कांग्रेस की सत्ता के दौरान मिले जख्मों को राजस्थान कभी भूल नहीं सकता।
2014 के बाद देश की सेवा में हमारी सरकार ने अभूतपूर्व फैसले लिए।
कांग्रेस के राज में हनुमान चालीसा सुनना भी गुनाह हो जाता है।
वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति का पर्दाफाश होने से कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम बौखलाया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर में मंगलवार को एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। जनसभा में मौजूद लोगों के भारी उत्साह को मजबूत भारत का आशीर्वाद बताते हुए उन्होंने कहा कि हर तरफ यही गूंज है- फिर एक बार मोदी सरकार। उन्होंने कहा, ‘चाहे 2014 हो, या 2019 हो, राजस्थान ने एकजुट होकर देश में भाजपा की ताकतवर सरकार बनाने के लिए अपना आशीर्वाद दिया था। आपने 25 की 25 सीटें भाजपा को जीत करके झोली भर दी थी। एकजुटता ही राजस्थान की सबसे बड़ी पूंजी है’।

पीएम मोदी ने कहा कि एक स्थिर और ईमानदार सरकार देश के विकास के लिए क्या कुछ कर सकती है, ये पिछले 10 वर्षों में सबने देखा है। उन्होंने कहा, ‘ये जो कुछ भी हुआ है ना, ये आपके एक वोट की ताकत की वजह से हुआ है। आपके कारण हुआ है। जो 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं ना वो जो पुण्य है , उस पुण्य के हकदार आप हैं। 2014 में आपने मोदी को दिल्ली में सेवा का अवसर दिया, तो देश ने वो फैसले लिए, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। लेकिन आप सोचिए, अगर कांग्रेस 2014 के बाद भी होती तो देश में क्या-क्या हुआ होता’।

कांग्रेस को घेरते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘राजस्थान के मेरे भाइयों और बहनों, आप लोग तो कुछ महीने पहले ही कांग्रेस के पंजे से मुक्त हुए हैं। कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में रहते हुए जो जख्म दिए, वो राजस्थान के लोग भूल नहीं सकते। माफिया-अपराधी राजस्थान छोड़कर भागने पर मजबूर हैं। पेपरलीक माफिया भी भजनलाल जी का कानूनी डंडा चलने के बाद ठंडा पड़ गया है। जो अपराधी धोखे में हैं, वो जान लें, भजनलाल सरकार की गाड़ी चलनी शुरू ही हुई है, अभी टॉप गिअर लगना बाकी है’।

पीएम मोदी ने कर्नाटक की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस के राज में हनुमान चालीसा सुनना भी गुनाह हो जाता है। कांग्रेस के राज में अपनी आस्था का पालन करना भी मुश्किल हो जाता है। और राजस्थान तो खुद इसका भुक्तभोगी रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमारे यहां सूरज की पहली किरण का स्वागत भी ‘राम राम सा’ से होता है। कांग्रेस ने तो ‘राम-राम सा’ कहने वाले राजस्थान में रामनवमी पर प्रतिबंध लगा दिया था। अब भाजपा सरकार आने के बाद किसी की हिम्मत नहीं है कि आपकी आस्था पर सवाल उठा दे। आप हनुमान चालीसा भी गाएंगे और रामनवमी भी मनाएंगे- ये भाजपा की गारंटी है’।

कांग्रेस की वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति का पर्दाफाश करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे कांग्रेस और उसके इकोसिस्टम को इतनी मिर्ची लगी है, इतनी मिर्ची लगी है कि हर तरह वो गालियां देने में टूट पड़े है। जो आए वो मोदी को गाली दे रहा है। उन्होंने कहा, ‘उसे बाबासाहेब के संविधान की भी परवाह नहीं है। और आपको पता होगा उन्होंने मेनिफेस्टो में तो लिखा है कि आपकी संपत्ति का सर्वे करेंगे। हमारी माताओं-बहनों के पास जो स्त्री-धन होता है, जो मंगलसूत्र होता है उसका सर्वे करेंगे। और फिर आपकी सारी संपत्ति जरूरत से ज्यादा जो भी होगा वो उनपर कब्जा करेगी और फिर लोगों को बांट देंगे। क्या स्त्री-धन पर हाथ लगा सकते हैं क्या? मंगलसूत्र पर हाथ लगा सकते हैं क्या? ये पंजे की ये ताकत’।

पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने संविधान और बाबासाहेब की परवाह नहीं की। मैं काँग्रेस को पूछना चाहता हूँ, क्या कांग्रेस ऐलान करेगी कि संविधान में दलितों-पिछड़ों के आरक्षण को कम करके, वो इसे मुसलमानों में नहीं बांटेगी? जरा देश की जनता से वादा करो। कांग्रेस की इन साजिशों के बीच, मोदी आज आपको खुले मंच से एक गारंटी दे रहा है। दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों का आरक्षण ना खत्म होगा, ये मोदी की गारंटी है, ना ही उसे धर्म के नाम पर बांटने दिया जाएगा’।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से भी एलर्जी रही है। ये बीजेपी है जो आज पूरे देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना रही है। इस क्षेत्र में इलाज की बेहतर सुविधाओं के लिए एक मेडिकल कॉलेज भी बनकर तैयार हो रहा है। उन्होंने राजस्थान के अपने परिवारजनों का आशीर्वाद मांगते हुए कहा कि हमें राष्ट्र का प्रति कर्तव्य और लोकतंत्र के प्रति अपने दायित्व को नहीं भूलना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आपके सपने मेरे अपने हैं। विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए मेरा भी हर पल हर-क्षण देश के लिए है। इसलिए 24/7 मैं 2047 के लिए काम कर रहा हूं और बीते 10 वर्ष में जो काम हुआ है, वो तो केवल एक ट्रेलर है। अगले 5 वर्षों में हमें देश और राजस्थान को बहुत आगे लेकर जाना है। उन्होंने कहा, ‘मेरा अनुरोध है, आप रिकॉर्ड संख्या में कमल के आगे का बटन दबाकर सभी बीजेपी उम्मीदवारों को संसद में भेजें’।

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!