सोशल मीडिया और नवीनतम प्रौद्योगिकी का अभिनव उपयोग करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने ई-गवर्नेंस पर आयोजित 18वें राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन को आज टि्वटर के माध्‍यम से संबोधित किया। यह पहला अवसर है कि ऐसा संबोधन टि्वटर के माध्‍यम से किया गया है।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया ‘दोस्‍तों नमस्‍कार। मुझे टि्वटर के माध्‍यम से ई-गवर्नेंस पर आयोजित 18वें राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में शामिल होकर बहुत खुशी हो रही है। मैं इस सम्‍मेलन में व्‍यक्तिगत रूप से शामिल होना चाहता था लेकिन ऐसा करने में असमर्थ था। इसके अलावा और रास्‍ता नहीं था। मैं आपके साथ बातचीत का अवसर खोना नहीं चाहता था।

मैंने सोचा कि इस सम्‍मेलन में भाग न लेने के बावजूद मैं आपसे कैसे जुड़ सकता हूं इसलिए मैंने प्रौद्योगिकी का उपयोग करके इस माध्‍यम द्वारा आपसे बातचीत करने का निर्णय लिया। मुझे बताया गया है कि इस सम्‍मेलन में केंद्र और राज्‍य सरकारों, सशस्‍त्र बलों, शिक्षा, उद्योग और निजी क्षेत्र के अनेक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। प्रतिभागी और उनकी विशेषज्ञता प्रभावी और कुशल ई-गवर्नेंस के लिए आगे बढ़ने की दिशा में इस सम्‍मेलन को एक सही मंच बनाते हैं।

मुझे यह भी बताया गया है कि 12 श्रेणियों में 22 पुरस्‍कार प्रदान किए जाएंगे। मैं सभी पुरस्‍कार विजेताओं को बधाई देता हूं और उनके प्रयासों की प्रशंसा भी करता हूं। मैं विशेष रूप से खुश हूं कि इस वर्ष के सम्‍मेलन का विषय डिजिटल गवर्नेंस, कौशल विकास और रोजगार पर ही केंद्रित है।

केंद्र सरकार देश में डिजिटल रूप से सशक्‍त समाज और ज्ञान अर्थव्‍यवस्‍था बनाने के दृष्टिकोण के साथ डिजिटल भारत के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हम मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। यह हमारे नागरिकों के हितों की रक्षा करेगा और उनके जीवन में बदलाव लायेगा।

ई-गवर्नेंस डिजिटल भारत के हमारे सपने का एक अनिवार्य हिस्‍सा है। जितनी अधिक तकनीकी हम गवर्नेंस में लगायेंगे उतना ही भारत के लिए बेहतर होगा।

मुझे पूरा विश्‍वास है कि प्रौद्योगिकी और ई-गवर्नेंस प्रक्रियाओं को सरल बनायेंगे और कार्य एवं प्रगति की गति धीमी करने वाली अनेक बाधाओं को दूर करेंगे।

ई-गवर्नेंस पर नजर डालते समय हमें पहले ‘मोबाइल’ के बारे में सोचना चाहिए और इस प्रकार एम-गवर्नेंस अर्थात् मोबाइल गवर्नेंस को महत्‍व देना चाहिए।

मेरा आपसे अनुरोध है कि आप मोबाइल के माध्‍यम से जितना संभव हो अधिक से अधिक सेवाएं उपलब्‍ध कराने के तरीको का पता लगाएं। हम अपने मोबाइल फोन पर दुनिया को ले आएं।

हमारे राष्‍ट्र के पास जो युवा ऊर्जा है वह हमारी बेशकीमती संपत्ति है। प्रौद्योगि‍की के माध्‍यम से कौशल विकास को प्रोत्‍साहन देना आवश्‍यक है। भारत के विकास की यात्रा को हमें किस पैमाने और गति से आगे बढ़ाना है उसके लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक और सुव्‍यस्थित उपयोग करने की आवश्‍यकता है।

मुझे पूरा विश्‍वास है कि यह अखिल भारतीय सम्‍मेलन आने वाले वर्षों में देश के लिए अनेक नये विचारों का मुख्‍य केन्‍द्र बिन्‍दु बनेगा। जो आने वाले वर्षों में हमारे देश की मदद करेगा।

मैं एक बार फिर सम्‍मेलन में आने वाले सभी लोगों को शुभकामनाएं देता हूं। आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

हाल ही में अमरीकी राष्‍ट्रपति श्री ओबामा की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने मन की बात के विशेष एपिसोड को 'साउंड क्‍लाउड' के माध्‍यम से साझा किया था। श्री मोदी ने फेसबुक पर भी एक नेटिव वीडियो और एक ऑडियो ट्वीट तथा 28 जनवरी को आयोजित एनसीसी परेड पर अपने भाषण की झलकियों का एक वीडियो ट्वीट भी साझा किया था।

