प्‍यारे जवानों

आप सबको बड़ा सरप्राइज हुआ होगा कि मैं आज आपको बिना बताए आपका मेहमान बन गया। लेकिन मुझे लगता है कि मैं अपनों के बीच मेहमान कैसे बन सकता हूं और इसलिए मेरी इच्‍छा थी कि बिना बताए ही आपके बीच आ जाऊं। आप यहां परिवार से दूर, देश के लोग आनंद और उत्‍साह के साथ दिवाली मना सके, इसलिए इन बर्फीली पहाडि़यों के बीच, ये श्‍वेत चादर के बीच, जहां न कोई दीया जलाने की संभावना है, ऐसी दुर्गम परिस्थिति में अपने आप को खपा रहे हैं। अपनी जिंदगी देशवासियों की खुशी के लिए आप न्‍यौछावर कर रहे हैं। अपनी जवानी, भारत की जवानी गर्व कर सके, इसलिए आप हर पल, एक ही मंत्र को लेके, एक ही सपना लेकर के, एक ही संकल्‍प लेकर के, और वो है भारत माता की जय।यहां आपकी प्रेरणा, यही आपकी जिंदगी।

मैं समझता हूं, सभी देशवासियों के लिए आपके प्रति जो गौरव का मान है, उसका मूल कारण हर पल, हर परिस्थिति में देश के लिए जीना, देश के लिए मरना, यह आपका जीवन संदेश रहा है। इसलिए थलसेना हो, वायुसेना हो, नौसेना हो, देश के जवानों के प्रति सारा देश गर्व की अनुभूति करता है।

दुनिया का यह दुर्गम से दुर्गम क्षेत्र है, जहां भारत के जवान तैनात हैं। विश्‍व में कही भी पर इनकी कठिनाइयों वाला क्षेत्र नहीं है। विश्‍व में कही भी माइनस 30, माइनस 40 डिग्री temperature में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने आप को तैनात रखने का सौभाग्‍य विश्‍व को किसी को नहीं मिला है और आपने इसे उजागर करके दिखाया है।

मैं विशेष रूप से आया हूं, आपके बीच दिवाली के इस पावन पर्व पर, आपके बीच शरीक होने के लिए। मैं जानता हूं, कि परिवार के बीच दिवाली मनाने को जो आनन्‍द होता है, वह कुछ और होता है। लेकिन, आप तो भारत माता की भक्ति में ऐसे खप गये हैं, कि परिवार कहीं और दिवाली मना रहा है, आप कहीं और मातृभमि की रक्षा में तैनात हैं। मेरे यहां आने से आपके परिवार की कमी में भर नहीं सकता हूं, वह कमी तो रहनी ही रहनी है, लेकिन सवा सौ करोड़ देशवासियों के प्रतिनिधि के रूप में, आपके बीच आ करके, मैं स्‍वयं गौरव अनुभव करता हूं। एक संतोष का भाव अनुभव करता हूं।

प्रधानमंत्री के रूप में मेरे लिए यह पहली दिवाली है। और पहली दिवाली को और अभी-अभी तो मैं चुनाव भी जीता हूं तो एक और भी तो उसमें जरा उमंग-उत्‍साह भरा हुआ है। इन सबको छोड़-छाड़ कर के मैंने दिवाली कुछ समय आपके साथ और कुछ समय श्रीनगर के बाढ़ पीडि़तों के बीच बिताने का तय किया है।

अभी जब श्रीनगर में बाढ़ भाई, जिस प्रकार से हमारे सेना के जवानों ने मानवता की ऊंचाई दिखाई है, हमारे कुछ जवानों को अपना जीवन देना पड़ा, उनकी जिंदगी बचाने के लिए और यही तो सबसे बड़ी मिसाल है। जो हमारे जवानों ने दिखायी है। आज भारत चैन से सोता है, क्‍योंकि आप दिन रात जगते हैं। वो सुख-शांति की जिंदगी जीता है, क्‍योंकि आप कष्‍ट झेलते हैं।

