प्रधानमंत्री ने राज्य में आयी बाढ़ से उत्पन्न स्तिथियों की समीक्षा के लिये केरल का दौरा किया। एक समीक्षा बैठक के बाद, मौसम के हालात के अनुसार, उन्होंने राज्य के बाढ़ से प्रभावित कुछ स्थानों का हवाई सर्वेक्षण कर नुकसान का जायजा लिया। हवाई सर्वेक्षण के दौरान प्रधानमंत्री के साथ राज्य के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री श्री के. जे. अलफोंस भी थे।

प्रधानमंत्री ने बाढ़ की वजह से हुयी असामयिक मौतों और जीवन और संपत्ति को हुये नुकसान पर अपना दु:ख और शोक प्रकट किया।

प्रधानमंत्री ने राज्य के मुख्यमंत्री श्री पिनारायी विजयन और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ एक बैठक कर बाढ़ से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की।

समीक्षा बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने राज्य के लिये 500 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की। यह गृहमंत्री द्वारा 12 अगस्त 2018 को घोषित 100 करोड़ रुपये की राशि के अतिरिक्त है। उन्होंने राज्य सरकार को आश्वस्त भी किया कि राज्य सरकार द्वारा मांगी गयी राहत सामग्रियां जैसे अनाज और दवाइयों इत्यादि को उपलब्ध कराया जायेगा।

प्रधानमंत्री ने मृतकों के निकट संबंधियों को 2 लाख रु. प्रति व्यक्ति और गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रु. की सहायता अनुग्रह राशि के तौर पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से देने की घोषणा की।

प्रधानमंत्री ने बीमा कंपनियों को विशेष शिविर आयोजित कर नुकसान का आकलन करने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत प्रभावित परिवारों और लाभार्थियों को निश्चित समय के अंदर मुआवजा देने के निर्देश दिये।

उन्होंने फसल बीमा योजना के तहत किसानों के दावों के शीघ्र निस्तारण के आदेश दिये।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को प्राथमिकता के आधार पर बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुये राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत का निर्देश दिया। केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों जैसे एनटीपीसी और पीजीसीआईल को भी निर्देश दिये गये हैं कि बिजली की लाइनों की मरम्मत के लिये राज्य सरकार को सभी संभव सहायता प्रदान करने के लिये उपलब्ध रहें।

जिन ग्रामीणों के कच्चे मकान इस विनाशकारी बाढ़ में नष्ट हो गये हैं उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आवास उपलब्ध कराये जायेंगे भले ही पीएमएवाई-जी की स्थायी प्रतीक्षा सूची में वे किसी भी स्थान पर रहे हों।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 2018-19 के श्रम बजट में 5.5 करोड़ मानव कार्य दिवसों को मंजूरी दी गयी है। राज्य सरकार द्वारा इसमें वृद्धि के किसी भी निवेदन पर गौर किया जायेगा।

एकीकृत बागबानी विकास अभियान के तहत किसानों को उन बागबानी फसलों को दोबारा बोने के लिये सहायता प्रदान की जायेगी जिन्हें नुकसान पहुंचा है।

केंद्र सरकार केरल में बाढ़ की स्थिति पर लगातार और करीब से नजर रखे है। राज्य सरकार को इस संकट से निपटने के लिये प्रत्येक सहायता उपलब्ध करायी जा रही है। प्रधानमंत्री बाढ़ से उत्पन्न परिस्थिति के संबंध में मुख्यमंत्री के निरंतर संपर्क में बने हुये हैं।

प्रधानमंत्री के निर्देश पर 21 जुलाई 2018 को गृह राज्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने श्री के. जे. अलफोंस (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार) और एक उच्च स्तरीय केंद्रीय दल ने बाढ़ प्रभावित अलपुज्झा और कोट्टायम जिलों का दौरा कर बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की समीक्षा की और प्रभावित लोगों से मुलाकात की थी।

12 अगस्त 2018 को केंद्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री के. जे. अलफोंस एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ केरल के बाढ़ एवं भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा एवं हवाई सर्वेक्षण किया था और राज्य के मुख्यमंत्री, अन्य मंत्रियों और अन्य अधिकारियों के साथ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रहे खोज, बचाव एवं राहत कार्यों की समीक्षा की। गृहमंत्री ने एनडीआरएफ से 100 करोड़ रुपये की राशि के अग्रिम भुगतान के आदेश भी दिये।

केंद्रीय मंत्रालयों के एक संयुक्त दल ने राज्य सरकार द्वारा 21.07.2018 को दिये गये एक ज्ञापन के आधार पर 7 से 12 अगस्त 2018 के दौरान राज्य के प्रभावित इलाकों का दौरा कर नुकसान का आकलन किया था।

एनडीआरएफ के 57 दल, जिनमें 1,300 कर्मी और 435 नौकायें शामिल हैं, खोज और बचाव कार्य में लगाये गये हैं। बीएसएफ, सीआईएसएफ, आरएएफ की 5 कंपनियों को राज्य में राहत और बचाव कार्य के लिये तैनात किया गया है।

थलसेना, वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बल को भी राज्य में खोज और बचाव कार्यों के लिये नियुक्त किया गया है। राहत और बचाव कार्यों में कुल मिलाकर 38 हेलीकॉप्टरों को लगाया गया है। इसके अतिरिक्त 20 विमानों को भी संसाधनों की ढुलाई के लिये प्रयोग किया जा रहा है। थलसेना ने अभियांत्रिकी कार्यबल के 10 कॉलम और 10 दलों, जिसमें 790 प्रशिक्षित कर्मी शामिल हैं, को नियुक्त किया है। नौसेना 82 टीमों को लगा रही है। तटरक्षक बल ने 42 दल, 2 हेलीकॉप्टर और 2 पोतों को लगाया है।

9 अगस्त से एनडीआरएफ, थलसेना और नौसेना ने कुल मिलाकर 6,714 लोगों को बचाया या निकाला है और 891 व्यक्तियों को चिकित्सा सहायता मुहैया करायी है।

प्रधानमंत्री ने इस अभूतपूर्व संकट से निपटने के लिये राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा जो लोग अभी भी पानी में फंसे हुये उन्हें बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है और भारत सरकार इस काम में राज्य सरकार की यथासंभव मदद करती रहेगी।

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प्रधानमंत्री ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को उजागर करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 08, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि राष्ट्र की गरिमा और सम्मान की रक्षा में भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और शौर्य से प्रत्येक नागरिक गौरवान्वित है। उन्होंने कहा कि भारत माता के लिए सब कुछ बलिदान करने का उनका जज्बा सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-

"स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकंपितुमर्हसि |

धर्म्याधि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियौ न विद्यते ||"

इस श्लोक में यह बताया गया है कि जब व्यक्ति अपने कर्तव्य के प्रति सजग हो जाता है, तो उसके मन में किसी भी प्रकार की झिझक या भय नहीं होना चाहिए, क्योंकि न्याय की वेदी पर धर्म और सम्मान की रक्षा के लिए किया गया संघर्ष एक योद्धा के लिए आत्म-कल्याण का सबसे उत्कृष्ट और गौरवशाली मार्ग है।