बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा, टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से रामजन्मभूमि आज मुक्त हो गई है: प्रधानमंत्री मोदी
श्रीराम भारत की मर्यादा हैं, श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, आज का ये दिन करोड़ों रामभक्तों के संकल्प की सत्यता का प्रमाण है: पीएम मोदी
श्रीरामचंद्र को तेज में सूर्य के समान, क्षमा में पृथ्वी के तुल्य, बुद्धि में बृहस्पति के सदृश्य और यश में इंद्र के समान माना गया है, श्रीराम का चरित्र सबसे अधिक जिस केंद्र बिंदु पर घूमता है, वो है सत्य पर अडिग रहना, इसीलिए ही श्रीराम संपूर्ण हैं: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अयोध्या में 'श्री राम जन्मभूमि मंदिर' में भूमिपूजन किया।

भारत का एक स्वर्णिम अध्याय

इस अवसर पर प्रधान मंत्री ने देशवासियों और दुनिया भर में मौजूद राम भक्तों को बधाई दी। उन्होंने इसे एक ऐति​हासिक अवसर करार देते हुए कहा कि आज जब समस्त देशवासी इस बात को लेकर प्रफुल्लित हैं कि उन्होंने भावनात्मक रूप से वह सब हासिल कर लिया है जिसकी वह सदियों से प्रतीक्षा कर रहे थे, भारत एक स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज कई लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए यह विश्वास करना कठिन हो रहा है कि अपने जीवन काल में कभी वह आज का दिन भी देख सकते थे। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि राम जन्मभूमि को विध्वंस और पुनर्निर्माण के चक्र से मुक्ति मिल चुकी है और अब तंबू के स्थान पर रामलला के लिए भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह से 15 अगस्त स्वतंत्रता संग्राम के लिए देश भर के लोगों द्वारा दिए गए बलिदान का प्रतीक है उसी तरह आज का दिन राम मंदिर के लिए पीढ़ियों के समर्पण और निरंतर संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने इस अवसर पर उन लोगों का स्मरण किया और उनके प्रति सम्मान प्रकट किया जिनके संघर्ष के परिणामस्वरूप राम मंदिर का सपना साकार हुआ है।

श्री राम हमारी संस्कृति का आधार हैं

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री राम के अस्तित्व को मिटाने के कई बार प्रयास किए गए लेकिन आज भी वह हमारी संस्कृति का आधार स्तंभ बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर हमारी संस्कृति, हमारी आस्था, राष्ट्रीय भावना और सामूहिक शक्ति का आधुनिक प्रतीक होगा जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने का काम करेगा। मंदिर के बनने से संभावनाओं के कई अवसर बनेंगे जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का दिन करोड़ों राम भक्तों के विश्वास और सच्चे संकल्प की गवाही दे रहा है। उन्होंने पिछले साल माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मंदिर के संबध में सुनाए गए फैसले के दौरान सभी की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, देशवासियों द्वारा दिखाए गए संयम और गरिमा की प्रशंसा की । उन्होंने कहा कि यह संयंम और गरिमा आज भी दिखाई दे रही है। 

प्रधान मंत्री ने इस अवसर पर उन बातों का स्मरण किया कि किस तरह से गरीब, पिछड़े, दलित, आदिवासी सहित सभी वर्ग के लोगों ने एकसाथ मिलकर श्री राम की​ विजय, श्री कृष्ण गोवर्धन को उठाने, छत्रपति शिवाजी को स्वराज लाने और गांधीजी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन को चलाने जैसे कार्यों का सशक्त माध्यम बने। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण भी लोगों की मदद और योगदान से शुरू हुआ है।

श्री राम के चरित्र का स्मरण करते हुए प्रधान मंत्री ने कहा कि वह हमेशा सत्य पर टिके रहे और सामाजिक सद्भाव को अपने शासन का आधार बनाया। वह अपनी प्रजा से समान रुप से प्रेम करते थे लेकिन गरीबों और जरूरतमंदों के लिए उनके हृदय में विशेष दया भाव था । जीवन का कोई ऐसा पहलू नहीं है जहाँ श्री राम प्रेरणा के स्रोत के रूप में वर्तमान नहीं हैं। उनका प्रभाव देश की संस्कृति, दर्शन, विश्वास और परंपरा के कई पहलुओं में दिखाई देता है।

श्री राम - अनेकता में एकता का सूत्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री राम, प्राचीन काल में वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास के माध्यम से, मध्यकालीन युग में कबीर और गुरु नानक के माध्यम से और आधुनिक युग में महात्मा गांधी के अहिंसा और सत्याग्रह तथा उनके भजनों के माध्यय से एक मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में आज भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध भी श्री राम से जुड़े हैं, और अयोध्या शहर सदियों से जैनियों की आस्था का केंद्र रहा है। विभिन्न भाषाओं में लिखे गए विभिन्न रामायणों को याद करते हुए, प्रधान मंत्री ने कहा कि श्री राम देश में विविधता में एकता का सूत्र हैं।

