प्रधानमंत्री ने एम्स बिलासपुर राष्ट्र को समर्पित किया
प्रधानमंत्री ने बंदला में सरकारी हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज का उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री ने नालागढ़ में मेडिकल डिवाइस पार्क की आधारशिला रखी
प्रधानमंत्री ने 1690 करोड़ रुपये से अधिक लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग को चार लेन का बनाने की परियोजना की आधारशिला रखी
"मुझे निरंतर हिमाचल प्रदेश की विकास यात्रा का सहयात्री बनने का अवसर मिला है"
"हमारी सरकार निश्चित रूप से उस परियोजना का लोकार्पण करती है, जिसका हम शिलान्यास करते हैं"
"राष्ट्र रक्षा में हमेशा से हिमाचल का बड़ा योगदान रहा है, और अब बिलासपुर में नए एम्स के उद्घाटन के साथ, यह 'जीवन रक्षा' में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है"
"सभी के लिए जीवन की गरिमा सुनिश्चित करना हमारी सरकार की प्राथमिकता है"
"माताओं बहनों बेटियों का सुख, सुविधा, सम्मान, सुरक्षा और स्वास्थ्य डबल इंजन सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है"
"मेड इन इंडिया 5जी सेवाएं शुरू हो गई हैं, और जल्द ही हिमाचल में लाभ उपलब्ध होंगे"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्रीय राजमार्ग-105 पर पिंजौर से नालागढ़ तक राष्ट्रीय राजमार्ग को चार लेन का बनाने के लिए लगभग 31 किलोमीटर लंबी परियोजना की आधारशिला रखी, जिसकी लागत 1690 करोड़ रुपए है। प्रधानमंत्री ने एम्स, बिलासपुर का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री ने नालागढ़ में लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मेडिकल डिवाइस पार्क की आधारशिला भी रखी। प्रधानमंत्री ने इसके बाद बांदला में गवर्नमेंट हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज का उद्घाटन किया।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने विजयादशमी के पावन अवसर पर सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पावन पर्व सभी को हर बाधा को पार करते हुए संकल्पित 'पंच प्राण' के मार्ग पर चलने के लिए नई ऊर्जा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि विजयादशमी के अवसर पर हिमाचल में आने का अवसर मिलना भविष्य की हर जीत के लिए शुभ संकेत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बिलासपुर को स्वास्थ्य और शिक्षा का दोहरा उपहार मिला है। उन्होंने कुल्लू दशहरा में भाग लेने का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह राष्ट्र के कल्याण के लिए भगवान रघुनाथ जी से प्रार्थना करेंगे। प्रधानमंत्री ने पुराने समय को भी याद किया जब वे और उनके सहयोगी काम करते थे और इलाके में रहते थे। उन्होंने कहा, "मुझे निरंतर हिमाचल प्रदेश की विकास यात्रा का सहयात्री बनने का सौभाग्य मिला है।"

हिमाचल प्रदेश में पिछले वर्षों में हुए विकास के बारे में चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह लोगों का वोट है जो सभी विकास कार्यों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने राज्य और केंद्र में लोगों के विश्वास को श्रेय दिया जिसने सभी विकास कार्यों को गति दी है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से यही सोच थी कि शिक्षा, सड़क, उद्योग, अस्पताल जैसी सुविधाएं बड़े शहरों के लिए ही होती हैं। जहां तक पहाड़ी इलाकों की बात है तो वहां मूलभूत सुविधाएं भी सबसे आखिर में पहुंचीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे देश के विकास में भारी असंतुलन पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोग छोटी-छोटी बातों के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली जाने को मजबूर हैं। हालांकि, पिछले 8 वर्षों में, डबल इंजन सरकार ने वह सब बदल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हिमाचल प्रदेश आईआईटी, आईआईएम और आईआईआईटी जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालयों से लैस है। श्री मोदी ने कहा कि एम्स, बिलासपुर भारत में चिकित्सा शिक्षा के शीर्ष स्थान पर है, इसलिए यह बिलासपुर की महिमा में वृद्धि करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा, "पिछले आठ वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है

प्रधानमंत्री ने सरकार में कामकाज की बदली हुई शैली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब परियोजनाओं के लोकार्पण की स्पष्ट समय-सीमा के साथ शिलान्यास किया जाता है।

