प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर विश्व संस्कृत दिवस पर राष्ट्र को शुभकामनाएं दीं हैं। संस्कृत को ज्ञान और अभिव्यक्ति का एक शाश्वत स्रोत बताते हुए प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में इसके स्थायी प्रभाव को रेखांकित किया।
श्री मोदी ने पूरे विश्व के विद्वानों, छात्रों और उत्साही लोगों के समर्पण की सराहना की जो संस्कृत सीखने, पढ़ाने और उसे लोकप्रिय बनाने में लगे हुए हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पिछले एक दशक में सरकार ने संस्कृत के शिक्षण और अनुसंधान को मज़बूत करने के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों की स्थापना, संस्कृत शिक्षण केंद्र खोलना, संस्कृत विद्वानों को अनुदान देना और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए ज्ञान भारतम मिशन शुरू करना जैसे कई कदम उठाए हैं ।
एक्स पर पोस्ट की एक श्रृंखला में, प्रधान मंत्री ने लिखा;
आज श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर हम विश्व संस्कृत दिवस मना रहे हैं। संस्कृत ज्ञान और अभिव्यक्ति का एक शाश्वत स्रोत है। इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में देखा जा सकता है। यह दिन दुनिया भर में संस्कृत सीखने और उसे लोकप्रिय बनाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के प्रयासों की सराहना करने का अवसर है।
Today, on Shravan Poornima, we mark World Sanskrit Day. Sanskrit is a timeless source of knowledge and expression. Its impact can be found across sectors. This day is an occasion to appreciate the effort of every person around the world who is learning and popularising Sanskrit.
— Narendra Modi (@narendramodi) August 9, 2025
पिछले एक दशक में, हमारी सरकार ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने के लिए कई प्रयास किए हैं। इनमें केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, संस्कृत शिक्षण केंद्र स्थापित करना, संस्कृत विद्वानों को अनुदान देना और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए ज्ञान भारतम मिशन शामिल हैं। इससे अनगिनत छात्रों और शोधकर्ताओं को लाभ हुआ है।
Over the last decade, our Government has undertaken many efforts to make Sanskrit popular. These include setting up Central Sanskrit Universities, Sanskrit Learning Centres, providing grants to Sanskrit scholars and the Gyan Bharatam Mission to digitise manuscripts. This has…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 9, 2025
आज हम विश्व संस्कृत दिवस पर श्रावण पूर्णिमा के अवसर मना रहे हैं। संस्कृत ज्ञान और अभिव्यक्ति का एक शाश्वत स्रोत है। इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में देखा जा सकता है। इस दिन समुद्र तट पर संस्कृत शिक्षा और उसे लोकप्रिय बनाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की मान्यता का सुअवसर है।
आज हम श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर विश्व संस्कृत दिवस मना रहे हैं। संस्कृत ज्ञान और अभिव्यक्ति का एक शाश्वत स्रोत है। इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में देखा जा सकता है। यह दिन दुनियाभर में संस्कृत सीखने और उसे लोकप्रिय बनाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के प्रयासों की सराहना करने का सुअवसर…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 9, 2025
“पिछले एक दशक से ज्यादा समय में हमारी सरकार ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने के लिए अनेक प्रयास किए हैं। इनमें केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, संस्कृत शिक्षण केंद्रों की स्थापना, संस्कृत विद्वानों को अनुदान प्रदान करना और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए ज्ञान भारतम मिशन शामिल हैं। इससे अनगिनत विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को लाभ हुआ है।”
पिछले एक दशक से ज्यादा समय में हमारी सरकार ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने के लिए अनेक प्रयास किए हैं। इनमें केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, संस्कृत शिक्षण केंद्रों की स्थापना, संस्कृत विद्वानों को अनुदान प्रदान करना और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए ज्ञान भारतम मिशन शामिल हैं।…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 9, 2025
“अद्य श्रावणपूर्णिमादिने वयं विश्वसंस्कृतदिवसम् आचरामः। संस्कृतभाषा ज्ञानस्य अभिव्यक्तेः च अनादिस्रोतः अस्ति। तस्याः प्रभावः विविधेषु क्षेत्रेषु द्रष्टुं शक्यते। समग्रे विश्वे प्रत्येकम् अपि जनः यः संस्कृतं पठितुं तस्य प्रचारं कर्तुं च प्रयतमानः अस्ति तस्य प्रशंसायै कश्चन अवसरः नाम एतत् दिनम्।”
अद्य श्रावणपूर्णिमादिने वयं विश्वसंस्कृतदिवसम् आचरामः। संस्कृतभाषा ज्ञानस्य अभिव्यक्तेः च अनादिस्रोतः अस्ति। तस्याः प्रभावः विविधेषु क्षेत्रेषु द्रष्टुं शक्यते। समग्रे विश्वे प्रत्येकम् अपि जनः यः संस्कृतं पठितुं तस्य प्रचारं कर्तुं च प्रयतमानः अस्ति तस्य प्रशंसायै कश्चन अवसरः…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 9, 2025
“गते दशके अस्माकं सर्वकारेण संस्कृतस्य प्रचाराय अनेके प्रयासाः कृताः सन्ति। तेषु त्रयाणां केन्द्रीयसंस्कृतविश्वविद्यालयानां स्थापनम्, संस्कृताध्ययनकेन्द्राणाम् आरम्भः, संस्कृतविद्वद्भ्यः अनुदानप्रदानम्, पाण्डुलिपीनां डिजिटल माध्यमे स्थापनाय ज्ञानभारतं मिशन् इत्यादीनि सन्ति। एतेन अगणिताः छात्राः शोधार्थिनः च लाभान्विताः जाताः।”
गते दशके अस्माकं सर्वकारेण संस्कृतस्य प्रचाराय अनेके प्रयासाः कृताः सन्ति। तेषु त्रयाणां केन्द्रीयसंस्कृतविश्वविद्यालयानां स्थापनम्, संस्कृताध्ययनकेन्द्राणाम् आरम्भः, संस्कृतविद्वद्भ्यः अनुदानप्रदानम्, पाण्डुलिपीनां डिजिटल माध्यमे स्थापनाय ज्ञानभारतं मिशन् इत्यादीनि सन्ति। एतेन…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 9, 2025


