काजीरंगा केवल एक राष्ट्रीय उद्यान से कहीं अधिक है-यह असम की आत्मा है, भारत की जैव विविधता का एक अनमोल रत्न है, इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल के रूप में सम्मानित किया है : प्रधानमंत्री
हाल के वर्षों में, काजीरंगा में पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुले हैं: प्रधानमंत्री
लंबे समय से यह माना जाता था कि प्रकृति और प्रगति एक-दूसरे के विपरीत हैं, दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते; आज, भारत दुनिया को दिखा रहा है कि दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं: प्रधानमंत्री
पूर्वोत्तर अब विकास के हाशिये पर नहीं है; यह अब राष्ट्र के हृदय और स्वयं दिल्ली के करीब है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज असम के कालियाबोर में 6,950 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना (एनएच-715 के कालियाबोर-नुमालीगढ़ खंड का 4-लेन निर्माण) का भूमि पूजन किया। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने जनता के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोग उन्हें आशीर्वाद देने आए हैं और वे इसके लिए अत्यंत आभारी हैं। उन्होंने कहा कि काजीरंगा की पुनः यात्रा पर उन्हें अपनी पिछली यात्रा की यादें ताजा हो गई और याद किया कि दो साल पहले काजीरंगा में बिताए पल उनके जीवन के सबसे विशेष अनुभवों में से थे। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में रात्रि विश्राम करने का अवसर मिला और अगली सुबह हाथी पर सफारी के दौरान उन्होंने इस क्षेत्र की सुंदरता को करीब से अनुभव किया।

श्री मोदी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि असम की यात्रा हमेशा उन्हें अपार आनंद देती है और उन्‍होंने इसे वीरों की भूमि तथा हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले पुत्र-पुत्रियों की भूमि बताया। उन्होंने बताया कि कल ही उन्होंने गुवाहाटी में आयोजित बागुरुंबा द्वौ उत्सव में भाग लिया जहां बोडो समुदाय की पुत्रियों ने अपने प्रदर्शन से एक नया रिकॉर्ड बनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने बागुरुंबा की असाधारण प्रस्तुति की सराहना की जिसमें 10,000 से अधिक कलाकारों की ऊर्जा, खाम की ताल और सिफुंग की मधुरता ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि बागुरुंबा का अनुभव आंखों को सुकून देता है और दिल को छू लेता है। प्रधानमंत्री ने असम के कलाकारों के उल्लेखनीय प्रयास, तैयारी और समन्वय की प्रशंसा करते हुए इसे वास्तव में अद्भुत बताया। उन्होंने बागुरुंबा द्वौ उत्सव में भाग लेने वाले सभी कलाकारों को एक बार फिर बधाई दी। उन्होंने इस कार्यक्रम को राष्ट्र और विश्व तक पहुंचाने के लिए सभी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और टीवी मीडिया को धन्यवाद दिया।

श्री मोदी ने यह याद करते हुए कहा कि पिछले वर्ष उन्होंने झूमोइर महोत्सव में भाग लिया था और इस बार उन्हें माघ बिहू के दौरान असम आने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि मात्र एक माह पहले ही वे विकास परियोजनाओं के लिए आए थे जहां उन्होंने गुवाहाटी में विस्तारित लोकप्रिय गोपीनाथ बरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया और नामरूप में अमोनिया यूरिया कॉम्प्लेक्स की नींव रखी। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरों ने उनकी सरकार के ‘‘विकास भी, विरासत भी’’ के मंत्र को और मजबूत किया है।

प्रधानमंत्री ने असम के अतीत, वर्तमान और भविष्य में कालियाबोर के ऐतिहासिक महत्व का उल्‍लेख करते हुए कहा कि यह काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का प्रवेश द्वार और ऊपरी असम के लिए संपर्क का एक प्रमुख केंद्र है। उन्होंने याद दिलाया कि कालियाबोर से ही महान योद्धा लाचित बोरफुकन ने मुगल आक्रमणकारियों को खदेड़ने की रणनीति बनाई थी और उनके नेतृत्व में असम की जनता ने साहस, एकता और दृढ़ संकल्प के साथ मुगल सेना को परास्त किया था। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि यह केवल एक सैन्य विजय नहीं बल्कि असम के गौरव और आत्मविश्वास की घोषणा थी। उन्होंने कहा कि अहोम शासनकाल से ही कालियाबोर का रणनीतिक महत्व रहा है और उन्होंने खुशी व्यक्त की कि उनकी सरकार में यह क्षेत्र अब संपर्क और विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज उनकी पार्टी पूरे देश में लोगों की पहली पसंद बन गई है और पिछले डेढ़ साल में पार्टी पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हाल ही में हुए बिहार चुनावों में, 20 साल बाद भी, लोगों ने उन्हें रिकॉर्ड संख्या में वोट और सीटें दी। उन्होंने आगे कहा कि केवल दो दिन पहले महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में हुए महापौर और पार्षद चुनावों के नतीजों से पता चला कि दुनिया के सबसे बड़े नगर निगमों में से एक मुंबई ने पहली बार उनकी पार्टी को रिकॉर्ड जनादेश दिया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के अधिकांश शहरों के लोगों ने उन्हें सेवा करने का अवसर दिया है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इससे पहले केरल की जनता ने उनकी पार्टी को महत्वपूर्ण समर्थन दिया था जिसके चलते पार्टी ने राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम में पहली बार महापौर पद जीता था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश भर में हाल के चुनाव परिणाम स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि मतदाता सुशासन और विकास चाहते हैं, जिसमें प्रगति और विरासत दोनों पर ध्यान केंद्रित किया गया हो और इसीलिए वे उन्हें चुन रहे हैं।

श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि ये चुनाव एक और संदेश देते हैं—कि देश विपक्षी दल की नकारात्मक राजनीति को लगातार नकार रहा है। उन्होंने बताया कि मुंबई, जिस शहर में विपक्षी दल का जन्म हुआ था, वहां वह अब चौथे या पांचवें स्थान पर सिमट गया है और महाराष्ट्र में, जहां उन्होंने दशकों तक शासन किया, वहां तो उसका अस्तित्व ही खत्म हो चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विपक्ष ने देश का विश्वास खो दिया है क्योंकि उसके पास विकास का कोई एजेंडा नहीं है और ऐसी पार्टी कभी भी असम या काजीरंगा के हितों की सेवा नहीं कर सकती।

प्रधानमंत्री ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका के शब्दों को याद किया, जिन्होंने काजीरंगा की सुंदरता का गहरे स्नेह से वर्णन किया था। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों में काजीरंगा के प्रति प्रेम और असम के लोगों का प्रकृति से गहरा जुड़ाव झलकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि काजीरंगा केवल एक राष्ट्रीय उद्यान नहीं, बल्कि असम की आत्मा और भारत की जैव विविधता का अनमोल रत्न है। इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि काजीरंगा और इसके वन्यजीवों की रक्षा करना न केवल पर्यावरण का संरक्षण है, बल्कि असम के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। श्री मोदी ने असम की धरती से शुरू होने वाली नई परियोजनाओं की घोषणा की और व्यापक प्रभाव डालने वाली इन पहलों के लिए लोगों को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने यह बताते हुए कहा कि काजीरंगा एक सींग वाले गैंडे का घर है और बाढ़ के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया, जब वन्यजीव ऊंची जगहों की तलाश में राष्ट्रीय राजमार्ग पार करने के लिए मजबूर हो जाते हैं और अक्सर फंस जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जंगल को सुरक्षित रखते हुए सुचारू यातायात सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बताया कि इसी योजना के तहत, कालियाबोर से नुमालीगढ़ तक 90 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर लगभग 7,000 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है, जिसमें 35 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर भी शामिल है। वाहन ऊपर से गुजरेंगे जबकि वन्यजीवों की आवाजाही नीचे निर्बाध रहेगी। इस कॉरिडोर का डिजाइन गैंडों, हाथियों और बाघों के पारंपरिक आवागमन मार्गों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। श्री मोदी ने कहा कि यह कॉरिडोर ऊपरी असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच संपर्क को भी बेहतर बनाएगा और नई रेल सेवाओं के साथ लोगों के लिए नए अवसर खोलेगा। उन्होंने इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए असम और देश को बधाई दी।

प्रकृति के संरक्षण से अवसरों के सृजन की बात कहते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि काजीरंगा में हाल के वर्षों में पर्यटन में लगातार वृद्धि हुई है। होमस्टे, गाइड सेवाएं, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को आय के नए साधन मिले हैं।

असम की जनता और सरकार की एक और उपलब्धि की सराहना करते हुए, श्री मोदी ने याद दिलाया कि एक समय था जब गैंडों का अवैध शिकार एक बड़ी चिंता का विषय था और 2013 और 2014 में दर्जनों एक सींग वाले गैंडों का अवैध शिकार किया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने यह तय किया कि यह नहीं चलेगा और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया, वन विभाग को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए, निगरानी बढ़ाई और ‘वन दुर्गा’ के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया। उन्होंने बताया कि इसके परिणामस्वरूप, 2025 में गैंडों के अवैध शिकार की एक भी घटना दर्ज नहीं की गई। यह सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति और असम की जनता के प्रयासों से संभव हुआ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि प्रकृति और प्रगति एक-दूसरे के विरोधी हैं, लेकिन आज भारत दुनिया को दिखा रहा है कि अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों साथ-साथ प्रगति कर सकते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले दशक में वन और वृक्षों का आवरण बढ़ा है, और लोगों ने उत्साहपूर्वक ‘‘एक पेड़ मां के नाम’’ अभियान में भाग लिया, जिसके तहत 260 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए गए हैं। 2014 से बाघ और हाथी अभयारण्यों की संख्या बढ़ी है, और संरक्षित और सामुदायिक क्षेत्रों का विस्तार हुआ है। श्री मोदी ने कहा कि चीतों को, जो कभी भारत में विलुप्त हो गए थे, अब वापस लाया गया है और वे एक नया आकर्षण बन गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत आर्द्रभूमि के संरक्षण पर लगातार काम कर रहा है और एशिया का सबसे बड़ा रामसर नेटवर्क बन गया है, रामसर स्थलों की संख्या के मामले में विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम भी दुनिया को दिखा रहा है कि विकास, विरासत संरक्षण और प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ कैसे चल सकता है।

श्री मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा दर्द हमेशा से दूरी रही है—दिलों की दूरी और जगहों की दूरी। उन्होंने कहा कि दशकों से इस क्षेत्र के लोगों को लगता रहा है कि विकास कहीं और हो रहा है और वे पीछे छूट रहे हैं, जिससे न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि विश्वास भी प्रभावित हुआ। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र और राज्य में उनकी पार्टी की सरकारों ने पूर्वोत्तर के विकास को प्राथमिकता देकर इस भावना को बदला है। उन्होंने बताया कि सड़क, रेल, हवाई और जलमार्गों के माध्यम से असम को जोड़ने का काम साथ-साथ शुरू किया गया है।

श्री मोदी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि रेल संपर्क का विस्तार सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर लाभकारी है। यह पूर्वोत्तर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विपक्ष की इस उपेक्षा की आलोचना करते हुए कहा कि जब विपक्ष केंद्र में सत्ता में था, तब असम को रेल बजट में केवल लगभग 2,000 करोड़ रुपये मिलते थे, जबकि उनकी सरकार के कार्यकाल में इसे बढ़ाकर लगभग 10,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है जो पांच गुना अधिक है। श्री मोदी ने कहा कि इस बढ़े हुए निवेश से बड़े पैमाने पर अवसंरचना का विकास हुआ है, जिसमें नई रेल लाइनें, दोहरीकरण और विद्युतीकरण शामिल हैं जिससे रेलवे क्षमता और यात्री सुविधाओं में वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने कालियाबोर से तीन नई रेल सेवाओं के शुभारंभ की घोषणा की जो असम के रेल संपर्क में एक महत्वपूर्ण विस्तार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन गुवाहाटी को कोलकाता से जोड़ेगी जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक आरामदायक हो जाएगी, जबकि दो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण स्टेशनों को कवर करेंगी, जिससे लाखों यात्रियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। श्री मोदी ने कहा कि ये ट्रेनें असम के व्यापारियों को नए बाजारों से जोड़ेंगी, छात्रों को शिक्षा के अवसरों तक आसान पहुंच प्रदान करेंगी और देश के विभिन्न हिस्सों में यात्रा को सरल बनाएंगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के संपर्क विस्तार से यह विश्वास पैदा होता है कि पूर्वोत्तर अब विकास के हाशिये पर नहीं है, अब दूर नहीं है, बल्कि दिल के करीब और दिल्ली के करीब है।

प्रधानमंत्री ने असम के सामने मौजूद एक बड़ी चुनौती—इसकी पहचान और संस्कृति की रक्षा की आवश्यकता के बारे में भी कहा। उन्होंने असम में उनकी सरकार की घुसपैठ से प्रभावी ढंग से निपटने, जंगलों, ऐतिहासिक सांस्कृतिक स्थलों और लोगों की जमीनों को अवैध अतिक्रमणों से मुक्त कराने के लिए प्रशंसा की। इसकी चारों ओर सराहना हो रही है। पीएम मोदी ने इसकी तुलना विपक्ष से करते हुए कहा कि दशकों तक विपक्ष ने केवल वोट और सरकार बनाने के लिए असम की धरती घुसपैठियों के हवाले कर दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के शासनकाल में घुसपैठ बढ़ती रही और इन घुसपैठियों ने असम के इतिहास, संस्कृति या आस्था की परवाह किए बिना बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किए। उन्होंने आगे कहा कि घुसपैठ के कारण पशु गलियारों में अतिक्रमण हुआ, अवैध शिकार को बढ़ावा मिला और तस्करी तथा अन्य अपराध बढ़ गए।

