प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज श्री शिवराज पाटिल के निधन पर शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री पाटिल एक अनुभवी नेता थे, जिन्होंने अपना जीवन जनसेवा के लिए समर्पित कर दिया था।

अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने श्री पाटिल के निधन पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि उन्होंने अपने लंबे और गौरवशाली सार्वजनिक जीवन में विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष और लोकसभा अध्यक्ष सहित विभिन्न पदों पर रहकर देश की सेवा की। श्री पाटिल समाज कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट निष्ठा के लिए जाने जाते थे।

प्रधानमंत्री ने श्री पाटिल के साथ उनके जीवनकाल में हुई अपनी कई भेटों को याद करते हुए कहा कि उनसे सबसे हाल की मुलाकात कुछ महीने पहले हुई थी जब श्री पाटिल उनके आवास पर आए थे।

एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में श्री मोदी ने लिखा:

श्री शिवराज पाटिल जी के निधन से मुझे गहरा दुःख हुआ है। वे एक अनुभवी नेता थे। उन्‍होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष और लोकसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वे समाज कल्याण में योगदान देने के लिए अत्यंत समर्पित थे। वर्षों से मेरा उनसे कई बार संपर्क रहा, जिनमें से सबसे हाल की भेंट कुछ महीने पहले मेरे आवास पर हुई थी। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। ऊँ शांति।

“श्री शिवराज पाटील जी यांच्या निधनाने दुःख झाले आहे. ते एक अनुभवी नेते होते. सार्वजनिक जीवनातील आपल्या प्रदीर्घ कारकिर्दीत त्यांनी आमदार, खासदार, केंद्रीय मंत्री, महाराष्ट्र विधानसभेचे तसेच लोकसभेचे अध्यक्ष म्हणून काम केले. समाजाच्या कल्याणासाठी योगदान देण्याच्या ध्येयाने ते झपाटले होते. ​गेल्या काही वर्षांत त्यांच्यासोबत माझे अनेक वेळा संवाद झाले, त्यापैकी सर्वात अलीकडील भेट काही महिन्यांपूर्वीच जेव्हा ते माझ्या निवासस्थानी आले होते तेव्हा झाली होती. या दुःखद प्रसंगी माझ्या संवेदना त्यांच्या कुटुंबीयांसोबत आहेत. ओम शांती.”

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प्रधानमंत्री ने ज्ञान के सार को आत्मसात करने पर केंद्रित संस्कृत सुभाषित साझा किया
January 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जो ज्ञान की विशालता के बीच केवल उसके सार पर ध्यान केंद्रित करने की शाश्वत बुद्धिमत्ता पर जोर देता है।

संस्कृत श्लोक-

अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥

यह सुभाषित इस भाव को व्यक्त करता है कि यद्यपि ज्ञान प्राप्ति के लिए असंख्य शास्त्र और विविध विद्याएँ उपलब्ध हैं, किंतु मानव जीवन समय की सीमाओं और अनेक बाधाओं से बंधा हुआ है। अतः, मनुष्य को उस हंस के समान बनना चाहिए जो दूध और पानी के मिश्रण में से केवल दूध को अलग करने की क्षमता रखता है अर्थात, हमें भी अनंत सूचनाओं के बीच से केवल उनके सार—उस परम सत्य को पहचानना और ग्रहण करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा:

“अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।

यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥”