Published By : Admin |
August 25, 2014 | 19:14 IST
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"Bank account for each household is a "national priority""
"Try your best to ensure that no one is left without a bank account"
"Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana to be launched across the nation on August 28th: every account to get a debit card and Rs. 1 lakh accident cover"
• हर परिवार के लिए बैंक खाता ‘राष्ट्रीय प्राथमिकता’ है।
• अपनी ओर से अथक प्रयास करें ताकि कोई भी परिवार बगैर बैंक खाते के न रह जाए।
• प्रधान मंत्री जन धन योजना देश भर में 28 अगस्त को शुरू की जाएगी, हर खाते के साथ एक डेबिट कार्ड और 1 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सभी बैंक अधिकारियों को एक ई-मेल भेजा है जिसमें उनकी स्वतंत्रता दिवस घोषणा ‘प्रधान मंत्री जन धन योजना’ का जिक्र है, जो वित्तीय समावेशन पर राष्ट्रीय मिशन है और जिसका उद्देश्य देश भर में सभी परिवारों को बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराना और हर परिवार का बैंक खाता खोलना है।
प्रधानमंत्री ने इसे अत्यंत बड़ी जिम्मेदारी करार देते हुए कहा है, ‘हमें सात करोड़ से भी ज्यादा परिवारों को प्रवेश देने और उनका खाता खोलने की जरूरत है। यह राष्ट्रीय प्राथमिकता है और हमें इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए निश्चित रूप से तैयार हो जाना चाहिए। इस प्रक्रिया की अहमियत को समझने की जरूरत है क्योंकि महज इस एक कमी के चलते सभी अन्य विकास गतिविधियां अटकती जा रही हैं। मुझे भरोसा है कि हम सभी मिलकर इस स्थिति से निपट लेंगे।’
प्रधानमंत्री ने बैंक अधिकारियों से आग्रह करते हुए कहा है, ‘आप चक्र को अपने कंधे का सहारा दीजिए और अपनी ओर से अथक प्रयास कीजिए ताकि कोई भी ऐसा परिवार न छूट जाए जिसके पास कोई बैंक खाता न हो। यह अपने-आप में आपके और आपकी टीम के लिए अत्यंत संतुष्टि का एक अहम स्रोत साबित होगा। मैं खुद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली शाखाओं की उपलब्धियों को ध्यान में रखूंगा।’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘प्रधान मंत्री जन धन योजना सब का साथ सब का विकास की हमारी विकास अवधारणा का अहम भाग है। जिस तरह से हम आधुनिक बैंकिंग एवं वित्तीय प्रणालियों वाले इस ज्ञान युग में आगे बढ़ रहे हैं, वैसे में यह बात असहनीय है कि हमारी आबादी का एक बड़ा हिस्सा बुनियादी बैंकिंग सुविधाओं से वंचित रह जाए। मुझे कभी-कभी यह सोचकर आश्चर्य लगता है कि क्या हमने स्थितियां इतनी जटिल कर दी हैं जिससे कि गरीब और हाशिए में खड़े लोगों को सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। हमें इस कुचक्र को तोड़ने की जरूरत है तथा जन धन योजना इस दिशा में पहला कदम साबित होगी। एक बैंक खाता खुल जाने के बाद हर परिवार को बैंकिंग और कर्ज की सुविधाएं सुलभ हो जाएंगी। इससे उन्हें साहूकारों के चंगुल से बाहर निकलने, आपातकालीन जरूरतों के चलते पैदा होने वाले वित्तीय संकटों से खुद को दूर रखने और तरह-तरह के वित्तीय उत्पादों से लाभान्वित होने का मौका मिलेगा।’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘पहले कदम के रूप में प्रधान मंत्री जन धन योजना के तहत हर खाता धारक को एक रुपे डेबिट कार्ड और एक लाख रुपए का दुर्घटना बीमा दिया जाएगा। आगे चलकर इन लोगों को बीमा और पेंशन उत्पादों के दायरे में लाया जाएगा।’
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा, ‘मुझे भरोसा है कि आप इस चुनौती का मुकाबला कर इस राष्ट्रीय प्रयास में अपना अहम योगदान करेंगे। मैं आपकी मदद के लिए मौजूद हूं।’ प्रधान मंत्री जन धन योजना देश भर में एक साथ 28 अगस्त, 2014 को शुरू की जाएगी। प्रधानमंत्री इसे दिल्ली में औपचारिक रूप से शुरू करेंगे। राज्य स्तर पर भी इसके समानांतर समारोह आयोजित किए जाएंगे जिनमें केंद्रीय मंत्री शिरकत करेंगे। जिला और उप-जिला स्तरों पर भी इस तरह के समारोह आयोजित किए जाएंगे। शाखा स्तर पर शिविर भी लगाए जाएंगे।
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में ₹24,815 करोड़ की दो रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी
April 18, 2026
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 24,815 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
इस बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये मल्टीट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करेंगे और भीड़भाड़ को कम करेंगे। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नए भारत की परिकल्पना के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मुख्य योजना के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।
उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश राज्यों के 15 जिलों को कवर करने वाली ये 02 (दो) परियोजनाएं भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 601 किलोमीटर तक बढ़ाएंगी।
प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), नैमिषारण्य (सीतापुर), अन्नवरम, अंतर्वेदी, द्रक्षरामम आदि शामिल हैं।
