प्रधानमंत्री ने तीन राष्ट्रीय आयुष संस्थानों का उद्घाटन किया
"आयुर्वेद उपचार से भी आगे बढ़कर कल्याण को बढ़ावा देता है"
"पूरा विश्व स्वास्थ्य एवं कल्याण के एक वैश्विक उत्‍सव के रूप में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाता है"
"अब हम 'नेशनल आयुष रिसर्च कंसोर्टियम' बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं”
“आयुष उद्योग जो 8 साल पहले लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का था आज लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है”
"पारंपरिक चिकित्सा का क्षेत्र लगातार विस्तृत हो रहा है और हमें इसकी हर संभावना का पूरा लाभ उठाना है"
"'वन अर्थ, वन हेल्थ' का अर्थ है स्वास्थ्य का व्यापक दृष्टिकोण"


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 9वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के समापन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने तीन राष्ट्रीय आयुष संस्थानों का भी उद्घाटन किया। तीन संस्थान - अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), गोवा, राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान (एनआईयूएम), गाजियाबाद और राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान (एनआईएच), दिल्ली - अनुसंधान और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करेंगे और लोगों के लिए सस्ती आयुष सेवाओं की सुविधा भी प्रदान करेंगे। इन संस्थानों को लगभग 970 करोड़ रुपये की कुल लागत से विकसित किया गया है। इनके माध्यम से, अस्पताल के बिस्तरों की संख्या में लगभग 500 की वृद्धि होगी और छात्रों के प्रवेश में भी लगभग 400 की वृद्धि होगी।

सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने दुनिया भर से 9वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के सभी प्रतिनिधियों का गोवा की खूबसूरत भूमि पर स्वागत किया और विश्व आयुर्वेद कांग्रेस की सफलताओं के लिए सभी को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि विश्व आयुर्वेद कांग्रेस का आयोजन तब किया जा रहा है जब आजादी का अमृत काल की यात्रा चल रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत काल के प्रमुख संकल्पों में से एक भारत के वैज्ञानिक, ज्ञान और सांस्कृतिक अनुभव से वैश्विक कल्याण सुनिश्चित करना है और इसके लिए आयुर्वेद एक सशक्त और प्रभावी माध्यम है। भारत की जी-20 अध्यक्षता का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने जी-20 की थीम 'वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर' के बारे में बताया।

प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया के 30 से अधिक देशों ने आयुर्वेद को पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के रूप में मान्यता दी है। उन्होंने आयुर्वेद की व्यापक मान्यता सुनिश्चित करने के लिए और अधिक निरंतर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज उद्घाटन किए गए तीन राष्ट्रीय संस्थान आयुष स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को नई गति प्रदान करेंगे।

आयुर्वेद के दार्शनिक आधार के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, "आयुर्वेद उपचार से आगे बढ़कर कल्याण को बढ़ावा देता है।" उन्होंने कहा कि प्रवृत्तियों में विभिन्न परिवर्तनों के माध्यम से दुनिया जीवन के इस प्राचीन तरीके की ओर बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में आयुर्वेद के संबंध में काफी काम पहले से ही चल रहा है। उस समय को याद करते हुए जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने आयुर्वेद से संबंधित संस्थानों को बढ़ावा दिया था और गुजरात आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के उत्थान के लिए काम किया था। प्रधानमंत्री ने कहा, “इसके परिणामस्वरूप विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जामनगर में पारंपरिक दवाओं के लिए पहला और एकमात्र वैश्विक केंद्र स्थापित किया। वर्तमान सरकार के बारे में बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि अलग से आयुष मंत्रालय की स्थापना की गई जिससे आयुर्वेद के प्रति उत्साह और विश्वास बढ़ा। उन्होंने कहा कि एम्स की तर्ज पर अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान भी स्थापित किए जा रहे हैं। इस साल की शुरुआत में हुए ग्लोबल आयुष इनोवेशन एंड इन्वेस्टमेंट समिट को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में भारत के प्रयासों की भरपूर प्रशंसा करता है। उन्होंने यह भी बताया कि पूरा विश्व स्वास्थ्य और कल्याण के वैश्विक उत्‍सव के रूप में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को मना रहा है। श्री मोदी ने कहा, "एक समय था जब योग को हेय दृष्टि से देखा जाता था, लेकिन आज यह पूरी मानवता के लिए आशा और अपेक्षाओं का स्रोत बन गया है।

आज की दुनिया में आयुर्वेद के विलंबित वैश्विक समझौते, सुगमता और स्वीकृति पर दुख व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्नत विज्ञान केवल प्रमाण को पवित्र कंघी बनाने वाले की रेती मानता है। 'डेटा आधारित साक्ष्य' के प्रलेखन की दिशा में लगातार काम करने की आवश्यकता पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे पास आयुर्वेद का परिणाम भी था और प्रभाव भी था, लेकिन प्रमाण के मामले में पिछड़ रहे थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक वैज्ञानिक मापदंडों पर हर दावे को सत्यापित करने के लिए हमें चिकित्सा डेटा, अनुसंधान और पत्रिकाओं को एक साथ लाना होगा। इस संबंध में किए गए कार्यों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने साक्ष्य-आधारित अनुसंधान डेटा के लिए एक आयुष अनुसंधान पोर्टल के निर्माण के बारे में बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी तक लगभग 40 हजार अनुसंधान अध्ययनों के आंकड़े उपलब्ध हैं और कोरोना काल में हमारे पास आयुष से संबंधित लगभग 150 विशिष्ट अनुसंधान अध्ययन थे। उन्होंने कहा, "हम अब एक 'नेशनल आयुष रिसर्च कंसोर्सियम' बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताया कि आयुर्वेद जीवन जीने का तरीका भी है। एक मशीन या एक कंप्यूटर की उपमा देते हुए, जो अंतिम उपयोगकर्ता द्वारा ज्ञान की कमी के कारण खराब हो जाता है, प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद हमें सिखाता है कि शरीर और मन को एक साथ और एक-दूसरे के साथ स्वस्थ होना चाहिए। आयुर्वेद की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 'उचित नींद' आज चिकित्सा विज्ञान के लिए चर्चा का एक बड़ा विषय है, लेकिन भारत के आयुर्वेद विशेषज्ञों ने सदियों पहले इस पर विस्तार से लिखा था। अर्थव्यवस्था में भी आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने आयुर्वेद के क्षेत्र में नए अवसरों जैसे कि जड़ी-बूटियों की खेती, आयुष दवाओं के निर्माण और आपूर्ति और डिजिटल सेवाओं के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में आयुष स्टार्टअप्स के लिए काफी संभावनाएं हैं। आयुर्वेद के क्षेत्र में सभी के लिए अवसरों के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि लगभग 40,000 एमएसएमई आयुष क्षेत्र में सक्रिय हैं। आयुष उद्योग जो 8 साल पहले करीब 20 हजार करोड़ रुपये का था, आज करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा, "इसका मतलब है कि 7-8 वर्षों में 7 गुना वृद्धि हुई है।” उन्होंने इस क्षेत्र के वैश्विक विकास पर भी विस्तार से बताया और कहा कि हर्बल दवाओं और मसालों का मौजूदा वैश्विक बाजार लगभग 120 बिलियन डॉलर या 10 लाख करोड़ रुपये का है। प्रधानमंत्री ने कहा, “पारंपरिक चिकित्सा का यह क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है और हमें इसकी हर संभावना का पूरा फायदा उठाना है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए हमारे किसानों के लिए कृषि का एक नया क्षेत्र खुल रहा है, जिसमें उन्हें बेहतर मुनाफा भी मिलेगा। इसमें युवाओं के लिए हजारों-लाखों नए रोजगार सृजित होंगे।”

विशेष रूप से गोवा जैसे राज्य के लिए आयुर्वेद और योग पर्यटन में अवसरों के बारे में चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), गोवा उस दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत साबित हो सकता है।

प्रधानमंत्री ने वन अर्थ वन हेल्थ के भविष्य के दृष्टिकोण को समझाया, जिसे भारत ने दुनिया के सामने रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “इस ‘वन अर्थ, वन हेल्थ' का अर्थ है स्वास्थ्य का व्यापक दृष्टिकोण। चाहे वह समुद्री जीव हों, जंगली पशु हों, इंसान हों या पौधे, उनका स्वास्थ्य आपस में जुड़ा हुआ है। हमें उन्हें अलग-थलग देखने के बजाय समग्रता में देखना होगा। आयुर्वेद की यह समग्र दृष्टि भारत की परंपरा और जीवन शैली का हिस्सा रही है।” उन्होंने आयुर्वेद कांग्रेस का आह्वान किया कि वे इस बात पर चर्चा करें कि आयुष और आयुर्वेद को समग्रता में आगे ले जाने का रोडमैप कैसे बनाया जा सकता है

