"पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन इस बात का भी प्रतिबिंब है कि हर देशवासी पूरी संवेदनशीलता से आपके साथ है"
"संकट की इस घड़ी में मां भारती आप सभी बच्चों के साथ है"
"इस मुश्किल समय में अच्छी किताबें आपकी विश्वसनीय दोस्त हो सकती हैं"
"आज जब हमारी सरकार 8 साल पूरे कर रही है तब देश का आत्मविश्वास और देशवासियों का खुद पर भरोसा अभूतपूर्व है"
"पिछले 8 साल गरीबों के कल्याण और सेवा के लिए समर्पित रहे हैं"
“अब गरीब से गरीब व्यक्ति भी लाभ पाने को लेकर आश्वस्त है। इसी भरोसे को बढ़ाने के लिए हमारी सरकार अब शत-प्रतिशत सशक्तिकरण का अभियान चला रही है”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना (स्कीम) के तहत लाभ जारी किए। इस कार्यक्रम से जुड़े लोगों में केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी, मंत्रिमंडल के कई अन्य सदस्य और मुख्यमंत्री शामिल थे।

उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने उन बच्चों के जीवन में आ रही कठिनाइयों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जिन्होंने कोरोना के कारण अपने प्रियजनों को खो दिया। “हर दिन का संघर्ष और हर दिन की चुनौतियां। आज जो बच्चे हमारे साथ हैं और जिनके लिए यह कार्यक्रम हो रहा है, उनके दर्द को शब्दों में बयान करना मुश्किल है।” उन्होंने बच्चों से कहा कि वह प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के तौर पर बोल रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन परिस्थितियों में, 'पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन ऐसे कोरोना प्रभावित बच्चों की मुश्किलों को कम करने का एक छोटा सा प्रयास है, जिन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया। पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन इस बात का भी प्रतिबिंब है कि हर देशवासी पूरी संवेदनशीलता से आपके साथ है।” प्रधानमंत्री ने बताया कि अगर किसी को व्यावसायिक पाठ्यक्रम (प्रोफेशनल कोर्स) या उच्च शिक्षा के लिए शैक्षणिक ऋण (एजुकेशन लोन) की जरूरत है तो उसमें भी पीएम केयर्स मदद करेगा। अन्य दैनिक जरूरतों के लिए भी अन्य योजनाओं के माध्यम से उनके लिए हर माह 4 हजार रुपये की व्यवस्था की गई हैI 23 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर 10 लाख रुपये के अलावा मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक मदद के लिए बच्चों को आयुष्मान कार्ड के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा और संवाद हेल्पलाइन के माध्यम से भावनात्मक परामर्श भी दिया जाएगा ।

प्रधानमंत्री ने महामारी के सबसे दर्दनाक प्रभाव का इतनी बहादुरी से सामना करने के लिए बच्चों को सलाम किया और कहा कि माता-पिता के प्यार की भरपाई कोई नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि "संकट की इस घड़ी में मां भारती आप सभी बच्चों के साथ हैं।" उन्होंने आगे कहा कि पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन के जरिए देश अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री महोदय ने महामारी के दौरान मानवीय करुणा के उन उदाहरणों को याद किया जब विशेष रूप से लोगों ने प्रभावित लोगों के कल्याण में किस प्रकार अपना योगदान दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कोष ने कोरोना काल में अस्पतालों को तैयार करने, वेंटिलेटर खरीदने और ऑक्सीजन प्लांट लगाने में भी काफी मदद की। इससे कई लोगों की जान बचाई जा सकी और कई परिवारों का भविष्य बचाया जा सका।