प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, अनाज, सीमेंट, पीओएल, लोहा और इस्पात, कंटेनर, उर्वरक, चीनी, रासायनिक लवण, चूना पत्थर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन का साधन होने के नाते, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में मदद करेगा, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन (180.31 करोड़ किलोग्राम) में कमी आएगी, जो 7.33 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।
गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन (403 किमी)
गाजियाबाद-सीतापुर एक मौजूदा दोहरी लाइन खंड है जो दिल्ली-गुवाहाटी उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन 4) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह परियोजना देश के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों के बीच संपर्क सुधारने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस खंड की मौजूदा लाइन क्षमता का 168% तक उपयोग हो रहा है और परियोजना शुरू न होने की स्थिति में इसके 207% तक होने का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, हापुड, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जिलों से होकर गुजरती है।
परियोजना का मार्ग गाजियाबाद (मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स), मुरादाबाद (पीतल के बर्तन और हस्तशिल्प), बरेली (फर्नीचर, वस्त्र, इंजीनियरिंग), शाहजहांपुर (कालीन और सीमेंट से संबंधित उद्योग) और रोजा (तापीय विद्युत संयंत्र) जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से होकर गुजरता है।
सुगम परिवहन के लिए, परियोजना की रूपरेखा हापुड़, सिंभाओली, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर और सीतापुर के भीड़भाड़ वाले स्टेशनों को बाईपास करने के लिए बनाई गई है और तदनुसार, बाईपास खंडों पर छह नए स्टेशन प्रस्तावित हैं।
परियोजना खंड के पास/पास प्रमुख पर्यटक/धार्मिक स्थान दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), और नैमिषारण्य (सीतापुर) हैं।
इस परियोजना से कोयला, खाद्यान्न, रासायनिक खाद, तैयार इस्पात आदि के 35.72 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
अनुमानित लागत: लगभग 14,926 करोड़ रुपये।
रोजगार सृजन: 274 लाख मानव दिन।
कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 128.77 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड की कमी। यह 5.15 करोड़ पेड़ों के बराबर है।
लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 2,877.46 करोड़ रुपये की बचत।
राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) खंड हावड़ा - चेन्नई उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) का हिस्सा है।
प्रस्तावित परियोजना हावड़ा-चेन्नई उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) मार्ग के चौगुने विस्तार की पहल का हिस्सा है।
यह परियोजना आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी, कोनासीमा, काकीनाडा, अनाकापल्ले और विशाखापत्तनम जिलों से होकर गुजरती है।
विशाखापत्तनम को आकांक्षी जिला कार्यक्रम में एक आकांक्षी जिला माना गया है।
यह पूर्वी तट पर स्थित विशाखापत्तनम, गंगावरम, मछलीपटनम और काकीनाडा जैसे प्रमुख पत्तनों को जोड़ती है।
परियोजना का मार्ग पूर्वी तटरेखा के साथ-साथ चलता है और यह पूर्वी तटीय रेल गलियारे के सबसे व्यस्त, मुख्य रूप से माल ढुलाई के खंडों में से एक है।
इस खंड की लाइन क्षमता का उपयोग पहले ही 130% तक पहुंच चुका है, जिसके कारण बार-बार जाम और परिचालन में देरी हो रही है। क्षेत्र में पत्तनों और उद्योगों के प्रस्तावित विस्तार के कारण लाइन की क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
परियोजना के इस खंड में गोदावरी नदी पर 4.3 किमी लंबा रेल पुल, 2.67 किमी लंबा वायडक्ट, 3 बाईपास शामिल हैं और नया मार्ग मौजूदा मार्ग से लगभग 8 किमी छोटा है, जिससे संपर्क और परिचालन दक्षता में सुधार होगा।
प्रस्तावित खंड अन्नवरम, अंतर्वेदी और द्रक्षरामम आदि जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच में सुधार करके पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
कोयला, सीमेंट, रासायनिक खाद, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, कंटेनर, बॉक्साइट, जिप्सम, चूना पत्थर आदि सहित 29.04 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
अनुमानित लागत: लगभग 9,889 करोड़ रुपये।
रोजगार सृजन: 135 लाख मानव दिन।
कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 51.49 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड की कमी। यह 2.06 करोड़ पेड़ों के बराबर है।
लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 1,150.56 करोड़ रुपये की बचत।
आर्थिक सशक्तिकरण:
आकांक्षी जिले - विशाखापत्तनम जिले को बेहतर संपर्क मिलेगा।
पर्यटन और उद्योगों के माध्यम से इस क्षेत्र में अतिरिक्त आर्थिक अवसर उपलब्ध होंगे।
रेल संपर्क में सुधार के कारण नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा प्राप्त होगी।