गोवा के राज्यपाल श्री पी एस श्रीधरन पिल्लई, गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, केंद्रीय आयुष मंत्री श्री सर्वानंद सोनोवाल, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री डॉ. मुंजापारा महेंद्रभाई, केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाईक और विज्ञान भारत के अध्यक्ष डॉ. शेखर मांडे इस अवसर पर उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

9वीं विश्व आयुर्वेद कांग्रेस (डब्ल्यूएसी) और आरोग्य एक्सपो में 50 से अधिक देशों, अंतर्राष्ट्रीय छात्रों और आयुर्वेद के विभिन्न अन्य हितधारकों का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक विदेशी प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी होगी। 9वीं डब्ल्यूएसी का मूल विषय "आयुर्वेद फॉर वन हेल्थ" है।

तीन संस्थान - अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), गोवा, राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान (एनआईयूएम), गाजियाबाद और राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान (एनआईएच), दिल्ली - अनुसंधान और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करेंगे और लोगों के लिए सस्ती आयुष सेवाओं की सुविधा भी प्रदान करेंगे। इन संस्थानों को लगभग 970 करोड़ रुपये की कुल लागत से विकसित किया गया है। इनके माध्यम से, अस्पताल के बिस्तरों की संख्या में लगभग 500 की वृद्धि होगी और छात्रों के प्रवेश में भी लगभग 400 की वृद्धि होगी।

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April 18, 2026

आज मैं एक बेहद महत्वपूर्ण विषय पर विशेष कर देश की माता बहनों और बेटियों से बात करने के लिए आया हूं! आज भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया। उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया है। हमारे भरसक प्रयास के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया! और मैं इसके लिए सभी माताओं-बहनों, उनसे मैं क्षमा प्रार्थी हूं।

साथियों,

हमारे लिए देश हित सर्वोपरि है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दल हित सब कुछ हो जाता है, दल हित, देश हित से बड़ा हो जाता है, तो नारी शक्ति को, देश हित को, इसका खामियाजा उठना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ है। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश के नारी शक्ति को उठाना पड़ा है।

साथियों,

कल देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी, देश की नारी शक्ति देख रही थी, मुझे भी यह देखकर बहुत दुख हुआ, कि जब ये नारी हित का प्रस्ताव गिरा, तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, सपा, जैसी परिवारवादी पार्टियां, खुशी से तालियां बजा रही थीं। महिलाओं से उनके अधिकार छिनकर ये लोग मेजें थपथपा रहे थे। उन्होंने जो किया वो केवल टेबल पर थाप नहीं थी, वो नारी के स्वाभिमान पर उसके आत्मसम्मान पर चोट थी और नारी सब भूल जाती है, अपना अपमान कभी नहीं भूलती, इसलिए संसद में कांग्रेस और उसके सहयोग के उन सबके व्यवहार की कसक हर नारी के मन में हमेशा रहेगी। देश की नारी जब भी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी, तो वो याद करेगी कि इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने, संसद में महिला आरक्षण को रोकने का जश्न मनाया था, खुशियां मनाई थीं। कल संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन का जिन दलों ने विरोध किया है, उनसे मैं दो टूक कहूंगा, ये लोग नारी शक्ति को फॉर ग्रांटेड ले रहे हैं, वो ये भूल रहे हैं, कि 21वीं सदी की नारी देश की हर घटना पर नजर रख रही है, वो उनकी की मंशा भाप रही है और सच्चाई भी भली भांति जान चुकी है। इसलिए महिला आरक्षण विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है, इसकी उन्हें सजा जरूर मिलेगी। इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है और जनता द्वारा इसकी सजा से भी वो बच नहीं पाएंगे।

साथियों,

सदन में नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से भी कुछ छिनने का नहीं था। नारी शक्ति वंदन संशोधन हर किसी को कुछ ना कुछ देने का था, देने के लिए संशोधन का था। ये 40 साल से लटके हुए नारी के हक को, 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से उसका हक देने का संशोधन था।

नारी शक्ति वंदन संशोधन 21वीं सदी के भारत की नारी को नए अवसर देने, नई उड़ान देने, उसके सामने से बाधाएं हटाने का महायज्ञन था। देश की 50% यानी आधी आबादी को उसका अधिकार देने का साफ नियत के साथ, ईमानदारी के साथ किया गया एक पवित्र प्रयास था। नारी को भारत की विकास यात्रा में सहयात्री बनाने और सबको जोड़ने का प्रयास था। नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है। नारी शक्ति वंदन संशोधन उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम, सभी राज्यों की हर राज्य की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था। ये संसद में सभी राज्यों की आवाज को अधिक शक्ति देने का प्रयास था। राज्य छोटा हो, राज्य बड़ा हो, राज्य की आबादी कम हो या राज्य की आबादी ज्यादा हो। सब की समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी। लेकिन इस ईमानदार प्रयास की कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने भ्रूण हत्या कर दी है, भ्रूण हत्या कर दी है। ये कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, टीएमके जैसे दल, इस भ्रूण हत्या के गुनहगार हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं, ये देश की नारी शक्ति के अपराधी हैं।

साथियों,

कांग्रेस महिला आरक्षण के विषय से ही नफरत करती है, उसने हमेशा से ही महिला आरक्षण को रोकने के लिए षड्यंत्र किए हैं। इस दिशा में पहले जितनी बार भी प्रयास हुए, हर बार कांग्रेस ने इसमें रो़ड़े अटकाए हैं। इस बार भी कांग्रेस और उसके साथियों ने महिला आरक्षण को रोकने के लिए एक के बाद एक नए झूठ का सहारा लिया। कभी संख्या को लेकर, कभी किसी और तरीके से, कांग्रेस और उसके साथियों ने देश को गुमराह करने की कोशिश की। ऐसा करके इन दलों ने भारत के नारी शक्ति के सामने अपना असली चेहरा सामने ला दिया है। अपना मुखौटा उतर दिया है।

साथियों,

मुझे व्यक्तिगत तौर पर आशा थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेंगी। कांग्रेस अपने पापों का प्रायश्चित करेगी, लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने का, महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का, अवसर खो दिया। कांग्रेस खुद देश के अधिकांश हिस्सों में अपना वजूद खो चुकी है। कांग्रेस परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों के पीठ पर सवार होकर खुद को जिंदा रखे हुए है। लेकिन कांग्रेस, ये भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़े, इसलिए कांग्रेस ने इस संशोधन का विरोध करवारकर अनेक क्षेत्रीय दलों के भविष्य को अंधकार में धकेलना का राजनीतिक षड्यंत्र किया है।

साथियों,

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और दूसरी पार्टियां, इतने वर्षों से हर बार वही बहाने, वही कुतर्क गढ़ते आए हैं, बनाते आए हैं, कोई ना कोई टेक्निकल पेंच फंसाकर, ये महिलाओं के अधिकारों पर डाका डालते रहे हैं। देश राजनीति का यह भद्दा पैटर्न बराबर समझ चुका है, और उसके पीछे की वजह भी जान चुका है।

भाइयों बहनों,

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध की एक बड़ी वजह है, इन परिवारवादी पार्टियों का डर। इन्हें डर है, अगर महिलाएं सशक्त हो गईं, तो इन परिवारवादी पार्टियों का नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा। ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके परिवार के बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें। आज पंचायतों में, लोकल बॉडीज में, जिन हजारों लाखों महिलाओं ने अपनी क्षमता को साबित किया है, जब आगे बढ़कर लोकसभा और विधानसभाओं में आना चाहती हैं, देश की सेवा करना चाहती हैं, परिवारवादियों के भीतर उनसे असुरक्षा की भावना बैठी हुई है। परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए कहीं ज्यादा सीटें होंगी, महिलाओं का कद बढ़ेगा, इसीलिए, इन लोगों ने नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध किया है। देश की नारीशक्ति कांग्रेस और उसके सहयोगियों को इस पाप के लिए कभी माफ नहीं करेगी।

