महाराष्ट्र और हरियाणा की जनता ने बीजेपी के प्रति और हमारे साथियों के प्रति जो विश्वास जताया है, जो आशीर्वाद दिए हैं, मैं इसके लिए उनका साधुवाध और अंत: करण से धन्यवाद करता हूं: प्रधानमंत्री मोदी
मैं हरियाणा और महाराष्ट्र के लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि हम उनकी सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे: पीएम मोदी
मनोहर लाल खट्टर और देवेंद्र फडणवीस ने जनता की सेवा की जिससे उन्हें दोबारा जीत का आशीर्वाद दिया है: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान अमित भाई शाह, श्रीमान राजनाथ जी, गडकरी जी, और सभी प्यारे भाइयो और बहनो, मैं सबसे पहले दीवाली का आरंभ होने से पूर्व ही महाराष्ट्र और हरियाणा की जनता ने भारतीय जनता पार्टी के प्रति, –हमारे साथियों के प्रति जो विश्वास जताया है, जो आशीर्वाद दिए हैं इसके लिए मैं उनका अन्तहकरण से अभिनंदन करता हूं, उनका साधुवाद करता हूं। भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र ईकाई और भारतीय जनता पार्टी हरियाणा ईकाई वहां की पार्टी के सभी पदाधिकारी, सभी कार्यकर्ता उन्होंने भी जनता का विश्वास जीतने में अथक प्रयास किया, लोगों के आशीर्वाद प्राप्त किए उनका भी बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। महाराष्ट्र में और हरियाणा में मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र जी का पहला अनुभव और मनोहर लाल जी का भी पहला अनुभव, ये दोनों लोग कभी किसी सरकार में मंत्री भी नहीं थे। महाराष्ट्र में हमें गत चुनाव में बहुमत नहीं मिला था, हरियाणा में हमें चुनाव में केवल दो सीटों का बहुमत मिला था उसके बावजूद भी सबको साथ लेकर के दोनों मुख्यमंत्रियों ने उनकी टीम ने पांच वर्ष तक महाराष्ट्र और हरियाणा की जो सेवा की ईमानदारी के साथ राज्य के विकास के लिए जनता की भलाई के लिए कार्य करते रहे और उसका परिणाम है कि आज दोबारा जनता ने उन पर विश्वास जताया है उनके पांच वर्ष के कार्यकाल में जो जनता ने आशीर्वाद दिए हैं उनको भी बहुत बधाई देता हूं और मुझे विश्वास है कि उनके नेतृत्व में आने वाले पांच वर्ष महाराष्ट्र के और हरियाणा के विकास की नई ऊंचाइयों को पार करने वाला कार्यकाल रहेगा ऐसा मुझे पूरा भरोसा है। जो पालिटिकल पंडित आज इस चुनाव का एनालिसिस कर रहे हैं, हरियाणा अपने आप में एक अभूतपूर्व विजय है। अभूतपूर्व इसलिए है कि इन दिनों एक सरकार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करके दोबारा जीतने की घटनाएं बहुत कम हैं, एक सरकार आती है पांच साल रहती है फिर दूसरी आती है पांच साल रहती है ऐसे वातावरण में सबसे बड़े दूसरे दल को रूप में विश्वास और आशीर्वाद प्राप्त करके आना ये बहुत बड़ी बात है। पिछली बार विधानसभा के चुनाव में 33 प्रतिशत वोट मिले थे पांच वर्ष में थोड़ा बहुत एंटीस्टैबलिशमेंट होता है लेकिन उसकी बजाय 33 से बढ़कर 36 प्रतिशत वोट प्राप्त किए 3 प्रतिशत ज्यादा वोट प्राप्त करना ये भी जनसामान्य का उनके काम पर मोहर लगाने का सीधा-सीधा गौरव प्राप्त होता है। 

जो लोग हरियाणा की राजनीति जानते हैं उनको पता है, मैंने वर्षों तक वहां काम किया है संगठन का, किसी भी दल के साथ हमें समझौता अगर करना होता था सीट शेयरिंग का चुनाव के लिए तो ज्यादातर उन दलों की टर्मस्स एंड कंडीशन पर कभी पांच सीटें लड़ने को मिलती थीं कभी दस सीटें लड़ने को मिलती थीं और वो भी जो वो कहें उस सीट पर लड़ना पड़ता था और कभी दो अंक पार कर जाएं हम जीतने में यानी 10 या 10 से ज्यादा की सीट आ जाएं तो ये हमारा बहुत बड़ा सौभाग्य हुआ करता था और ये मैं पुरानी बात नहीं कर रहा हूं, 2014 से पहले हमारी ये स्थिति थी वैसी स्थिति में से जिस प्रकार से हमारी नई टीम को पांच साल और वो भी सिर्फ दो लोगों का हमारे पास बहुमत था और आज की राजनीति हम जानते हैं कि ऐसे समय निर्णय कितने संभल कर लेने होते हैं, कोई भी निर्णय लेने में कितनी दिक्कत आती हैं। इन सब को साथ लेकर चलना ऐसे वातावरण में भी, और मुख्यमंत्री नए बाकी टीम भी नई उसके बाद भी पांच वर्ष काम करके फिर से वापस आना हरियाणा के भारतीय जनता पार्टी को जितनी बधाई दें उतनी कम है। उसी प्रकार से महाराष्ट्र, 2014 के पहले भाजपा हमेशा महाराष्ट्र में जूनियर पार्टनर रही, शिवसेना के नेतृत्व में रहते थे। कभी सरकार बनी तो शिवसेना के नेतृत्व में बनी हमारे लोगों को थोड़ा बहुत काम करने का अनुभव मिला लेकिन महाराष्ट्र की एक विशेषता देखिए, गत पचास वर्षों में आपको भी ये सुनकर आश्चर्य होगा, 50 वर्ष में एक भी मुख्यमंत्री महाराष्ट्र की सेवा नहीं कर पाया पांच साल लगातार मुख्यमंत्री 50 साल के बाद पहली बार देवेंद्र जी को सेवा करने का मौका मिला। महाराष्ट्र जैसा देश की आर्थिक राजधानी, दुनिया में देश के प्रभाव को बढ़ाने में महाराष्ट्र का और मुंबई का बहुत बड़ा योगदान है।

ऐसे राज्य में पॉलिटिकल स्टैबिलिटी बहुत मायना रखती है लेकिन 50 साल तक दो तिहाई बहुमत वाली सरकारें भी एक मुख्यमंत्री को लेकर चल नहीं पाईं जबकि भाजपा को चरित्र है सबको साथ लेकर चलने का हमें पूर्ण बहुमत नहीं मिला था, भाजपा-शिवसेना पिछले चुनाव में आमने-सामने लड़े थे लेकिन चुनाव आने के बाद जब जनता ने तय कर लिया कि भाजपा-शिवसेना अलग चल ही नहीं सकते आपको साथ चलना ही पड़ेगा, निर्णय जनता ने किया और भाजपा और शिवसेना ने मिलकर का पांच साल स्थिर साशन और नेतृत्व दिया और इस बार भी गठबंधन को भारी बहुमत से महाराष्ट्र की जनता ने विजयी बनाया और इसलिए महाराष्ट्र की जनता का जो अपार विश्वास है। हमारा युवा नेतृत्व है वहां नया नेतृत्व है लेकिन उन्होंने जिस प्रकार से एक भी दाग लगे बिना सरकार चलाई उसको आज जन समर्थन मिला है और ये बात हमारे लिए बहुत गर्व और आनंद की है कि जब देश में ट्रें हर पांच साल में सरकारें बदलने का है ऐसे में पांच वर्ष बाद दोबारा बैठाने का निर्णय ये भाजपा के प्रति हमारे लोगों के काम करने के तरीके के प्रति जो विश्वास है उस विश्वास को प्रकट करता है।

