प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज आचार्य कृपलानी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत के एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और बुद्धिमत्ता, अखंडता एवं साहस के प्रतीक के रूप में उन्हें याद करते हुए, श्री मोदी ने एक ऐसे भारत के उनके महान दृष्टिकोण को साकार करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई जो समृद्ध व मजबूत हो और जहां गरीब तथा हाशिए के लोग भी सशक्त हों।

एक्स पर अपने एक पोस्ट में, उन्होंने लिखा:

“आचार्य कृपलानी को उनकी जयंती पर याद कर रहा हूं। वह भारत के एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और साथ ही बुद्धिमत्ता, अखंडता एवं साहस के प्रतीक थे। वह लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के प्रति गहराई से प्रतिबद्ध थे।

आचार्य कृपलानी अन्याय से लड़ने से नहीं डरते थे। हम एक ऐसे भारत के उनके महान दृष्टिकोण को साकार करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं जो समृद्ध व मजबूत हो और जहां गरीब तथा हाशिए के लोग भी सशक्त हों।”

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प्रधानमंत्री ने एकता, पारस्परिक सहयोग और सामूहिक संकल्प की शक्ति पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
June 03, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए कहा कि जब नागरिक एकता और पारस्परिक सहयोग के सूत्र में बंधे होते हैं, तब राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प के बल पर देश निरंतर प्रगति की नई ऊँचाइयों को छू रहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर लिखा:

"जब नागरिक एकजुटता और आपसी सहयोग के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प से आज देश उन्नति की नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च।

धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥"

जिस प्रकार लकड़ी के टुकड़े अलग-अलग रहने पर अपनी पूरी ऊर्जा प्रदर्शित नहीं कर पाते, लेकिन एक साथ आने पर प्रज्वलित होकर प्रकाश और ऊष्मा उत्पन्न करते हैं, उसी प्रकार किसी राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि और शक्ति उसके नागरिकों की एकता, पारस्परिक सहयोग तथा सामूहिक संकल्प पर निर्भर करता है।