"मोरबी में हुई त्रासदी के बाद लोगों की मौत से पूरा देश शोक में"
"आज बनासकांठा विकास के इतिहास में अपना अध्याय लिख रहा है"
"हर काम जो देश और गुजरात के गौरव को बढ़ाता है, डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता है"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के थराद, बनासकांठा में 8000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की कि गुजरात और पूरा देश कल मोरबी में हुई त्रासदी के बाद लोगों की मौत के शोक में डूबा हुआ है। दुःख की इस घड़ी में हम सभी पीड़ितों के परिवारों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उनकी टीम तहे दिल से राहत कार्य के लिए काम कर रही है। "कल रात भूपेंद्रभाई केवड़िया से सीधे मोरबी पहुंचे और राहत कार्यों की जिम्‍मेदारी ली। मैं उनके और राहत कार्य में शामिल अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हूं। एनडीआरएफ टीम और सशस्त्र सेना के कर्मी घटनास्‍थल पर पहुंच चुके हैं। मैं अंबाजी की धरती से गुजरात के लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि राहत कार्य में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।”

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि उनके मन में दो विचार थे कि वह इस आयोजन को रद्द करें या नहीं, लेकिन बनासकांठा में जलापूर्ति परियोजनाओं के महत्व और लोगों के प्यार को जानकर उन्होंने अपने धैर्य को बढ़ाया और 8000 करोड़ रुपये से अधिक की इन परियोजनाओं की शुरुआत करने के लिए आगे आए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन परियोजनाओं से बनासकांठा, पाटन और मेहसाणा सहित गुजरात के छह से अधिक जिलों में सिंचाई सुविधाओं में मदद मिलेगी। राज्य ने अतीत में जिन कठिनाइयों का सामना किया है, उन्हें याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गुजरात के लोगों का धैर्य है जो उन्हें उनके पास जो भी संसाधन मौजूद होते हैं उनकी मदद से किसी भी विपत्ति से निपटने की ताकत देता है। श्री मोदी ने कहा, "बनासकांठा इसका एक जीवंत और शानदार उदाहरण है"। उन्‍होंने आज उन विकास कार्यों पर प्रकाश डाला जिन्‍होंने जिले की शक्‍ल बदल दी है।

प्रधानमंत्री ने उस समय को याद किया जब उत्तरी गुजरात के सैकड़ों जिलों में फ्लोराइड से दूषित पानी था। उन्‍होंने कहा कि पानी से संबंधित मुद्दों का क्षेत्र के कृषि जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया, स्थिति ऐसी थी कि कोई भूस्‍वामी अपनी जमीन बेचना चाहता था तो उसे कोई खरीदार नहीं मिलता था। प्रधानमंत्री ने कहा, "जब से मैं भूमि का 'सेवक' बना हूं, हमारी सरकार ने इस क्षेत्र की समस्याओं की पहचान की और पूरे समर्पण एवं ईमानदारी के साथ उनके समाधान की दिशा में काम किया।" श्री मोदी ने कहा, “ हमने जल संरक्षण, निर्मित चेक डैम और तालाबों पर ध्यान केंद्रित किया”। प्रधानमंत्री ने सुजलम-सुफलाम योजना, वासमो योजना और पानी समितियों का उदाहरण दिया। उन्होंने महिलाओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की भी चर्चा की जिसके परिणामस्वरूप कच्छ सहित पूरा उत्तर गुजरात क्षेत्र ड्रिप सिंचाई और 'प्रति बूंद अधिक फसल' मॉडल के साथ फल-फूल रहा है, जबकि क्षेत्र में कृषि, बागवानी के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, "एक तरफ हमारे पास बनास डेयरी है जबकि दूसरी तरफ 100 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट है, हमने इस क्षेत्र के हर घर में नल का पानी पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया है।" श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि ड्रिप सिंचाई और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों ने बनासकांठा की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है और इसकी विश्वव्यापी पहचान भी बनी है। प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की, "आज बनासकांठा विकास के इतिहास में अपना अध्याय लिख रहा है।" उन्होंने बताया कि बनासकांठा में 4 लाख हेक्टेयर भूमि ड्रिप और माइक्रो सिंचाई के उपयोग के लिए समर्पित है जिसके परिणामस्वरूप जल स्तर और कम नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, "यह न केवल आपको लाभान्वित कर रहा है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन को भी सुरक्षित कर रहा है।" सुजलम-सुफलम योजना पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने क्षेत्र के लोगों की प्रशंसा की, जिन्होंने अपने प्रयास और समर्पण से सभी आलोचकों को चुप करा दिया और सुजलम-सुफलम योजना को एक शानदार सफलता दिलाई।