भाइयों-बहनों, अब तो सेना में भले ही कम मात्रा में, लेकिन महिलाओं ने भी अपना शौर्य-अपना सामर्थ दिखाना प्रारंभ किया है। यह हमें गौरव प्रदान करता है। सेना के जवानों के बीच आकर के मैं गर्व महसूस करता हूं। आप कल्‍पना कर सकते हैं कि सियाचिन में, इन बर्फीली पहाडि़यों में, कितने कितने हमारे नौजवान शहीद हो चुके हैं। सफेद चद्दर ओढ़कर के सौ गए और किसी का शरीर 21 साल के बाद मिलता है। पता नहीं, कितने ही ऐसे जीवन होंगे, जिनका अभी भी परिवार वालों को इंतजार होगा।

आजादी के लिए फांसी के तख्‍त पर चढ़ने वाले लोग इतिहास में अमर हो जाते हैं। ये आजादी के लिए जिए, मरे और आजादी के लिए मरे। और, आप वे लोग हैं , जो देश आजाद रहे, देश का सामान्‍य मानव सुख-चैन की जिदंगी जिये, इसलिए अपने आप को अर्पित करने के लिए प्रति पल संकल्‍पबद्ध रहते हैं।

ये बलिदान कम नहीं है। ये त्‍याग, ये तपस्‍चर्या,ये Discipline हमें गर्व दिलाती है, देश को गर्व दिलाती है। विश्‍व के अनेक फौज के अंदर भारत के फौजियों का अपना एक सम्‍मान है, उनके जीवन और आचरण के कारण, डिसिप्लिन के कारण, सामान्‍य मानवों के प्रति उनके व्‍यवहार के कारण और संकट के समय उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर करके उनके सुख-दुख को बांटना।

भारत की फौज सिर्फ दुश्‍मनों के लिए खतरा बनकर जीने वाली फौज नहीं है, वह दुश्‍मनों के लिए जितना संकट पैदा करती है, उतना ही अपनों के लिए जीवन प्रदान करती है। कोई भी ऐसा प्राकृतिक संकट नहीं आया है, जिसमें हमारी सेना के जवान पहुंचे ना हों। दिन-रात मेहनत ना किये हों। भारत आपके प्रति गौरव का अनुभव करता है। जब तक कोई इन बर्फीले ग्‍लेशियर को नहीं देखेगा, माइनस 30-40 डिग्री में जवान कैसे तैनात होता है, इसे देखेगा नहीं, उसे कल्‍पना नहीं आ सकती है कि हमारे फौज, हमारे हवान कितनी कठिनाइयों के बीच, कितने दुर्गम इलाकों के बीच, मातृभूमि की रक्षा के लिए पुरूषार्थ कर रहे हैं।

मेरा एक सौभाग्‍य है आज कि भारत के एक प्रधान सेवक के रूप में मुझे आपके हालात को अपनी आंखों से देखने का अवसर मिला है। अनुभव करने का अवसर मिला है। मैं इन ऊंचाईयों पर जब पहुंचा तो हमारे साथ वाले डॉक्‍टर हर पल मुझे देख रहे थे। मेरा बीपी चैक कर रहे थे मेरा, oxygen चेक कर रहे थे। उसी से पता चलता है कि कितनी गंभीर अवस्‍था में आप लोग रहते हैं, कितनी कठिनाइयों में आप रहते है।

मैं विश्‍वास दिलाता हूं मेरे देश के जवानों को, चाहे वो सीमा पर तैनात हों या कैंटोनमेंट में हो, वो सेवारत हो या सेवानिवृत हों, सवा सौ करोड़ का देश आपके साथ खडा़ हुआ है। आपके सपने, आपकी जिम्‍मेवारी, ये देश के सपने और देश की जिम्‍मेवारी है। यहां से निकलने के बाद कभी आपको किसी चीज के लिए किसी पर निर्भर रहना पड़े, ये मुझे मंजूर नहीं है। सेना के जीवन के बाद भी आप और आपका परिवार गौरव से जिये, सम्‍मान से जिये, ऐसी व्‍यवस्‍था हमेशा रहे, ये मेरी प्रतिबद्धता है, ये मेरी इच्‍छा है।

