अभी सर्बानंद काफी विस्‍तार से खेल जगत में क्‍या हो रहा है, उसके विषय में बता रहे थे। मेरा मुख्‍य काम है आप लोगों को बधाई देना। वैसे मैं आज डेढ़-दो घंटे आप लोगों के साथ बिताना चाहता था। मैंने जो पहले schedule बनाया था, लेकिन फिर मुझे Vizag जाना जरूरी हो गया, cyclone के कारण। इसलिए आपसे मिलने के बाद तुरंत मुझे निकलना पड़ेगा।

इस भेंट के पीछे मेरा मुख्‍य मकसद था - आप लोगों को सुनना। क्‍योंकि हर एक के पास अपनी एक History है। हर एक का अपना एक प्रयास है। कितनी कठिनाइयों से आप घिरे होंगे। प्रारंभिक दिनों में घर से भी कहते होंगे- नहीं, पढ़ाई करो, खेलने कहां जाते हो? यही करो। यही कठिनाइयां रहती हैं। एक स्‍टेज के बाद तो फिर परिवार को लगता है, वाह वाह, हमारा बेटा, हमारी बेटी कुछ कर रही है। लेकिन पहले तो सब लोग रोकते रहते है।

उसके बाद भी हमारे देश में खिलाड़ी को दो चीजों पर ध्‍यान केन्द्रित करना पड़ता है। एक तो खेल पर, दूसरा ये खिलवाड़ पर। दोनों hassles को पार करना पड़ता है। खेलकूद, हमारे देश में बहुत पुरानी परंपरा रही है। आप लोगों ने, अगर Archeological Sites देखने का अगर आपका शौक हो, हमारे देश में धौलावीरा करके एक स्‍थान है, दुनिया का सबसे पुरातन नगर। 5000 year old वो Town है। और कभी वहां जाएंगे, कच्‍छ के रेगिस्‍तान के पास है, तो वहां पर एक बहुत बड़ा स्‍टेडियम है 5000 साल पहले का। करीब 5000 लोग उसमें बैठ सके, इतना बड़ा स्‍टेडियम है। इसका मतलब यह है कि उस समय भी Sports एक प्राथमिक व्‍यवस्‍था का विषय रहा होगा, तभी जाकर इतना बड़ा स्‍टेडियम हजारों साल पहले बना होगा।

हमारे जितने रामायण-महाभारत की कथायें पढ़ते हैं, उसमें भी गुरू के पास बाकी शिक्षा के बजाए ये शिक्षा प्रमुख रहती थी। शस्‍त्रों की भी ट्रेनिंग रहती थी और ये मल्‍लयुद्ध वगैरह सब उस जमाने में उसका वर्णन रहता है। यानी ये विरासत तो हमारी पुरानी है। लेकिन बीच के कार्यकाल में हमने globally जो अपने-आप को तैयार करना चाहिए, हम काफी कम रहे हैं।

उसमें कोई खिलाडि़यों का दोष नहीं है। वो तो, उसको भी लगता है कि मैं विजेता बनकर के वापस आऊं। वह हारने के लिए थोड़े जाता है। लेकिन उसको जिस प्रकार का एक्‍सपोजर मिलना चाहिए, जिस प्रकार की ट्रेनिंग मिलनी चाहिए, जिस प्रकार का Infrastructure और Environment available होना चाहिए, उसकी कमी महसूस होती है। लेकिन अच्‍छा ये हुआ है कि पिछले कुछ समय से राज्‍यों का भी इस तरफ ध्‍यान गया है। कई राज्‍य अलग Sports University बना रहे हैं। भारत सरकार कई देशों के साथ Sports के expertise के लिए MOU कर रही है।

