स्किल की ये ताकत जो है, इंसान को कहां से कहां पहुंचा सकती है, एक सफल व्यक्ति की बहुत बड़ी निशानी होती है कि वो अपनी स्किल बढ़ाने का कोई भी मौका जाने ना दे: प्रधानमंत्री मोदी
तेजी से बदलती हुई आज की दुनिया में अनेक सेक्टरों में लाखों स्किल्ड लोगों की जरूरत है, विशेषकर स्वास्थ्य सेवाओं में तो बहुत बड़ी संभावनाएं बन रही हैं: पीएम मोदी
अब कौशल विकास मंत्रालय ने दुनिया भर में बन रहे इन अवसरों की मैपिंग शुरू की है, कोशिश यही है कि भारत के युवा को अन्य देशों की जरूरतों के बारे में, उसके संबंध में भी सही और सटीक जानकारी मिल सके: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने विश्व युवा कौशल दिवस और ‘कौशल भारत’ मिशन की पांचवीं वर्षगांठ के अवसर पर आज आयोजित डिजिटल स्किल कॉन्क्लेव के लिए अपने संदेश में युवाओं से कौशल प्राप्‍त करने, नया कौशल सीखने और कौशल बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि तेजी से बदलते कारोबारी माहौल और बाजार स्थितियों में निरंतर प्रासंगिक बने रहना संभव हो सके। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देश के युवाओं को बधाई दी और कहा कि यह दुनिया सही मायनों में युवाओं की है क्‍योंकि उनमें सदैव नए कौशल हासिल करने की व्‍यापक क्षमता होती है।

 

उन्होंने कहा कि इसी दिन पांच साल पहले शुरू किए गए ‘स्किल इंडिया मिशन’ से कौशल प्राप्‍त करने, नया कौशल सीखने एवं कौशल बढ़ाने के लिए एक विशाल अवसंरचना का निर्माण हुआ है और इसके साथ ही स्थानीय एवं विश्व दोनों ही स्तरों पर रोजगार प्राप्त करने के अवसर बढ़ गए हैं। इसकी बदौलत देश भर में सैकड़ों पीएम कौशल केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं और आईटीआई परिवेश या व्‍यवस्‍था की क्षमता काफी बढ़ गई है। इन ठोस प्रयासों के परिणामस्‍वरूप पिछले पांच वर्षों में पांच करोड़ से भी अधिक युवाओं को ‘कुशल’ बना दिया गया है। कुशल कामगारों और नियोक्ताओं का खाका (मैपिंग) या विवरण तैयार करने के लिए हाल ही में लॉन्‍च किए गए पोर्टल का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे घर लौटे प्रवासी श्रमिकों सहित अन्‍य कामगारों को आसानी से नौकरी पाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही नियोक्ताओं को भी माउस को क्लिक करते ही कुशल कर्मचारियों से संपर्क करने में काफी आसानी होगी। उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि प्रवासी श्रमिकों के उत्‍कृष्‍ट कौशल से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बदलने में भी काफी मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कौशल को एक उत्‍कृष्‍ट उपहार के रूप में वर्णित किया जिसे हम खुद को दे सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि कौशल दरअसल अनंत, अद्वितीय, अनमोल खजाना और एक साधन है जिसके जरिए न केवल रोजगार पाने लायक बना जा सकता है, बल्कि यह संतोषजनक जीवन जीने में भी मददगार साबित होता है। उन्होंने कहा कि नए कौशल हासिल करने के स्‍वाभाविक आकर्षण से व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा उत्‍पन्‍न होती है और व्‍यापक प्रोत्साहन मिलता है। कौशल न केवल आजीविका का साधन है, बल्कि हमारी सामान्‍य दिनचर्या में स्‍वयं को जीवंत और ऊर्जावान महसूस करने का एक विशेष गुण या माध्‍यम भी है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘ज्ञान’ और ‘कौशल’ के बीच के अंतर को भी सामने रखा। उन्होंने एक उदाहरण के साथ इसे स्‍पष्‍ट किया – यह जानना कि साइकिल कैसे चलती है, यह ‘ज्ञान’ है, जबकि वास्तव में स्‍वयं साइकिल चला लेना ‘कौशल’ है। युवाओं के लिए दोनों के बीच के अंतर को समझना और उनके विभिन्न संदर्भों एवं निहितार्थों को महसूस करना अत्‍यंत आवश्‍यक है। प्रधानमंत्री ने बढ़ई के कामकाज का एक उदाहरण देते हुए स्किलिंग, रिस्किलिंग और अपस्किलिंग के बीच की बारीकियों को समझाया।

