प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कोच्चि में देश की पहली वाटर मेट्रो की सराहना की है।

प्रधानमंत्री ने पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के एक ट्वीट को साझा करते हुए ट्वीट किया:

“इस शानदार उपलब्धि के लिए बहुत-बहुत बधाई! कनेक्टिविटी की दिशा में यह एक सराहनीय कदम है, जिससे ग्रीन ग्रोथ को भी काफी बल मिलेगा।”

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प्रधानमंत्री 13-14 मार्च को असम के दौरे पर रहेंगे
March 12, 2026
प्रधानमंत्री 47,800 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्‍यास करेंगे
प्रधानमंत्री शिलांग-सिलचर कॉरिडोर का भूमि पूजन करेंगे - जो उत्तर-पूर्वी भारत का पहला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड चार-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर है
प्रधानमंत्री असम माला 3.0 का भूमि पूजन करेंगे - जो सड़क इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर संबंधी एक प्रमुख पहल है
प्रधानमंत्री चाय बागान श्रमिकों को भूमि पट्टे वितरित करेंगे, जो चाय बागान समुदाय को गृहस्थी भूमि अधिकार प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है
ऊर्जा इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को मजबूत करने के लिए, प्रधानमंत्री कोपिली जलविद्युत परियोजना, नुमालीगढ़-सिलीगुड़ी पाइपलाइन क्षमता वृद्धि को समर्पित करेंगे और उत्तर-पूर्व गैस ग्रिड के चरण 1 का उद्घाटन करेंगे
प्रधानमंत्री कामाख्या रेलवे स्टेशन को कामाख्या मंदिर से जोड़ने वाली रोपवे परियोजना की आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री देश भर के 9.3 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम-किसान योजना की 22वीं किस्त जारी करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 13-14 मार्च 2026 को असम का दौरा करेंगे। इस दौरे के समय, प्रधानमंत्री कोकराझार, गुवाहाटी और सिलचर में 47,800 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे, आधारशिला रखेंगे, भूमि पूजन करेंगे और हरी झंडी दिखाएंगे।

13 मार्च को दोपहर लगभग 1:30 बजे, प्रधानमंत्री कोकराझार में 4,570 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का भूमि पूजन करेंगे, आधारशिला रखेंगे और शुभारंभ करेंगे। उसी दिन बाद में, शाम लगभग 5 बजे गुवाहाटी में, प्रधानमंत्री लगभग 19,680 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का भूमि पूजन करेंगे और उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

14 मार्च को सुबह लगभग 10:45 बजे, प्रधानमंत्री सिलचर में लगभग 23,550 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का भूमि पूजन करेंगे और राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

प्रधानमंत्री कोकराझार में

प्रधानमंत्री 3,200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली एक प्रमुख सड़क इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर परियोजना, असम माला 3.0 का भूमि पूजन करेंगे। इस योजना के तहत, अंतर-राज्यीय संपर्क को बेहतर बनाने और राष्ट्रीय राजमार्गों तथा ग्रामीण सड़कों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए असम भर में 900 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

प्रधानमंत्री बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (बीटीसी) क्षेत्र में लगभग 1,100 करोड़ रुपये के निवेश से निर्मित छह सड़क इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर परियोजनाओं का भूमि पूजन करेंगे, जिनमें चार फ्लाईओवर और दो पुल शामिल हैं। इन परियोजनाओं से कोकराझार जिले में यातायात जाम कम करने और संपर्क, पर्यटन, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण आवागमन में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री कोकराझार जिले के बाशबारी में आवधिक मरम्मत (पीओएच) कार्यशाला की आधारशिला रखेंगे। यह कार्यशाला रेलवे रखरखाव इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को मजबूत करेगी, परिचालन दक्षता बढ़ाएगी और क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

प्रधानमंत्री असम और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में संपर्क सुधारने के उद्देश्य से शुरू की गई तीन नई रेल सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाएंगे। इनमें कामाख्या-चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस शामिल है, जो उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी; गुवाहाटी-न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस, जो असम और पश्चिम बंगाल के बीच संपर्क को बेहतर बनाएगी; और नारंगी-अगरतला एक्सप्रेस, जो असम और त्रिपुरा के बीच संपर्क को सुधारते हुए यात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों के लिए अंतर-राज्यीय यात्रा को सुगम बनाएगी।

गुवाहाटी में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री चाय बागान श्रमिकों को भूमि पट्टे वितरित करेंगे, जो चाय बागान समुदाय को गृहस्थी भूमि अधिकार प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। सुरक्षित भूमि स्वामित्व से आवास सुरक्षा में सुधार होने, संस्थागत ऋण और कल्याणकारी योजनाओं तक बेहतर पहुंच संभव होने और दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक मजबूती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री पीएम-किसान योजना की 22वीं किस्त भी देश भर के 93 करोड़ से अधिक किसानों को जारी करेंगे, जिसके तहत पात्र किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में 2,000 रुपये प्राप्त होते हैं।

प्रधानमंत्री दीमा हसाओ और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिलों में स्थित कोपिली जलविद्युत परियोजना को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। 2,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगी, क्षेत्र में ग्रिड स्थिरता में सुधार करेगी और घरों, किसानों और उद्योगों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।