One Rank-One Pension, कितने दशक बीत गए, ये सपना आपका पूरा करना मेरे ही भाग्‍य में लिखा हुआ है। इसलिए, और मेरा लगाव भी है, आप लोगों के सा,थ मेरा लगाव भी है। हमारे जवानों के लिए एक हमेशा emotional विषय रहा है कि एक National level का war Memorial क्‍यों ना हो? मेरे साथियों, विश्‍व में हम गर्व कर सकें, ऐसा war memorial बनाने का हमने निर्णय ले लिया है, budget में उसका allocation कर दिया है, काम उसका चल रहा है, उसकी डिजाइन-विजाइन के लिए बहुत तेज गति से काम चल रहा है। इसलिए देश के लिए जीने-मरने वाले फौजी के लिए उमंग और जो उत्‍साह होता है, उसकी जो प्रेरणा होती है, उसकी चिंता करना पूरे देश की जिम्‍मेदारी है, शासन की जिम्‍मेदारी है। इसे निभाने के लिए मैं संकल्‍पबद्ध हूं।

मैं देशवासियों को भी इस ऊंचाई से दीपावली की आज मैं शुभकामनाएं दे रहा हूं। शायद ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा। मैं उन चोटियों तक हो आया हूं, जहां माइनस 30 डिग्री temperature रहता है। जहां हमारे जवान तैनात हैं। मैं इस ऊंचाई से भार‍तवासियों को, भारत के साथ जीने-मरने वाले जवानों के साथ खड़ा रह कर एक विशिष्‍ट रूप में दीपावली की शुभकामनाएं देता हूं। मैं विश्‍वास करता हूं कि आप जो दिवाली की दीया जला रहे हैं, उस रोशनी के मूल में हमारे इन जवानों का पसीना भी है, उनका त्‍याग भी है, तपस्‍या भी है। इसलिए दिवाली के इस पावन पर्व पर हम भी हमारी रक्षा करने वाले हमारा दीया कभी बुझ न जाए। इसमें जिदंगी खपाने वाले उन जवानों का स्‍मरण करते रहे, उनका गौरव करते रहें। एक स्‍वाभिमानी राष्‍ट्र के रूप में हम भी, जवान अगर सीमा की रक्षा करता है तो नागरिक सामान्‍य मानव के सपनों की चिंता करे और ये दोनों का साथ-साथ चलना ही राष्‍ट्र के उज्‍जवल भविष्‍य की गारंटी होती है।

मैं फिर एक बार आप सबको दिवाली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। आपके बीच आने का मुझे अवसर मिला, ऐसी दुर्गम जगह पर आने का अवसर मिला, ये मेरा सौभाग्‍य रहा है। मैं आपका हूं, मैं आपके लिए हूं, आपके बीच हूं, प्रतिपल आपके साथ हूं, ये विश्‍वास दिलाने आया हूं और हम सब मिलकर के मां भारती की सेवा में लगे हैं और अच्‍छी भारत मां की सेवा करेंगे। इस विश्‍वास को आगे बढ़ाते चलेंगे, इसी भावना के साथ फिर एक बार आपको भी और इन दुर्गम पहाडि़यों से देशवासियों को भी मेरी दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

विश्‍वभर में फैले हुए भारतीय समाज को भी दीपावली की मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत बहुत धन्‍यवाद। भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

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भारत-न्यूजीलैंड संबंध स्थायी मित्रता, समान मूल्यों और साझा प्रतिबद्धता पर आधारित हैं: ऑकलैंड में पीएम मोदी
July 11, 2026

नमस्ते !
की ओरा New Zealand!

