प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया
प्रधानमंत्री मोदी ने संसदीय चुनावों में जीत हासिल करने पर श्रीलंका के प्रधानमंत्री को बधाई दी
भारत और श्रीलंका ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत किया 
श्रीलंका की प्रगति हम दोनों देशों, दक्षिण-पूर्व एशिया और हमारे समुद्री क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है: प्रधानमंत्री मोदी
भारत और श्रीलंका ने व्यापार, कनेक्टिविटी, मानवीय और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की 
भारत और श्रीलंका आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाएंगे
भारत और श्रीलंका, दोनों का एक-दूसरे की सफलता एवं हमारे क्षेत्र की स्थिरता और विकास में बहुत बड़ा योगदान है: प्रधानमंत्री मोदी
भारत-श्रीलंका संबंध दोनों देशों के जन मन को आपस में जोड़ते हैं: प्रधानमंत्री मोदी

महा‍महिम प्रधानमंत्री श्री रानिल विक्रमसिंघे, मीडिया के सदस्‍य गणमुझे आपका, प्रो. मैथ्री विक्रमसिंघे और आपके प्रतिनिधि मंडल के सदस्‍यों का स्‍वागत करते हुए बहुत प्रसन्‍नता हो रही है।

मैं एक बार फिर पिछले महीने के संसदीय चुनाव में युनाइटेड नेशनल फ्रंट के नेतृत्‍व वाले गठबंधन की विजय के लिए बधाई देना चाहता हूं।

हम आभारी हैं कि आपने अपनी पहली विदेश यात्रा के रूप में भारत को चुना। यह सुखद संयोग है कि श्रीलंका के प्रधानमंत्री के रूप में आपका पिछला कार्यकाल और पहले एनडीए का कार्यकाल भी साथ-साथ था।

हम, भारत- श्रीलंका के संबंधों में आपके विश्‍वास और दृढ़ समर्थन के लिए आपका धन्‍यवाद करते हैं। आप हमारे अमूल्‍य मित्र हैं और श्रीलंका की प्रगति और अपने लक्ष्‍यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की भारत में सराहना की जाती है।

भारत- श्रीलंका संबंधों के लिए यह वर्ष उतना ही ऐतिहासिक है जितना कि श्रीलंका के लिए है। हमें फरवरी में राष्‍ट्रपति सिरीसेना का आतिथ्‍य सत्‍कार करने का भी सौभाग्‍य मिला था, जो उनकी पहली विदेश यात्रा थी। मुझे मार्च में श्रीलंका की विशेष यात्रा करने का भी सौभाग्‍य मिला। अब प्रधानमंत्री श्री विक्रमसिंघे हमारे बीच उपस्थि‍त हैं।

श्रीलंका में परिवर्तन, सुधार, सामंजस्‍य और प्रगति के लिए इस वर्ष दो बार चुनाव हुए। श्रीलंका की लोकतांत्रिक परंपरा के बारे में इससे मजबूत कोई दूसरा वक्‍तव्‍य नहीं हो सकता है। शांतिपूर्ण, समग्र और समृद्ध भविष्‍य की ओर श्रीलंका के बढ़ने का इससे अधिक स्‍पष्‍ट संकेत नहीं हो सकता है।

करीबी पड़ोसी और मित्र के रूप में हम श्रीलंका की सफलता और प्रगति की कामना करते हैं तथा भारत के अटूट समर्थन का आश्‍वासन देते हैं।

इसलिए हमें प्रसन्‍नता है कि हाल के समय में श्रीलंका सरकार ने कई महत्‍वपूर्ण कदम उठाए हैं। सबसे अधिक उम्‍मीद के समय में वहां के नेतृत्‍व ने बेहतरीन राजनीतिक एकता का प्रदर्शन किया है।

मुझे विश्‍वास है कि श्रीलंका में नेतृत्‍व की समझदारी और मंशा और लोगों के समर्थन से श्रीलंका सच्‍चा सामंजस्‍य और विकास हासिल करेगा ताकि श्रीलंकाई तमिल समुदाय सहित सभी श्रीलंकाई समानता, न्‍याय, शां‍ति और इज्‍जत से संयुक्‍त श्रीलंका में रह सकें।

हम दोनों देशों, दक्षिण एशिया और हमारे समुद्री क्षेत्रों के लिए आपकी प्रगति महत्‍वपूर्ण है।मेरे और प्रधानमंत्री के बीच आज बढि़या चर्चा हुई।

