प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पृथ्वी दिवस के अवसर पर संदेश दिया है।

प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट्स में कहा- "पृथ्वी दिवस हमारे ग्रह को स्वच्छ और हरा भरा रखने तथा सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का सही अवसर है। हमारा संबंध ऐसी संस्कृति से है जो इस मंत्र में विश्वास रखती है कि "माता भूमिः पुत्रोहं पृथिव्याः" अर्थात पृथ्वी हमारी माता है और हम उसके बच्चें हैं। पर्यावरण की देखभाल करना हमारे स्‍वभाव का अभिन्न हिस्सा है। भारत सही मायने में जलवायु परिवर्तन को कम करने में दुनिया को रास्ता दिखा सकता है ।"  

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा किया और महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया
April 16, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आज से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में हमारा देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और यही भावना लेकर हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“व्युच्छन्ती हि रश्मिभिर्विश्वमाभासि रोचनम्।

ता त्वामुषर्वसूयवो गीर्भिः कण्वा अहूषत॥”

संस्कृत के सुभाषितम् में कहा गया है कि नारी अपने ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान के अंधकार को दूर करती है और समस्त संसार को प्रकाशित करती है। अतः समृद्धि और उच्च गुणों की आकांक्षा रखने वाले लोग सदा नारी का आदर करते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

“आज से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में हमारा देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और यही भावना लेकर हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।

व्युच्छन्ती हि रश्मिभिर्विश्वमाभासि रोचनम्।

ता त्वामुषर्वसूयवो गीर्भिः कण्वा अहूषत॥”