प्रधानमंत्री महोदय ने कहा कि निराशा के अंधकारमय वातावरण में भी यदि हम स्वयं पर विश्वास करें तो प्रकाश की एक किरण अवश्य दिखाई देती है। उन्होंने हमारे अपने देश को ही इसका सबसे बड़ा उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री ने बच्चों को सलाह दी कि वे निराशा को हार में न बदलने दें। उन्होंने उनसे अपने बड़ों और अपने शिक्षकों की सुनने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि इस कठिन समय में अच्छी किताबें ही उनकी विश्वसनीय दोस्त बन सकती हैं। उन्होंने बच्चों से रोग मुक्त रहने के लिए खेलो इंडिया और फिट इंडिया मूवमेंट में शामिल होकर नेतृत्व करने के लिए भी कहा। उन्होंने उनसे उन्हें योग दिवस में भी भाग लेने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि नकारात्मकता के उस माहौल में भारत ने अपनी ताकत पर भरोसा किया। “हमें अपने वैज्ञानिकों, अपने डॉक्टरों और अपने युवाओं पर भरोसा था और हम दुनिया के लिए चिंता नहीं, आशा की किरण बनकर निकले। हम समस्या नहीं बने बल्कि समाधान देने वाले बनकर सामने आए। हमने दुनिया भर के देशों को दवाएं और टीके भेजे। इतने बड़े देश में भी हम वैक्सीन को हर नागरिक तक ले गए। उन्होंने कहा कि हमारा देश सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रहा है और दुनिया नई उम्मीद और विश्वास के साथ हमारी ओर देख रही है।

प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि आज जब उनकी सरकार अपने 8 वर्ष पूरे कर रही है तब देश का आत्मविश्वास और देशवासियों का खुद पर भरोसा अभूतपूर्व है। भ्रष्टाचार, हजारों करोड़ के घोटाले, भाई-भतीजावाद, देश भर में फैले आतंकवादी संगठन और क्षेत्रीय भेदभाव के उस दुष्चक्र से देश अब बाहर निकल रहा है, जिसमें वह 2014 से पहले फंसा हुआ था। उन्होंने कहा कि “यह आप सभी बच्चों के लिए एक उदाहरण है कि सबसे कठिन दिन भी बीत जाते हैं I”

स्वच्छ भारत मिशन, जन धन योजना या हर घर जल अभियान जैसी कल्याणकारी नीतियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 8 साल गरीबों के कल्याण और सेवा के लिए समर्पित रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि "परिवार के एक सदस्य के रूप में, हमने कठिनाइयों को कम करने और देश के गरीबों के लिए जीवन की सुगमता में सुधार करने की कोशिश की है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाकर सरकार ने गरीबों के अधिकारों को सुनिश्चित किया है। अब गरीब से गरीब व्यक्ति को विशवास है कि सरकार की योजनाओं का लाभ उन्हें मिलेगा, और लगातार मिलेगाI इसी भरोसे को बढ़ाने के लिए हमारी सरकार अब शत-प्रतिशत सशक्तिकरण का अभियान चला रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले आठ वर्षों में जितनी ऊंचाइयां हासिल की हैं, उसकी पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। आज दुनिया भर में भारत का गौरव बढ़ा है, वैश्विक मंचों पर हमारे भारत की ताकत बढ़ी है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि युवा शक्ति भारत की इस यात्रा का नेतृत्व कर रही है। अंत में उन्होंने कहा कि "अपने सपनों के लिए बस अपना जीवन समर्पित कर दो, वे साकार हो जाएंगे।”

 

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पीएम मोदी 12 अगस्त को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन करेंगे
August 11, 2026
आत्मकथा का शीर्षक है: “ट्रायम्फ ऑफ़ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ़, माई स्ट्रगल्स”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 12 अगस्त 2026 को सुबह 9:30 बजे नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन करेंगे। उसका शीर्षक “ट्रायम्फ ऑफ़ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ़, माई स्ट्रगल्स” है। प्रधानमंत्री इस अवसर पर वहां एकत्र लोगों को भी संबोधित करेंगे।

प्रधानमंत्री की ओर से श्री कोविंद की आत्मकथा का विमोचन भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे जाने-माने व्यक्तित्वों में से एक के जीवन और योगदान को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। आत्मकथा में गहराई से श्री राम नाथ कोविंद की शानदार जीवन यात्रा का व्यक्तिगत विवरण मिलेगा जिसमें प्रारंभिक वर्षों से लेकर उनके विशिष्ट सार्वजनिक जीवन और भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में उनकी सेवा तक के अनुभव, संघर्षों और सफलताओं का उल्लेख शामिल हैं। यह पुस्तक उन मूल्यों, अनुभवों और परिस्थितियों के बारे में बताती है जिन्होंने उनकी जीवन यात्रा और लोक सेवा को आकार दिया।