भारत के युवाओं में 'can-do' की भावना उनकी स्थायी ताकत है। भारत के युवाओं ने ही भारत के प्रति दुनिया के नजरिए को अंधेरे की मांद से आशा के प्रकाशस्तंभ में तब्दील कर दिया है। युवाओं ने अपनी अपार क्षमता, विचार, प्रतिभा और कौशल के साथ नए भारत के निर्माण के लिए एक सामूहिक दृष्टिकोण पाया है, जो प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रतिपादित किया गया है।
जब से नरेन्द्र मोदी पब्लिक डोमेन में आए, वे हमारे समय के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बन गए। उन्होंने अपने शासन में जो क्वालिटी लाई, वे युवाओं की आकांक्षाओं को दर्शाते हैं। पीएम मोदी में उन्हें एक ऐसा नेता मिला है जो मेहनती, दूरदर्शी, जोखिम उठाने वाला, कम्यूनकेटिव और टीम प्लेयर है।
मेहनती प्रधानमंत्री
तथ्य यह है कि प्रधानमंत्री दिन में 16 घंटे से अधिक समय तक काम करते हैं और कोई छुट्टी नहीं लेते हैं, और यह युवाओं को आश्चर्यचकित नहीं करता है। बहुत से युवा उद्यमी, वैज्ञानिक, किसान, शिक्षाविद, कलाकार आदि जो अपने काम को जोश के साथ करते हैं, वे अपने काम के प्रति इसी तरह से समर्पित होने के लिए जाने जाते हैं। मेहनती लोग पीएम मोदी के इस गुण की सराहना करते हैं।
तेज डिलीवरी, बेहतर कार्यान्वयन
जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी अपने विजन को आगे रखते हैं और फिर उसे मिशन और उत्साह के साथ क्रियान्वित करते हैं, इससे शासन में प्रफेशनलिजम और जवाबदेही आती है। लाल किले में अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान उन्होंने गरीबों को बैंक खाते से जोड़ने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद जन-धन योजना के तहत 33 करोड़ से अधिक खाते खोले गए। उन्होंने हर स्कूल में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की घोषणा की। एक साल के भीतर सभी सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय की व्यवस्था कर दी गई। उन्होंने 1,000 दिनों के भीतर 18,000 से अधिक गांवों के विद्युतीकरण का वादा किया। समय सीमा से 12 दिन पहले लक्ष्य पूरा कर लिया गया। पीएम मोदी ने दिखा दिया है कि वादे पूरे किए जा सकते हैं अगर इरादा स्पष्ट हो, उद्देश्य अच्छी तरह से परिभाषित हो और लोगों की भागीदारी इम्प्लिमेन्टेशन प्रोसेस का हिस्सा हो। यही वह अप्रोच है जिसके साथ यंग इंडिया ऑपरेट होता है। इसलिए, वे मोदी सरकार को कुशल, प्रभावकारी और असर डालनेवाला मानते हैं।
मूल्यों के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री मोदी का एक अन्य ट्रेडमार्क ईमानदारी, अखंडता, राष्ट्रवाद और अंतिम छोड़ पर खड़े व्यक्ति के प्रति आदर के मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा है। सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचारियों को अब देश के कानून से डर लगता है और ईमानदार व्यक्ति अपना सिर ऊंचा करके चलता है। यह दोष मुक्त शासन का परिणाम है जिसे प्रधानमंत्री ने सुनिश्चित किया है।
गरीबों, वंचितों और मेधावी लोगों के लिए 'रेड-टेप' की संस्कृति को 'रेड-कारपेट' की संस्कृति से बदल दिया गया है। इसने उन युवाओं को बहुत बढ़ावा दिया है जो आइडियाज से भरे हुए हैं और किकस्टार्ट पाने के लिए संस्थागत प्रोत्साहन की तलाश कर रहे हैं।
खतरा मोल लेने वाला
सत्ता के घेरे (पॉवर सर्किल) से आउटसाइडर के रूप में प्रधानमंत्री मोदी उन सिस्टम पर निर्भर नहीं है जो देश की प्रगति या हितों में बाधा डालते हैं। उनके पास जोखिम उठाने की अद्भूत क्षमता है जिसकी भारत के युवा सराहना करते हैं। नोटबंदी की घोषणा करके भ्रष्टाचार के खिलाफ पीएम मोदी की निर्णायक लड़ाई हो या फिर सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए भारतीय आर्म्ड फोर्सेज पर उनका पूरा भरोसा और आतंकवादियों को उनकी भाषा में जवाब देने के लिए एयर स्ट्राइक ने लोगों को दिखाया है कि प्रधानमंत्री मोदी यथास्थिति को बदलने से नहीं डरते, भले ही यह काम करने के लंबे समय से चले आ रहे तरीकों या फिर चुनावी गणित के खिलाफ हो।