प्रधानमंत्री ने देश में बड़ी संख्‍या में उपलब्‍ध कुशल कामगारों का उपयोग करने के मामले में भारत की व्‍यापक क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का उदाहरण दिया जहां बड़ी संख्‍या में उपलब्‍ध कुशल भारतीय कामगार वैश्विक मांग को पूरा कर सकते हैं। उन्होंने इस मांग का खाका या विवरण तैयार करने और भारतीय मानकों को अन्य देशों के मानकों के अनुरूप करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसी तरह उन्होंने यह सुझाव दिया कि लंबी समुद्री परंपरा का अनुभव रखने वाले भारतीय युवा इस सेक्‍टर में बढ़ती मांग को ध्‍यान में रखते हुए विश्‍व भर में मर्चेंट नेवी में विशेषज्ञ नाविकों के रूप में अहम योगदान कर सकते हैं।

हर साल 15 जुलाई को मनाए जाने वाला ‘विश्व युवा कौशल दिवस’ इस वर्ष वर्चुअल मोड में मनाया गया। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री श्री आर.के. सिंह, और लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के ग्रुप चेयरमैन श्री ए.एम.नाइक ने भी इस सम्मेलन को संबोधित किया। लाखों की संख्‍या में प्रशिक्षुओं के व्यापक नेटवर्क सहित प्रणाली के सभी हितधारकों ने इस सम्‍मेलन में भाग लिया।

 

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प्रधानमंत्री की सेशेल्स की राजकीय यात्रा
June 28, 2026

27 से 29 जून 2026 तक सेशेल्स की अपनी राजकीय यात्रा के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने आज माहे द्वीप के विक्टोरिया स्थित स्टेट हाउस में आधिकारिक वार्ता की।

वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता विकास, डिजिटल परिवर्तन, सतत् विकास, सामाजिक अवसंरचना, अक्षय ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा तथा रक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में अवैध मत्स्यन, मादक पदार्थों की तस्करी और समुद्री डकैती जैसी चुनौतियों सहित क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों नेताओं ने भारत द्वारा घोषित विशेष आर्थिक पैकेज के अंतर्गत परियोजनाओं और पहलों के कार्यान्वयन में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की विकास प्राथमिकताओं के समर्थन तथा दोनों देशों के बीच घनिष्ठ और स्थायी साझेदारी को और गहरा करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

आधिकारिक वार्ता के उपरांत दोनों नेताओं ने भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक संयुक्त स्मारक लोगो जारी किया। इसके बाद क्षमता विकास, यूपीआई, स्वास्थ्य, कृषि, पोत परिवहन, अंतरिक्ष, प्रत्यर्पण तथा ऋण सहायता (लाइन ऑफ क्रेडिट) के क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों/समझौतों का आदान-प्रदान किया गया। ऋण सहायता (लाइन ऑफ क्रेडिट) की राशि 1,250 करोड़ रुपये है। समझौता ज्ञापनों/समझौतों की पूरी सूची यहाँ [link] देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त, सेशेल्स की विकास आवश्यकताओं के समर्थन में खाद्य सुरक्षा, अवसंरचना, स्वास्थ्य, व्यावसायिक प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा तथा रक्षा के क्षेत्रों में कई घोषणाएँ भी की गईं। इन घोषणाओं का विवरण यहाँ [link] देखा जा सकता है। सेशेल्स ने आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) में शामिल होने की भी घोषणा की।

दिन के बाद के हिस्‍से में प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा के विशेष अधिवेशन को संबोधित किया और ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। अपने संबोधन में उन्होंने भारत और सेशेल्स के बीच मित्रता के ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला तथा लोकतंत्र, विधि का शासन और जन-केंद्रित सुशासन जैसे साझा मूल्यों को रेखांकित किया, जो दोनों देशों का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि परस्पर विश्वास और घनिष्ठ सहयोग ने विकास सहयोग, समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वास्थ्य तथा क्षमता विकास जैसे क्षेत्रों में विस्तृत एक मजबूत साझेदारी को आकार दिया है। प्रधानमंत्री ने दोनों लोकतंत्रों के बीच संसदीय आदान-प्रदान को और बढ़ाने का भी आह्वान किया। प्रधानमंत्री का पूरा संबोधन यहाँ [link] देखा जा सकता है।

सेशेल्स के विपक्ष के नेता महामहिम श्री बर्नार्ड जॉर्जेस ने भी प्रधानमंत्री से भेंट की। दोनों नेताओं ने भारत-सेशेल्स द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की और दोनों देशों के बीच विशेष मित्रता को और सुदृढ़ बनाने के प्रति अपना दृढ़ समर्थन व्यक्त किया।