"हमारे लिए, एमएसएमई का अर्थ है- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को अधिकतम समर्थन"
"एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करना पूरे समाज को मजबूत करना है"
"अगर कोई उद्योग आगे बढ़ना चाहता है, विस्तार करना चाहता है, तो सरकार न केवल उसे सहयोग दे रही है, बल्कि नीतियों में जरूरी बदलाव भी कर रही है"
"विदेश में भारतीय मिशनों का मूल्यांकन तीन मानकों अर्थात व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन पर किया जा रहा है"
"पहली बार खादी और ग्रामोद्योग का टर्नओवर 1 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचा है"
"उद्यमशीलता को हर भारतीय के लिए सहज बनाने में मुद्रा योजना की बहुत बड़ी भूमिका है"
"उद्यमशीलता और आर्थिक समावेशन में यह समावेश सही मायने में सामाजिक न्याय है"
"मैं एमएसएमई क्षेत्र को आश्वस्त करता हूं कि सरकार ऐसी नीतियां बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जो आपकी आवश्यकताओं को पूरा करती हैं और आपके लिए सकारात्मक हो"
“एक उद्यमी भारत की हर उपलब्धि हमें आत्मनिर्भर भारत की ओर ले जाएगी; मुझे आप पर और आपकी क्षमता पर विश्वास है"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज 'उद्यमी भारत' कार्यक्रम में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 'एमएसएमई प्रदर्शन में सुधार तथा तेजी' (रैंप) योजना, 'पहली बार के एमएसएमई निर्यातकों का क्षमता निर्माण' (सीबीएफटीई) योजना और 'प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम' (पीएमईजीपी) की नई सुविधाओं जैसी प्रमुख पहलों का शुभारंभ किया। उन्होंने 2022-23 के लिए पीएमईजीपी के लाभार्थियों को डिजिटल रूप से सहायता भी हस्तांतरित की, एमएसएमई आइडिया हैकथॉन, 2022 के परिणाम घोषित किए, राष्ट्रीय एमएसएमई पुरस्कार, 2022 वितरित किए और आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) फंड में 75 एमएसएमई को डिजिटल इक्विटी सर्टिफिकेट जारी किए। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री नारायण राणे और श्री भानु प्रताप सिंह वर्मा, देश भर के एमएसएमई हितधारक और विभिन्न देशों के राजनयिक उपस्थित थे।

 

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि एमएसएमई के उद्यम से ही आत्मनिर्भर भारत के अभियान को सिद्धि मिलेगी, भारत सशक्त होगा। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत जो भी ऊंचाइयां हासिल करेगा, वह एमएसएमई क्षेत्र की सफलता पर निर्भर करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का एक्सपोर्ट लगातार बढ़े, भारत के प्रॉडक्ट्स नए बाजारों में पहुंचें इसके लिए देश के एमएसएमई सेक्टर का सशक्त होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार, आपके इसी सामर्थ्य, इस सेक्टर की असीम संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले रही है, नई नीतियां बना रही है।" उन्होंने कहा कि आज शुरू की गई पहल और सरकार द्वारा किए गए अन्य उपाय एमएसएमई की क्वालिटी और प्रमोशन से जुड़े हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हम एमएसएमई कहते हैं तो तकनीकी भाषा में इसका विस्तार होता है माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज। लेकिन ये सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, भारत की विकास यात्रा का बहुत बड़ा आधार हैं। भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग एक तिहाई हिस्सेदारी एमएसएमई सेक्टर की है। एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त करने का मतलब है - पूरे समाज को सशक्त करना, सबको विकास के लाभ का भागीदार बनाना, सबको आगे बढ़ाना। इसलिए एमएसएमई सेक्टर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।

प्रधानमंत्री ने कहा, एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए पिछले आठ साल में हमारी सरकार ने बजट में 650 प्रतिशत से ज्यादा की बढोतरी की है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, “हमारे लिए एमएसएमई का मतलब है- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को अधिकतम समर्थन।"

यह बताते हुए कि 11 करोड़ से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि एमएसएमई रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है। महामारी के संकट के दौरान, हमने अपने छोटे उद्यमों को बचाने के साथ ही उन्हें नई ताकत देने का भी फैसला किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के तहत साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए की मदद एमएसएमई उद्यमों के लिए सुनिश्चित की। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इससे करीब 1.5 करोड़ रोजगार खत्म होने से बच गए। उन्होंने कहा कि आजादी के इस अमृत काल में, हमारे एमएसएमई भारत की आत्मनिर्भरता के विराट लक्ष्य की प्राप्ति का भी एक बहुत बड़ा माध्यम हैं।