— Narendra Modi (@narendramodi) January 30, 2015

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प्रधानमंत्री ने जल सुरक्षा पर नेशनल डिपार्टमेंटल समिट के समापन सत्र की अध्यक्षता की
September 02, 2026
यह टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री की सोच के अनुरूप आयोजित शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला सम्मेलन
प्रधानमंत्री ने ठोस और समयबद्ध नतीजों पर अमल करने के लिए लगातार समीक्षा और फॉलो-अप की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया
जन भागीदार पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए जल उत्सव को बढ़ावा देने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण की तकनीकों को अधिक से अधिक अपनाने और दुनिया भर के बेहतरीन तौर-तरीकों से सीखने पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी इस्तेमाल के जरिए पानी से जुड़े डेटा का बेहतर प्रबंधन करने की अपील की
प्रधानमंत्री ने पानी से जुड़े मुद्दों पर जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों की भागीदारी वाले राज्यों के बीच व्यवस्थित अध्ययन-दौरों का सुझाव दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पानी पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। यह शिखर सम्मेलन टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने, सहकारी संघवाद को गहरा करने और केंद्र तथा राज्यों के बीच बेहतर सहयोग के ज़रिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री की सोच के अनुरुप विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला सम्मेलन है। इसमें भारत की जल सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित चर्चा के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी एक साथ एक मंच पर थे।

प्रधानमंत्री ने दो दिनों तक चली गहन चर्चा की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि शिखर सम्मेलन से निकले कार्यान्वयन योग्य और समय-सीमा वाले कार्य बिंदुओं की समीक्षा और सीखने की निरंतर प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यह शिखर सम्मेलन केवल एक बार की गतिविधि बनकर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने इसकी समीक्षा व फॉलो अप की निरंतर प्रक्रिया का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों, जैसे आबादी का बढ़ना और भविष्य में पानी की ज़रूरतों के बारे में शहरी स्थानीय निकायों को जागरूक करने पर ज़ोर दिया और उनके लिए भी ऐसे ही चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने पानी बचाने वाली तकनीकों को ज़्यादा अपनाने की बात कही। उन्होंने भारतीय निर्माताओं और संबंधित लोगों को असरदार समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े पैमाने पर लागू करने में मदद करने के लिए खास प्रदर्शनियों और कार्यशालाएं, जिनमें दुनिया भर के बेहतरीन तरीकों की जानकारी भी शामिल हो, आयोजित करने का सुझाव भी दिया।

जन भागीदारी पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने लोगों में ज़्यादा जागरूकता लाने के लिए "जल उत्सव" को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने गाद निकालने के काम को एक नियमित कार्यक्रम बनाने और इसके लिए साफ नियम और मानक संचालन प्रक्रिया बनाने को कहा। बांध की सुरक्षा के मामले में, उन्होंने हर मॉनसून से पहले पूरी तैयारी रखने, तय सावधानियों का पालन करने और स्कूली छात्रों में जागरूकता पैदा करने पर ज़ोर दिया, जिसमें शिक्षा के पाठ्यक्रम में इसे सही ढंग से शामिल करना भी शामिल है।

प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में भी जल प्रबंधन और शासन के बारे में जानकारी और क्षमता बढ़ाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के बीच व्यवस्थित अंतर-राज्यीय अध्ययन-दौरे आयोजित किए जाएं, ताकि व्यावहारिक सीख मिल सके और सफल उपायों को दूसरी जगहों पर भी अपनाया जा सके।

प्रधानमंत्री ने मज़बूत जल डेटा गवर्नेंस की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिसमें जल-क्षेत्र से जुड़े डेटा को एक साथ लाया जाए, उसे व्यवस्थित रूप से प्रबंधित किया जाए और उसका विश्लेषण तथा प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए। उन्होंने एक समान प्रारूप के माध्यम से डेटा एकत्र करने और विश्लेषण करने के लिए एआई के उपयोग की भी सिफारिश की। उन्होंने कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपचारित पानी के उचित उपयोग के ज़रिए पानी की कमी की समस्या से निपटने के लिए पहले से तैयारी और एकीकृत योजना बनाने पर भी ज़ोर दिया।

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने अनुभव का ज़िक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सही योजना, पक्के इरादे, ज़रूरी संसाधन तथा काबिल अधिकारियों को लगाकर पानी की कमी की समस्या को एक अवसर में बदला जा सकता है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने सम्मेलन के चार मुख्य नतीजों पर ज़ोर दिया: पानी से जुड़ी ढ़ांचागत परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करना, जल संरक्षण को लोगों के एक लगातार चलने वाले आंदोलन के तौर पर मज़बूत करना, पीने योग्य पानी के स्रोतों की लंबे समय तक उपलब्धता सुनिश्चित करना और गांवों में पीने के पानी की योजनाओं के असरदार संचालन और रखरखाव को संस्थागत रूप देना।