प्रधानमंत्री मोदी ने चेतावनी दी कि घुसपैठिए जनसांख्यिकीय संतुलन बिगाड़ रहे हैं, संस्कृति पर हमला कर रहे हैं, गरीबों और युवाओं से नौकरियां छीन रहे हैं और आदिवासी क्षेत्रों में धोखाधड़ी से जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं जिससे असम और राष्ट्र दोनों की सुरक्षा को गंभीर खतरा है। उन्होंने लोगों को विपक्ष से सतर्क रहने के लिए आगाह करते हुए कहा कि उनकी एकमात्र नीति घुसपैठियों को संरक्षण देना और सत्ता प्राप्‍त करना है। श्री मोदी ने कहा कि विपक्ष और उसके सहयोगी पूरे देश में यही रणनीति अपना रहे हैं, उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बिहार में विपक्ष ने घुसपैठियों को संरक्षण देने के लिए मार्च और रैलियां आयोजित की, लेकिन बिहार की जनता ने उन्हें पूरी तरह से नकार दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि असम की जनता भी विपक्ष को करारा जवाब देगी।

श्री मोदी ने कहा कि असम का विकास पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की प्रगति के नए द्वार खोल रहा है और एक्ट ईस्ट पॉलिसी को दिशा दे रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जब असम प्रगति करेगा, तभी पूर्वोत्तर क्षेत्र प्रगति करेगा और सरकार के प्रयासों और जनता के विश्वास से यह क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छुएगा। अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री ने आज उद्घाटन की गई परियोजनाओं के लिए सभी को एक बार फिर बधाई दी।

इस कार्यक्रम में असम के राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोणोवाल और श्री पबित्र मार्गेरिटा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने 6,950 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना (एनएच-715 के कालियाबोर-नुमालीगढ़ खंड का 4-लेन निर्माण) का भूमि पूजन किया।

86 किलोमीटर लंबी काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर्यावरण के प्रति सजग एक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना है। इसमें 35 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर होगा जो काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरेगा, साथ ही 21 किलोमीटर का बाईपास खंड और एनएच-715 के मौजूदा राजमार्ग खंड का 30 किलोमीटर तक विस्तार करके इसे दो लेन से चार लेन का बनाया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य पार्क की समृद्ध जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाना है।

यह परियोजना नागांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों से होकर गुजरेगी और ऊपरी असम, विशेष रूप से डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया से संपर्क को काफी बेहतर बनाएगी। यह एलि‍वेटिड वाइल्‍डलाइफ कॉरिडोर जानवरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करेगा। इससे सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा, यात्रा का समय और दुर्घटना दर कम होगी, और बढ़ता यात्री और माल यातायात सुगम होगा। इस परियोजना के अंतर्गत, जाखलबंधा और बोकाखाट में बाईपास बनाए जाएंगे। ये शहरों में भीड़भाड़ कम करने, शहरी आवागमन को बेहतर बनाने और स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर को सुधारने में सहायक होंगे।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों - गुवाहाटी (कामाख्या)-रोहतक अमृत भारत एक्सप्रेस और डिब्रूगढ़-लखनऊ (गोमती नगर) अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये नई रेल सेवाएं पूर्वोत्तर और उत्तरी भारत के बीच रेल संपर्क को मजबूत करेंगी जिससे लोगों के लिए सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक यात्रा संभव हो सकेगी।

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Members of the Governing Body of Shri Ram College of Commerce meets the Prime Minister
April 25, 2026

A delegation comprising members of the Governing Body of Shri Ram College of Commerce, met the Prime Minister, Shri Narendra Modi, today. Shri Modi noted that this year marks the centenary of the institution, a significant milestone in its illustrious journey of academic excellence and nation-building. He lauded the college’s long-standing contribution to higher education and its role in nurturing generations of leaders across diverse fields.

On the occasion, a commemorative stamp marking the centenary year of Shri Ram College of Commerce was also released.

The Prime Minister posted on X:

"Met a delegation consisting of the Governing Body of the Shri Ram College of Commerce, one of India’s most reputed educational institutions. This year, we are marking the centenary of this institution. A commemorative stamp was released too. My best wishes to this institution."