श्री मोदी ने उस समय को याद किया जब पहले की सरकारों ने इस क्षेत्र के महत्व को नहीं पहचाना और छोटे उद्यमों को छोटा रखने वाली नीतियों को अपनाकर इस क्षेत्र को जकड़ लिया था। इससे निपटने के लिए एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई उद्योग आगे बढ़ना चाहता है, विस्तार करना चाहता है, तो सरकार न केवल उसे सहयोग दे रही है, बल्कि नीतियों में जरूरी बदलाव भी कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीईएम में, एमएसएमई को सरकार को सामान और सेवाएं प्रदान करने के लिए एक बहुत ही मजबूत मंच मिला है। उन्होंने प्रत्येक एमएसएमई को जीईएम पोर्टल पर पंजीकृत होने के लिए कहा। इसी तरह, 200 करोड़ से कम की परियोजनाओं के लिए वैश्विक निविदाओं पर रोक लगाने से भी एमएसएमई को मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार निर्यात बढ़ाने में एमएसएमई की मदद के लिए कदम उठा रही है। विदेश स्थित भारतीय मिशन को इस पर काम करने को कहा गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मिशनों का मूल्यांकन तीन मापदंडों यानी व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन पर किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम को 2014 के बाद नया रूप दिया गया था, क्योंकि यह 2008-2012 के बीच की अवधि में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम नहीं था। 2014 से अब तक इस कार्यक्रम के तहत 40 लाख से अधिक रोजगार का सृजन किया गया है। इस अवधि के दौरान इन उद्यमों को 14 हजार करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि इस योजना में आने वाले उत्पादों की लागत सीमा भी बढ़ा दी गई है।

समावेशी विकास की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रांसजेंडर उद्यमियों को उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब पहली बार खादी और ग्रामोद्योग का टर्नओवर 1 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचा है। “ये इसलिए संभव हुआ है क्योंकि गांवों में हमारे छोटे-छोटे उद्यमियों ने, हमारी बहनों ने बहुत परिश्रम किया है। बीते 8 वर्षों में खादी की बिक्री 4 गुणा बढ़ी है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि बिना गारंटी के ऋण प्राप्त करने में कठिनाई समाज के कमजोर वर्गों के लिए उद्यमशीलता के मार्ग पर चलने में एक बड़ी बाधा है। 2014 के बाद, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के माध्यम से उद्यमशीलता के दायरे को बढ़ाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि उद्यमशीलता को हर भारतीय के लिए सहज बनाने में मुद्रा योजना की बहुत बड़ी भूमिका है। बिना गांरटी के बैंक लोन की इस योजना ने महिला उद्यमियों, दलित, पिछड़े, आदिवासी उद्यमियों का एक बहुत बड़ा वर्ग देश में तैयार किया है। इस योजना के तहत अब तक करीब 19 लाख करोड़ रुपये कर्ज के रूप में दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि कर्जदारों में करीब 7 करोड़ ऐसे उद्यमी हैं, जिन्होंने पहली बार उद्यम शुरू किया है, जो नए उद्यमी बने हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत लोगों में से 18 प्रतिशत से अधिक महिला उद्यमी हैं। उन्होंने कहा, "उद्यमशीलता और आर्थिक समावेशन में यह समावेश सही मायने में सामाजिक न्याय है।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "आज, इस कार्यक्रम के माध्यम से, मैं एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े अपने सभी भाइयों और बहनों को आश्वस्त करता हूं कि सरकार ऐसी नीतियां बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जो आपकी आवश्यकताओं को पूरा करती हैं और आपके लिए सकारात्मक हो। एक उद्यमी भारत की हर उपलब्धि हमें एक आत्मनिर्भर भारत की ओर ले जाएगी। मुझे आप पर और आपकी क्षमता पर विश्वास है।

 

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि:

'उद्यमी भारत' एमएसएमई के सशक्तिकरण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरकार ने समय-समय पर एमएसएमई क्षेत्र को आवश्यक और समय पर सहायता प्रदान करने के लिए मुद्रा योजना, आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना, पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए कोष योजना आदि कई पहलों की शुरुआत की है, जिससे देश भर में करोड़ों लोगों को लाभ हुआ है।

