जहां भी संकट आया, हमने अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब हम ऑपरेशन गंगा चलाकर यूक्रेन से हजारों भारतीयों को वापस ला रहे हैं: पीएम मोदी
जिन लोगों का इतिहास रक्षा सौदों में कमीशन खाने का रहा हो, वो परिवारवादी देश को मजबूत नहीं कर सकते: बस्ती में पीएम मोदी
दशकों से इन 'परिवारवादियों' ने हमारी सेनाओं को दूसरे देशों पर निर्भर रहने दिया, भारत के डिफेंस सेक्टर को नष्ट कर दिया...लेकिन आज यूपी में एक डिफेंस कॉरिडोर स्थापित किया जा रहा है: पीएम मोदी
इस बार का चुनाव, घोर परिवारवादियों और घनघोर राष्ट्रभक्तों के बीच है: उत्तर प्रदेश के देवरिया में पीएम मोदी
योगी जी की सरकार का ही प्रयास है कि इस क्षेत्र में दिमागी बुखार काबू में आया है। ज्यादा से ज्यादा बच्चों का जीवन बच रहा है : देवरिया में पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को उत्तर प्रदेश के बस्ती और देवरिया में जनसभाओं  को संबोधित किया। बस्ती में उन्होंने अपना संबोधन चंद्रशेखर आजाद जी के बलिदान दिवस को याद करते हुए और बालाकोट एयरस्ट्राइक के तीन साल पूरे होने पर वायुसेना के पराक्रम की प्रशंसा से शुरू किया।

यूक्रेन से भारतीयों की वापसी पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “चुनौती भरे कालखंड में भारत ने हमेशा अपने एक-एक नागरिक के जीवन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। जहां भी संकट आया, हमने अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। ऑपरेशन गंगा चलाकर हम यूक्रेन से भी हजारों भारतीयों को वापस ला रहे हैं। ये समय भारत को ज्यादा से ज्यादा ताकतवर और आत्मनिर्भर बनाने का है। आत्मनिर्भर भारत अभियान, सिर्फ भाजपा सरकार का नहीं है, बल्कि एक-एक देशवासी की ज़रूरत है। देश आत्मनिर्भर होगा तो नौजवानों, महिलाओं, किसानों, दलितों, पिछड़ों, शोषितों सभी को लाभ होगा।”

यूपी के विकास की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ”उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ा डिफेंस कॉरिडोर बन रहा है। सरकार गन्ना किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए इथेनॉल प्लांट का नेटवर्क तैयार कर रही है। पिपराइच की डिस्टिलरी में गन्ने से सैकड़ों लीटर इथेनॉल हर रोज बनेगा। गांव के गोबर और शहरों के कचरे से बायोगैस बनाने के लिए, देश में सैकड़ों प्लांट बनाए जा रहे हैं। खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लिए हजारों-करोड़ रुपए का मिशन शुरू किया गया है। ताकि हर साल लाखों करोड़ रुपए विदेश जाने के बजाय हमारे किसानों की जेब में जाए। गन्ना किसानों को मुंडेरवा-पिपराइच चीनी मिल का तोहफा दिया गया है। एक जनपद, एक उत्पाद जैसी योजनाओं के माध्यम से बुनकरों, कारीगरों को भाजपा सरकार नया विश्वास दे रही है। इस साल के बजट में केंद्र सरकार ने एक स्टेशन, एक उत्पाद की घोषणा की है। इसके तहत बुनकरों, कारीगरों के सामान को बड़े मार्केट तक पहुंचाने के लिए रेलवे में विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।“

गरीब कल्याण को सरकार की पहली प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सरकार सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर चलते हुए हर गरीब को सशक्त कर रही है। सबसे पहले गरीब कल्याण की भावना से काम हो रहा है। जब मेडिकल कॉलेज और आईटीआई खुलते है, जब सिंचाई की दशकों पुरानी योजनाएं पूरी होती हैं और जब बिना किसी भेदभाव सरकार गरीब को पक्की छत देती है, तो ये सबका विकास ही है। जब गरीब को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जब सरकार मुफ्त राशन देती है, जीवन रक्षक टीका मुफ्त लगाती है, तो सबका कल्याण ही होता है। ।”

देवरिया में प्रधानमंत्री मोदी ने वहां की धरती के महान वीरों को नमन करने के साथ अपना संबोधन शुरू किया और कहा कि इस बार का चुनाव, घोर परिवारवादियों और घनघोर राष्ट्रभक्तों के बीच है। देवरिया और आसपास के इलाकों में दिमागी बुखार की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “योगी सरकार के प्रयास से ही इस क्षेत्र में दिमागी बुखार काबू में आया है और ज्यादा से ज्यादा बच्चों का जीवन बच रहा है। मुझे यूपी में 9 मेडिकल कालेजों का एक साथ लोकार्पण करने का मौका मिला, देवरिया का महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज भी इसमें शामिल है। पूरे उत्तर प्रदेश में 18 नए मेडिकल कालेज बनाए गए हैं और 20 पर तेजी से काम चल रहा है। गोरखपुर में बने एम्स से लोगों को दोगुनी राहत मिली है। वहीं सरकार की कोशिश है कि गरीबों के बच्चे भी अपनी भाषा में ही मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करें।”।

यूपी के विकास के लिए डबल इंजन सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, योगी जी की सरकार में नई चीनी मिलें खोली जा रही हैं, चीनी मिलों की आर्थिक हालत सुधारी जा रही है। गन्ना किसानों की आय बढ़े इसके लिए इथेनॉल ब्लेंडिंग का काम भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। पिछले 5 साल में करोड़ों लीटर इथेनॉल की खरीद से यूपी को 12 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक मिले हैं। किसानों को आसानी से गन्ने का भुगतान मिल रहा है। पिछले पांच साल में योगी जी की सरकार ने गन्ना किसानों का 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया है। साथ ही गोरखपुर का नया फर्टिलाइज प्लांट अब इस क्षेत्र का गौरव बढ़ा रहा है, इससे किसानों की दिक्कतें भी कम हुई हैं।”

यूपी में गरीबों की संपत्ति पर अवैध कब्जों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “सरकार अवैध कब्जे की बाढ़ रोकने का काम कर रही है। ड्रोन से गांव-गांव में मैपिंग कराकर घरौनी देने का काम तेजी से चल रहा है। जिसको प्रॉपर्टी का कार्ड मिल रहा है, उसके लिए बैंकों से मदद मिलना भी आसान हो रहा है। गरीबों के पास पक्का घर हो, घर में नल से जल हो, गैस हो, बिजली हो, शौचालय हो, घर तक पक्की सड़क हो, गरीब के जीवन को आसान बनाने वाली ऐसी अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं।”

अपने संबोधन के आखिर में प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से भारी तादाद में वोट देने की अपील करते हुए कहा कि लोगों का एक-एक वोट उनका जीवन आसान बनाएगा, उनका भविष्य सुरक्षित करेगा। इसलिए चुनाव में एक बार फिर भाजपा को जिताना है, अपना दल को जिताना है, निषाद पार्टी को जिताना है। लेकिन इसके लिए पहले मतदान, फिर जलपान के मंत्र को याद रखना है। 

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मंत्रिमंडल ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में चार की वृद्धि को मंजूरी दी, जिससे संख्या 33 से बढ़कर 37 हो गई
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।