राष्ट्र निर्माण में हिमाचल प्रदेश के योगदान के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘राष्ट्र रक्षा’ में हमेशा से हिमाचल का बड़ा योगदान रहा है और अब बिलासपुर में नए एम्स के उद्घाटन के साथ, यह 'जीवन रक्षा' में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। प्रधानमंत्री ने महामारी की चुनौती के बावजूद समय पर इसे पूरा करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकार की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि यह उन तीन राज्यों में से एक है जिन्हें बल्क ड्रग्स पार्क के लिए चुना गया है। हिमाचल प्रदेश भी उन चार राज्यों में से एक है जिसे मेडिकल डिवाइसेस पार्क के लिए चुना गया है और नालागढ़ मेडिकल डिवाइस पार्क इसी का हिस्सा है। प्रधानमंत्री ने कहा, "यह वीरों की भूमि है और मैं इस भूमि का ऋणी हूं।"

चिकित्सा पर्यटन पहलू पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अनंत अवसर हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य की हवा, पर्यावरण और जड़ी-बूटी राज्य के लिए ढेर सारे फायदे के स्रोत हो सकते हैं।

गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए जीवन की सुगमता सुनिश्चित करने के लिए सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि दूरस्थ स्थानों पर अस्पताल उपलब्ध कराने और चिकित्सा बिलों के खर्च को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसलिए हम एम्स से लेकर जिला अस्पतालों और गांवों में वेलनेस सेंटरों में क्रिटिकल केयर तक निर्बाध कनेक्टिविटी पर काम कर रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना राज्य के अधिकांश परिवारों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान कर रही है। पूरे देश में 3 करोड़ से ज्यादा मरीज इसके लाभार्थी हैं, जिनमें हिमाचल से 1.5 लाख लाभार्थी हैं। सरकार ने पूरे देश में 45,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं, जिससे रोगियों के लगभग 90,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि माताओं बहनों बेटियों का सुख, सुविधा, सम्मान, सुरक्षा और स्वास्थ्य डबल इंजन सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सभी के लिए जीवन की गरिमा सुनिश्चित करना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने माताओं और बहनों के सशक्तिकरण के लिए शौचालय निर्माण, मुफ्त गैस कनेक्शन, सैनिटरी पैड वितरण योजना, मातृ वंदना योजना और हर घर जल अभियान जैसे उपायों के बारे में बताया।

इसी तरह, हिमाचल में कई परिवारों को वन रैंक वन पेंशन से बहुत लाभ हुआ है। उन्होंने शत-प्रतिशत कोरोना टीकाकरण पूरा करने वाला पहला राज्य होने के लिए राज्य की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हिमाचल अवसरों की भूमि है।" उन्होंने कहा कि राज्य में बिजली का उत्पादन होता है, उपजाऊ जमीन है और पर्यटन के कारण रोजगार के अनंत अवसर हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां बेहतर कनेक्टिविटी की कमी थी जिसने इन अवसरों के सामने सबसे बड़ी बाधा के रूप में काम किया। उन्होंने कहा, "2014 से हिमाचल प्रदेश में गांव-गांव तक सर्वोत्तम इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।" प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमाचल की सड़कों को चौड़ा करने का काम भी चारों तरफ चल रहा है। उन्होंने कहा, ''वर्तमान में हिमाचल में कनेक्टिविटी कार्यों पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिससे चंडीगढ़ और अंबाला से बिलासपुर, मंडी और मनाली जाने वाले यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमाचल के लोगों को घुमावदार सड़कों से मुक्त कराने के लिए सुरंगों का जाल भी बिछाया जा रहा है।

डिजिटल इंडिया में नवीनतम विकास के बारे में चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी के संबंध में हिमाचल में भी अभूतपूर्व काम किया गया है। उन्होंने कहा, "पिछले 8 वर्षों में, मेड इन इंडिया मोबाइल फोन भी सस्ते हो गए हैं और नेटवर्क को गांवों तक भी पहुंचा दिया है।" हिमाचल प्रदेश भी बेहतर 4जी कनेक्टिविटी के कारण डिजिटल लेनदेन में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, 'डिजिटल इंडिया से अगर किसी को सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है तो वह आप हिमाचल के लोग हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि इससे बिलों का भुगतान, बैंक से संबंधित कार्य, प्रवेश, आवेदन आदि में न्यूनतम समय लगता है।

