प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज जकार्ता में इंडोनेशिया की संसद को संबोधित किया। वह इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करने वाले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत इंडोनेशिया के राष्ट्रपति महामहिम श्री प्रबोवो सुबियांतो की गरिमामयी उपस्थिति तथा संसद की अध्यक्ष महामहिम सुश्री पुआन महारानी के स्नेहपूर्ण आमंत्रण और भारत-इंडोनेशिया साझेदारी को सुदृढ़ बनाने में उनके सार्थक योगदान के लिए धन्यवाद करते हुए की। उन्होंने भारत के 1.4 अरब नागरिकों की ओर से सांसदों को शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि लोकतंत्र की जननी भारत, इंडोनेशिया के साथ लोकतांत्रिक संबंधों को और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों देशों के बीच गहरे सभ्यतागत एवं समुद्री संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दो सहस्राब्दियों से भी अधिक समय से हिंद महासागर विचारों, व्यापार, संस्कृति और आस्था के आदान-प्रदान के माध्यम से भारत और इंडोनेशिया को जोड़ता रहा है। उन्होंने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' तथा 'भिन्नेका तुंग्गल इका' (विविधता में एकता) के साझा आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि यही मूल्य आज भी दोनों देशों की साझेदारी का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि साझा ऐतिहासिक यात्रा, समान चुनौतियाँ और दोनों देशों के लोगों की साझा आकांक्षाएँ भारत और इंडोनेशिया को स्वाभाविक तथा विश्वसनीय साझेदार बनाती हैं।

प्रधानमंत्री ने भारत की विकास यात्रा और विकसित भारत 2047 तथा गोल्डन इंडोनेशिया 2045 (इंडोनेशिया एमास 2045) के विज़न के बीच मौजूद सामंजस्य को रेखांकित करते हुए व्यापार, निवेश, संपर्क, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में गहन सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को सशक्त बनाने तथा स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए इंडोनेशिया के साथ मिलकर कार्य करने की भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों की भावना के अनुरूप प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय सहयोग के लिए गंगा-महाकम विज़न के आधार पर भारत-इंडोनेशिया संबंधों में एक नई शुरुआत का आह्वान किया। इस दृष्टिकोण के अंतर्गत उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपने सभ्यतागत संबंधों को और सुदृढ़ करना चाहिए, एक-दूसरे के साथ अपनी विकास यात्राओं को साझा करना चाहिए, सुरक्षा एवं रणनीतिक विश्वास को मजबूत करना चाहिए, समुद्री समृद्धि के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए तथा वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को और सशक्त बनाना चाहिए।

इस संबोधन में भारत और इंडोनेशिया के बीच स्थायी सभ्यतागत संबंधों तथा साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को रेखांकित किया गया और दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
India is a nation that follows the path of development, not expansionism. pic.twitter.com/M52IfCj4Fl
— PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026
For India and Indonesia, the sea has never represented distance. It has always been a bridge between our nations and remains central to our shared future. pic.twitter.com/8hU3umJ855
— PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026
India, Indonesia and the Indian Ocean... these names themselves reflect the deep ties that bind us. pic.twitter.com/Wvg4Ng1UjI
— PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026
When India and Indonesia stand together, they strengthen the world's faith that democracy creates opportunities, democracy builds trust and democracy shapes the future. pic.twitter.com/boZB8tqO2R
— PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026
The goodwill and trust that India and Indonesia share must create new opportunities for our citizens. pic.twitter.com/l2LCy9ihXC
— PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026
India firmly believes that reform of the UN Security Council can no longer be delayed. pic.twitter.com/OcReGxfkG1
— PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026
India is a strong advocate of a free, open and inclusive Indo-Pacific.
— PMO India (@PMOIndia) July 7, 2026
India believes in freedom of navigation in the Indo-Pacific. pic.twitter.com/IiopDi2UtC


