डिजिटल इंडिया का एक दशक

Published By : Admin | July 1, 2025 | 09:00 IST

दस साल पहले, हमने बहुत दृढ़ विश्वास के साथ अज्ञात क्षेत्र में एक साहसिक यात्रा शुरू की।

जबकि दशकों तक भारतीयों की; टेक्नोलॉजी का उपयोग करने की क्षमता पर संदेह किया जाता रहा, हमने इस अप्रोच को बदल दिया और भारतीयों की, टेक्नोलॉजी का उपयोग करने की क्षमता पर भरोसा किया।

जबकि दशकों तक यह सोचा जाता रहा कि टेक्नोलॉजी के उपयोग से संपन्न और वंचित के बीच की खाई और गहरी हो जाएगी, हमने इस मानसिकता को बदल दिया और संपन्न एवं वंचित के बीच की खाई को खत्म करने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग किया।

जब इरादा सही हो, तो इनोवेशन, कम सशक्त लोगों को सशक्त बनाता है। जब अप्रोच, समावेशी होता है, तो टेक्नोलॉजी; हाशिये पर रहने वालों के जीवन में बदलाव लाती है।

इस विश्वास ने डिजिटल इंडिया की नींव रखी: पहुँच को लोकतांत्रिक बनाने, समावेशी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने और सभी के लिए अवसर प्रदान करने का मिशन।

2014 में, इंटरनेट की पहुंच सीमित थी, डिजिटल साक्षरता कम थी और सरकारी सेवाओं तक ऑनलाइन पहुंच दुर्लभ थी। कई लोगों को संदेह था कि क्या भारत जैसा विशाल और विविधतापूर्ण देश वास्तव में डिजिटल हो सकता है।

आज, उस सवाल का जवाब न केवल डेटा और डैशबोर्ड में है, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के जीवन में भी है। हम कैसे गवर्न करते हैं, कैसे सीखते हैं, लेन-देन करते हैं और कैसे निर्माण करते हैं, डिजिटल इंडिया हर जगह है।

डिजिटल खाई को पाटना

2014 में भारत में करीब 25 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन थे। आज यह संख्या बढ़कर 97 करोड़ से ज़्यादा हो गई है। 42 लाख किलोमीटर से ज़्यादा ऑप्टिकल फाइबर केबल, जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से 11 गुना ज़्यादा है, अब सबसे दूरदराज के गांवों को भी जोड़ती है।

भारत में 5G की शुरुआत दुनिया में सबसे तेज़ गति से हुई है, जहाँ सिर्फ़ दो साल में 4.81 लाख बेस स्टेशन स्थापित किए गए हैं। हाई-स्पीड इंटरनेट अब शहरी केंद्रों और गलवान, सियाचिन और लद्दाख सहित अग्रिम सैन्य चौकियों तक पहुँच गया है।

इंडिया स्टैक, जो हमारी डिजिटल रीढ़ है, ने UPI जैसे प्लेटफ़ॉर्म को सक्षम किया है, जो अब सालाना 100+ बिलियन लेनदेन को संभालता है। सभी वास्तविक समय के डिजिटल लेनदेन में से लगभग आधे भारत में होते हैं।

Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से, ₹44 लाख करोड़ से अधिक सीधे नागरिकों को ट्रांसफर किए गए हैं, जिससे बिचौलियों को हटाया गया है और ₹3.48 लाख करोड़ की लीकेज की बचत हुई है।

SVAMITVA जैसी योजनाओं ने 2.4 करोड़ से अधिक संपत्ति कार्ड जारी किए हैं और 6.47 लाख गांवों की मैपिंग की है, जिससे भूमि से संबंधित अनिश्चितता के वर्षों का अंत हुआ है।

सभी के लिए अवसर का लोकतंत्रीकरण

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था MSMEs और छोटे उद्यमियों को पहले से कहीं ज़्यादा सशक्त बना रही है।

ONDC (डिजिटल कॉमर्स के लिए ओपन नेटवर्क) एक क्रांतिकारी प्लेटफ़ॉर्म है जो खरीदारों और विक्रेताओं के विशाल बाज़ार के साथ सहज कनेक्शन प्रदान करके अवसरों की एक नई खिड़की खोलता है।

GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) आम आदमी को सरकार के सभी अंगों को सामान और सेवाएँ बेचने में सक्षम बनाता है। यह न केवल आम आदमी को एक विशाल बाज़ार के साथ सशक्त बनाता है बल्कि सरकार के लिए पैसे भी बचाता है।