लगभग 6000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 'एमएसएमई प्रदर्शन में सुधार और तेजी' (रैंप) योजना का उद्देश्य मौजूदा एमएसएमई योजनाओं के प्रभाव में वृद्धि के साथ राज्यों में एमएसएमई की कार्यान्वयन क्षमता और कवरेज को बढ़ाना है। यह नवाचार को बढ़ावा देने, विचार को प्रोत्साहित करने, गुणवत्तापूर्ण मानकों को विकसित करके नए व्यवसाय और उद्यमिता को बढ़ावा देने, प्रथाओं और प्रक्रियाओं में सुधार करने, बाजार पहुंच बढ़ाने तथा तकनीकी उपकरण और उद्योग 4.0 के जरिये आत्मनिर्भर भारत अभियान को पूरक समर्थन प्रदान करेगा एवं एमएसएमई उद्यामों को प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाएगा।

'पहली बार के एमएसएमई निर्यातकों का क्षमता निर्माण' (सीबीएफटीई) योजना का उद्देश्य एमएसएमई को वैश्विक बाजार के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के उत्पादों और सेवाओं की पेशकश करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारतीय एमएसएमई की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें अपनी निर्यात क्षमता का लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

'प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम' (पीएमईजीपी) की नई विशेषताओं में विनिर्माण क्षेत्र के लिए अधिकतम परियोजना लागत को बढ़ाकर 50 लाख रुपये (पहले के 25 लाख रुपये से) और सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपये (पहले के 10 लाख रुपये से) करने तथा अधिक सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए आकांक्षी जिलों और ट्रांसजेंडर समुदाय के आवेदकों को विशेष श्रेणी के आवेदकों में शामिल करना शामिल हैं। इसके साथ ही, आवेदकों/उद्यमियों को बैंकिंग, तकनीकी और विपणन विशेषज्ञों के साथ परामर्श के माध्यम से भी सहायता प्रदान की जा रही है।

एमएसएमई आइडिया हैकथॉन, 2022 का उद्देश्य व्यक्तियों की रचनात्मकता को बढ़ावा देना और समर्थन करना, एमएसएमई के बीच नवीनतम तकनीकों को अपनाना तथा नवाचार को बढ़ावा देना है। चयनित अवधारणा युक्त विचारों को 15 लाख रुपये प्रति स्वीकृत अवधारणा, तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

राष्ट्रीय एमएसएमई पुरस्कार 2022 भारत के मजबूत एमएसएमई क्षेत्र के विकास में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए एमएसएमई, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों, आकांक्षी जिलों और बैंकों के योगदान की मान्यता है।

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"डबल इंजन सरकार के दोहरे प्रयास से बिहार का विकास होना तय है"

बिहार के राज्यपाल श्रीमान राजेंद्र अर्लेकर जी, मुख्यमंत्री श्रीमान नीतीश कुमार जी, मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी गिरिराज सिंह जी, हरदीप सिंह पुरी जी, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा जी, सम्राट चौधरी जी, मंच पर विराजमान अन्य सभी महानुभाव और बेगुसराय से पधारे हुए उत्साही मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

जयमंगला गढ़ मंदिर और नौलखा मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं को मैं प्रणाम करता हूं। मैं आज विकसित भारत के लिए विकसित बिहार के निर्माण के संकल्प के साथ बेगुसराय आया हूं। ये मेरा सौभाग्य है कि इतनी विशाल संख्या में आप जनता-जनार्दन, आपके दर्शन करने का मुझे सौभाग्य मिला है।

साथियों,

बेगूसराय की ये धरती प्रतिभावान युवाओं की धरती है। इस धरती ने हमेशा देश के किसान और देश के मज़दूर, दोनों को मजबूत किया है। आज इस धरती का पुराना गौरव फिर लौट रहा है। आज यहां से बिहार सहित, पूरे देश के लिए 1 लाख 60 हज़ार करोड़ रुपए उससे भी अधिक के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है, डेढ़ लाख करोड़ से भी ज्यादा। पहले ऐसे कार्यक्रम दिल्ली के विज्ञान भवन में होते थे, लेकिन आज मोदी दिल्ली को बेगुसराय ले आया है। और इन योजनाओं में करीब-करीब 30 हज़ार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स सिर्फ और सिर्फ ये मेरे बिहार के हैं। एक ही कार्यक्रम में सरकार का इतना बड़ा निवेश ये दिखाता है कि भारत का सामर्थ्य कितना बढ़ रहा है। इससे बिहार के नौजवानों को यहीं पर नौकरी के, रोजगार के अनेकों नए अवसर बनेंगे। आज के ये प्रोजेक्ट, भारत को दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनाने का माध्यम बनेंगे। आप रूकिए भैया बहुत हो गया आपका प्यार मुझे मंजूर है, आप रूकिए, आप बैठिए, आप चेयर पर से नीचे आ जाइए, प्लीज, मेरी आपसे प्रार्थना है, आप बैठिए...हां। आप बैठ जाइए, वो कुर्सी पर बैठ जाइए आराम से, थक जाएंगे। आज की ये परियोजनाएं, बिहार में सुविधा और समृद्धि का रास्ता बनाएंगी। आज बिहार को नई ट्रेन सेवाएं मिली हैं। ऐसे ही काम है, जिसके कारण आज देश पूरे विश्वास से कह रहा है, बच्चा-बच्चा कह रहा है, गांव भी कह रहा है, शहर भी कह रहा है- अबकी बार...400 पार!, अबकी बार...400 पार!, अबकी बार...400 पार! NDA सरकार...400 पार!