देश में 5जी के विकास पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, "अब देश में पहली बार, मेड इन इंडिया 5जी सेवाएं भी शुरू हो गई हैं और इसका लाभ बहुत जल्द हिमाचल को उपलब्ध कराया जाएगा।" उन्होंने कहा कि भारत में ड्रोन नियमों में बदलाव के बाद परिवहन के लिए उनका उपयोग बहुत बढ़ जाएगा, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और पर्यटन क्षेत्रों को भी इससे बहुत लाभ होगा। उन्होंने ड्रोन नीति लाने वाला पहला राज्य होने के लिए हिमाचल प्रदेश की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा, “हम एक प्रकार के विकास के लिए प्रयासरत हैं जिससे प्रत्येक नागरिक की सुविधा बढ़े और प्रत्येक नागरिक समृद्धि से जुड़ा हो। यह एक विकसित भारत और एक विकसित हिमाचल प्रदेश के संकल्प को साबित करेगा।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग ठाकुर, सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा और सांसद तथा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री सुरेश कुमार कश्यप इस अवसर पर उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

हिमाचल प्रदेश में कई परियोजनाएं

राष्ट्रीय राजमार्ग-105 पर पिंजौर से नालागढ़ तक राष्ट्रीय राजमार्ग को चार लेन का बनाने के लिए लगभग 31 किलोमीटर लंबी परियोजना की आधारशिला रखी, जिसकी लागत 1690 करोड़ रुपए है। यह सड़क परियोजना अंबाला, चंडीगढ़, पंचकूला और सोलन/शिमला से बिलासपुर, मंडी और मनाली की ओर जाने वाले यातायात के लिए एक प्रमुख संपर्क लिंक है। चार लेन के इस राष्ट्रीय राजमार्ग का लगभग 18 किमी का हिस्सा हिमाचल प्रदेश के अंतर्गत आता है और शेष भाग हरियाणा में पड़ता है। यह राजमार्ग हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नालागढ़-बद्दी में बेहतर परिवहन सुविधा सुनिश्चित करेगा और क्षेत्र में औद्योगिक विकास को भी गति देगा। इससे राज्य में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

एम्स बिलासपुर

एम्स बिलासपुर के उद्घाटन के माध्यम से देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण और संकल्प को फिर से प्रदर्शित किया गया है। प्रधानमंत्री ने अक्टूबर 2017 में इसका शिलान्यास भी किया था। केंद्रीय क्षेत्र की योजना - प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत इसे स्थापित किया जा रहा है।

एम्स बिलासपुर, 1470 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित है। इस अत्याधुनिक अस्पताल में 18 स्पेशलिटी और 17 सुपर स्पेशियलिटी विभाग, 18 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, 64 आईसीयू बेड के साथ 750 बेड शामिल है। यह अस्पताल 247 एकड़ में फैला है। यह 24 घंटे आपातकालीन और डायलिसिस सुविधाओं, अल्ट्रासोनोग्राफी, सीटी स्कैन, एमआरआई आदि जैसी आधुनिक डायग्नोस्टिक मशीनों, अमृत फार्मेसी और जन औषधि केंद्र और 30 बिस्तरों वाले आयुष ब्लॉक से सुसज्जित है। अस्पताल ने हिमाचल प्रदेश के आदिवासी और दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए डिजिटल स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित किया है। साथ ही, काजा, सलूनी और केलांग जैसे दुर्गम आदिवासी और अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से अस्पताल द्वारा विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इस अस्पताल में हर साल एमबीबीएस कोर्स के लिए 100 छात्रों और नर्सिंग कोर्स के लिए 60 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा।

गवर्नमेंट हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज, बंदला

प्रधानमंत्री ने बंदला में गवर्नमेंट हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज का उद्घाटन किया। इस पर लगभग 140 करोड़ रुपये का व्यय होगा। इस कॉलेज से पनबिजली परियोजनाओं के लिए प्रशिक्षित कामगार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। हिमाचल प्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में से एक है। इससे युवाओं के कौशल को बढ़ाने और पनबिजली क्षेत्र में रोजगार के पर्याप्त अवसर प्रदान करने में मदद मिलेगी।

मेडिकल डिवाइस पार्क, नालागढ़

प्रधानमंत्री ने नालागढ़ में लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मेडिकल डिवाइस पार्क की आधारशिला भी रखी। इस मेडिकल डिवाइस पार्क में उद्योग स्थापित करने के लिए 800 करोड़ रुपये से अधिक के समझौता ज्ञापन पर पहले ही हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। इस परियोजना से क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

 

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