प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज आंध्र प्रदेश के गूंटूर का दौरा किया और तीन प्रमुख परियोजनाओं का अनावरण किया।

इस अवसर पर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के राज्यपाल श्री ई. एस. एल. नरसिम्हन और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग और नागरिक उड्डयन मंत्री श्री सुरेश प्रभु भी उपस्थित थे।

देश की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, प्रधानमंत्री ने भारतीय सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) की 1.33 एमएमटी विशाखापत्तनम स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (एसपीआर) सुविधा राष्ट्र को समर्पित की। परियोजना की लागत 1125 करोड़ रूपये है। यह देश की सबसे बड़ी भूमिगत भंडारण सुविधा है।

उन्होंने कृष्णापटनम में भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) तटीय स्थापना परियोजना की स्थापना के लिए आधारशिला रखी। 100 एकड़ में फैली इस परियोजना की अनुमानित लागत 580 करोड़ रूपये है। यह परियोजना नवंबर 2020 तक चालू हो जाएगी। पूरी तरह से स्वचालित और अत्याधुनिक इस तटीय स्थापना परियोजना से आंध्र प्रदेश के लिए पेट्रोलियम उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

गैस आधारित अर्थव्यवस्था पर प्रमुखता से जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने ओएनजीसी के एस-1 वशिष्ठ नामक विकास परियोजना राष्ट्र को समर्पित किया, जो आंध्र प्रदेश में कृष्णा-गोदावरी (KG) अपतटीय बेसिन में स्थित है। परियोजना की लागत लगभग 5,700 करोड़ रुपये है। यह परियोजना 2020 तक तेल आयात को 10% कम करने के प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान करेगी।

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प्रधानमंत्री ने सत्य की विजय पर जोर देते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
March 12, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने उन सभी महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने वर्ष 1930 में आज ही के दिन शुरू हुए दांडी मार्च में भाग लिया था।

प्रधानमंत्री ने सत्य की विजय पर बल देने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को भी साझा किया:

“सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।

येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥”

सुभाषितम् का संदेश है कि सत्य की सदैव विजय होती है और असत्य अंततः नष्ट हो जाता है। इसलिए, उसी मार्ग का अनुसरण करना चाहिए जिस पर चलकर ऋषियों ने परमानंद प्राप्त किया और परम सत्य को जाना।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्‍ट में लिखा;

“सन् 1930 में आज ही के दिन दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी। इसमें शामिल सभी विभूतियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण!

सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।

येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥”