प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वियना में प्रवासी भारतीयों द्वारा उनके सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। प्रधानमंत्री के आगमन पर प्रवासी भारतीय समुदाय ने उनका बड़े उत्साह और स्नेह के साथ स्वागत किया। ऑस्ट्रिया के संघीय श्रम और अर्थव्यवस्था मंत्री महामहिम श्री मार्टिन कोचर भी सामुदायिक सभा में सम्मिलित हुए।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने में भारतीय प्रवासियों के योगदान पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जब भारत और ऑस्ट्रिया दोनो मित्र राष्ट्र राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहे थे उस समय यहां की यात्रा ने इस अवसर को वास्तव में विशेष बना दिया। दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और बहुलवादी लोकाचार का स्मरण करते हुए उन्होंने हाल के चुनावों के विस्तार, पैमाने और सफलता के बारे में बात की, जहां भारतवासियों ने निरंतरता के लिए मतदान किया, जिससे उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए ऐतिहासिक जनादेश मिला।

प्रधानमंत्री ने पिछले 10 वर्षों में भारत की परिवर्तनकारी प्रगति के बारे में बात की और विश्वास व्यक्त किया कि भारत निकट भविष्य में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जो 2047 तक एक विकसित देश - विकसित भारत - बनने के मार्ग पर है। उन्होंने इस बारे में बात की कि कैसे हरित विकास और नवाचार में ऑस्ट्रियाई विशेषज्ञता भारत के साथ साझेदारी कर सकती है। जिससे इसकी उच्च विकास गति और विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ उठाया जा सकता है। उन्होंने भारत के "विश्वबंधु" होने और वैश्विक प्रगति और कल्याण में योगदान देने पर भी बल दिया। उन्होंने प्रवासी भारतीय समुदाय से आग्रह किया कि वे अपनी मातृभूमि के साथ अपने सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों को पोषित-पल्लवित करना जारी रखें, भले ही वे अपनी नई मातृभूमि में समृद्ध हों। इस संदर्भ में, उन्होंने भारतीय दर्शन, भाषाओं और विचारों में गहरी बौद्धिक रुचि का उल्लेख किया जो सदियों से ऑस्ट्रिया में मौजूद है।

ऑस्ट्रिया में लगभग 31000 भारतीय प्रवासी रहते हैं। भारतीय प्रवासियों में मुख्य रूप से स्वास्थ्य सेवा और अन्य क्षेत्रों तथा बहुपक्षीय संयुक्त राष्ट्र निकायों में काम करने वाले पेशेवर शामिल हैं। ऑस्ट्रिया में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लगभग 500 भारतीय छात्र रहते हैं।

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प्रधानमंत्री ने दृढ़ संकल्प, आत्मसंयम और बुद्धिमत्ता के गुणों पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
June 02, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका तात्‍पर्य है दृढ़ संकल्प और आत्म-संयम ही वह शक्तियां हैं जो कठिनतम मार्गों को भी सुगम बना देती हैं। श्री मोदी ने कहा कि आज हमारे युवा इसी दृढ़ संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट में लिखा:

"दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन राह को भी आसान बना देती है। आज हमारे युवा साथी इसी संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।

निश्चित्य यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः।

अबन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते॥"

जो व्यक्ति किसी कार्य को भली-भांति सोच-समझकर दृढ़ निश्‍चय के साथ आरंभ करता है और बीच में अधूरा नहीं छोड़ता, जो समय का सदुपयोग करता है तथा अपनी इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है। ऐसा व्‍यक्ति ही वास्‍तव में बुद्धिमान होता है।