प्रधान मंत्री ने कहा कि श्री राम कई देशों में पूजे जाते हैं। विश्व की सबसे अधिक मुस्लिम जनसंख्या वाले देश इंडोनेशिया, कंबोडिया, लाओस, मलेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में रामायण की खासी लोकप्रियता है। ईरान और चीन की कई लोककथाओं में भी राम का संदर्भ मिलता है। कई अन्य देशों में भी रामकथा काफी लोकप्रिय है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण की शुरुआत के साथ ही इन सभी देशों के लोग आज खुशी महसूस कर रहे हैं।

समस्त मानवजाति के लिए प्रेरणा का स्रोत

प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि आने वाले कई वर्षों तक राम मंदिर समस्त मानवजाति के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण होगा कि श्री राम, राम मंदिर और हमारी चिर पुरातन परंपराओं का संदेश पूरे विश्व तक पहुंचे। इस बात को ध्यान में रखते हुए ही देश में राम सर्किट का निर्माण कराया जा रहा है।  

रामराज्य

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर महात्मा गांधी जी के रामराज्य के सपने का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि श्री राम की शिक्षाएं आज भी देश का मार्गदर्शन कर रही हैं। इसमें कोई भी गरीब या दुखी नहीं होना चाहिए; पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से खुश होना चाहिए; किसानों और पशुपालकों को हमेशा खुश रहना चाहिए; बूढ़े, बच्चों और डॉक्टरों को हमेशा सुरक्षित रखना चाहिए; शरण मांगने वालों की रक्षा करना सभी का कर्तव्य है; मातृभूमि स्वर्ग से बढ़कर है; और, एक राष्ट्र के पास जितनी अधिक शक्ति होगी, उसकी शांति की क्षमता उतनी ही अधिक होगी जैसी मूल बातें शामिल हैं। प्रधान मंत्री ने कहा कि श्री राम आधुनिकता के साथ-साथ परिवर्तन का भी प्रतीक हैं। श्रीराम के इन आदर्शों पर चलकर देश प्रगति कर रहा है।

 

आपसी प्रेम और भाईचारे की नींव

प्रधान मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मंदिर का निर्माण आपसी प्रेम और भाईचारे की नींव पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'सबका साथ' और 'सबका विश्वास ' के साथ, हमें 'सबका विकास' हासिल करना होगा और आत्म-विश्वास से भरा आत्मानिर्भर भारत बनाना होगा। उन्होंने कहा कि हम सबको श्री राम के इस संदेश का अनुसरण करने की आवश्यकता है कि किसी भी प्रकार की देरी किए बिना हमें आगे बढ़ना चाहिए।

 

कोविड के दौरान मर्यादा का पालन

प्रधानमंत्री ने कोविड की वर्तमान पृष्ठभूमि में श्री राम के 'मर्यादा' मार्ग के महत्व को याद करते हुए सभी लोगों से दो गज की दूरी है जरुरी और मास्क है जरुरी की मर्यादा का पालन करने का आह्वान किया ।

 

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प्रधानमंत्री 19 जून को PM-VBRY के तहत लगभग ₹2,400 करोड़ के इंसेंटिव जारी करेंगे
June 17, 2026
पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारियों को 15,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा
सतत रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए, नियोक्ता प्रति अतिरिक्त कर्मचारी प्रति माह 3,000 रुपये तक के प्रोत्साहन के पात्र होंगे
पीएम-वीबीआरवाई योजना रोजगार सृजन, रोजगार के औपचारिकीकरण और सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार को सुगम बनाने के लिए बनाई गई
इस योजना ने देश भर में 15 लाख लाभार्थियों को रोजगार प्रदान किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 19 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सायं 5 बजे आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) के अंतर्गत लगभग 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का वितरण करेंगे।

यह राशि वितरण पीएम-वीबीआरवाई के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पीएम-वीबीआरवाई भारत सरकार की प्रमुख रोजगार-संबंधी प्रोत्साहन योजना है, जिसका उद्देश्य रोजगार सृजन में तेजी लाना, रोजगार को औपचारिक बनाना, रोजगार क्षमता बढ़ाना और सभी सेक्‍टरों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना है। इस योजना के माध्यम से देश भर में पहले ही 15 लाख रोजगार के अवसर सृजित किए जा चुके हैं।

पीएम-वीबीआरवाई योजना का उद्देश्य श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत, पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारियों को 15,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता है, जिससे उन्हें कार्यबल में शामिल होने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी प्रति माह 3,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलता है, जिससे सतत रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिलता है। आर्थिक विकास को गति देने में विनिर्माण के कार्यनीतिक महत्व को देखते हुए, विनिर्माण क्षेत्र के नियोक्ता चार वर्षों की अवधि के लिए प्रोत्साहन प्राप्त करने के पात्र हैं, जबकि अन्य सभी सेक्‍टरों के नियोक्ता दो वर्षों के लिए प्रोत्साहन का लाभ उठा सकते हैं।

यह योजना रोजगार-आधारित विकास के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि भारत की आर्थिक प्रगति के लाभ उसके युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण औपचारिक रोजगार के अवसरों में परिवर्तित हों।

प्रधानमंत्री- विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) 1 अगस्त, 2025 से प्रभावी हुई। 99,446 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करने के लिए प्रोत्साहन देना है। इनमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थी पहली बार कार्यबल में प्रवेश करेंगे। कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों की सहायता करने के जरिये, यह योजना औपचारिक रोजगार के विस्तार, सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सुदृढ़ करने और विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।