अभी ऑस्‍ट्रेलिया Prime Minister आए थे तो मैंने उनके साथ विस्‍तार से बात की थी कि आप भारत में sports के संबंध में हमारे साथ जुड़कर के कैसे Infrastructure में, और चीज में क्‍या मदद कर सकते हैं। काफी मेरी विस्‍तार से बातचीत हुई है। मैं और भी कई देशों से इस विषय में बात कर रहा हूं। उसी प्रकार से कोशिश अपनी ऐसी है कि हम देश में sports की mapping करे। कुछ राज्‍य हैं, जिसकी कुछ खेलों में काफी अच्‍छी स्थिति है। कुछ राज्‍य हैं, जैसे हरियाणा में देखो तो बहादुर लोग मिल जाएंगे आपको। उनकी वहां expertise है तो वहां इस प्रकार का focus हो। हैदराबाद ने अपना अलग नाम निकाला है तो उनके लिए इस प्रकार से facility develop हो। अगर ये चीजें हम करते हैं तो शायद हम बहुत ही focused activity पर ध्‍यान दें पाएंगे। मेरी उमंग है और आप लोगों का हौसला है। ये दोनों मिलकर के जरूर कुछ न कुछ अच्‍छा होगा, ऐसा मेरा विश्‍वास है।

कोई भी देश आत्‍मसम्‍मान के बिना आगे बढ़ ही नहीं सकता है। आत्‍मगौरव के बिना आगे नहीं बढ़ सकता है। और जब छोटे-छोटे recognisation मिलते जाते हैं recognise होते जाते हैं तो इसका total बढ़ता जाता है जो ये ultimately हर पीढ़ी को प्रेरणा देता है। जैसे हमारे वैज्ञानिकों ने मंगलयान में सफलता प्राप्‍त की। दुनिया में हम पहले देश बने जिन्‍होंने orbit में पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्‍त की। हम पहले देश बने हैं। अब ये कोई प्रधानमंत्री ने काम नहीं किया है, और न ही मंत्रिपरिषद के लोगों ने किया है। किया है वैज्ञानिकों ने। लेकिन सीना सारे हिंदुस्‍तानियों का तन जाता है, गर्व हो जाता है। सारी दुनिया को स्‍वीकार करना पड़ रहा है कि अच्‍छा भाई....जिस प्रकार से हम लोगों ने ये Mars में सफलता पाई है....!

अगर आप हैदराबाद में ऑटो रिक्‍शा में जाएं, एक किलोमीटर, तो कम से कम 10-12 रुपया लगता होगा। हम लोगों का Mars पर जाने का खर्चा एक किलोमीटर का 7 रुपये आया है। यानी हॉलीवुड की फिल्‍म से भी कम खर्चें में ये Mars Mission हमारा सफल हुआ है। ये घटना स्‍वाभिमान में जोड़ती है।

वैसे ही हमारा एक खिलाड़ी विजय प्राप्‍त करता है, तो वो तो वहां एक कोने में होता है, पसीना पौंछ रहा है, उसे तो मालूम ही नहीं है कि दुनिया क्‍या देख रही है। लेकिन अभी तो आपका पसीना शरीर से सूखा नहीं है, और पूरे हिंदुस्‍तान में एकदम से गर्व महसूस होता है। सबको आनंद होता है, वाह, चलिए, कुछ कर दिखाया। इसका Electrified Effect होता है इन चीजों का और ऐसी चीजें जब निरंतर बनती है, तो हर पीढ़ी के लोग प्रेरणा का कारण बन जाते हैं। इसलिए हमारे लिए आप लोगों की सफलता सिर्फ व्‍यक्तिगत सफलता का मुद्दा नहीं है। ये हर भारतवासी के हृदय में आत्‍मगौरव पैदा करता है, आपका प्रयास सम्‍मान पैदा करता है। उस पर जितनी आपने मेहनत की, पसीना आपने बहाया, सुबह नींद खराब करके आप मैदान में चले गए, लेकिन कूदते वो लोग हैं, और वही आपकी सफलता है। ये पूरा हिंदुस्‍तान इस बात को लेकर के खड़ा हो जाता है, आपकी सफलता के लिए उसको आनंद होता है। यही सबसे बड़ा Achievement होता है।

मैं जानता हूं, कितनी कठिनाइयों से निकलना पड़ता है। दुनिया के और देश जब आते हैं, उनकी एक-एक चीज जब आप देखते होंगे तो आपको लगता होगा कि देखिए, इनके पास तो ये चीज ऐसी है, मेरे पास कैसी है। हम सामान्‍य साधनों से आज जा रहे हैं। ये मुझे विश्‍वास है, इन चीजों में जरूर बदलाव आएगा, professionalism आएगा।

