फूल कभी स्थानीय बाजार में रह जाते थे, आज वो नागालैंड से निकलकर दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों तक जा रहे हैं । वेसालु पुरो जी की यात्रा हमें बताती है कि शौक जब मेहनत और सही मार्गदर्शन से जुड़ जाता है, तो वह नई संभावनाओं का रास्ता खोल सकता है ।

मेरे प्यारे देशवासियो,

हमारे आसपास ऐसे कई लोग हैं, जो एक छोटा सा प्रयास शुरू करते हैं और देखते-ही-देखते उनका प्रयास बहुत से लोगों के जीवन में बदलाव का रास्ता बना देता है । ओडिशा के देबरीगढ़ में एक गाँव है ‘धोड़रोकुसुम’ । कुछ साल पहले तक इस गाँव की मैथिली भुए जी लगभग हर दिन जंगल जाती थीं - कभी जलावन की लकड़ी लेने, कभी महुआ और केंदु पत्ता चुनने, तो कभी बांस की कोपलें और दूसरी वन उपज लाने । उनके और वहाँ के अनेक परिवारों की बहुत सी जरूरतें इसी जंगल से पूरी होती थीं, लेकिन फिर मैथिली जी देबरीगढ़ Eco–Tourism से जुड़ीं । यहाँ से जंगल के साथ उनका रिश्ता एक नई दिशा में बदल गया । अब जंगल का संरक्षण भी उनकी आजीविका का माध्यम बन गया । साथियो, मैथिली जी के जीवन में आए इस बदलाव ने दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित किया । आज 60 से अधिक महिलाएं जंगल के संरक्षण में जुड़ चुकी हैं । कोई वन्य-जीवों की सुरक्षा का दायित्व संभाल रही हैं, कोई घास के मैदानों के विकास से जुड़ी हैं, तो कुछ महिलाएं Eco–Tourism activities में योगदान दे रही हैं । साथियो, मैथिली जी और देबरीगढ़ की इन बहनों ने दिखाया है कि प्रकृति की रक्षा भी हो सकती है और जीवन में समृद्धि भी आ सकती है । इन सभी बहनों का प्रयास हम सभी के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है ।

साथियो,

आज हमारी बेटियों के सपनों की उड़ान, धरती से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंच रही है और आपको यह जानकर गर्व होगा कि भारत, ऐसे सपने देखने वाली दुनिया की हजारों बेटियों को एक साथ जोड़ रहा है | इस प्रयास का नाम है Mission ShaktiSAT | इसके माध्यम से 108 देशों की 12 हजार छात्राओं को Satellite Technology सीखने और innovation के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है | 23 अगस्त, National Space Day पर इस मिशन की एक सुंदर तस्वीर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में देखने को मिली | गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में Mission ShaktiSAT के दूसरे चरण की शुरुआत हुई | इस अवसर पर दुनिया के अलग-अलग देशों और भारत से आई करीब 100 छात्राएं एक साथ जुटीं | भारत के दूर-दराज क्षेत्रों से चुनी हुई छात्राएं भी इसमें हिस्सा ले रही हैं | इस पूरे प्रयास का लक्ष्य भी बहुत खास है | पूरी तरह छात्राओं की भागीदारी से तैयार एक satellite को Moon की Orbit में भेजने की तैयारी है | साथियो, मुझे विश्वास है कि इनमें से अनेक छात्राएं आने वाले समय में science, technology और innovation के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाएंगी |

मेरे प्यारे देशवासियो,

आजकल Avocado फल की बड़ी धूम है | इस फल को पहले शायद ही कोई जानता था | इसकी value और demand दोनों कम थी, लेकिन आज इसे dining table पर खूब देखा जा रहा है | आज यह health और premium market की पसंद बन गया है |

हमारे किसान भाई-बहनों के लिए भी ये बहुत मददगार है | आंध्र प्रदेश में कडपा के वरदराज जी का उदाहरण है | वे कई वर्षों से अपने खेत में टमाटर और केले की खेती कर रहे थे | एक दिन उन्होंने अपने दोस्तों के farm में avocado की फसल देखी | इसके बाद उन्होंने Youtube से इस पर जानकारी जुटाई | अब तक वे करीब 4 टन avocado का उत्पादन कर चुके हैं | आज वे सीधे स्थानीय दुकानों को इसकी सप्लाई कर रहे हैं | नई फसल, वैज्ञानिक सलाह और सीधी marketing से उनके छोटे से farm की कमाई पूरी तरह बदल गई है | तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चन्द्रशेखरन जी ने आधी हेक्टेयर जमीन पर avocado उगाना शुरू किया | उन्हें इसके अच्छे दाम मिल रहे हैं और कमाई भी बढ़ी है | कर्नाटक में चिक्कमगलुरु के कुछ किसान भाई-बहनों ने तो coffee plantation के बीच avocado लगाया है | इससे उन्हें coffee और काली मिर्च के साथ अतिरिक्त कमाई भी हो रही है | साथियो, हम शहरों के restaurant में अक्सर avocado toast के बारे में सुनते हैं, लेकिन इसी avocado के जरिए हमारे innovative किसानों ने कमाई की एक नई recipe ढूंढ ली है | यानि अपने देश के avocado से आपके toast का स्वाद भी बढ़ा और किसानों की आमदनी भी बढ़ गई है |

