प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मतुआ धर्म मेले के सभी श्रद्धालुओं और प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। यह विशेष अवसर पूर्ण ब्रह्म श्री श्री हरिचंद ठाकुर जी की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। श्री मोदी ने कहा, “मैं उन्हें सादर प्रणाम करता हूं। उनके विचार और शिक्षाएं आज भी अनेक लोगों को शक्ति और आशा प्रदान करती हैं। उन्होंने गरिमा, समानता और भक्ति के लिए एक सशक्त आंदोलन को जन्म दिया। उन्होंने पीढ़ियों को सत्य, सद्भाव और सामूहिक उत्थान के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि मतुआ संस्कृति की समृद्ध और जीवंत परंपराएं गहरी आध्यात्मिक शक्ति और समानता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। यह हमारे राष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने को महत्वपूर्ण रूप से समृद्ध करती है। श्री मोदी ने कहा, "पिछले एक दशक से हमारी सरकार मतुआ समुदाय के कल्याण, सशक्तिकरण और सम्मान के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।"
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया:
"मतुआ धर्म मेले के सभी श्रद्धालुओं और प्रतिभागियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई।"
यह विशेष अवसर पूर्ण ब्रह्म श्री श्री हरिचंद ठाकुर जी की जयंती से संबंधित है। मैं उन्हें सादर प्रणाम करता हूं। उनके विचार और शिक्षाएं आज भी अनेक लोगों को शक्ति और आशा प्रदान करती हैं। उन्होंने गरिमा, समानता और भक्ति के लिए एक सशक्त आंदोलन को जन्म दिया। उन्होंने पीढ़ियों को धर्म, सद्भाव और सामूहिक उत्थान के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
मातुआ संस्कृति की समृद्ध और जीवंत परंपराएं गहरी आध्यात्मिक शक्ति और समानता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। यह हमारे राष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने को महत्वपूर्ण रूप से समृद्ध करती है। पिछले एक दशक से, हमारी सरकार मतुआ समुदाय के कल्याण, सशक्तिकरण और गरिमा के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध रही है।
“মতুয়া ধর্মমেলায় আগত সমস্ত ভক্ত এবং অংশগ্রহণকারীদের জানাই আমার আন্তরিক শুভেচ্ছা ও অভিনন্দন।
এই বিশেষ তিথিটি পূর্ণ ব্রহ্ম শ্রী শ্রী হরিচাঁদ ঠাকুরজির জয়ন্তীর সঙ্গে যুক্ত। আমি তাঁকে আমার সশ্রদ্ধ প্রণাম নিবেদন করছি। তাঁর আদর্শ এবং শিক্ষা আজও অগণিত মানুষকে শক্তি ও আশার আলো দিয়ে চলেছে এবং সম্মান, সাম্য ও ভক্তির এক শক্তিশালী আন্দোলনের জন্ম ঘটিয়েছে। তিনি প্রজন্ম থেকে প্রজন্মান্তরকে ন্যায়ের পথ, সম্প্রীতি এবং সমষ্টিগত উন্নয়নের পথে চলার অনুপ্রেরণা জুগিয়েছেন।
মতুয়া সংস্কৃতির এই সমৃদ্ধ এবং প্রাণবন্ত ঐতিহ্য এক গভীর আধ্যাত্মিক শক্তি এবং সাম্যের প্রতি অটুট অঙ্গীকারকে প্রতিফলিত করে। এটি আমাদের দেশের সামাজিক কাঠামোকে উল্লেখযোগ্যভাবে সমৃদ্ধ করেছে। গত এক দশকে, আমাদের সরকার মতুয়া সম্প্রদায়ের কল্যাণ, ক্ষমতায়ন এবং মর্যাদার প্রতি সম্পূর্ণ দায়বদ্ধ থেকে কাজ করে চলেছে।”