एक अच्‍छा प्रारंभ यह हुआ है कि हमारा जो corporate world है, ये भी अपने-आप को किसी sports के साथ identify करने लगे हैं। आने वाले दिनों में इसका बहुत बड़ा लाभ होने वाला है, क्‍योंकि इस प्रकार का एक Public-Private Partnership Model develop होता है। तो Sportsman की भी गरिमा बढ़ती है। उसको कभी अपनी निजी आर्थिक जीवन की चिंता नहीं रहती है। उसके लिए भी सुविधा रहती है। तो मेरी कोशिश ये है कि Sports में हम खिलाडि़यों को जितनी सहायता कर सकते हैं, करें। जितना प्रोत्‍साहन दे सकते हैं, दें। Expertise के लिए जो भी बन पड़ता है, करें। ऐसा तो नहीं है कि भारत के लोगों में कोई क्षमता नहीं है। अगर मौका मिले तो भारत के लोग भी अपना पराक्रम जरूर दिखा सकते हैं।

मैं देख रहा हूं कि इन दिनों, पहले के समय में थोड़ा कम खाते थे, मगर इन दिनों Sports के field के लोग भी, उनकी हर गतिविधि समाज के लिए प्रेरक बनती जा रही है। यह अच्‍छी स्थिति है। अभी मैरी कॉम ने सफाई का काम किया। मैं देख रहा था न्‍यूज में मोदी सफाई कर रहा था, उससे ज्‍यादा, मैरी कॉम सफाई कर रही थी, इसका असर ज्‍यादा था। उसने और नौ लोगों को बोला कि नहीं, आप भी करिये। मैं देख रहा था, सचिन तेंदुलकर भी इन दिनों करीब करीब रोज जाते हैं सफाई करने के लिए सुबह। एक माहौल बनाने में आपको जो स्‍थान मिला है, वह समाज जीवन में कितनी मदद करता है।

मैं हमारे HRD Ministry को कहने वाला हूं कि हमारे जो खिलाड़ी विजयी हो के जाते हैं, और जिनको थोड़ा स्‍वभाव भी बोलने का बातचीत करने का होता है, सबका नहीं होता है, ऐसे लोगों को University ले जाना चाहिए। University में उनके talks, students के साथ होने चाहिए। इससे बहुत फायदा होता है। जब एक खिलाड़ी अपनी कथा खुद students के साथ share करता है। बच्‍चों के मुंह में इतने सवाल होते हैं। आप ये कैसे करते थे, आपके माता जी-पिता जी डांटते तो नहीं थे ना, आपको sufficient time मिलता था ? पढ़ाई में क्‍या होता था। Home-work नहीं करते थे तो क्‍या होता था? सब पूछते हैं बच्‍चे।

मैं समझता हूं, ये बात कोई राजनेता करने जाए तो यह उनके गले नहीं उतरेगी, लेकिन एक खिलाड़ी खुद जो Success है, वो जाता है तो उसके मन को बहुत छू जाता है और हम भी तय करे हां, वैसे Sports वालों का schedule भी इतना tight रहता है, कि शायद, साल में 20-25 Week तो वो बाहर ही जाते होंगे। एक position पर पहुंच के, उनका तो ऐसे ही रहता है। लेकिन फिर भी जब समय मिले, सीधी बातचीत, अगर ये माहौल बनाएंगे तो उसका फायदा होगा।

Sports में जिसमें हम लोग आगे काम करना चाहते हैं। आखिरकार Sportsman का Career का समय काफी कम होता है। Age हो जाती है, Physically भी उसका, उतना संभव नहीं होता है। एक सीमित कार्यकाल तक...। हमारे जैसा Field नहीं है आपका, हमारे यहां 90 साल तक भी गाड़ी चलती है। आप लोगों का एक सीमित समय तक होता है। लेकिन Sports Related Activity आज बहुत बढ़ गई है। खिलाड़ी को उसके साथ एक और expertise खेल की ही लानी चाहिए। आने वाले दिनों में, आपने देखा होगा, कि क्रिकेट में कई खिलाड़ी ऐसे थे, खेलकूद से निकले तो वे Statistics पर, कुछ लोग चले गए Special Commentator में रूप में। कोई अच्‍छी भाषा develop किया, तो commentator ही बन गए। कुछ तो अंपायर बन गए। लेकिन बाद में भी कई areas होते है, उनकी भी Institution चलती हैं।

