प्रधानमंत्री ने दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले ‘सुप्रभातम्’ कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह सुबह की ताजगी भरी शुरुआत करता है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में योग से लेकर भारतीय जीवन शैली के विभिन्न पहलुओं तक विविध विषयों को शामिल किया जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपराओं और मूल्यों पर आधारित यह कार्यक्रम ज्ञान, प्रेरणा और सकारात्मकता का एक अनूठा संगम है।

प्रधानमंत्री ने ‘सुप्रभातम्’ कार्यक्रम के एक विशेष खंड-संस्कृत सुभाषितम् की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि यह भारत की संस्कृति और विरासत के बारे में नए सिरे से जागरूकता फैलाने में मदद करता है।

प्रधानमंत्री ने आज के ‘सुभाषितम’ को दर्शकों के साथ साझा किया।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक अलग पोस्ट में कहा:

“दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला सुप्रभातम् कार्यक्रम सुबह-सुबह ताजगी भरा एहसास देता है। इसमें योग से लेकर भारतीय जीवन शैली तक अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा होती है। भारतीय परंपराओं और मूल्यों पर आधारित यह कार्यक्रम ज्ञान, प्रेरणा और सकारात्मकता का अद्भुत संगम है।

https://www.youtube.com/watch?v=vNPCnjgSBqU”

“सुप्रभातम् कार्यक्रम में एक विशेष हिस्से की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। यह है संस्कृत सुभाषित। इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति और विरासत को लेकर एक नई चेतना का संचार होता है। यह है आज का सुभाषित…”

 

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प्रधानमंत्री ने प्रकृति के प्रति आभार और सभी के कल्याण की कामना करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
June 08, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर सभी जीवों का कल्याण करना हमारी संस्कृति की मूल भावना रही है।

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि इसी व्यापक दृष्टि के साथ, भारत आज प्रगति और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा:

"प्रकृति के साथ संतुलन बिठाकर समस्त जीवों का कल्याण हो, यही हमारी संस्कृति की मूल भावना रही है। इसी व्यापक दृष्टि से आज भारतवर्ष प्रगति और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।

यावच्चतस्रः प्रदिशश्चक्षुर्यावत् समश्नुते।

तावत् समैत्विन्द्रियं मयि तद्धस्तिवर्चसम्॥"

हम ऐसी समृद्धि प्राप्त करें जो चारों दिशाओं में विस्तृत हो और दूरदर्शिता से परिपूर्ण हो - जहाँ प्रकृति के साथ पूर्ण सामंजस्य में रहते हुए, पर्यावरण संरक्षित हो और सभी जीवों का सतत कल्याण सुनिश्चित हो।