पिछले 19-20 वर्षों में किए गए कार्यों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि सुजलम-सुफलम योजना के तहत सैकड़ों किलोमीटर लंबी पुनर्भरण (रिचार्ज) नहरें बनाई गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि पाइपलाइन बिछाने और भूजल के बढ़ते स्तर के कारण गांव के तालाबों को नये सिरे से तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री ने आगे बताया कि बनने वाली दो पाइपलाइनों से 1 हजार से अधिक गांव के तालाबों को फायदा होगा। परियोजना की विस्‍तार से जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पाइपलाइन को मुक्तेश्वर बांध और कर्मावत तालाब तक बढ़ाया जा रहा है और ऊंचाई वाले स्थानों पर बिजली के पंपों की मदद से पानी उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि नर्मदा की मुख्य नहर से एक वितरण नहर का निर्माण किया जा रहा है जिससे थराद, वाव और सुईगांव तालुका के दर्जनों गांवों को लाभ होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, "पाटन और बनासकांठा के 6 तालुकों के अनेक गांवों को भी कसरा-दंतीवाड़ा पाइपलाइन से लाभ होगा। आने वाले समय में, नर्मदा नदी से पानी मुक्तेश्वर बांध और कर्मावत तालाब में आएगी। इससे बनासकांठा के वडगाम, पाटन के सिद्धपुर और मेहसाणा के खेरालु तालुका को फायदा होगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा, "किसी को पानी देना एक पवित्र कार्य माना जाता है", "जिसे पानी मिलता है वह अमृत का वाहक होता है और वह अमृत किसी को भी अजेय बनाता है। लोग उस व्‍यक्‍ति को आर्शीवाद देते हैं। पानी का हमारे जीवन में इतना महत्‍व है।" इस संबंध में किए गए विकास पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कृषि और पशुपालन में नई संभावनाओं का उदाहरण दिया। उन्होंने भूमि के उत्पादन में वृद्धि के कारण फलते-फूलते खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर भी प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कुछ महीने पहले आलू प्रसंस्करण संयंत्र की आधारशिला रखने का भी स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने कहा, सरकार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का दायरा बढ़ा रही है। किसान उत्पादक संघों और सखी मंडलों को इस क्षेत्र से जोड़ रहे हैं।” उन्होंने बताया, चाहे कोल्‍ड स्‍टोरेज संयंत्र या खाद्य प्रसंस्करण संयंत्र बनाना हो, सरकार इन संगठनों को करोड़ों रुपये की सहायता दे रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम इस परिकल्‍पना के साथ आगे बढ़ रहे हैं जहां किसान न केवल अनार के पेड़ का मालिक है बल्कि रस निर्माण इकाई में भी हिस्सेदारी रखता है। प्रधानमंत्री ने सखी मंडलों पर भी प्रकाश डाला जो आज फल और सब्जियों से लेकर अचार, मुरब्बा और चटनी तक कई उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने उद्योग को और विकसित करने के लिए सखी मंडलों को उपलब्ध बैंक ऋण की सीमा को भी दोगुना कर दिया है। उन्होंने कहा, “वन धन केन्‍द्र जनजातीय क्षेत्रों में खोले गए हैं ताकि जनजातीय महिलाओं के सखी मंडल वन उपज से बेहतर उत्पाद बना सकें।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है। उन्होंने किसानों के उर्वरकों के लिए अखिल भारतीय स्तर पर उर्वरकों के एक साझा ब्रांड नाम 'भारत' के शुभारंभ के बारे में भी बात की, जिसने किसानों के बीच भ्रम को खत्म कर दिया है। उन्‍होंने बताया कि किसानों को यूरिया की बोरी 260 रुपये में उपलब्ध है जबकि अंतरराष्ट्रीय कीमत 2000 रुपये से अधिक है। इसी प्रकार उन्‍होंने इस बात पर प्रसन्‍नता जाहिर की कि बनास डेयरी का विस्तार उत्‍तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्‍थान, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और झारखंड तक हो चुका है। गोवर्धन, जैव ईंधन जैसी योजनाएं पशुधन की उपयोगिता को बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।

प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा में बनासकांठा जैसे क्षेत्रों की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। दीसा में वायु सेना हवाई अड्डा और नडाबेट में 'सीमा-दर्शन' क्षेत्र में जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर रहे हैं। उन्होंने सीमावर्ती जिले में एनसीसी के विस्तार और वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज प्रोग्राम के तहत जिले और सीमावर्ती गांवों पर विशेष ध्‍यान देने की भी जानकारी दी।

कच्छ भूकंप पीड़ितों की स्मृति में स्मृति वन की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों और बनास डेयरी प्रबंधन से लोगों को स्मारक देखने के लिए प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया। उन्‍होंने कहा, "ऐसा हर काम, जो राष्ट्र के गौरव को बढ़ाता है, गुजरात का गौरव बढ़ाता है, डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता है। हमारी ताकत सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास में निहित है"।

इस अवसर पर सांसद श्री प्रभातभाई पटेल, श्री भरतसिंह धाबी और श्री दिनेशभाई अनवैद्य, गुजरात सरकार के मंत्री श्री रुशिकेश पटेल, श्री जीतूभाई चौधरी, श्री किरीटसिंह वाघेला और श्री गजेन्द्रसिंह परमार भी उपस्थित थे।

पृष्‍ठभूमि

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने बनासकांठा के थराद का दौरा किया और 8000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी। जलापूर्ति से संबंधित जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई उनमें 1560 करोड़ रुपये से अधिक की लागत की मुख्‍य नर्मदा नहर से कसारा से दंतेवाड़ा पाइपलाइन शामिल है। यह परियोजना पानी की आपूर्ति में वृद्धि करेगी और क्षेत्र के किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी। प्रधानमंत्री ने सुजलम सुफलाम नहर को मजबूत करने, मोढेरा-मोती दाऊ पाइपलाइन का मुक्तेश्वर बांध-कर्मावत झील तक विस्तार, और संतालपुर तालुका के 11 गांवों के लिए लिफ्ट सिंचाई योजना सहित अनेक परियोजनाओं की भी घोषणा की

पूरा भाषण पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Govt directs faster processing of city gas projects, hikes commercial LPG allocation to ease supply stress

Media Coverage

Govt directs faster processing of city gas projects, hikes commercial LPG allocation to ease supply stress
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
यह नया भारत है, जो अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ता: पीएम मोदी
March 23, 2026
Today, India is moving forward with a new confidence; Now India faces challenges head-on: PM
From the Gulf to the Global West and from the Global South to neighbouring countries, India is a trusted partner for all: PM
What gets measured gets improved and ultimately gets transformed: PM
This is the new India, It is leaving no stone unturned for development: PM

नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!