मैं दोनों प्रदेश की जनता को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपने हम पर इतनी बड़ी मात्र में आशीर्वाद बरसाए हैं हमारी टीम नई थी अनुभव बहुत सामान्य प्रकार का था लेकिन उसके बाद भी पांच साल तक हमने सेवा करने के हमारे मकसद से जरा भी डिगे बिना आपकी सेवा की है अब आपने दोबारा हमें मौका दिया है तो मैं महाराष्ट्र की और हरियाणा की जनता को विश्वास दिलाता हूं कि आप की सेवा करने में हम पिछले पांच साल से भी ज्यादा मेहनत करेंगे, त्याग और तपस्या में कोई कमी नहीं रखेंगे। आप ने जो विश्वास रखा है उस विश्वास पर खरा उतरने के लिए हम भरसक कोशिश करेंगे और केंद्र में सरकार में होने के कारण मैंने अनुभव किया है कि भारत सरकार की योजनाओं को लागू करने में भाजपा की जहां-जहां सरकारें हैं वो अधिक उत्साह के साथ मेहनत करती हैं जनता तक बात ले जाती हैं। जहां अन्य दलों की सरकारें आई हैं उनका ज्यादा समय योजनाओं के नाम बदलने में जाता है। मोदी की एक योजना हो तो उनको लगता है कि अपने राज्य में नाम बदल दें वरना क्रेडिट मोदी को चली जाएगी, उसी उधेड़बुन वो एक दो साल यूं ही खराब कर देते हैं लेकिन भाजपा जहां-जहां है वहां कोई रुकावट के बिना केंद्र सरकार की योजनाएं भी उतनी त्वरित गति से जन सामान्य के लाभ के लिए आगे बढ़ाई जाती हैं। उसके कारण ऐसी सरकारों से जनता को डबल फायदा मिलता है और राज्य और केंद्र दोनों की योजनाएं जन सामान्य के लिए तेज गति से आगे बढ़ती हैं। मुझे विश्वास है कि आने वाले दिनों में जनता का ये बढ़ता हुआ प्यार हमारी जिम्मेदारियों को भी बढ़ाता है और हम सभी भाजपा के कार्यकर्ता हर पल हर डगर जनता के विश्वास पर खरे उतरने के लिए हमारी तरफ से हम कोई कमी नहीं रखेंगे इस विश्वास को लेकर हमें आगे बढ़ना है।

मैं फिर एक बार देवेंद्र और मनोहर जी की टीम को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं और देशवासियों को भी इस तोहफे के लिए प्रणाम करता हूं और दीवाली की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं और दीपावली का पर्व आपके परिवार में भी नया प्रकाश लेकर के आए, नई ऊर्जा लेकर के आए, नया उमंग लेकर के आए और आपका भारत के विकास की यात्रा में समर्थ योगदान जुड़ाता चले ये शुभकामना देते हुए मैं फिर एक बार भाजपा की इस टीम को भी, अमित भाई और नड्डा जी। इस पूरी टीम ने जो चुनाव अभियान को चलाया उनको भी मैं बहुत बधाई देता हूं उनका भी अभिनंदन करता हूं आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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मैं देश की हर नारी को विश्वास दिलाता हूं, हम महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाली हर रुकावट को खत्म करके रहेंगे: पीएम मोदी
April 18, 2026

आज मैं एक बेहद महत्वपूर्ण विषय पर विशेष कर देश की माता बहनों और बेटियों से बात करने के लिए आया हूं! आज भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया। उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया है। हमारे भरसक प्रयास के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया! और मैं इसके लिए सभी माताओं-बहनों, उनसे मैं क्षमा प्रार्थी हूं।

साथियों,

हमारे लिए देश हित सर्वोपरि है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दल हित सब कुछ हो जाता है, दल हित, देश हित से बड़ा हो जाता है, तो नारी शक्ति को, देश हित को, इसका खामियाजा उठना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ है। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश के नारी शक्ति को उठाना पड़ा है।

साथियों,

कल देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी, देश की नारी शक्ति देख रही थी, मुझे भी यह देखकर बहुत दुख हुआ, कि जब ये नारी हित का प्रस्ताव गिरा, तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, सपा, जैसी परिवारवादी पार्टियां, खुशी से तालियां बजा रही थीं। महिलाओं से उनके अधिकार छिनकर ये लोग मेजें थपथपा रहे थे। उन्होंने जो किया वो केवल टेबल पर थाप नहीं थी, वो नारी के स्वाभिमान पर उसके आत्मसम्मान पर चोट थी और नारी सब भूल जाती है, अपना अपमान कभी नहीं भूलती, इसलिए संसद में कांग्रेस और उसके सहयोग के उन सबके व्यवहार की कसक हर नारी के मन में हमेशा रहेगी। देश की नारी जब भी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी, तो वो याद करेगी कि इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने, संसद में महिला आरक्षण को रोकने का जश्न मनाया था, खुशियां मनाई थीं। कल संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन का जिन दलों ने विरोध किया है, उनसे मैं दो टूक कहूंगा, ये लोग नारी शक्ति को फॉर ग्रांटेड ले रहे हैं, वो ये भूल रहे हैं, कि 21वीं सदी की नारी देश की हर घटना पर नजर रख रही है, वो उनकी की मंशा भाप रही है और सच्चाई भी भली भांति जान चुकी है। इसलिए महिला आरक्षण विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है, इसकी उन्हें सजा जरूर मिलेगी। इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है और जनता द्वारा इसकी सजा से भी वो बच नहीं पाएंगे।