कल्पना कीजिए: आप मुद्रा लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं। अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क के ज़रिए आपकी क्रेडिट योग्यता का मूल्यांकन किया जाता है। आपको अपना लोन मिल जाता है और आप अपना उद्यम शुरू कर देते हैं। आप GeM पर रजिस्टर होते हैं, स्कूलों और अस्पतालों को सप्लाई करते हैं और फिर ONDC के ज़रिए आगे बढ़ते हैं।

ONDC ने हाल ही में 200 मिलियन ट्रांज़ेक्शन को पार कर लिया है, जिसमें से आखिरी 100 मिलियन ट्रांज़ेक्शन सिर्फ़ छह महीनों में हुए हैं। बनारसी बुनकरों से लेकर नागालैंड के बांस कारीगरों तक, विक्रेता अब बिना किसी बिचौलिए या डिजिटल एकाधिकार के, पूरे देश में ग्राहकों तक पहुँच रहे हैं।


GeM ने 50 दिनों में ₹1 लाख करोड़ GMV को भी पार कर लिया है, जिसमें 1.8 लाख से अधिक महिलाओं के नेतृत्व वाले MSME सहित 22 लाख विक्रेताओं ने ₹46,000 करोड़ के ऑर्डर पूरे किए हैं।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत की ग्लोबल ऑफरिंग

आधार, कोविन, डिजीलॉकर और फास्टैग से लेकर पीएम-वाणी और वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन तक भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का अब वैश्विक स्तर पर अध्ययन और अपनाया जा रहा है।

कोविन ने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को सक्षम बनाया, 220 करोड़ QR-verifiable प्रमाणपत्र जारी किए। 54 करोड़ यूजर्स के साथ डिजीलॉकर 775 करोड़ से अधिक दस्तावेजों को सुरक्षित और निर्बाध रूप से होस्ट करता है।

हमारे G20 प्रेसीडेंसी के माध्यम से, भारत ने ग्लोबल DPI रिपॉजिटरी और $25 मिलियन का सोशल इम्पैक्ट फंड लॉन्च किया, जिससे अफ्रीका और दक्षिण एशिया के देशों को समावेशी डिजिटल इकोसिस्टम अपनाने में मदद मिली।

स्टार्टअप पावर और आत्मनिर्भर भारत का संगम

भारत अब दुनिया के शीर्ष 3 स्टार्टअप इकोसिस्टम में शुमार है, जहाँ 1.8 लाख से ज़्यादा स्टार्टअप हैं। लेकिन यह सिर्फ़ स्टार्टअप मूवमेंट से कहीं ज़्यादा है, यह एक तकनीकी पुनर्जागरण है।

जब बात युवाओं में एआई स्किल पैठ और एआई talent concentration की आती है तो भारत बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

1.2 बिलियन डॉलर के India AI Mission के माध्यम से, भारत ने 34,000 जीपीयू तक वैश्विक स्तर पर बेजोड़ कीमतों पर 1 डॉलर/जीपीयू प्रति घंटे से भी कम कीमत पर पहुंच को सक्षम किया है, जिससे भारत न केवल सबसे किफायती इंटरनेट अर्थव्यवस्था बन गया है, बल्कि सबसे किफायती कंप्यूट डेस्टिनेशन भी बन गया है।

भारत ने humanity-first AI का समर्थन किया है। एआई पर New Delhi Declaration जिम्मेदारी के साथ इनोवेशन को बढ़ावा देती है। हम पूरे देश में AI Centres of Excellence स्थापित कर रहे हैं।

आगे की राह

अगला दशक और भी अधिक परिवर्तनकारी होगा। हम डिजिटल गवर्नेंस से ग्लोबल डिजिटल नेतृत्व की ओर, India-first से India-for-the-world की ओर बढ़ रहे हैं।

डिजिटल इंडिया, केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, यह लोगों का आंदोलन बन गया है। यह एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और भारत को दुनिया के लिए एक विश्वसनीय इनोवेशन भागीदार बनाने के लिए अहम है।

सभी इनोवेटर्स, उद्यमियों और सपने देखने वालों के लिए: दुनिया, अगली डिजिटल सफलता के लिए भारत की ओर देख रही है।

आइए, हम वह बनाएं, जो सशक्त करे।

आइए, हम वह हल करें, जो वास्तव में मायने रखता है।

आइए, हम ऐसी तकनीक से नेतृत्व करें जो जोड़ती है, सबको साथ लाती है और सबका उत्थान करती है।

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इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026: AI के लिए मानव-केंद्रित भविष्य का निर्माण
February 22, 2026

मानव इतिहास के एक निर्णायक दौर में, दुनिया नई दिल्ली में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में एक साथ जुटी। भारत के लिए यह बेहद गर्व और खुशी का अवसर था, जब हमने दुनिया भर से आए राष्ट्राध्यक्षों, सरकारों के प्रमुखों, प्रतिनिधियों और इनोवेशन से जुड़े लोगों का स्वागत किया।