हम भारत के लोग सुनते आए थे, 20 साल के बाद। लेकिन आज चालीस साल बाद कोई भारतीय पीएम न्यूज़ीलैंड की धरती पर आया है। ये मेरा सौभाग्य है। मैं न्यूजीलैंड के सभी निवासियों के लिए, आप सभी लोगों के लिए, 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं।

साथियों,

ये प्रधानमंत्री के रूप में भले ही मेरा पहला न्यूज़ीलैंड दौरा है। लेकिन 25-30 साल पहले, जब मैं किसी सरकार में भी हिस्सा नहीं था, सार्वजनिक जीवन में मुझे कोई जानता नहीं था, तब भी मुझे यहां न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। और उस समय, मुझे किसी ने गिफ्ट में तीन चीजें दी थीं जो मैं वापस इंडिया लेकर के गया था। एक, यह मफ़लर। एक कैप, और एक दस्ताना। क्योंकि ठंड का मौसम था।

और उसमें से एक चीज़ मैं अभी यहां इस कार्यक्रम में भी लेकर आया हूं। यह मफ़लर जो आप देख रहे हैं, यह 25-30 साल पहले मुझे न्यूजीलैंड के एक साथी ने दिया था। इतने साल में मैंने कई बार इसका उपयोग किया, और आज भी इसे बहुत संभाल कर के रखा है। जैसे आपके प्यार को संभाल के रखता हूं।

इस बार जब मेरा यहां आने का कार्यक्रम बना, तो मैं विशेष तौर पर इसे अपने साथ लेकर के आया क्योंकि खबर थी कि ठंड ज्यादा है।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के रिश्ते में यादें भी हैं, दोस्ती भी है, वैल्यूज़ भी हैं और एक कमिटमेंट भी है। इस रिश्ते को न्यूज़ीलैंड की एक सुंदर परंपरा अच्छे से डिफाइन करती है। यहाँ सदियों से एक शब्द लोगों को जोड़ता आया है - वाका। वाका सिर्फ़ एक नाव का नाम नहीं है, वाका हमारी शेयर्ड जर्नी की प्रतीक है। और आज भारत-न्यूजीलैंड की यही वाका एक नई यात्रा पर निकलने के लिए तैयार है।

हमारे सामने अवसरों से भरा खुला समुद्र है, हवाएँ हमारे साथ हैं, समंदर की विशाल लहरें हमारे साथ हैं, इच्छाशक्ति का नीला आसमान हमारे साथ है, पाने को काफी कुछ है, और मैं जानता हूं, हम सफल होंगे।

साथियों,

मुझे इस यात्रा की सफलता पर पूरा भरोसा है, जानते हैं क्यों? मोदी नहीं, क्योंकि इसके असली नाविक आप सभी हैं। ऑकलैंड से वेलिंगटन तक, क्राइस्टचर्च से क्वीन्सटाउन तक, न्यूज़ीलैंड के कोने-कोने में फैला भारतीय समुदाय इस शेयर्ड जर्नी का एक नाविक है।

साथियों,

आगे बढ़ने से पहले, मैं अपने मित्र, प्राइम मिनिस्टर क्रिस्टोफर लक्सन, न्यूज़ीलैंड सरकार के सभी साथियों और यहां लेबर पार्टी के मंबर्स का अभिनंदन करूंगा।

ये दिखाता है कि भारत-न्यूज़ीलैंड रिश्ते को कितना बड़ा बाइ-पार्टिसन सपोर्ट है। इससे ये भी पता चलता है कीवी इंडियन कम्यूनिटी की अचीवमेंट्स आपका कंट्रीब्यूशन कितना बड़ा है। आप यहां आए किवी इंडियन कम्यूनिटी के इस उत्सव का हिस्सा बने इससे ये सेलिब्रेशन और वाइब्रेंट हो गया है।

आपने जिस गर्मजोशी से जिस स्नेह और उत्साह से, आप ने हम सभी का स्वागत किया है मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

वैसे एक्सीलेंसी, किवी इंडियन कम्यूनिटी में भी सुपरहिट हैं। भारत के इंडिपेंडेंस डे पर आपने क्रिस हिपकिंस के साथ मिलकर दमादम मस्त कलंदर गाने पर जो डांस किया वो काफी वायरल हुआ। आपके वो मूव, Kiwi Indians के दिलों में छप गए हैं।

साथियों,

न्यूज़ीलैंड वाकई एक अद्भुत देश है। यहां पीस है, प्रॉसपैरिटी है, नेचर है, कल्चर है, और न्यूज़ीलैंड की असली ताकत, यहां के स्थानीय लोग हैं। न्यूज़ीलैंड के लोगों ने दिखाया है कि कोई देश जब एक जूनून, एक जज्बे के साथ आगे बढ़ता है, तो वो दुनिया को इंस्पायर करता है।

यहां जो किवी इंडियन कम्यूनिटी है, आप सभी को भी न्यूज़ीलैंड के दिलदार लोगों ने बहुत प्रेम से अपनाया है, अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। उन्होंने आपके टैलेंट, आपके विजन पर ट्रस्ट किया है। और आज देखिए, न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी हो, यहां की सोसायटी हो, किवी इंडियन्स नए-नए रंग भर रहे हैं।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां निखिल रविशंकर Air New Zealand के CEO बन सकते हैं। जहां आनंद सत्यानंद गवर्नर जनरल बन सकते हैं जहां क्रिकेट टीम में रचिन रविंद्र, ईश सोढी और एजाज़ पटेल जैसे टैलेंट को अवसर मिल सकता है।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां की सड़कों में भी भारतीय शहरों को सम्मान दिया गया है। कहीं खंडाला है। कहीं बॉम्बे हिल्स हैं। कहीं कोरोमंडल है।

कलकत्ता स्ट्रीट, दिल्ली क्रिसेंट, अमृतसर स्ट्रीट, ऐसे कितने ही नाम हैं। यहां रहते-रहते आप भी पूरे के पूरे Kiwi हो गए हैं। जैसे मुझे बताया गया है कि किसी भी विषय पर बात शुरू कीजिए थोड़ी ही देर में बात मौसम पर पहुँच जाती है!

साथियों,

मैं न्यूज़ीलैंड की लीडरशिप से जब भी मिला हूं, वो आप सभी की बहुत प्रशंसा करते हैं। प्रशंसा आपकी होती है, और माथा मेरा ऊंचा होता है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कि भारत, हज़ारों वर्षों पुरानी सभ्यता है जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में हर दौर में भारत ने खुद को ट्रांसफॉर्म किया है और इसका कारण है, हमारी सीखने की ललक।

भारत सबसे सीखता है हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं जनकल्याण की भावना मायने रखती है और इसलिए हमने न्यूज़ीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।

न्यूज़ीलैंड, दुनिया का वो देश है जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का राइट दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूज़ीलैंड की सोसायटी में वीमेन, बहुत बड़े पैमाने में कंट्रीब्यूट कर रही हैं। भारत भी आज Women Led Development के मंत्र के साथ महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है।

साथियों,

रूरल इकॉनॉमी, कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है ये न्यूज़ीलैंड ने करके दिखाया है। न्यूज़ीलैंड की ताकत, एग्रीकल्चर के इर्द-गिर्द बनाया गया एक एफिशियंट इकोसिस्टम है। ट्रेसेबिलिटी हो, फूड सेफ्टी हो, कंप्लायंस सिस्टम हो ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे, छोटे किसानों वाले बड़े एग्रीकल्चर नेशन के लिए बहुत बड़ी सीख है।

न्यूज़ीलैंड ने ज़ेस्प्री मॉडल से दिखाया है कि छोटे किसान भी बाज़ार के एक बड़े ब्रैंड बन सकते हैं। न्यूज़ीलैंड की क्लाइमेट-स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग टेक्नॉलॉजी में भी हमारे लिए सीखने को बहुत कुछ है।