अभी सानिया से मेरा मिलना हुआ था, बहुत अच्‍छी Institution खड़ी की है। ऐसी चीजें, जब आप मैदान से बाहर निकलें, तब भी खेल जगत का एक बहुत बड़ा विश्‍व है, जो पूरा एक आपका आर्थिक जीवन उस पर आगे बढ़ सकता है। उसको भी हमको वैज्ञानिक तरीके से develop करना है ताकि कभी Sportsman की नौकरी-वौकरी तलाशने की जरूरत ना पड़े, क्‍योंकि स्‍वयं उसकी expertise बन जाती है, expertise की requirement रहती है। लोग even आज अच्‍छे ढंग के मैदान बनाना है, इसके लिए भी expertise हो गई। तो ये जितने हमारे यहां Institutional work खड़ा हुआ, तो खिलाडि़यों के लिए इसके बाद भी एक बहुत बड़ी Career की बड़ी संभावना है sports university के माध्‍यम से हम इसको बढ़ाना चाहते हैं। Sports University के माध्‍यम से Academic Field का भी बहुत बड़ा काम खड़ा होगा। Teaching का ये, लगता है कि चलिये मैं Teaching करके भी Sports को बढ़ावा दे सकता है, Sports universities में उसके लिए भी अवसर रहेगा।

जब तक हम पूरे जीवन की chain नहीं बनाते हैं, खिलाड़ी को एक Career के रूप में भी अवसर नहीं मिलेगी। तो इस प्रकार की दिशा में भी मैं काम कर रहा हूं। लेकिन आप लोगों के सुझाव उसमें ज्‍यादा काम आएंगे। एक तो आपको Global Exposure हुआ है। आप दुनिया के खिलाड़ियों से बातें करते हो, दुनिया के खेल जगत के environment को जानते हो, वहां के experts से आपका dialogue होता है, वहां की कठिनाइयों का आपको पता है। इतना ज्‍यादा आप लोगों का involvement होगा, शायद हम इस चीज में बहुत ही अच्‍छा कर पाएंगे।

खिलाड़ी की discipline, खेल में विजय जितना गौरव दिलाता है, लेकिन एकाध छोटी सी गलती, दुनियाभर में देश का नाम बदनाम कर देती है। हमारे देश का तो दुर्भाग्‍य ये है कि 15 लोग Gold Medal लाए तो उसकी खबर 8वें नंबर पे होती है, लेकिन अगर किसी खिलाड़ी ने गलती कर दी तो वह नंबर ब्रेकिंग न्‍यूज हो जाती है और खेल का मौसम हो, सब हो लेकिन, वैसे ही कोई मामूली राजनेता उटपटांग बोल दे तो Headline News होता है और जो बेचारा 15 साल से पसीना बहा करके Gold Medal लाया है, उसका News 11 नंबर पर चला जाता है। तो ये हमारे देश की कुछ कठिनाइयां हैं। किस समय, किस बात को बल देना चाहिए, उन कठिनाइयों से गुजरना है। हम लोग तो आदी हो गए हैं, क्‍योंकि हमारा रोज का कारोबार है, ऐसी कठिनाइयों का। आप लोगों के लिए ज्‍यादा दिक्‍कत होती है।

लेकिन आप लोगों ने देश का गौरव बढ़ाया है, आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। और मैं, आपका एक मित्र हूं, आपका एक साथी हूं। आप खुले मन से मुझे अपनी बात बताते रहें। मुझे लिख सकते हैं, हक से लिख सकते हैं। क्‍योंकि जितना काम एक राजनेता करता है, खिलाड़ी उससे कम नहीं करता है।

मेरी तरफ से भारत का सम्‍मान बढ़ाने के लिए आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। कभी आप अलग से भी मिलना चाहें तो मेरे यहां समय मांग सकते हैं। मैं समय जरूर दूंगा। क्‍योंकि मुझे इस क्षेत्र में कुछ न कुछ हो, यह मेरी इच्‍छा है। लेकिन मैं जितना सोचूंगा, उतना आप लोग अनुभवी होने के कारण ज्‍यादा अच्‍छा सुझाव दे सकते हैं।

फिर एक बार आप सबको बहुत-बहुत बधाई।

Congratulations

Thank You, Thanks.