कम्युनिकेशन के मास्टर
प्रधानमंत्री मोदी के पांच साल के कार्यकाल ने पहले की सरकारों की तुलना में लोगों तक पहुंचने के पुराने तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, रेडियो, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और MyGov का इस्तेमाल करते हुए पीएम मोदी ने सरकार को लोगों तक पहुंचाया है। नरेन्द्र मोदी सरकार के कम्युनिकेशन मॉडल की सफलता का आकलन इसकी कुशल फीडबैक मैकेनिज्म, सुलभता और लोगों को शासन के सहभागी मॉडल में आकर्षित करने के लिए गुट (कोटरी) को तोड़ने की क्षमता के माध्यम से किया जा सकता है। नवीनतम डिजिटल इनोवेशन के अनुरूप तकनीकी प्रोत्साहन, काफी हद तक, सरकार और नागरिकों के बीच सूचना संतुलन बनाने में सक्षम है। युवा न्यू एज कम्युनिकेशन को अधिक आकर्षक और सुविधाजनक पाते हैं। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित हुई है।
टीम प्लेयर
प्रधानमंत्री मोदी एक टीम के प्लेयर हैं। उनके लिए हर एक देशवासी की राष्ट्र की प्रगति में भागीदारी मायने रखती है। उनका 'जनभागीदारी' मॉडल, जिसे 'स्वच्छ भारत अभियान' की सफलता में देखा जा सकता है, उसी भावना को दर्शाता है। वह अपना विजन लोगों के सामने रखते हैं और उन्हें अपना बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हर सरकारी विभाग, हर निजी या सार्वजनिक संगठन और हर नागरिक खुद को बड़े कार्य का हिस्सा महसूस करता है।
ये सभी गुण जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सर्वोच्च पद पर लाए हैं, युवाओं के साथ गहरा संबंध बनाने में सहायक रहे हैं। वे राष्ट्र की सेवा करने के लिए उत्साहित और प्रेरित महसूस करते हैं। उनमें एक विश्वास है कि उनके कार्यों में बदलाव लाने की शक्ति है। कोई आश्चर्य नहीं कि स्वच्छता से लेकर डिजिटल इंडिया तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विभिन्न प्लेटफार्मों पर किए गए हर आह्वान का युवाओं ने स्वागत किया और उत्साह और जोश के साथ भाग लिया।
पीढ़ियों तक, ग्रामीण भारत में सिर पर पानी के मटके ढोती महिलाओं का दृश्य रोज़मर्रा की बात थी। यह सिर्फ़ एक काम नहीं था, बल्कि एक ज़रूरत थी, जो उनके दैनिक जीवन का अहम हिस्सा थी। पानी अक्सर एक या दो मटकों में लाया जाता, जिसे पीने, खाना बनाने, सफ़ाई और कपड़े धोने इत्यादि के लिए बचा-बचाकर इस्तेमाल करना पड़ता था। यह दिनचर्या आराम, पढ़ाई या कमाई के काम के लिए बहुत कम समय छोड़ती थी, और इसका बोझ सबसे ज़्यादा महिलाओं पर पड़ता था।
2014 से पहले, पानी की कमी, जो भारत की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक थी; को न तो गंभीरता से लिया गया और न ही दूरदृष्टि के साथ हल किया गया। सुरक्षित पीने के पानी तक पहुँच बिखरी हुई थी, गाँव दूर-दराज़ के स्रोतों पर निर्भर थे, और पूरे देश में हर घर तक नल का पानी पहुँचाना असंभव-सा माना जाता था।
यह स्थिति 2019 में बदलनी शुरू हुई, जब भारत सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) शुरू किया। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक सक्रिय घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) पहुँचाना है। उस समय केवल 3.2 करोड़ ग्रामीण घरों में, जो कुल संख्या का महज़ 16.7% था, नल का पानी उपलब्ध था। बाकी लोग अब भी सामुदायिक स्रोतों पर निर्भर थे, जो अक्सर घर से काफी दूर होते थे।