मेरे प्यारे देशवासियो,

कुछ ही दिनों में 3 सितंबर को हम महानायक उत्तम कुमार जी की जन्म-शताब्दी मनाएंगे | साथियो, उत्तम कुमार जी एक versatile actor थे, जो अपने अभिनय से लोगों के दिलों में रच-बस गए | Film lovers का मानना है कि श्रीमान सत्यजीत रे ने फिल्म ‘नायक-the hero’ की पूरी script महानायक उत्तम कुमार जी को ध्यान में रखकर लिखी थी | श्रीमान सत्यजीत रे ने कहा था कि उनमें dignity के साथ-साथ अद्भुत emotional depth भी था | किरदार को वो जीवंत बनाने के लिए बहुत मेहनत करते थे | उत्तम कुमार जी अपनी सहजता के साथ ही philanthropy के लिए भी जाने जाते थे | उनके जीवन से कभी भी हार न मानने की एक और बड़ी सीख भी मिलती है | उनकी शुरुआती फिल्में बहुत नहीं चलीं, लेकिन उन्होंने अपने काम पर focus बनाए रखा | इसी का परिणाम था कि उन्होंने इतनी ऊंचाई हासिल की | साथियो, मुझे ध्यान है कि जब मैं कोलकाता में road show कर रहा था, तो मैं उत्तम कुमार जी के घर के सामने से भी गुजरा था | वहाँ मुझे एक व्यक्ति ने उनकी एक तस्वीर भी भेंट की थी | मैं एक बार फिर महानायक उत्तम कुमार जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं | वे हमेशा हम सब के दिलों पर राज करते रहेंगे |“महानायक उत्तम कुमार चीरोदिन मानुषेर हृदये राज कोरबेन”

मेरे प्यारे देशवासियो,

हमारे पर्व और त्योहार, हमारी परंपराओं के साथ-साथ, हमें एक-दूसरे से जुडने का भी अवसर देते हैं | आने वाले दिनों में हम और भी कई महत्वपूर्ण पर्व मनाने जा रहे हैं | 4 सितंबर को जन्माष्टमी का पावन पर्व है | सितंबर में ही हम विश्वकर्मा पूजा भी मनाएंगे | इस अवसर पर अपने आसपास के कारीगरों, शिल्पकारों और विश्वकर्मा साथियों का सम्मान करना चाहिए | कुछ महीनों बाद दीपावली भी आने वाली है, इसकी तैयारियां भी धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं | त्योहारों के इस मौसम में, मैं एक बार फिर, आपसे, vocal for local का आग्रह दोहराऊंगा और vocal for local का मतलब केवल मिट्टी के दीये खरीदना नहीं है, इसका vision बहुत बड़ा है | हम अपने घर के लिए जो भी सामान खरीदते हैं, उसे एक बार जरूर देख लें कि वो भारत में बना हो | भारत के आत्मनिर्भर बनने का मार्ग, भारत में बनी चीजों पर गर्व करने से ही प्रशस्त होगा | इस संदेश को ज्यादा-से-ज्यादा लोगों तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है | हमारे creative world के साथियों, influencers और celebrities की भी इसमें बहुत बड़ी भूमिका है | मेरा आपसे आग्रह है कि स्वयं भी vocal for local को अपनाए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कीजिए |

साथियो,

आपके आस-पास भी ऐसे अनेक लोग होंगे, जो अपने छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में बड़ा बदलाव ला रहे हैं | आप उनके बारे में ‘मन की बात’ के लिए जरूर लिखिए | आपका भेजा हुआ अनुभव, देश के किसी कोने में, किसी के लिए, नई प्रेरणा बन सकता है | मुझे आपके सुझावों और अनुभवों की प्रतीक्षा है | बहुत-बहुत धन्यवाद | नमस्कार |

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