साथियों,

सदन में नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से भी कुछ छिनने का नहीं था। नारी शक्ति वंदन संशोधन हर किसी को कुछ ना कुछ देने का था, देने के लिए संशोधन का था। ये 40 साल से लटके हुए नारी के हक को, 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से उसका हक देने का संशोधन था।

नारी शक्ति वंदन संशोधन 21वीं सदी के भारत की नारी को नए अवसर देने, नई उड़ान देने, उसके सामने से बाधाएं हटाने का महायज्ञन था। देश की 50% यानी आधी आबादी को उसका अधिकार देने का साफ नियत के साथ, ईमानदारी के साथ किया गया एक पवित्र प्रयास था। नारी को भारत की विकास यात्रा में सहयात्री बनाने और सबको जोड़ने का प्रयास था। नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है। नारी शक्ति वंदन संशोधन उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम, सभी राज्यों की हर राज्य की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था। ये संसद में सभी राज्यों की आवाज को अधिक शक्ति देने का प्रयास था। राज्य छोटा हो, राज्य बड़ा हो, राज्य की आबादी कम हो या राज्य की आबादी ज्यादा हो। सब की समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी। लेकिन इस ईमानदार प्रयास की कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने भ्रूण हत्या कर दी है, भ्रूण हत्या कर दी है। ये कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, टीएमके जैसे दल, इस भ्रूण हत्या के गुनहगार हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं, ये देश की नारी शक्ति के अपराधी हैं।

साथियों,

कांग्रेस महिला आरक्षण के विषय से ही नफरत करती है, उसने हमेशा से ही महिला आरक्षण को रोकने के लिए षड्यंत्र किए हैं। इस दिशा में पहले जितनी बार भी प्रयास हुए, हर बार कांग्रेस ने इसमें रो़ड़े अटकाए हैं। इस बार भी कांग्रेस और उसके साथियों ने महिला आरक्षण को रोकने के लिए एक के बाद एक नए झूठ का सहारा लिया। कभी संख्या को लेकर, कभी किसी और तरीके से, कांग्रेस और उसके साथियों ने देश को गुमराह करने की कोशिश की। ऐसा करके इन दलों ने भारत के नारी शक्ति के सामने अपना असली चेहरा सामने ला दिया है। अपना मुखौटा उतर दिया है।

साथियों,

मुझे व्यक्तिगत तौर पर आशा थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेंगी। कांग्रेस अपने पापों का प्रायश्चित करेगी, लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने का, महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का, अवसर खो दिया। कांग्रेस खुद देश के अधिकांश हिस्सों में अपना वजूद खो चुकी है। कांग्रेस परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों के पीठ पर सवार होकर खुद को जिंदा रखे हुए है। लेकिन कांग्रेस, ये भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़े, इसलिए कांग्रेस ने इस संशोधन का विरोध करवारकर अनेक क्षेत्रीय दलों के भविष्य को अंधकार में धकेलना का राजनीतिक षड्यंत्र किया है।

साथियों,

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और दूसरी पार्टियां, इतने वर्षों से हर बार वही बहाने, वही कुतर्क गढ़ते आए हैं, बनाते आए हैं, कोई ना कोई टेक्निकल पेंच फंसाकर, ये महिलाओं के अधिकारों पर डाका डालते रहे हैं। देश राजनीति का यह भद्दा पैटर्न बराबर समझ चुका है, और उसके पीछे की वजह भी जान चुका है।

भाइयों बहनों,

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध की एक बड़ी वजह है, इन परिवारवादी पार्टियों का डर। इन्हें डर है, अगर महिलाएं सशक्त हो गईं, तो इन परिवारवादी पार्टियों का नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा। ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके परिवार के बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें। आज पंचायतों में, लोकल बॉडीज में, जिन हजारों लाखों महिलाओं ने अपनी क्षमता को साबित किया है, जब आगे बढ़कर लोकसभा और विधानसभाओं में आना चाहती हैं, देश की सेवा करना चाहती हैं, परिवारवादियों के भीतर उनसे असुरक्षा की भावना बैठी हुई है। परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए कहीं ज्यादा सीटें होंगी, महिलाओं का कद बढ़ेगा, इसीलिए, इन लोगों ने नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध किया है। देश की नारीशक्ति कांग्रेस और उसके सहयोगियों को इस पाप के लिए कभी माफ नहीं करेगी।

