केरल, 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को बड़ी तादाद में समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
भाजपा कभी भी किसी व्यक्ति को वोट-बैंक के चश्मे से नहीं देखती है और उसका लक्ष्य सभी को सशक्त बनाना है।
एक तरफ जहां बीजेपी सरकार केरल के लोगों को प्राथमिकता दे रही है वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस-कम्युनिस्ट गठबंधन का ट्रैक रिकॉर्ड परिवारवाद से घिरा हुआ है।
टूरिज्म और टैलेंट से बनी केरल की पहचान को,कांग्रेस-कम्युनिस्ट पार्टियां घोटालों और अराजकता से धूमिल करने में जुटी हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को केरल के तिरुवनंतपुरम में एक जनसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें केरल के लोगों का भरपुर स्नेह और आशीर्वाद मिला है और यहां आकर उन्हें बहुत खुशी हुई है। लोकसभा चुनाव की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, ‘केरल के लोगों में इस बार एक अलग ही उत्साह है। 2019 में केरल में बीजेपी को लेकर जो आशा जगी थी, वो 2024 में विश्वास में बदलती नजर आ रही है। 2019 में केरल ने बीजेपी-एनडीए को डबल डिजिट में वोट दिया था। वहीं 2024 में डबल डिजिट में सीट देने का मन बना रहा है।‘


केरल को भविष्य को जीने वाला और भविष्य को जानने वाला राज्य बताते हुए पीएम ने कहा, ‘2019 में देश नारा दे रहा था- फिर एक बार, मोदी सरकार! 2024 में हर कोई कह रहा है- अबकी बार, 400 पार’!

जनसभा में उत्साह से भरे बीजेपी कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा कि आने वाले लोकसभा चुनाव में विपक्ष अपनी हार मान चुका है। इसलिए वो बौखलाया हुआ है, उसके पास देश के विकास का रोडमैप नहीं है, उसके पास बस एक ही एजेंडा है- मोदी को गाली दो।

पीएम मोदी ने कहा कि केरल कभी नकारात्मक सोच रखने वालों के साथ नहीं खड़ा होगा। वो इस बार राष्ट्र निर्माण के लिए बीजेपी-एनडीए को आशीर्वाद देगा। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी यहां जिस तरह पदयात्रा निकाल रही है, जिस तरह सुरेंद्रन जी के साथ लोग सड़कों पर कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं, वो अपने आप में बहुत बड़ा संदेश है।‘

प्रधानमंत्री ने कहा कि केरल में बीजेपी को मिल रहा भारी जनसमर्थन 370 सीटों के लक्ष्य को आसान बनाएगा। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको ये विश्वास दिलाने आया हूं कि आपकी आकांक्षाओं और सपनों को साकार करने में मोदी कोई कमी नहीं छोड़ेगा। ये मोदी की गारंटी है।‘

वहीं चुनाव की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी ने केरल सहित किसी भी राज्य को कभी वोट के चश्मे से नहीं देखा है। देश के विकास का समान लाभ केरल को भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि केरल के लोग पूरी दुनिया में हैं। ऐसे में विश्व में भारत के बढ़ते हुआ कद ने उनमें एक नया आत्मविश्वास भरा है। पीएम ने कहा, ‘गल्फ के देशों में रहने वाले मेरे भाइयों बहनों ने अभी हाल ही में अनुभव किया है कि तब के भारत और आज के भारत में कितना फर्क है।‘

पीएम ने कहा कि 2024 का चुनाव नए भारत को और आगे लेकर जाने का चुनाव है। उन्होंने कहा कि देशभर में मोदी के तीसरे कार्यकाल को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है। इसमें भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बनेगा। हमारे तीसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचारी गलत काम करने से पहले 100 बार सोचेंगे। कई करोड़ भारतवासी गरीबी से बाहर आने वाले हैं। ये मोदी की गारंटी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केरल सरकार के लगातार असहयोग के बाद भी वंदे भारत से हाइवे प्रोजेक्ट्स तक, केरल में आज न्यू जेनरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर खूब काम किया जा रहा है। वहीं विकास को लेकर पीएम ने कांग्रेस और कम्यूनिस्टों पर जोरदार हमला करते हुए कहा कि उनके लिए अपने परिवार का हित देश के करोड़ों परिवारों से ऊपर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट केरल में तो एक दूसरे के दुश्मन हैं। लेकिन राज्य के बाहर एक दूसरे के बेस्ट फ्रेंड फॉर-एवर हैं। यानी, तिरुवनंतपुरम में कुछ और भाषा, दिल्ली में कुछ और बोली, इस धोखाधड़ी का जवाब केरल के लोगों को आने वाले चुनाव में देना है।

पीएम मोदी ने कहा कि केरल की पहचान टूरिज्म और टैलेंट से है। लेकिन कांग्रेस और कम्युनिस्टों ने इसे घोटालों और अराजकता की पहचान देने की कोशिश की है। इन दोनों का एक ही एजेंडा रहता है- कैसे लोगों को लड़वाकर वोट बटोरे जाएं। इन दोनों दलों ने राज्य में ऐसी स्थितियां बना दी हैं कि नई इंडस्ट्रीज यहां आने से डरने लगी हैं। इसी का असर है कि युवाओं के लिए नौकरी ढूंढ पाना मुश्किल होता जा रहा है।

कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी पर जोरदार प्रहार करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि केरल में बस सरकार बदलती है, हालात नहीं बदलते! लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में यहां के लोगों के पास हालात बदलने के साथ ही एक नई राजनीति के उदय का भी मौका है। पीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने ‘सबकी सरकार’ और ‘सबके लिए सरकार’ के मंत्र पर काम किया है। हम तीसरे कार्यकाल में भी इसी भावना के साथ काम करने वाले हैं।

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।