प्रधानमंत्री ऑयल इंडिया लिमिटेड की नुमालीगढ़-सिलीगुड़ी उत्पाद पाइपलाइन (एनएसपीएल) की क्षमता संवर्धन परियोजना राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह परियोजना अतिरिक्त पेट्रोलियम उत्पादों की निकासी को सक्षम बनाकर नुमालीगढ़ रिफाइनरी की क्षमता को 3 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष करने में सहायक होगी। प्रधानमंत्री उत्तर-पूर्व गैस ग्रिड के पहले चरण का भी उद्घाटन करेंगे, जो गुवाहाटी को नुमालीगढ़, गोहपुर और ईटानगर से जोड़ने वाली एक प्रमुख पाइपलाइन परियोजना है, जिसकी एक शाखा लाइन दीमापुर तक जाती है। प्रधानमंत्री हैलाकांडी जिले के पंचग्राम में नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) के रेल-चालित पीओएल टर्मिनल की आधारशिला भी रखेंगे। ये परियोजनाएं उत्तर-पूर्व में ऊर्जा इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेंगी और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाएंगी।

प्रधानमंत्री द्वारा प्रमुख रेल विद्युतीकरण परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा, जिनमें लगभग 420 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रंगिया-मुरकोंगसेलेक रेल लाइन (558 किमी) और लगभग 1,180 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चापरमुख-डिब्रूगढ़ रेल लाइन (571 किमी) के साथ-साथ लगभग 650 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बदरपुर-सिलचर और बदरपुर-चुराईबारी रेल लाइनें शामिल हैं। इन परियोजनाओं से ब्रह्मपुत्र और बराक घाटी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में सुधार के साथ-साथ ट्रेनों का परिचालन तेज, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल हो सकेगा।

प्रधानमंत्री फुरकटिंग-तिनसुकिया रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना (194 किमी) की आधारशिला भी रखेंगे, जिसकी लागत 3,600 करोड़ रुपये से अधिक है। इससे लाइन की क्षमता बढ़ेगी और अतिरिक्त यात्री और मालगाड़ियों का परिचालन संभव हो सकेगा।

जलमार्ग क्षेत्र में, प्रधानमंत्री बिश्वनाथ जिले के बिश्वनाथ घाट और जोरहाट जिले के नेमाटी में क्रूज टर्मिनलों की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री डिब्रूगढ़ के बोगीबील में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (आरसीओई) का भूमि पूजन भी करेंगे, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक प्रमुख समुद्री प्रशिक्षण और अनुसंधान केंद्र के रूप में कार्य करेगा। प्रधानमंत्री पांडू जेटी को एनएच-27 से जोड़ने वाली एप्रोच रोड का भी उद्घाटन करेंगे।

प्रधानमंत्री कामाख्या रेलवे स्टेशन को कामाख्या मंदिर से जोड़ने वाली रोपवे परियोजना की आधारशिला रखेंगे। सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत उन्नत मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला तकनीक का उपयोग करते हुए योजनाबद्ध इस रोपवे की क्षमता प्रतिदिन लगभग 17,000 यात्रियों को ले जाने की होगी। यह परियोजना तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा में लगने वाले समय को कम करेगी और एक आरामदायक, पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प प्रदान करेगी, साथ ही शहर की सड़कों पर भीड़भाड़ कम करने में भी मदद करेगी।

प्रधानमंत्री गुवाहाटी में पीएम एकता मॉल का भी उद्घाटन करेंगे। इस मॉल को असम और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए एक प्रमुख वाणिज्यिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इसमें 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना के तहत निर्मित वस्तुओं, जीआई-टैग प्राप्त उत्पादों, असम और अन्य राज्यों के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों के स्थायी स्टॉल होंगे। इस सुविधा में प्रमुख भारतीय ब्रांडों के शोरूम, फूड कोर्ट, आधुनिक सुविधाएं, पार्किंग और डिजिटल कियोस्क भी शामिल होंगे, जो स्थानीय कारीगरों को एक मंच प्रदान करेंगे और क्षेत्रीय संस्कृति और उद्योग को बढ़ावा देंगे।

प्रधानमंत्री सिलचर में

प्रधानमंत्री शिलांग-सिलचर कॉरिडोर का भूमि पूजन करेंगे, जो उत्तर-पूर्वी भारत का पहला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड चार-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर है। लगभग 22,860 करोड़ रुपये के निवेश से निर्मित 166 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर से मेघालय और असम के बीच कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा। इस परियोजना से गुवाहाटी और सिलचर के बीच की दूरी कम होगी और यात्रा का समय 8.5 घंटे से घटकर लगभग 5 घंटे हो जाएगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक विकास और सीमा पार व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री कैपिटल पॉइंट के पास ट्रंक रोड से सिलचर के रंगिरखारी पॉइंट तक एनएच-306 पर बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर (चरण-1) का भूमि पूजन भी करेंगे। इस परियोजना से सिलचर की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक पर ट्रैफिक कम होगा, मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर जैसे पड़ोसी राज्यों से संपर्क बेहतर होगा और बराक घाटी के आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।

इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री करीमगंज जिले के पथारकंडी में एक नए कृषि महाविद्यालय की आधारशिला रखेंगे। यह संस्थान असम में कृषि शिक्षा और अनुसंधान के इको-सिस्‍टम को मजबूत करेगा और बराक घाटी और आसपास के क्षेत्रों के छात्रों को उनके घर के पास ही उच्च गुणवत्ता वाली कृषि शिक्षा तक पहुंच प्रदान करेगा।