साथियों,

2014 में जब आपने NDA को सेवा का अवसर दिया, तब मैं कहता था कि पूर्वी भारत का तेज़ विकास ये हमारी प्राथमिकता है। इतिहास गवाह रहा है, जब-जब बिहार और ये पूर्वी भारत, समृद्ध रहा है, तब-तब भारत भी सशक्त रहा है। जब बिहार में स्थितियां खराब हुईं, तो देश पर भी इसका बहुत बुरा असर बड़ा। इसलिए मैं बेगुसराय से पूरे बिहार की जनता को कहता हूं- बिहार विकसित होगा, तो देश भी विकसित होगा। बिहार के मेरे भाई-बहन, आप मुझे बहुत अच्छी तरह जानते हैं, और जब आपके बीच आया हूं तो मैं दोहराना चाहता हूं- ये वादा नहीं है- ये संकल्प है, ये मिशन है। आज जो ये प्रोजेक्ट बिहार को मिले हैं, देश को मिले हैं, वो इसी दिशा में बहुत बड़ा कदम हैं। इनमें से अधिकतर पेट्रोलियम से जुड़े हैं, फर्टिलाइज़र से जुड़े हैं, रेलवे से जुड़े हैं। ऊर्जा, उर्वरक और कनेक्टिविटी, यही तो विकास का आधार हैं। खेती हो या फिर उद्योग, सब कुछ इन्हीं पर निर्भर करता है। और जब इन पर तेजी से काम चलता है, तब स्वाभाविक है रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं, रोजगार भी मिलता है। आप याद कीजिए, बरौनी का जो खाद कारखाना बंद पड़ चुका था, मैंने उसे फिर से चालू करने की गारंटी दी थी। आपके आशीर्वाद से मोदी ने वो गारंटी पूरी कर दी। ये बिहार सहित पूरे देश के किसानों के लिए बहुत बड़ा काम हुआ है। पुरानी सरकारों की बेरुखी के कारण, बरौनी, सिंदरी, गोरखपुर, रामागुंडम, वहां जो कारखाने थे, वो बंद पड़े थे, मशीन सड़ रहे थे। आज ये सारे कारखाने, यूरिया में भारत की आत्मनिर्भरता की शान बन रहे हैं। इसलिए तो देश कहता है- मोदी की गारंटी यानि गारंटी पूरा होने की गारंटी। मोदी की गारंटी यानि गारंटी जे पूरा होय छय !

साथियों,

आज बरौनी रिफाइनरी की क्षमता के विस्तार का काम शुरु हो रहा है। इसके निर्माण के दौरान ही, हजारों श्रमिकों को महीनों तक लगातार रोजगार मिला। ये रिफाइनरी, बिहार में औद्योगिक विकास को नई ऊर्जा देगी और भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी। मुझे आपको ये बताते हुए खुशी है कि बीते 10 साल में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से जुड़े 65 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स बिहार को मिले हैं, जिनमें से अनेक पूरे भी हो चुके हैं। बिहार के कोने-कोने में जो गैस पाइपलाइन का नेटवर्क पहुंच रहा है, इससे बहनों को सस्ती गैस देने में मदद मिल रही है। इससे यहां उद्योग लगाना आसान हो रहा है।

साथियों,

आज हम यहां आत्मनिर्भर भारत से जुड़े एक और ऐतिहासिक पल के साक्षी बने हैं। कर्नाटक में केजी बेसिन के तेल कुओं से तेल का उत्पादन शुरु हो चुका है। इससे विदेशों से कच्चे तेल के आयात पर हमारी निर्भरता कम होगी।

साथियों,

राष्ट्रहित और जनहित के लिए समर्पित मजबूत सरकार ऐसे ही फैसले लेती है। जब परिवारहित और वोटबैंक से बंधी सरकारें होती हैं, तो वो क्या करती हैं, ये बिहार ने बहुत भुगता है। अगर 2005 से पहले के हालात होते तो बिहार में हज़ारों करोड़ की ऐसी परियोजनाओं के बारे में घोषणा करने से पहले सौ बार सोचना पड़ता। सड़क, बिजली, पानी, रेलवे की क्या स्थिति थी, ये मुझसे ज्यादा आप जानते हैं। 2014 से पहले के 10 वर्षों में रेलवे के नाम पर, रेल के संसाधनों को कैसे लूटा गया, ये पूरा बिहार जानता है। लेकिन आज देखिए, पूरी दुनिया में भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की चर्चा हो रही है। भारतीय रेल का तेज़ी से बिजलीकरण हो रहा है। हमारे रेलवे स्टेशन भी एयरपोर्ट की तरह सुविधाओँ वाले बन रहे हैं।

साथियों,

बिहार ने दशकों तक परिवारवाद का नुकसान देखा है, परिवारवाद का दंश सहा है। परिवारवाद और सामाजिक न्याय, ये एक दूसरे के घोर विरोधी हैं। परिवारवाद, विशेष रूप से नौजवानों का, प्रतिभा का, सबसे बड़ा दुश्मन है। यही बिहार है, जिसके पास भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर जी की एक समृद्ध विरासत है। नीतीश जी के नेतृत्व में NDA सरकार, यहां इसी विरासत को आगे बढ़ा रही है। वहीं दूसरी तरफ RJD-कांग्रेस की घोर परिवारवादी कुरीति है। RJD-कांग्रेस के लोग, अपने परिवारवाद और भ्रष्टाचार को उचित ठहराने के लिए, दलित, वंचित, पिछड़ों को ढाल बनाते हैं। ये सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि समाज के साथ विश्वासघात है। ये सामाजिक न्याय नय, समाज क साथ विश्वासघात छय। वरना क्या कारण है कि सिर्फ एक ही परिवार का सशक्तिकरण हुआ। और समाज के बाकी परिवार पीछे रह गए? किस तरह यहां एक परिवार के लिए, युवाओं को नौकरी के नाम पर उनकी जमीनों पर कब्जा किया गया, ये भी देश ने देखा है।

साथियों,

सच्चा सामाजिक न्याय सैचुरेशन से आता है। सच्चा सामाजिक न्याय, तुष्टिकरण से नहीं संतुष्टिकरण से आता है। मोदी ऐसे ही सामाजिक न्याय, ऐसे ही सेकुलरिज्म को मानता है। जब मुफ्त राशन हर लाभार्थी तक पहुंचता है, जब हर गरीब लाभार्थी को पक्का घर मिलता है, जब हर बहन को गैस, पानी का नल, घर में टॉयलेट मिलता है, जब गरीब से गरीब को भी अच्छा और मुफ्त इलाज मिलता है, जब हर किसान लाभार्थी के बैंक खाते में सम्मान निधि आती है, तब सैचुरेशन होता है। और यही सच्चा, सामाजिक न्याय है। बीते 10 वर्षों में मोदी की ये गारंटी, जिन-जिन परिवारों तक पहुंची हैं, उनमें से सबसे अधिक दलित, पिछड़े, अतिपिछड़े वही मेरे परिवार ही हैं।

साथियों,

हमारे लिए सामाजिक न्याय, नारीशक्ति को ताकत देने का है। बीते 10 सालों में 1 करोड़ बहनों को, मेरी माताएं-बहनें इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने आई हैं, उसका कारण है। 1 करोड़ बहनों को हम लखपति दीदी बना चुके हैं। मुझे खुशी है इसमें बिहार की भी लाखों बहनें हैं, जो अब लखपति दीदी बन चुकी हैं। और अब मोदी ने 3 करोड़ बहनों को, आंकड़ा सुनिए जरा याद रखना 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने की गारंटी दी है। हाल में हमने बिजली का बिल जीरो करने और बिजली से कमाई करने की भी योजना शुरु की है। पीएम सूर्यघर- मुफ्त बिजली योजना। इससे बिहार के भी अनेक परिवारों को फायदा होने वाला है। बिहार की NDA सरकार भी बिहार के युवा, किसान, कामगार, महिला, सबके लिए निरंतर काम कर रही है। डबल इंजन के डबल प्रयासों से बिहार, विकसित होकर रहेगा। आज इतना बड़ा विकास का उत्सव हम मना रहे हैं, और आप इतनी बड़ी तादाद में विकास के रास्ते को मजबूत कर रहे हैं, मैं आपका आभारी हूं। एक बार फिर आप सभी को विकास की, हजारों करोड़ की इन परियोजनाओं के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इतनी बड़ी तादाद में माताएं-बहनें आई हैं, उनको विशेष रूप से प्रणाम करता हूं। मेरे साथ बोलिए-

भारत माता की जय !

दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए-

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

बहुत-बहुत धन्यवाद।