प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत की प्रगति की कुंजी के रूप में बुद्धि (सरस्‍वती) और समृद्धि (लक्ष्‍मी) के संयोग पर बल दिया। प्रोफेसर भालचंद्र नेमाडे को 50वें ज्ञानपीठ पुरस्‍कार से सम्‍मानित करने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि रचनात्‍मक लेखन में अनेक पीढि़यों के जीवन का स्‍पर्श करने की क्षमता है। उन्‍होंने दुहराया कि आज विश्‍व के समक्ष ग्‍लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की समस्‍याओं का समाधान वेदों में ढूंढा जा सकता है। प्रोफेसर भालचंद्र नेमाडे के लेखन की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने श्री अरविंदो से उनके दृष्टिकोण की तुलना की। उन्‍होंने कहा कि प्रोफेसर नेमाडे का लेखन अनेक पीढि़यों को प्रेरित करेगा। प्रधानमंत्री ने बल दिया कि साहित्‍य प्रौद्योगिकी के वर्तमान युग में बेहद महत्‍वपूर्ण है।

PM presents 50th Jnanpeeth Award to Prof Bhalchandra Nemade (7)

प्रधानमंत्री ने पुस्‍तकों और पढ़ने में घट रही रूचि पर खेद प्रकट किया। उन्‍होंने कहा कि लोगों को अपने घरों में पुस्‍तकों के लिए खास जगह रखनी चाहिए। उन्‍होंने वान्‍चे गुजरात (पढ़े गुजरात) पहल का उल्‍लेख किया जो उन्‍होंने गुजरात के मुख्‍यमंत्री रहते हुए आरंभ की थी।

PM presents 50th Jnanpeeth Award to Prof Bhalchandra Nemade (14)

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प्रधानमंत्री ने पावन पृथ्‍वी को राष्ट्र की शक्ति के स्रोत के रूप में वर्णित करने वाले संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
March 10, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने संस्कृत में रचित सुभाषितम् को साझा किया, जिसमें पावन पृथ्‍वी को राष्ट्र की शक्ति के स्रोत के रूप में वर्णित किया गया है।

“यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।

यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।

सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥”

सुभाषितम् का अर्थ है कि पृथ्वी, जो महासागरों के रूप में जल से परिपूर्ण है और बाहरी रूप से जल से घिरी है, जिसे विद्वानों ने अपने ज्ञान से जाना है और जिसका हृदय विशाल आकाश में शाश्वत सत्य से ओत-प्रोत है - वह पृथ्वी एक महान राष्ट्र के रूप में हमारी ऊर्जा और शक्ति को बनाए रखे।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर अपनी पोस्‍ट में लिखा;

“यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।

यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।

सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥”