उन्होंने उच्च सदन में उपराष्ट्रपति का स्वागत किया
“मैं सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर सदन के सभी सदस्यों की ओर से सशस्त्र बलों को सलाम करता हूं”
“हमारे उपराष्ट्रपति एक किसान पुत्र हैं और उन्होंने एक सैनिक स्कूल में पढ़ाई की है, वह जवानों और किसानों के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं”
“अमृत काल की इस यात्रा में हमारे लोकतंत्र, हमारी संसद और हमारी संसदीय व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होगी”
“आपका जीवन इस बात का प्रमाण है कि कोई सिर्फ सुविधा-संपन्न साधनों से ही नहीं बल्कि अभ्यास और सिद्धियों से कुछ भी हासिल कर सकता है”
“मार्गदर्शन करना ही नेतृत्व की वास्तविक परिभाषा है और राज्यसभा के संदर्भ में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है”
“सदन में गंभीर लोकतांत्रिक चर्चा लोकतंत्र की जननी के रूप में हमारे गौरव को और मजबूती देगी”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत में राज्यसभा को संबोधित किया और उच्च सदन में उपराष्ट्रपति का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री ने संसद के सभी सदस्यों के साथ-साथ देश के सभी नागरिकों की ओर से भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति श्री जगदीप धनखड़ को बधाई देकर अपने संबोधन की शुरुआत की। देश के उपराष्ट्रपति के प्रतिष्ठित पद पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पद अपने आप में लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

राज्यसभा के सभापति को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस है और सदन के सभी सदस्यों की ओर से सशस्त्र बलों को सलामी दी। उपराष्ट्रपति के जन्मस्थान झुंझुनू का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाने वाले झुंझुनू के कई परिवारों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने उपराष्ट्रपति के जवानों एवं किसानों के साथ घनिष्ठ संबंध पर प्रकाश डाला और कहा, “हमारे उपराष्ट्रपति एक किसान पुत्र हैं और उन्होंने एक सैनिक स्कूल में पढ़ाई की है। इस प्रकार, वह जवानों और किसानों के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं।”

प्रधानमंत्री ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि संसद का सम्मानित उच्च सदन ऐसे समय में उपराष्ट्रपति का स्वागत कर रहा है जब भारत दो महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी बना है। श्री मोदी ने कहा कि भारत ने आजादी के अमृत काल में प्रवेश किया है और जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी और अध्यक्षता करने का प्रतिष्ठित अवसर भी प्राप्त किया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत आने वाले दिनों में नए भारत के लिए विकास के एक नए युग की शुरुआत करने के अलावा दुनिया की दिशा निर्धारित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा, “इस यात्रा में हमारे लोकतंत्र, हमारी संसद और हमारी संसदीय प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।"

इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कि आज राज्यसभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत हुई है, प्रधानमंत्री ने कहा कि उच्च सदन के कंधों पर निहित जिम्मेदारी आम आदमी की चिंताओं से जुड़ी है। उन्होंने कहा, “भारत इस काल के दौरान अपनी जिम्मेदारियों को समझता है और उसका पालन करता है।” प्रधानमंत्री ने यह भी इंगित किया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के रूप में भारत का प्रतिष्ठित जनजातीय समाज इस महत्वपूर्ण मोड़ पर देश का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने इस तथ्य पर भी प्रकाश डाला कि पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, जो एक बहुत ही हाशिए के समाज से उठे, देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचे।

आसन की ओर सम्मान से देखते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “आपका जीवन इस बात का प्रमाण है कि कोई भी सिर्फ सुविधा-संपन्न संसाधनों से ही नहीं बल्कि अभ्यास और सिद्धियों से कुछ भी हासिल कर सकता है।” तीन दशकों से अधिक समय तक एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में उपराष्ट्रपति के अनुभव पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने मजाक के स्वर में कहा कि आपको इस सदन में अदालत की याद नहीं आएगी क्योंकि राज्यसभा में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद हैं जो आपसे सुप्रीम कोर्ट में मिला करते थे। उन्होंने आगे कहा, “आपने विधायक से लेकर सांसद, केन्द्रीय मंत्री और राज्यपाल की भूमिका का भी निर्वाह किया है।” उन्होंने आगे कहा कि इन सभी भूमिकाओं के बीच साझा कारक देश के विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति आपकी आस्था है। प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति के चुनाव में उपराष्ट्रपति को मिले 75 प्रतिशत मत को भी याद किया, जो उनके प्रति सभी की आत्मीयता का प्रमाण है। प्रधानमंत्री ने कहा, “मार्गदर्शन करना ही नेतृत्व की वास्तविक परिभाषा है और यह राज्यसभा के संदर्भ में अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इस सदन पर अधिक परिष्कृत तरीके से लोकतांत्रिक निर्णयों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है।”

इस सदन की गरिमा को बनाए रखने और उसे बढ़ाने के लिए इसके सदस्यों पर निहित जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सदन देश की महान लोकतांत्रिक विरासत का वाहक रहा है और यही इसकी ताकत भी रही है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कई पूर्व प्रधानमंत्रियों ने एक समय राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया। प्रधानमंत्री ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि उपराष्ट्रपति के मार्गदर्शन में यह सदन अपनी विरासत और गरिमा को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, “सदन में गंभीर लोकतांत्रिक चर्चा लोकतंत्र की जननी के रूप में हमारे गौरव को और मजबूती देगी।”

अपने संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने पिछले सत्र को याद किया जहां पूर्व उपराष्ट्रपति एवं पूर्व सभापति के मुहावरे और उनकी तुकबंदियां सदस्यों के लिए खुशी एवं हंसी का स्रोत होती थीं। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा, “मुझे विश्वास है कि आपकी हाजिरजवाबी प्रकृति उस कमी को कभी महसूस नहीं होने देगी और आप सदन को उसका लाभ देते रहेंगे।”

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!