मेरे प्रिय देशवासियों,

कांग्रेस और उसके साथी दल, डिलिमिटेशन पर लगातार, लगातार झूठ बोल रहे हैं। ये इस बहाने विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं। क्योंकि, बांटो और राज करो, काँग्रेस ये पॉलिटिक्स अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है। और, कांग्रेस आज भी उसी के सहारे चल रही है। कांग्रेस ने हमेशा देश में दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा दी है। इसलिए, ये झूठ फैलाया गया कि डिलिमिटेशन यानी परिसीमन से कुछ राज्यों को नुकसान होगा! जबकि, सरकार ने पहले दिन से स्पष्ट किया है, कि न किसी

राज्य की भागीदारी का अनुपात बदलेगा, न किसी का representation कम होगा। बल्कि,सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में ही बढ़ेंगी। फिर भी काँग्रेस,DMK,TMC और समाजवादी पार्टी जैसे दल इसे मानने को तैयार नहीं हुए।

साथियों,

ये संशोधन बिल सभी दलों, और सभी राज्यों के लिए एक मौका था, एक अवसर था। ये बिल पास होता तो तमिलनाडु, बंगाल, यूपी, केरलम, हर राज्य की सीटें बढ़तीं। लेकिन अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से इन दलों ने, अपने राज्य के लोगों को भी धोखा दे दिया। जैसे कि, DMK के पास मौका था कि वो और ज्यादा तमिल लोगों को सांसद, विधायक बना सकती थी, तमिलनाडु की आवाज़ और मजबूत कर सकती थी! लेकिन, उसने वो मौका खो दिया। TMC के पास भी बंगाल के लोगों को आगे बढ़ाने का मौका था। लेकिन TMC ने भी ये मौका गवां दिया। समाजवादी पार्टी के पास भी मौका था कि वो महिला विरोधी छवि होने के दाग को कुछ कम कर सके। लेकिन सपा भी इसमें चूक गई। समाजवादी पार्टी लोहिया जी को तो पहले ही भूल चुकी है। सपा ने नारीशक्ति वंदन संशोधन का विरोध करके, लोहिया जी के सारे सपनों को पैरों तले रौंद दिया है। सपा महिला आरक्षण विरोधी है, ये यूपी की और देश की महिलाएं कभी नहीं भूलेंगी।

साथियों,

महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके, कांग्रेस ने फिर एक बात सिद्ध कर दी है। कांग्रेस, एक एंटी रिफॉर्म पार्टी है। 21वीं सदी के विकसित भारत के लिए, जो भी निर्णय, जो भी रिफॉर्म्स ज़रूरी हैं, जो भी निर्णय देश ले रहा है, कांग्रेस उन सबका विरोध करती है, उसे खारिज कर देती है, उस काम के अंदर खलल डालती है। यही कांग्रेस का इतिहास है और यही कांग्रेस की नेगेटिव पॉलिटिक्स है।

साथियों,

ये वही कांग्रेस है, जिसने जनधन-आधार-मोबाइल की त्रिशक्ति का विरोध किया। कांग्रेस ने, डिजिटल पेमेंट्स का विरोध किया, कांग्रेस ने, GST का विरोध किया, कांग्रेस ने, सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का विरोध किया, कांग्रेस ने, ट्रिपल तलाक के विरुद्ध कानून का विरोध किया। कांग्रेस ने, आर्टिकल 370 हटाने का विरोध किया। हमारा संविधान, हमारे कोर्ट, जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड, समान नागरिक आचार संहिता को, यूसीसी को ज़रूरी बताते हैं, कांग्रेस उसका भी विरोध करती है। Reform का नाम सुनते ही कांग्रेस, विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है। ऐसा कोई भी काम जिससे देश मजबूत होता है, कांग्रेस उसमें बाधाएं खड़ी करने के लिए पूरी शक्ति लगा देती है। कांग्रेस, वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध करती है, कांग्रेस, देश से घुसपैठियों को भगाने का विरोध करती है, कांग्रेस, मतदाता सूची के शुद्धिकरण, SIR का विरोध करती है, कांग्रेस, वक्फ बोर्ड में Reform का विरोध करती है।

साथियों,

कांग्रेस ने, शरणार्थियों को सुरक्षा देने वाले CAA कानून तक का विरोध किया। इस पर झूठ बोलकर-अफवाहें फैलाकर देश में बवंडर खड़ा कर दिया। कांग्रेस, माओवादी-नक्सली हिंसा को समाप्त करने के देश के प्रयासों में भी रुकावटें डालती है। कांग्रेस का एक ही पैटर्न रहा है, कोई भी Reform आए तो झूठ बोलो, भ्रम फैलाओ। इतिहास साक्षी है, कांग्रेस ने हमेशा यही नेगेटिव रास्ता चुना है।

