लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दो पुस्तकों का विमोचन किया, राष्ट्रपति को पहली प्रतियां सौंपीं
'मन की बात: ए सोशल रिवोल्यूशन ऑन रेडियो', पीएम मोदी का सामान्य नागरिकों के साथ जुड़ने के लिए रेडियो को एक माध्यम के रूप बताती है
'मार्चिंग विद अ बिलियन ड्रीम्स' पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन के तरीके पर केंद्रित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक प्रभावी वक्ता: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
‘मन की बात’ प्रधानमंत्री मोदी का जनता के साथ संवाद का एक सरल एवं प्रभावी मंच: उपराष्ट्रपति
मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उठाए गए मुद्दे अत्यंत प्रासंगिक: लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन
प्रधानमंत्री मोदी लोगों के साथ सीधा संवाद करने के लिए रेडियो का प्रभावी रूप से उपयोग करते हैं: अरुण जेटली

राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी को 'मन की बात: रेडियो पर एक सामाजिक क्रांति' तथा 'एक अरब लोगों के साथ-मध्य अवधि में नरेंद्र मोदी की सरकार का विश्लेषण'- दोनों पुस्तकों की प्रथम प्रति लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने भेंट की। श्रीमती सुमित्रा महाजन ने आज राष्ट्रपति भवन में उप-राष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी, केन्द्रीय वित्त एवं रक्षा मंत्री श्री अरूण जेटली तथा अन्य गणमान्य लोगों की उपस्थिति में आयोजित एक समारोह में जारी किया।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी राजनेता के लिए प्रभावी संचार महत्वपूर्ण है। संवाद करने की क्षमता के बिना, एक नेता अपने विचारों और दृष्टिकोण से लोगों को प्रेरित नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि निस्संदेह, आज की तारीख में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सबसे प्रभावी संचारकों में से एक हैं।स्वतंत्र भारत में, प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने हमारे संविधान में संहित धर्मनिरपेक्षता सहित मूल्यों को प्रभावी ढंग से प्रचारित किया। श्रीमती इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के पक्ष में आम लोगों को सही ढंग से खड़ा किया।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उठाए गए कई कदमों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ाया है।

राष्ट्रपति ने दोनों पुस्तकों को प्रकाशित करने के लिए प्रकाशकों को बधाई दी तथा साथ ही  आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें सामयिक चिंता के महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित कराती हैं और इसकी अंतर्निहित योग्यता के कारण व्यापक पाठक वर्ग होना चाहिए।

उप-राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी, लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन और केन्द्रीय वित्त एवं रक्षा मंत्री श्री अरूण जेटली ने भी सभा को संबोधित किया तथा यह बताया कि कैसे ये पुस्तकें श्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण पहलुओं पर और सरकार की उपलब्धियों पर को दिखाती हैं। 

पुस्तक 'मन की बात: रेडियो पर एक सामाजिक क्रांति' प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का संकलन है। इसमें 'मन की बात'-विषयों, विषयों की पसंद, मुख्य विशेषताएं का एक व्यापक, गुणात्मक और शैक्षिक विश्लेषण शामिल है। यह बताता है कि कैसे 'मन की बात' के माध्यम से 'न्यू इंडिया' - विशेष रूप से युवा जुड़ा है। 'मन की बात' के माध्यम से कैसे एक व्यापक आंदोलन खड़ा किया गया है, जिसके अंतर्गत स्वच्छ भारत अभियान, भारत की पर्यटन क्षमता को बढ़ावा, सुरक्षित सड़कें, ड्रग्स रहित भारत इत्यादि को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका रही है। इस पुस्तक का संकलन श्री राजेश जैन ने किया है।

पुस्तक 'एक अरब लोगों के साथ-मध्य अवधि में नरेंद्र मोदी की सरकार का विश्लेषण' सरकार के परिवर्तन का विश्लेषण करता है तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के प्रशासन परिदृश्य में सुधार कर एक विकासशील देश में पारदर्शी संस्कृति विकसित कर अभूतपूर्व परिवर्तन लाने का कार्य किया है। इसे श्री उदय माहूरकर ने लिखा है। 

इन पुस्तकों को 'ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन' और 'लेक्सिस नेक्सिस' द्वारा प्रस्तुत किया गया है। 

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प्रधानमंत्री ने जड़ों की रक्षा के महत्व पर संस्कृत सुभाषितम साझा किया
February 25, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें ज्ञान की मूलभूत जड़ों तथा दैनिक अनुशासन की रक्षा के निर्णायक महत्व पर बल दिया गया है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषित इस प्रकार है:

विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्।

तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥

“एक बुद्धिमान व्यक्ति वृक्ष के समान होता है। उस ज्ञान स्‍वरूपी वृक्ष की जड़ दैनिक उपासना है। वेद उसकी शाखाएँ हैं और सत्कर्म उसके पत्ते हैं। अतः जड़ की सावधानीपूर्वक रक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि यदि जड़ नष्ट हो गई तो न शाखाएँ रहेंगी और न ही पत्ते।”

एक्स पर प्रधानमंत्री ने लिखा;

विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्।

तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