मेरे प्रिय देशवासियों,

कांग्रेस और उसके साथी दल, डिलिमिटेशन पर लगातार, लगातार झूठ बोल रहे हैं। ये इस बहाने विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं। क्योंकि, बांटो और राज करो, काँग्रेस ये पॉलिटिक्स अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है। और, कांग्रेस आज भी उसी के सहारे चल रही है। कांग्रेस ने हमेशा देश में दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा दी है। इसलिए, ये झूठ फैलाया गया कि डिलिमिटेशन यानी परिसीमन से कुछ राज्यों को नुकसान होगा! जबकि, सरकार ने पहले दिन से स्पष्ट किया है, कि न किसी

राज्य की भागीदारी का अनुपात बदलेगा, न किसी का representation कम होगा। बल्कि,सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में ही बढ़ेंगी। फिर भी काँग्रेस,DMK,TMC और समाजवादी पार्टी जैसे दल इसे मानने को तैयार नहीं हुए।

साथियों,

ये संशोधन बिल सभी दलों, और सभी राज्यों के लिए एक मौका था, एक अवसर था। ये बिल पास होता तो तमिलनाडु, बंगाल, यूपी, केरलम, हर राज्य की सीटें बढ़तीं। लेकिन अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से इन दलों ने, अपने राज्य के लोगों को भी धोखा दे दिया। जैसे कि, DMK के पास मौका था कि वो और ज्यादा तमिल लोगों को सांसद, विधायक बना सकती थी, तमिलनाडु की आवाज़ और मजबूत कर सकती थी! लेकिन, उसने वो मौका खो दिया। TMC के पास भी बंगाल के लोगों को आगे बढ़ाने का मौका था। लेकिन TMC ने भी ये मौका गवां दिया। समाजवादी पार्टी के पास भी मौका था कि वो महिला विरोधी छवि होने के दाग को कुछ कम कर सके। लेकिन सपा भी इसमें चूक गई। समाजवादी पार्टी लोहिया जी को तो पहले ही भूल चुकी है। सपा ने नारीशक्ति वंदन संशोधन का विरोध करके, लोहिया जी के सारे सपनों को पैरों तले रौंद दिया है। सपा महिला आरक्षण विरोधी है, ये यूपी की और देश की महिलाएं कभी नहीं भूलेंगी।

साथियों,

महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके, कांग्रेस ने फिर एक बात सिद्ध कर दी है। कांग्रेस, एक एंटी रिफॉर्म पार्टी है। 21वीं सदी के विकसित भारत के लिए, जो भी निर्णय, जो भी रिफॉर्म्स ज़रूरी हैं, जो भी निर्णय देश ले रहा है, कांग्रेस उन सबका विरोध करती है, उसे खारिज कर देती है, उस काम के अंदर खलल डालती है। यही कांग्रेस का इतिहास है और यही कांग्रेस की नेगेटिव पॉलिटिक्स है।

साथियों,

ये वही कांग्रेस है, जिसने जनधन-आधार-मोबाइल की त्रिशक्ति का विरोध किया। कांग्रेस ने, डिजिटल पेमेंट्स का विरोध किया, कांग्रेस ने, GST का विरोध किया, कांग्रेस ने, सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का विरोध किया, कांग्रेस ने, ट्रिपल तलाक के विरुद्ध कानून का विरोध किया। कांग्रेस ने, आर्टिकल 370 हटाने का विरोध किया। हमारा संविधान, हमारे कोर्ट, जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड, समान नागरिक आचार संहिता को, यूसीसी को ज़रूरी बताते हैं, कांग्रेस उसका भी विरोध करती है। Reform का नाम सुनते ही कांग्रेस, विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है। ऐसा कोई भी काम जिससे देश मजबूत होता है, कांग्रेस उसमें बाधाएं खड़ी करने के लिए पूरी शक्ति लगा देती है। कांग्रेस, वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध करती है, कांग्रेस, देश से घुसपैठियों को भगाने का विरोध करती है, कांग्रेस, मतदाता सूची के शुद्धिकरण, SIR का विरोध करती है, कांग्रेस, वक्फ बोर्ड में Reform का विरोध करती है।

साथियों,

कांग्रेस ने, शरणार्थियों को सुरक्षा देने वाले CAA कानून तक का विरोध किया। इस पर झूठ बोलकर-अफवाहें फैलाकर देश में बवंडर खड़ा कर दिया। कांग्रेस, माओवादी-नक्सली हिंसा को समाप्त करने के देश के प्रयासों में भी रुकावटें डालती है। कांग्रेस का एक ही पैटर्न रहा है, कोई भी Reform आए तो झूठ बोलो, भ्रम फैलाओ। इतिहास साक्षी है, कांग्रेस ने हमेशा यही नेगेटिव रास्ता चुना है।

