प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केवडिया में 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' पर सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार पटेल और भारत की एकता एवं शक्ति के उनके दृष्टिकोण को एक अविस्मरणीय श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में स्‍थापित यह प्रतिमा राष्ट्रीय गौरव और सरदार पटेल के स्‍वप्‍नों को साकार करने के राष्ट्र के सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“केवडिया में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की।

यह स्मारक सरदार पटेल और भारत की एकता एवं शक्ति के प्रति उनके दृष्टिकोण को एक अविस्मरणीय श्रद्धांजलि है। दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में स्थापित, यह राष्ट्रीय गौरव और सरदार पटेल के सपनों को साकार करने के सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।

“केवड़िया में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार पटेल को समर्पित एक भव्य स्मारक है, जो भारत की एकता को लेकर उनकी संकल्पना का सशक्त प्रतीक है। विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में यह हमारे राष्ट्रीय गौरव और सरदार पटेल के सपनों को साकार करने के सामूहिक संकल्प की प्रेरणाशक्ति भी है।”

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प्रधानमंत्री ने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत की शक्ति को उजागर करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
March 06, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत के लोग अपने दृढ़ संकल्प से सबसे कठिन कार्यों को भी संभव बना देते हैं। उन्होंने कहा है कि सही दिशा में अथक प्रयास करके वे बड़े से बड़े लक्ष्य भी हासिल कर लेते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“यद् दूरं यद् दुराराध्यं यच्च दूरे व्यवस्थितम्। तत् सर्वं तपसा साध्यं तपो हि दुरतिक्रमम्॥”

इसका संदेश है कि लक्ष्य चाहे कितना ही दूर, कठिन या पहुंच से बाहर क्यों न लगे, अटल संकल्प और निरंतर परिश्रम से उसे प्राप्त किया जा सकता है। दृढ़ता और धैर्य ही वे शक्तियां हैं जो असंभव को संभव बनाती हैं।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:

“भारत के लोग अपने दृढ़ निश्चय से किसी भी कार्य को संभव बना देते हैं। सही दिशा में अपनी अथक मेहनत से वे बड़े से बड़े लक्ष्य को भी हासिल कर दिखाते हैं।

यद् दूरं यद् दुराराध्यं यच्च दूरे व्यवस्थितम्।

तत् सर्वं तपसा साध्यं तपो हि दुरतिक्रमम्॥”