प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को केरलम के कोच्चि में अखिल केरला धीवरा सभा के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्र निर्माण में मछुआरा समुदाय के योगदान की उन्होंने खूब सराहना की। उन्होंने संगठन के 50 वर्षों की यात्रा को सेवा, समर्पण और समाज के अधिकारों की रक्षा का प्रेरणादायक उदाहरण बताया। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर केरलम के सभी मछुआरा साथियों और संगठन के सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण और परिश्रम की प्रशंसा की।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हाल ही में केरलम की यात्रा के दौरान उनकी धीवरा सभा के प्रतिनिधियों से मुलाकात हुई थी और कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण आयोजन में शामिल होना उनके लिए प्रसन्नता का विषय है।

पीएम मोदी ने कहा कि प्रदेश के लोगों की लंबे समय से चली आ रही इच्छा के अनुरूप राज्य का नाम “केरल” से बदलकर “केरलम” करने के प्रस्ताव को केंद्र की बीजेपी-एनडीए सरकार ने मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से राज्य को मलयाली संस्कृति के अनुरूप उसकी सही पहचान मिली है और इसके लिए उन्होंने राज्य के लोगों को बधाई दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि धीवरा समुदाय प्रकृति और जीवन के संतुलन का अनूठा उदाहरण पेश करता है। उन्होंने कहा कि मछुआरा समुदाय समुद्र को केवल संसाधन नहीं बल्कि “अम्मा” के रूप में सम्मान देता है। समुद्र की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए समुदाय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत की सदियों पुरानी प्रकृति-सम्मत परंपरा को दिखाने वाला है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि धीवरा समुदाय की परंपरा भारत की प्राचीन विरासत से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि इस गौरवशाली परंपरा को संजोकर रखना समाज और देश दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय चेतना से जुड़े विषयों में धीवरा सभा ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। समुद्री सीमाओं की रक्षा में भी मछुआरा समुदाय पहली पंक्ति के प्रहरी के रूप में कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता को मजबूत करने में भी इस संगठन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

प्रधानमंत्री ने केरलम में आई विनाशकारी बाढ़ के समय मछुआरा समुदाय की सेवा भावना को याद करते हुए कहा कि उस कठिन समय में इस समाज के लोगों ने अपनी नावों को जोखिम में डालकर हजारों लोगों की जान बचाई थी और जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाई थी। उन्होंने कहा कि उन घटनाओं ने पूरे देश को मछुआरा समुदाय के साहस, सेवा और समर्पण से परिचित कराया और आज पूरा राष्ट्र उन्हें सम्मान के साथ याद करता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मछुआरा समुदाय देश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने की क्षमता रखता है, लेकिन दशकों तक इस वर्ग की उपेक्षा होती रही। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार इस समुदाय की क्षमता को पहचानते हुए उसे विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ब्लू इकॉनमी की विशाल संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मछुआरा समुदाय के विकास के लिए विशेष प्रयास कर रही है। इसी दिशा में अलग मंत्रालय का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केरलम को बड़ी मदद दी गई है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि मछुआरा सहकारी समितियों और फिशरीज फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है ताकि समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि मछुआरा समुदाय के युवा ब्लू इकॉनमी में नेतृत्व करें और निर्यात जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ें। इसी उद्देश्य से क्रेडिट गारंटी प्रणाली के माध्यम से युवाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक भी अब मछुआरा समुदाय की ताकत बन रही है। इसी सोच के तहत नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है, जिससे मछुआरे, नाव मालिक और निर्यातक एक ही मंच पर पंजीकरण कर सकते हैं और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकता है।
समुद्र में जाने वाले मछुआरों की सुरक्षा को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सैटेलाइट आधारित तकनीक के माध्यम से सुरक्षा को मजबूत किया गया है। उन्होंने बताया कि तटीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी कई पहल की जा रही हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आधुनिक तटीय मछली पकड़ने वाले गांव विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा कई हार्बरों को बेहतर बनाया जा रहा है। इसके साथ ही आइस प्लांट और कोल्ड स्टोरेज की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री अर्थव्यवस्था केवल पारंपरिक मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है। सी-वीड उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं उभर रही हैं। केरलम में सी-वीड उत्पादन क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं और युवाओं के लिए आय के नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार आधुनिक फिश फार्मिंग प्रणाली को बढ़ावा दे रही है और सागर मित्र तथा मत्स्य सेवा केंद्रों का नेटवर्क भी बनाया जा रहा है। साथ ही राज्य के तटों पर आर्टिफिशियल रीफ लगाने की मंजूरी दी गई है, जिससे समुद्र में मछलियों की संख्या बढ़ेगी और समुद्री संसाधनों का सतत विकास सुनिश्चित होगा।
प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से केरलम के प्रत्येक परिवार के जीवन में समृद्धि आएगी और राज्य की अर्थव्यवस्था नई ऊंचाई पर पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि यही भावना विकसित भारत और विकसित केरलम के निर्माण की आधारशिला है।
Akhila Kerala Dheevara Sabha is celebrating its 50th anniversary today.
— narendramodi_in (@narendramodi_in) March 11, 2026
For the past 50 years, this organisation has continuously worked to protect the rights of the fishermen community: PM @narendramodi
The long wait of my Malayali brothers and sisters has finally come to an end.
— narendramodi_in (@narendramodi_in) March 11, 2026
For many years, all of you wished that the name of Kerala should be changed to Keralam.
Our BJP-NDA government at the Centre has approved this proposal: PM @narendramodi
Akhila Kerala Dheevara Sabha has played a very important role in promoting social harmony: PM @narendramodi
— narendramodi_in (@narendramodi_in) March 11, 2026
The hard work and capabilities of our fishermen community have the potential to give new momentum to the country's economy: PM @narendramodi at Golden Jubilee celebrations of Akhila Kerala Dheevara Sabha
— narendramodi_in (@narendramodi_in) March 11, 2026