भारत जो भी करता है, उसे बड़े पैमाने और पूरे उत्साह के साथ करता है, और यह समिट भी इससे अलग नहीं थी। 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। इनोवेटर्स ने अत्याधुनिक एआई उत्पाद और सेवाएं पेश कीं। प्रदर्शनी हॉल में हजारों युवा नजर आए, जो सवाल पूछ रहे थे और नई संभावनाओं की कल्पना कर रहे थे। उनकी जिज्ञासा ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे लोकतांत्रिक AI समिट बना दिया। मैं इसे भारत की विकास यात्रा का अहम पड़ाव मानता हूं, क्योंकि AI इनोवेशन और उसके इस्तेमाल को लेकर जन आंदोलन सच में शुरू हो चुका है।

मानव इतिहास में कई ऐसी तकनीकी क्रांतियां हुई हैं, जिन्होंने सभ्यता की दिशा बदल दी। आर्टिफिशियल-इंटेलिजेंस भी आग, लेखन, बिजली और इंटरनेट जैसी ही बड़ी खोजों की श्रेणी में आती है। लेकिन AI के साथ फर्क यह है कि जो बदलाव पहले दशकों में होते थे, वे अब कुछ ही हफ्तों में हो सकते हैं और पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं।

AI मशीनों को बुद्धिमान बना रहा है, लेकिन यह मानव की सोच और इरादों को कई गुना ताकत देने वाला साधन भी है। इसलिए AI को मशीन केंद्रित नहीं, बल्कि मानव केंद्रित बनाना बेहद जरूरी है। इस समिट में हमने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत के साथ ग्लोबल AI चर्चा के केंद्र में मानव कल्याण को रखा।

मैं हमेशा मानता रहा हूं कि तकनीक लोगों की सेवा के लिए होनी चाहिए, न कि लोग तकनीक के लिए। चाहे बात UPI के जरिए डिजिटल भुगतान की हो या कोविड टीकाकरण की, हमने यह सुनिश्चित किया कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर हर व्यक्ति तक पहुंचे और कोई पीछे न छूटे। समिट में भी यही भावना साफ दिखी। कृषि, सुरक्षा, दिव्यांगजनों की सहायता और बहुभाषी समाज के लिए उपकरण जैसे क्षेत्रों में हमारे इनोवेटर्स के काम में यह सोच नजर आई।

भारत में AI की ताकत लोगों को सशक्त बनाने के कई उदाहरण पहले से मौजूद हैं। हाल ही में भारतीय डेयरी सहकारी संस्था AMUL द्वारा शुरू की गई AI आधारित डिजिटल सहायक ‘Sarlaben’ 36 लाख डेयरी किसानों, जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं, को उनकी अपनी भाषा में पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन से जुड़ी रियल टाइम जानकारी दे रही है। इसी तरह ‘Bharat VISTAAR’ नाम का AI आधारित प्लेटफॉर्म किसानों को बहुभाषी जानकारी देता है। मौसम से लेकर बाजार भाव तक की जानकारी देकर यह उन्हें सशक्त बना रहा है।

इंसानों को डेटा पॉइंट, मशीनों के लिए कच्चा माल नहीं बनना चाहिए

इंसानों को कभी भी सिर्फ डेटा पॉइंट या मशीनों के लिए कच्चा माल नहीं बनना चाहिए। इसके बजाय, AI को दुनिया की भलाई के लिए एक टूल बनना चाहिए, जो ग्लोबल साउथ के लिए तरक्की के नए दरवाजे खोले। इस सोच को अमल में लाने के लिए, भारत ने मानव-केंद्रित AI गवर्नेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क पेश किया।

M – नैतिक और एथिकल सिस्टम: AI को एथिकल गाइडलाइंस पर आधारित होना चाहिए।
A – जवाबदेह गवर्नेंस: पारदर्शी नियम और मजबूत निगरानी।
N – राष्ट्रीय संप्रभुता: डेटा पर राष्ट्रीय अधिकारों का सम्मान।
A – सुलभ और समावेशी: AI पर मोनोपॉली नहीं होनी चाहिए।
V – वैध और प्रामाणिक: AI को कानूनों का पालन करना चाहिए और वेरिफाई किया जा सकने वाला होना चाहिए।

MANAV, जिसका मतलब है “इंसान”, ऐसे सिद्धांत बताता है जो 21वीं सदी में AI को इंसानी मूल्यों से जोड़ते हैं।