साथियों,

जो भी कार्य देश के लिए जरूरी फैसला होता है, कांग्रेस इसको कार्पेट के नीचे डाल देती है। कांग्रेस के इसी रवैये की वजह से भारत विकास की उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया, जिसका भारत हकदार है। आजादी के समय, उस दौर में हमारे साथ और भी कई देश आजाद हुए थे। ज्यादातर देश हमसे बहुत आगे निकल गए, और इसकी वजह थी, कि कांग्रेस हर Reform को रोककर बैठी रही। लटकाना-भटकाना- अटकाना यही कांग्रेस का सिद्धांत रहा है, यही कांग्रेस का वर्क कल्चर रहा है। कांग्रेस ने पड़ोसी देशों के साथ सीमा-विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने पाकिस्तान के साथ पानी के बंटवारे से जुड़े विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने ओबीसी आरक्षण के निर्णय को 40 साल तक लटकाए रखा। कांग्रेस ने सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन को 40 साल तक रोके रखा।

साथियों,

कांग्रेस के इस रवैये ने हमेशा देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है। कांग्रेस के हर विरोध, हर अनिर्णय, हर छल-प्रपंच का खामियाजा देश ने भुगता है, देश की पीढ़ियों ने भुगता है। आज देश के सामने जितनी भी बड़ी चुनौतियां हैं, वो कांग्रेस के इसी रवैये से उपजी हुई हैं। इसलिए, ये लड़ाई सिर्फ एक कानून की नहीं है, ये लड़ाई, कांग्रेस की उस एंटी-रिफॉर्म मानसिकता के साथ है, जिसमें सिर्फ नेगेटिविटी है, नकारात्मकता है। और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है, कि देश की सभी बहनें-बेटियां, कांग्रेस की इस मानसकिता को करारा जवाब देकर रहेगी।

साथियों,

कुछ लोग देश की महिलाओं के सपने टूटने को सरकार की नाकामी बता रहे हैं। लेकिन, ये विषय कामयाबी या नाकामयाबी क्रेडिट का था ही नहीं। मैंने संसद में भी कहा था, आधी आबादी को उनका हक मिल जाने दीजिये, मैं इसका क्रेडिट, विज्ञापन छपवाकर विपक्ष के सभी लोगों को दे दूँगा। लेकिन, महिलाओं को दक़ियानूसी सोच से देखने वाले फिर भी अपने झूठ पर अड़े रहे, कायम रहे!

साथियों,

नारीशक्ति को भागीदारी दिलाने की लड़ाई दशकों से चल रही है। वर्षों से मैं भी इसके लिए प्रयास करने वालों में से एक हूं। कितनी ही महिलाएं ये विषय मेरे सामने उठाती रही हैं। कितनी ही बहनों ने पत्र के द्वारा मुझे सारी बातें बताई हैं। मेरे देश की माताएं-बहनें-बेटियां, मैं जानता हूं, आज आप सब दुखी हैं। मैं भी आपके इस दुःख में दुःखी हूँ। आज भले ही, बिल पास कराने के लिए जरूरी 66 परसेंट वोट हमें नहीं मिला हो, लेकिन मैं जानता हूं, देश की 100 परसेंट नारीशक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है। मैं देश की हर नारी को विश्वास दिलाता हूं, हम महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाले हर रुकावट को खत्म करके रहेंगे, हटाकर के रहेंगे। हमारा हौसला भी बुलंद है, हमारी हिम्मत भी अटूट है और हमारा इरादा भी अडिग है। महिला आरक्षण का विरोध करने वाली पार्टियां, ये देश की नारी शक्ति को संसद और विधानसभाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने से कभी भी रोक नहीं पाएंगे, सिर्फ वक्त का इंतजार है। नारी शक्ति के सशक्तीकरण का बीजेपी-एनडीए का संकल्प अक्षुण्ण है। कल हमारे पास संख्याबल नहीं था, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम हार गए। हमारा आत्मबल अजेय है। हमारा प्रयास रुकेगा नहीं, हमारा प्रयास थमेगा नहीं। हमारे पास आगे अभी और मौके आएंगे, हमें आधी आबादी के सपनों के लिए, देश के भविष्य के लिए, इस संकल्प को पूरा करना ही है। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।