प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक और उपलब्धि हासिल करने के लिए वैज्ञानिकों और

इंजीनियरों को बधाई दी है। गुजरात में 700 मेगावॉट का देश का पहला सबसे बड़ा स्‍वदेशी

काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्र यूनिट-3 ने पूरी क्षमता से अपना परिचालन शुरू कर दिया है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने एक पोस्ट में कहा:

“भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की।

गुजरात में 700 मेगावॉट का देश का पहला सबसे बड़ा स्वदेशी काकरापार परमाणु ऊर्जा

संयंत्र यूनिट-3 पूरी क्षमता के साथ परिचालन शुरू कर दिया है।

हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई”

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भारत-कोरिया गणराज्य का ऊर्जा संसाधन सुरक्षा पर संयुक्त वक्तव्य
April 20, 2026

1.भारत और कोरिया गणराज्य एक खुले, समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए साझा विजन रखने वाले विशेष रणनीतिक साझेदार हैं।

2. हमारी विशेष रणनीतिक साझेदारी का मुख्य आधार एक दीर्घकालिक और विश्वसनीय आर्थिक तथा ऊर्जा संसाधन साझेदारी है, जो खुले बाजारों और नियम-आधारित व्यापार के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है, और जो हमारी समृद्धि तथा आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करती है। इस समय, इन साझा सिद्धांतों की पुनः पुष्टि करना और वर्तमान परिस्थितियों का उद्योगों एवं बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना इस समय अत्यंत आवश्यक है।

3. हम भारत-कोरिया गणराज्य व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते(सीईपीए) तथा संबंधित द्विपक्षीय ढांचों के माध्यम से ऊर्जा संसाधन व्यापार और निवेश सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। भारत, कोरिया गणराज्य को नैफ्था तथा अन्य पेट्रोलियम फीडस्टॉक का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, जबकि कोरिया गणराज्य भारत को पेट्रोलियम उत्पादों और लुब्रिकेंट बेस ऑयल का एक अग्रणी आपूर्तिकर्ता है।

4. हम ऊर्जा संसाधन आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने को प्रतिबद्ध हैं, जिसमें क्षेत्रीय सहयोग को बेहतर बनाना, ऊर्जा बदलाव की गति तेज करना तथा ऊर्जा संसाधनों के लिए खुले व्यापार व्यवस्थाओं का समर्थन करना शामिल है। हमने एक प्रमुख एलएनजी उपभोक्ता के रूप में बाजार की स्थिरता और पारदर्शिता बढ़ाने तथा खरीदारों के दृष्टिकोण को बेहतर रूप से दर्शाने के लिए आपसी सहयोग को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता को भी स्वीकार किया है।

5. हम ऊर्जा व्यापार को सुदृढ़ बनाने के अपने साझा प्रतिबद्धता को स्वीकार करते हैं। हम यह भी मानते हैं कि जहाज निर्माण सहित सुदृढ़ समुद्री बुनियादी ढांचा दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल ऊर्जा संसाधनों के परिवहन में सहायता प्रदान करने हेतु एक मजबूत और विविधीकृत जहाज निर्माण तंत्र के महत्व को स्वीकार करते हैं।

6. इस परिप्रेक्ष्य में, भारत और कोरिया गणराज्य निम्नलिखित प्रयास करते हैं:


-एक-दूसरे को ऊर्जा संसाधनों की स्थिर, सुरक्षित और विश्वसनीय आपूर्ति बनाए रखना, जिसमें दोनों देशों द्वारा नैफ्था और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में मुक्त व्यापार बनाए रखने के प्रयास, तथा संपूर्ण ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में सहयोग करना शामिल है।

- एलएनजी उपभोग करने वाले देशों के बीच अधिक घनिष्ठ सहयोग की संभावनाएं तलाशना।

- जहाज निर्माण क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करना- जिसमें भारत में शिपयार्ड की स्थापना, शिपयार्ड का आधुनिकीकरण, मानव संसाधन विकास तथा प्रौद्योगिकी शामिल है, लेकिन यह यहीं तक सीमित नहीं है।

7. भारत और कोरिया गणराज्य क्षेत्रीय साझेदारों से आह्वान करते हैं कि वे वैश्विक ऊर्जा संसाधन आपूर्ति श्रृंखलाओं को खुला बनाए रखने में सहयोग करें, जिससे हमारे लोगों की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।