भरोसा ही वह नींव है जिस पर AI का भविष्य टिका है। जैसे-जैसे जेनरेटिव सिस्टम दुनिया को कंटेंट से भर रहे हैं, डेमोक्रेटिक समाजों को डीपफेक और गलत जानकारी से खतरा है। जैसे खाने की चीज़ों पर न्यूट्रिशन लेबल होते हैं, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर ऑथेंटिसिटी लेबल होने चाहिए। मैं दुनिया भर के लोगों से वॉटरमार्किंग और सोर्स वेरिफिकेशन के लिए शेयर्ड स्टैंडर्ड बनाने के लिए एक साथ आने की अपील करता हूं। भारत ने पहले ही इस दिशा में एक कदम उठाया है, जिसमें सिंथेटिक तरीके से बनाए गए कंटेंट की साफ लेबलिंग को कानूनी तौर पर ज़रूरी कर दिया गया है।

हमारे बच्चों की भलाई हमारे दिल के बहुत करीब है। AI सिस्टम को ऐसे सेफगार्ड के साथ बनाया जाना चाहिए जो जिम्मेदार, फ़ैमिली-गाइडेड एंगेजमेंट को बढ़ावा दें, और वैसी ही केयर दिखाएं जैसी हम दुनिया भर के एजुकेशन सिस्टम में करते हैं।

टेक्नोलॉजी का सबसे ज़्यादा फ़ायदा तब होता है जब उसे शेयर किया जाता है, न कि उसे एक स्ट्रेटेजिक एसेट की तरह बचाकर रखा जाता है। ओपन प्लेटफ़ॉर्म लाखों युवाओं को टेक्नोलॉजी को ज़्यादा सुरक्षित और ज़्यादा ह्यूमन-सेंट्रिक बनाने में मदद कर सकते हैं। यह कलेक्टिव इंटेलिजेंस ही इंसानियत की सबसे बड़ी ताकत है। AI को एक ग्लोबल कॉमन गुड के तौर पर विकसित होना चाहिए।

हम एक ऐसे दौर में जा रहे हैं जहाँ इंसान और इंटेलिजेंट सिस्टम मिलकर बनाएंगे, मिलकर काम करेंगे और मिलकर आगे बढ़ेंगे। पूरी तरह से नए प्रोफेशन सामने आएंगे। जब इंटरनेट शुरू हुआ, तो कोई भी इसकी संभावनाओं के बारे में सोच भी नहीं सकता था। इसने बहुत सारे नए मौके पैदा किए, और AI भी ऐसा ही करेगा।

मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे मज़बूत युवा AI युग के असली ड्राइवर होंगे। हम दुनिया के कुछ सबसे बड़े और सबसे अलग-अलग तरह के स्किलिंग प्रोग्राम चलाकर स्किलिंग, रीस्किलिंग और लाइफलॉन्ग लर्निंग को बढ़ावा दे रहे हैं।

भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और टेक्नोलॉजी टैलेंट का घर है। हमारी एनर्जी कैपेसिटी और पॉलिसी क्लैरिटी के साथ, हम AI की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए खास स्थिति में हैं। इस समिट में, मुझे भारतीय कंपनियों को स्वदेशी AI मॉडल और एप्लिकेशन लॉन्च करते देखकर गर्व हुआ, जो हमारी युवा इनोवेशन कम्युनिटी की टेक्नोलॉजिकल गहराई को दिखाते हैं।

हमारे AI इकोसिस्टम की ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए, हम एक मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर फाउंडेशन बना रहे हैं। इंडिया AI मिशन के तहत, हमने हज़ारों ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाए हैं और जल्द ही और लगाने वाले हैं। बहुत सस्ते रेट पर वर्ल्ड-क्लास कंप्यूटिंग पावर एक्सेस करके, सबसे छोटे स्टार्ट-अप भी ग्लोबल प्लेयर बन सकते हैं। इसके अलावा, हमने एक नेशनल AI रिपॉजिटरी बनाई है, जिससे डेटासेट और AI मॉडल तक एक्सेस सबको मिलता है। सेमीकंडक्टर और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर वाइब्रेंट स्टार्ट-अप और एप्लाइड रिसर्च तक, हम पूरी वैल्यू चेन पर फोकस कर रहे हैं।

भारत की विविधता, लोकतंत्र और डेमोग्राफिक गतिशीलता सबको साथ लेकर चलने वाले इनोवेशन के लिए सही माहौल देते हैं। भारत में सफल होने वाले समाधान हर जगह मानवता की सेवा कर सकते हैं। इसीलिए दुनिया से हमारा आह्वान है: भारत में डिजाइन और डेवलप करें। दुनिया तक पहुंचाएं। मानवता की सेवा में पहुंचाएं।

स्रोत: The Jerusalem Post

(लेखक भारत के प्रधानमंत्री हैं)