साथियों,

जो भी कार्य देश के लिए जरूरी फैसला होता है, कांग्रेस इसको कार्पेट के नीचे डाल देती है। कांग्रेस के इसी रवैये की वजह से भारत विकास की उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया, जिसका भारत हकदार है। आजादी के समय, उस दौर में हमारे साथ और भी कई देश आजाद हुए थे। ज्यादातर देश हमसे बहुत आगे निकल गए, और इसकी वजह थी, कि कांग्रेस हर Reform को रोककर बैठी रही। लटकाना-भटकाना- अटकाना यही कांग्रेस का सिद्धांत रहा है, यही कांग्रेस का वर्क कल्चर रहा है। कांग्रेस ने पड़ोसी देशों के साथ सीमा-विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने पाकिस्तान के साथ पानी के बंटवारे से जुड़े विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने ओबीसी आरक्षण के निर्णय को 40 साल तक लटकाए रखा। कांग्रेस ने सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन को 40 साल तक रोके रखा।

साथियों,

कांग्रेस के इस रवैये ने हमेशा देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है। कांग्रेस के हर विरोध, हर अनिर्णय, हर छल-प्रपंच का खामियाजा देश ने भुगता है, देश की पीढ़ियों ने भुगता है। आज देश के सामने जितनी भी बड़ी चुनौतियां हैं, वो कांग्रेस के इसी रवैये से उपजी हुई हैं। इसलिए, ये लड़ाई सिर्फ एक कानून की नहीं है, ये लड़ाई, कांग्रेस की उस एंटी-रिफॉर्म मानसिकता के साथ है, जिसमें सिर्फ नेगेटिविटी है, नकारात्मकता है। और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है, कि देश की सभी बहनें-बेटियां, कांग्रेस की इस मानसकिता को करारा जवाब देकर रहेगी।

साथियों,

कुछ लोग देश की महिलाओं के सपने टूटने को सरकार की नाकामी बता रहे हैं। लेकिन, ये विषय कामयाबी या नाकामयाबी क्रेडिट का था ही नहीं। मैंने संसद में भी कहा था, आधी आबादी को उनका हक मिल जाने दीजिये, मैं इसका क्रेडिट, विज्ञापन छपवाकर विपक्ष के सभी लोगों को दे दूँगा। लेकिन, महिलाओं को दक़ियानूसी सोच से देखने वाले फिर भी अपने झूठ पर अड़े रहे, कायम रहे!

साथियों,

नारीशक्ति को भागीदारी दिलाने की लड़ाई दशकों से चल रही है। वर्षों से मैं भी इसके लिए प्रयास करने वालों में से एक हूं। कितनी ही महिलाएं ये विषय मेरे सामने उठाती रही हैं। कितनी ही बहनों ने पत्र के द्वारा मुझे सारी बातें बताई हैं। मेरे देश की माताएं-बहनें-बेटियां, मैं जानता हूं, आज आप सब दुखी हैं। मैं भी आपके इस दुःख में दुःखी हूँ। आज भले ही, बिल पास कराने के लिए जरूरी 66 परसेंट वोट हमें नहीं मिला हो, लेकिन मैं जानता हूं, देश की 100 परसेंट नारीशक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है। मैं देश की हर नारी को विश्वास दिलाता हूं, हम महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाले हर रुकावट को खत्म करके रहेंगे, हटाकर के रहेंगे। हमारा हौसला भी बुलंद है, हमारी हिम्मत भी अटूट है और हमारा इरादा भी अडिग है। महिला आरक्षण का विरोध करने वाली पार्टियां, ये देश की नारी शक्ति को संसद और विधानसभाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने से कभी भी रोक नहीं पाएंगे, सिर्फ वक्त का इंतजार है। नारी शक्ति के सशक्तीकरण का बीजेपी-एनडीए का संकल्प अक्षुण्ण है। कल हमारे पास संख्याबल नहीं था, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम हार गए। हमारा आत्मबल अजेय है। हमारा प्रयास रुकेगा नहीं, हमारा प्रयास थमेगा नहीं। हमारे पास आगे अभी और मौके आएंगे, हमें आधी आबादी के सपनों के लिए, देश के भविष्य के लिए, इस संकल्प को पूरा करना ही है। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।