प्रधानमंत्री ने नव शैपल में प्रथम विश्‍व युद्ध स्‍मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की, यह स्‍मारक प्रथम विश्‍व युद्ध के दौरान फ्रांस और बेल्जियम में हुई लड़ाइयों में प्राण न्‍यौछावर करने वाले करीब 4700 भारतीय सैनिकों के सम्‍मान में बनाया गया है। प्रधानमंत्री ने स्‍मारक पर आगंतुक पुस्तिका में लिखा, ‘’विश्‍वयुद्ध के दौरान विदेशी धरती पर लड़ने वाले हमारे सैनिकों ने अपने समर्पण, वफादारी, साहस और बलिदान के बल पर दुनिया भर से सराहना प्राप्‍त की। मैं उन्‍हें सलाम करता हूं’’

उन्‍होंने नव शैपल में स्‍मारक के बाहर एकत्र भारतीय मूल के युवाओं से भी मुलाकात की। उन्‍होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे उनके साथ ‘शहीदों अमर रहो’ का नारा लगाएं।

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प्रधानमंत्री ने शक्ति और क्षमता के सामंजस्य पर बल देने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 13, 2026
प्रधानमंत्री ने 1998 के परमाणु परीक्षणों को हमारे राष्ट्र के संकल्प का निर्णायक क्षण बताया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज मई 1998 में पोखरण में भारत द्वारा किए गए ऐतिहासिक परमाणु परीक्षणों को याद करते हुए उन्हें हमारे राष्ट्र के संकल्प का निर्णायक क्षण बताया। श्री मोदी ने कहा, “11 मई के परीक्षणों के बाद, पूरी दुनिया ने भारत पर दबाव बनाया, लेकिन हमने यह सिद्ध कर दिया कि कोई भी शक्ति भारत को झुका नहीं सकती।”

प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-

“एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता ।

न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः।।”

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पोस्‍ट पर लिखा;

“1998 में इसी दिन भारत ने जो परमाणु परीक्षण किए थे, उनसे दुनिया को पता चला कि हमारे देश की इच्छाशक्ति कितनी अटल है! 11 मई के टेस्ट के बाद पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन हमने दिखाया कि कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती।

एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता ।

न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः।।”