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भारत-न्यूजीलैंड संबंध स्थायी मित्रता, समान मूल्यों और साझा प्रतिबद्धता पर आधारित हैं: ऑकलैंड में पीएम मोदी
July 11, 2026

नमस्ते !
की ओरा New Zealand!

हम भारत के लोग सुनते आए थे, 20 साल के बाद। लेकिन आज चालीस साल बाद कोई भारतीय पीएम न्यूज़ीलैंड की धरती पर आया है। ये मेरा सौभाग्य है। मैं न्यूजीलैंड के सभी निवासियों के लिए, आप सभी लोगों के लिए, 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं।

साथियों,

ये प्रधानमंत्री के रूप में भले ही मेरा पहला न्यूज़ीलैंड दौरा है। लेकिन 25-30 साल पहले, जब मैं किसी सरकार में भी हिस्सा नहीं था, सार्वजनिक जीवन में मुझे कोई जानता नहीं था, तब भी मुझे यहां न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। और उस समय, मुझे किसी ने गिफ्ट में तीन चीजें दी थीं जो मैं वापस इंडिया लेकर के गया था। एक, यह मफ़लर। एक कैप, और एक दस्ताना। क्योंकि ठंड का मौसम था।

और उसमें से एक चीज़ मैं अभी यहां इस कार्यक्रम में भी लेकर आया हूं। यह मफ़लर जो आप देख रहे हैं, यह 25-30 साल पहले मुझे न्यूजीलैंड के एक साथी ने दिया था। इतने साल में मैंने कई बार इसका उपयोग किया, और आज भी इसे बहुत संभाल कर के रखा है। जैसे आपके प्यार को संभाल के रखता हूं।

इस बार जब मेरा यहां आने का कार्यक्रम बना, तो मैं विशेष तौर पर इसे अपने साथ लेकर के आया क्योंकि खबर थी कि ठंड ज्यादा है।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के रिश्ते में यादें भी हैं, दोस्ती भी है, वैल्यूज़ भी हैं और एक कमिटमेंट भी है। इस रिश्ते को न्यूज़ीलैंड की एक सुंदर परंपरा अच्छे से डिफाइन करती है। यहाँ सदियों से एक शब्द लोगों को जोड़ता आया है - वाका। वाका सिर्फ़ एक नाव का नाम नहीं है, वाका हमारी शेयर्ड जर्नी की प्रतीक है। और आज भारत-न्यूजीलैंड की यही वाका एक नई यात्रा पर निकलने के लिए तैयार है।

हमारे सामने अवसरों से भरा खुला समुद्र है, हवाएँ हमारे साथ हैं, समंदर की विशाल लहरें हमारे साथ हैं, इच्छाशक्ति का नीला आसमान हमारे साथ है, पाने को काफी कुछ है, और मैं जानता हूं, हम सफल होंगे।

साथियों,

मुझे इस यात्रा की सफलता पर पूरा भरोसा है, जानते हैं क्यों? मोदी नहीं, क्योंकि इसके असली नाविक आप सभी हैं। ऑकलैंड से वेलिंगटन तक, क्राइस्टचर्च से क्वीन्सटाउन तक, न्यूज़ीलैंड के कोने-कोने में फैला भारतीय समुदाय इस शेयर्ड जर्नी का एक नाविक है।

साथियों,

आगे बढ़ने से पहले, मैं अपने मित्र, प्राइम मिनिस्टर क्रिस्टोफर लक्सन, न्यूज़ीलैंड सरकार के सभी साथियों और यहां लेबर पार्टी के मंबर्स का अभिनंदन करूंगा।

ये दिखाता है कि भारत-न्यूज़ीलैंड रिश्ते को कितना बड़ा बाइ-पार्टिसन सपोर्ट है। इससे ये भी पता चलता है कीवी इंडियन कम्यूनिटी की अचीवमेंट्स आपका कंट्रीब्यूशन कितना बड़ा है। आप यहां आए किवी इंडियन कम्यूनिटी के इस उत्सव का हिस्सा बने इससे ये सेलिब्रेशन और वाइब्रेंट हो गया है।