जुलाई 2025 तक, हर घर जल कार्यक्रम के अंतर्गत प्रगति असाधारण रही है, 12.5 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को जोड़ा गया है, जिससे कुल संख्या 15.7 करोड़ से अधिक हो गई है। इस कार्यक्रम ने 200 जिलों और 2.6 लाख से अधिक गांवों में 100% नल जल कवरेज हासिल किया है, जिसमें 8 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश अब पूरी तरह से कवर किए गए हैं। लाखों लोगों के लिए, इसका मतलब न केवल घर पर पानी की पहुंच है, बल्कि समय की बचत, स्वास्थ्य में सुधार और सम्मान की बहाली है। 112 आकांक्षी जिलों में लगभग 80% नल जल कवरेज हासिल किया गया है, जो 8% से कम से उल्लेखनीय वृद्धि है। इसके अतिरिक्त, वामपंथी उग्रवाद जिलों के 59 लाख घरों में नल के कनेक्शन किए गए, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विकास हर कोने तक पहुंचे। महत्वपूर्ण प्रगति और आगे की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2025–26 में इस कार्यक्रम को 2028 तक बढ़ाने और बजट में वृद्धि की घोषणा की गई है।

2019 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किए गए जल जीवन मिशन की शुरुआत गुजरात से हुई है, जहाँ श्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री के रूप में सुजलाम सुफलाम पहल के माध्यम से इस शुष्क राज्य में पानी की कमी से निपटने के लिए काम किया था। इस प्रयास ने एक ऐसे मिशन की रूपरेखा तैयार की जिसका लक्ष्य भारत के हर ग्रामीण घर में नल का पानी पहुँचाना था।
हालाँकि पेयजल राज्य का विषय है, फिर भी भारत सरकार ने एक प्रतिबद्ध भागीदार की भूमिका निभाई है, तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए राज्यों को स्थानीय समाधानों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने का अधिकार दिया है। मिशन को पटरी पर बनाए रखने के लिए, एक मज़बूत निगरानी प्रणाली लक्ष्यीकरण के लिए आधार को जोड़ती है, परिसंपत्तियों को जियो-टैग करती है, तृतीय-पक्ष निरीक्षण करती है, और गाँव के जल प्रवाह पर नज़र रखने के लिए IoT उपकरणों का उपयोग करती है।
जल जीवन मिशन के उद्देश्य जितने पाइपों से संबंधित हैं, उतने ही लोगों से भी संबंधित हैं। वंचित और जल संकटग्रस्त क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करके, और स्थानीय समुदायों को योगदान या श्रमदान के माध्यम से स्वामित्व लेने के लिए प्रोत्साहित करके, इस मिशन का उद्देश्य सुरक्षित जल को सभी की ज़िम्मेदारी बनाना है।
इसका प्रभाव सुविधा से कहीं आगे तक जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि JJM के लक्ष्यों को प्राप्त करने से प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे से अधिक की बचत हो सकती है, यह समय अब शिक्षा, काम या परिवार पर खर्च किया जा सकता है। 9 करोड़ महिलाओं को अब बाहर से पानी लाने की ज़रूरत नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह भी अनुमान है कि सभी के लिए सुरक्षित जल, दस्त से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोक सकता है और स्वास्थ्य लागत में 8.2 लाख करोड़ रुपये की बचत कर सकता है। इसके अतिरिक्त, आईआईएम बैंगलोर और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, JJM ने अपने निर्माण के दौरान लगभग 3 करोड़ व्यक्ति-वर्ष का रोजगार सृजित किया है, और लगभग 25 लाख महिलाओं को फील्ड टेस्टिंग किट का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया है।

रसोई में एक माँ का साफ़ पानी से गिलास भरते समय मिलने वाला सुकून हो, या उस स्कूल का भरोसा जहाँ बच्चे बेफ़िक्र होकर पानी पी सकते हैं; जल जीवन मिशन, ग्रामीण भारत में जीवन जीने के मायने बदल रहा है।