हम, मार्च से मुद्रा विनिमय व्‍यवस्‍था सहित द्विपक्षीय संबंधों में कुछ महत्‍वपूर्ण प्रगति का स्‍वागत करते हैं। हम आशा व्‍यक्‍त करते हैं कि अब महत्‍वपूर्ण द्विपक्षीय पहलों और परियोजनाओं में तेजी से प्रगति होगी।

हम दोनों मजबूत आर्थिक संबंध चाहते हैं। हम चाहते हैं कि हमारा व्‍यापार बढ़े और श्रीलंका के लिए अधिक संतुलित बने। हमने यह चर्चा की कि व्‍यापार और निवेश के लिए द्विपक्षीय प्रबंधों सहित इन लक्ष्‍यों को हम अधिक खुले और प्रतिस्‍पर्धी भारतीय बाजार में किस तरह हासिल कर सकते हैं।

मैंने उन भारतीय निवेशकों के लिए उनकी मदद मांगी है जो विशेष रूप से बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र में श्रीलंका के आर्थिक विकास में भाग लेने के इच्‍छुक हैं।

मैंने मानवीय और आर्थिक संबंधो को गहरा करने के लिए दोनों देशों के दरम्‍यान जुड़ाव को मजबूती प्रदान करने के लिए भारत की पूरी मदद की पेशकश की है जिससे हमारे समाज के सभी वर्गों को लाभ पहुंचेगा।

मैंने प्रधानमंत्री श्री विक्रमसिंघे को बुनियादी ढांचा रेलवे, ऊर्जा, समुदाय, विकास परियोजनाएं, कृषि, क्षमता बढ़ाने, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और नागरिक परमाणु क्षेत्र में हमारी विकास भागीदारी के लिए लगातार प्रतिबद्धता का आश्‍वासन दिया है।

हम लोगों के बीच संबंधों को लगातार बढ़ावा देते रहेंगे। हाल ही में दोनों देश के बीच टेस्ट मैचों की एक दिलचस्प श्रृंखला समाप्त हुई है। हम सभी को क्रिकेट के मैदान पर महान क्रिकेटर कुमार संगकारा की कमी खलेगी।

हम अपने मजबूत गठबंधन के सुरक्षा हितों के महत्‍व को समझते हैं और हमें एक दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशील बने रहने की जरूरत है। हम दोनों अपने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।

हम आतंकवाद का मुकाबला करने में अपने सहयोग को अधिक व्‍यापक बनाएंगे और अपने आसपास के समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के लिए मिलकर काम करेंगे। रक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्रीलंका हमारा सबसे बड़ा भागीदार है और हम इस क्षेत्र में अपना सहयोग लगातार बढ़ाते रहेंगे।

प्रधानमंत्री और मैंने मछुआरों के मुद्दे पर भी विचार- विमर्श किया। हम इस बात पर सहमत हैं कि दोनों पक्षों के मछुआरा संघों को इस मुद्दे का समाधान निकालने के लिए अपने प्रयास जारी रखने चाहिए।

मैंने उन्‍हें अवगत कराया है कि इस मुद्दे को मानवीय मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए क्‍योंकि इससे मछुआरों की जीविका प्रभावित होती है। मैंने उन्‍हें भारतीय मछुआरों को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए प्रोत्‍साहित करने हेतु उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी।

अंत में, मुझे यह कहना है कि भारत और श्रीलंका की एक दूसरे की सफलता, स्थिरता और हमारे क्षेत्र के विकास में बड़ी हिस्सेदारी है।

यह एक ऐसा संबंध है जो साधारण भारतीयों और श्रीलंका के लोगों के दिलों को छूता है। यह दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से बड़ा महत्वपूर्ण भी है। राष्ट्रपति सिरिसेना और प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे के साथ, हम बड़ी आशा के साथ भविष्य की ओर देख सकते हैं।

धन्यवाद।

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प्रधानमंत्री ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, गुरु सेवा को बताया ज्ञान प्राप्ति का मार्ग
May 12, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने संस्कृत में एक सुभाषितम को साझा किया, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि केवल गुरु की समर्पित सेवा से ही ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत में एक सुभाषितम साझा किया-

"यथा खात्वा खनित्रेण भूतले वारि विन्दति।

तथा गुरुगतां विद्यां शुश्रूषुरधिगच्छति॥"

सुभाषितम् यह बताता है कि जिस प्रकार पानी प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत और धैर्य से धरती को खोदना पड़ता है, उसी प्रकार ज्ञान भी केवल गुरु की निष्ठापूर्वक सेवा करने, विश्वास, समर्पण, अनुशासन और ईमानदारी के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट किया:

"यथा खात्वा खनित्रेण भूतले वारि विन्दति।

तथा गुरुगतां विद्यां शुश्रूषुरधिगच्छति॥"