साथियों,

यहां के मानुका हनी को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां हनी ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा हेल्थ एंड वेलनेस से जुड़ा है वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी हनी का बहुत बड़ा महत्व है। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि भारत में भी हम बी-कीपिंग को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में हनी प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी हुई है।

और आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो हनी आता है, वो गोल्ड क्या, डायमंड बनता जा रहा है। मैं समझता हूं, न्यूजीलैंड से हम हनी प्रोडक्शन और बढ़ाने के बारे में भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

इस साल इंडिया–न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशन्स के सौ साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी। उस टूर में मेजर ध्यानचंद के शानदार परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हुई थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का भी दिल जीत लिया था।

साथियों,

कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं, तो ये कोलैब का जमाना है। न्यूज़ीलैंड और भारत स्पोर्ट्स में भी बहुत ही शानदार कोलैब कर सकते हैं। जैसे एक उदाहरण रग्बी का है। मुझे अभी-अभी बताया गया है कि कुछ देर पहले ही ऑल ब्लैक ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए, इसमें न्यूज़ीलैंड इसमें हमारी बहुत help कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में “न्यूज़ीलैंड रग्बी” और “रग्बी इंडिया” के coaching program को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।

साथियों,

आज यहां आने से पहले, मैं यहाँ न्यूज़ीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप event में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन्स ने नए ideas ने वाकई मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि हम स्पोर्ट्स टेक में साथ मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं।

भारत और न्यूज़ीलैंड का फ्यूचर, आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण, स्पेस सेक्टर भी है। भारत का चंद्रयान जब मून के साउथ पोल पर लैंड किया, पूरा न्यूजीलैंड नाच रहा था उस दिन। और उस दिन हम सबको गर्व हुआ।

अब आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। आपको गर्व दिलाने में इस सक्सेस में न्यूजीलैंड की टेक्नॉलजी का भी योगदान रहा है। न्यूजीलैंड की स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया है। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं।

साथियों,

स्पेस सेक्टर ये बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी, एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती हैं। यही हमारे ट्रेड अग्रीमेंट की भी स्पिरिट है। ये ट्रेड अग्रीमेंट विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा। और भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों के बिजनेस को नए अवसर देगा।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच एक और बहुत बड़ी सम्मानता है। ये समानता, हमारे इंडिजनेस कल्चर की है, इंडिजनेस कल्चर को सेलिब्रेट करने, उसको संरक्षण देने की है। और आज मैं माओरी समाज को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं।

मैंने हाका को केवल एक performance के रूप में ही नहीं देखा। मैंने हाका में, एक समाज की आत्मा देखी है। उसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है, और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एहसास है।

साथियों,

माओरी संस्कृति में एक बहुत सुंदर शब्द है- मना-कितांगा। इसका मतलब है, सम्मान देना, अपनापन देना, और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं 'अतिथि देवो भवः।'

शब्द अलग हैं, परिवेश अलग हैं, पहनावा अलग हैं, भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है।

ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है—फानो यानि परिवार। इसमें कई पीढ़ियाँ होती हैं। रिश्ते होते हैं। पूरा समुदाय होता है। भारत भी, परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता, हमारे लिए फैमिली, एक इंस्टीट्यूशन है।

साथियों,

माओरी परंपरा का एक और सुंदर विचार है— काईत्या कितांगा। ये हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं हैं। हम उसके संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है— 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।' पृथ्वी हमारी माता है। इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए, एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं।

साथियों,

मैं जानता हूं, हजारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी आपके दिल के किसी न किसी कोने में, दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही रहता है, हिंदुस्तान बसता ही है। सही है कि नहीं है? शरीर यहां होगा, मन? और इसीलिए, आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नज़र रखते हैं।

और जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर के देखते हैं, तो बहुत सी चीज़ें देखने की छूट जाती हैं। लेकिन घर में टी.वी. पर बैठकर के जब देखते हैं, तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसा ही, आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। और यही बात हमें सबसे खास बनाती है।

भारतीय देश से बाहर जिस देश में रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में मदद करते हैं, और अपने देश के विकास की भी जानकारी रखते हैं।

साथियों,

हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।

साथियों,

वैश्विक चुनौतियों के बीच, आज भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है वो अभूतपूर्व है। मैं आपके सामने देश की उपलब्धियों का भारत के सामर्थ्य का एक गुलदस्ता प्रस्तुत करुंगा। यह गुलदस्ता मैं आपके लिए लेकर के आया हूँ। और मैं पक्का मानता हूँ इस गुलदस्ते में आपकी पसंद का कोई न कोई फूल ज़रूर होगा, जो आपको सुंदर भी लगेगा और गर्व से भर भी देगा।

तो आप तैयार हैं? गुलदस्ता पेश करूँ? अब आपको ढूँढना है आपका फूल कहाँ है उसमें, या तो सारे के सारे फूल आपके हैं।

साथियों,

भारत आज दुनिया की fastest growing major economy है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा Vaccine Producer है। भारत Mobile Data Consumption में दुनिया के अग्रणी देशों में है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Mobile Manufacturer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Telecom Market है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Wheat Producer है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा Milk Producer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Fish Producer है।

साथियों,

इतना ही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Automobile Market है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है। भारत बहुत जल्द दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Renewable Energy Producer बनने जा रहा है। Solar Energy Capacity में भी भारत दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो चुका है।

साथियों,

आज का भारत, दुनिया को विकास के नए मॉडल भी दे रहा है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े Digital Identity Platform का सफल संचालन कर रहा है। आज भारत में UPI के माध्यम से हर महीने अरबों Digital Transactions हो रहे हैं। भारत के Digital Public Infrastructure में आज दुनिया के दर्जनों देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं। Drone Technology और Space Economy में भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

ये उस नए भारत की तस्वीर हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे भारत न्यूजीलैंड की तरह की इकॉलॉजी और इकॉनॉमी दोनों में बैलेंस बनाकर चल रहा है।

साथियों,

भारत की इस ग्रोथ का एक और पहलू भी है, ये पहलू हमारी विरासत है, हमारी हैरिटेज है। भारत, जितना महत्व अपनी इकॉनॉमी और इकॉलॉजी को देता है, उतना ही फोकस, अपनी हैरिटेज पर भी करता है।

साथियों,

भारत कैसे काम करता है, इसका उदाहरण श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूप हैं। जब अफगानिस्तान में संकट आया, तो हम गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे मान के साथ भारत लेकर आए।

साथियों,

हमारे महान सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, साहस, समानता और करुणा का संदेश दिया है। दुनिया के हर हिस्से में गुरुद्वारे, सेवा के सेंटर हैं। कोई भूखा आए, उसे भोजन मिलता है। कोई संकट में हो, उसे सहारा मिलता है।

इसी माहौल में सिख कम्युनिटी के कुछ भाइयों और बहनों ने हमें बताया था कि श्री हरमंदिर साहिब में सेवा के लिए FCRA से जुड़ी कुछ परेशानियां आ रही हैं। हमने उस समस्या का तुरंत समाधान किया।

साथियों,

आप सभी श्री हेमकुंड साहिब जी के बारे में भी जानते हैं। हैं। हिमालय की ऊंचाइयों पर है। साल का लंबा समय बर्फ की चोटियों से घिरा रहता है। वहाँ अगर कोई दर्शन करने के लिए जाना चाहे तो बड़ा कठिन मार्ग है, बहुत कम लोग जा पाते हैं। खास करके हमारे सिख भाई-बहन वहाँ यात्रा के लिए जाते हैं।

वहाँ दर्शन के लिए जाने में, खास करके हमारे बुज़ुर्गों को, हमारे सिख भाई-बहनों को सहूलियत हो, इसलिए सरकार हेमकुंड साहिब तक रोपवे भी बनवा रही है।

साथियों,

हमारी ही सरकार ने साहिबजादों के शौर्य और बलिदान की अमर स्मृति में प्रति वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाना प्रारंभ किया है। आज यह दिवस पूरे देश के लिए, प्रेरणा का पर्व बन चुका है। आज केरलम से लेकर असम तक का बच्चा भी चारो साहिबजादों और माता गुजरी के बलिदान के बारे में जानने लगा है।

‘वीर बाल दिवस’ ने भारत के अनगिनत बच्चों के मन में युवाओं के हृदय में अटूट साहस का संचार किया है।

साथियों,

मैं आपसे पवित्र जोड़े साहब की भी बात करूंगा। मेरी सरकार में मेरे एक साथी हैं, श्रीमान हरदीप पुरी जी। पुरी परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सेवादार थे। हरदीप पुरी जी ने मुझे यह बताया था की उनके परिवार ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के “जोड़े साहब” 300 साल से संजो के रखे हैं।

बंटवारे के समय पुरी साहब के पूर्वज इन्हें सुरक्षित दिल्ली ले आए थे। पवित्र “जोड़े साहब” को उनका परिवार सिख संगत को सौंपना चाहता था जिससे की ज़्यादा से ज़्यादा लोग इनके दर्शन कर सकें।

फिर हमने एक समिति बनाई, जो सिख परंपराओं को जानते हैं, जानकारों की हमने advice ली और हमने निर्णय लिया कि इन पवित्र जोड़े साहब को वहां ले जाया जाए जहां श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पहली बार पावन भूमि पर आए, जहां उनका जन्म हुआ, यानी हमारे श्री पटना साहिब।

मुझे बहुत खुशी है कि अब यह पवित्र जोड़े साहब पटना साहिब की पावन भूमि पर है और यह मेरा सौभाग्य है कि उस पवित्र अवसर का मुझे साक्षी बनने का, वहां मौजूद रहने का सौभाग्य मिला था। मैं आपसे भी आग्रह करूंगा कि जब भी भारत जाएं, पटना साहिब में उनके दर्शन जरूर करें।

साथियों,

आज मैं यहां से बहुत सारा विश्वास, बहुत सारा प्यार, और बहुत सारी स्मृतियां लेकर जा रहा हूं। और मैं आपसे ये भी कहूंगा, इस बार भारतीय पीएम को न्यूज़ीलैंड आने में 40 साल लगे हैं, लेकिन अब इतना लंबा इंतज़ार आपको नहीं करना पड़ेगा। अब 40 साल नहीं लगेंगे, ये मोदी की गारंटी है।

और मोदी की गारंटी मतलब, गारंटी पूरा होने की गारंटी।

साथियों,

मैं आपसे एक आग्रह भी करना चाहता हूं। हमने कुछ समय पहले, हमारी इंडियन डायस्पोरा के बच्चों के लिए एक नया प्रयोग किया है। हमारे बच्चे भारत को समझें और भारत की विविधता की बात दुनिया तक पहुँचे, इसके लिए हमने भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। अभी इसका कर्टेन रेजर ही हुआ है, और हमारे साथियों ने इसमें ही जिस एनर्जी से पार्टिसिपेट किया है, मैं वही देखकर बहुत प्रभावित हूं।

अब हम इस इवेंट के सिक्स्थ एडिशन को और हाईटेक बना रहे हैं। बहुत सारे इवेंट्स इस बार ऐप के माध्यम से होने वाले हैं। मेरा आग्रह है कि यहाँ जितने भी युवा साथी हैं, वो इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। भारत को जाने और भारत की विरासत को न्यूजीलैंड के लोगों से जोड़ें।

साथियों,

मैं एक शानदार फ्यूचर सामने देख रहा हूं, जिसमें विकसित भारत की रोशनी भी है, और न्यूज़ीलैंड की प्रॉसपैरिटी भी है। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्राइम मिनिस्टर लक्सन और उनकी टीम का आभार! न्यूज़ीलैंड की जनता का धन्यवाद!

एक बार फिर मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय! वंदे मातरम्!

थैंक यू !
की ओरा !