"Education should become a force for the nation’s character building."
"Dialogue with students: Enjoy childhood. Don’t let the child in you die."
"We must restore respect for the teacher in our society."
"Can’t India dream of exporting good teachers?"
"Children can contribute to nation-building through cleanliness, saving electricity and water."

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की ताकत बनाने का आह्वान किया।

PM releasing the brochure PM releasing the brochure "Swachh Bharat, Swachh Vidyalaya", at the "Teachers' Day" function

शिक्षक दिवस पर पूरे देश के छात्रों के साथ अनूठे संवाद में प्रधानमंत्री ने कहा कि बदली हुई दुनिया में डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर शिक्षक दिवस की प्रासंगिकता की फिर से व्‍याख्‍या करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षक के महत्व को उभारने की बहुत जरूरत है और समाज में शिक्षकों के सम्मान को फिर से स्‍थापित करना होगा, तभी शिक्षक नई पीढ़ी को सांचे में ढाल सकेंगे।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्वभर में अच्छे शिक्षकों की बहुत मांग है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्‍होंने पूछा कि क्या भारत अच्छे शिक्षकों को विश्व भर में भेजने का सपना नहीं देख सकता?

प्रधानमंत्री ने लड़कियों की शिक्षा की जरूरत को रेखांकित करते हुए अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण का जिक्र किया जिसमें उन्‍होंने एक साल के भीतर सभी स्‍कूलों में लड़कियों के लिए अलग से शौचालय बनाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि लड़कियों के बीच में पढ़ाई छोड़ देने यानि ड्रॉप-आउट को कम करने के लिए सभी स्‍कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय बनाना जरूरी है।

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प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़, दंतेवाड़ा की एक छात्रा के उस प्रश्न पर खुशी जाहिर की जिसमें दंतेवाड़ा में लड़कियों के लिए उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों की कमी और लड़कियों की शिक्षा की पहल से जुड़े प्रयासों को लेकर प्रश्‍न किया गया था। उन्होंने कहा कि बस्‍तर जैसे उस इलाके जहां की धरती माओवाद के कारण लहूलुहान हो चुकी है वहां की एक लड़की का यह प्रश्न देश को जागृत कर सकता है।

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गुजरात में अपने द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रम “वाचे गुजरात” (गुजरात पढ़ो) की तरह देश भर में इस तरह का कार्यक्रम शुरू किए जाने के सवाल पर प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया का हवाला दिया और कहा कि उन्हें आशा है कि सभी लोग जुड़ पाने और ज्ञान तक पहुंच पाने की अपनी जरूरत पूरी कर सकेंगे। एक अन्य प्रश्न के जवाब में प्रधानमंत्री ने कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया।

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प्रधानमंत्री ने देश के प्रतिष्ठित नागरिकों को सलाह दी कि वे अपने पास के स्कूल में सप्ताह में कम से कम एक पीरियड पढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे अपने छोटे-छोटे कामों के जरिए जैसे कि सफाई रखकर और बिजली-पानी की बचत कर राष्ट्र निर्माण में योगदान कर सकते हैं।

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प्रधानमंत्री ने दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में वैश्विक नेताओं का स्वागत किया
February 16, 2026
1.4 बिलियन लोगों की शक्ति से प्रेरित भारत एआई परिवर्तन में अग्रणी स्थान पर: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में विश्व भर के नेताओं, उद्योगपतियों, नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी को लेकर उत्‍साही व्‍यक्तियों का स्वागत किया।

“सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की थीम पर आधारित यह शिखर सम्मेलन, मानव-केंद्रित प्रगति और समावेशी विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्यम सहित विभिन्न सेक्‍टरों में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिखर सम्मेलन में होने वाली चर्चाएं एआई के नवाचार, सहयोग और जिम्मेदार उपयोग पर वैश्विक विमर्श को समृद्ध करेंगी, जिससे एक प्रगतिशील, नवोन्मेषी और अवसर-उन्मुख भविष्य का निर्माण होगा।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वैश्विक एआई परिवर्तन में भारत के नेतृत्व पर बल दिया, जो इसकी 1.4 बिलियन की जनसंख्या, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्‍टम और अत्याधुनिक अनुसंधान की शक्ति से प्रेरित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एआई में भारत की प्रगति महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाती है, जिसने देश को प्रौद्योगिकीय उन्नति में अग्रणी स्थान पर ला खड़ा किया है।

श्री मोदी ने एक्स पर एक थ्रेड पोस्ट साझा करते हुए लिखा:

“एआई पर चर्चा करने के लिए पूरी दुनिया ए‍कत्रित है!”

आज से भारत दिल्ली के भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन कर रहा है। मैं इस समिट में वैश्विक नेताओं, उद्योगपतियों, नवप्रवर्तकों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकीय को लेकर उत्‍साही व्‍यक्तियों का हार्दिक स्वागत करता हूं। समिट की थीम "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" है, जो मानव-केंद्रित प्रगति के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

“आज एआई स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्यम सहित कई सेक्‍टरों में बदलाव ला रहा है। एआई इम्पैक्ट समिट एआई के विविध पहलुओं, जैसे नवाचार, सहयोग, जिम्मेदार उपयोग आदि पर वैश्विक चर्चा को समृद्ध करेगा। मुझे विश्वास है कि शिखर सम्मेलन के परिणाम एक प्रगतिशील, नवोन्मेषी और अवसर-उन्मुख भविष्य को आकार देने में सहायक होंगे।”

उन्‍होंने कहा, “भारत की 1.4 बिलियन जनता की बदौलत हमारा देश एआई परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्‍टम और अत्याधुनिक अनुसंधान तक, एआई में हमारी प्रगति महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाती है।”