आपने जिस गर्मजोशी से जिस स्नेह और उत्साह से, आप ने हम सभी का स्वागत किया है मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

वैसे एक्सीलेंसी, किवी इंडियन कम्यूनिटी में भी सुपरहिट हैं। भारत के इंडिपेंडेंस डे पर आपने क्रिस हिपकिंस के साथ मिलकर दमादम मस्त कलंदर गाने पर जो डांस किया वो काफी वायरल हुआ। आपके वो मूव, Kiwi Indians के दिलों में छप गए हैं।

साथियों,

न्यूज़ीलैंड वाकई एक अद्भुत देश है। यहां पीस है, प्रॉसपैरिटी है, नेचर है, कल्चर है, और न्यूज़ीलैंड की असली ताकत, यहां के स्थानीय लोग हैं। न्यूज़ीलैंड के लोगों ने दिखाया है कि कोई देश जब एक जूनून, एक जज्बे के साथ आगे बढ़ता है, तो वो दुनिया को इंस्पायर करता है।

यहां जो किवी इंडियन कम्यूनिटी है, आप सभी को भी न्यूज़ीलैंड के दिलदार लोगों ने बहुत प्रेम से अपनाया है, अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। उन्होंने आपके टैलेंट, आपके विजन पर ट्रस्ट किया है। और आज देखिए, न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी हो, यहां की सोसायटी हो, किवी इंडियन्स नए-नए रंग भर रहे हैं।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां निखिल रविशंकर Air New Zealand के CEO बन सकते हैं। जहां आनंद सत्यानंद गवर्नर जनरल बन सकते हैं जहां क्रिकेट टीम में रचिन रविंद्र, ईश सोढी और एजाज़ पटेल जैसे टैलेंट को अवसर मिल सकता है।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां की सड़कों में भी भारतीय शहरों को सम्मान दिया गया है। कहीं खंडाला है। कहीं बॉम्बे हिल्स हैं। कहीं कोरोमंडल है।

कलकत्ता स्ट्रीट, दिल्ली क्रिसेंट, अमृतसर स्ट्रीट, ऐसे कितने ही नाम हैं। यहां रहते-रहते आप भी पूरे के पूरे Kiwi हो गए हैं। जैसे मुझे बताया गया है कि किसी भी विषय पर बात शुरू कीजिए थोड़ी ही देर में बात मौसम पर पहुँच जाती है!

साथियों,

मैं न्यूज़ीलैंड की लीडरशिप से जब भी मिला हूं, वो आप सभी की बहुत प्रशंसा करते हैं। प्रशंसा आपकी होती है, और माथा मेरा ऊंचा होता है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कि भारत, हज़ारों वर्षों पुरानी सभ्यता है जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में हर दौर में भारत ने खुद को ट्रांसफॉर्म किया है और इसका कारण है, हमारी सीखने की ललक।

भारत सबसे सीखता है हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं जनकल्याण की भावना मायने रखती है और इसलिए हमने न्यूज़ीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।

न्यूज़ीलैंड, दुनिया का वो देश है जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का राइट दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूज़ीलैंड की सोसायटी में वीमेन, बहुत बड़े पैमाने में कंट्रीब्यूट कर रही हैं। भारत भी आज Women Led Development के मंत्र के साथ महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है।

साथियों,

रूरल इकॉनॉमी, कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है ये न्यूज़ीलैंड ने करके दिखाया है। न्यूज़ीलैंड की ताकत, एग्रीकल्चर के इर्द-गिर्द बनाया गया एक एफिशियंट इकोसिस्टम है। ट्रेसेबिलिटी हो, फूड सेफ्टी हो, कंप्लायंस सिस्टम हो ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे, छोटे किसानों वाले बड़े एग्रीकल्चर नेशन के लिए बहुत बड़ी सीख है।

न्यूज़ीलैंड ने ज़ेस्प्री मॉडल से दिखाया है कि छोटे किसान भी बाज़ार के एक बड़े ब्रैंड बन सकते हैं। न्यूज़ीलैंड की क्लाइमेट-स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग टेक्नॉलॉजी में भी हमारे लिए सीखने को बहुत कुछ है।

साथियों,

यहां के मानुका हनी को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां हनी ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा हेल्थ एंड वेलनेस से जुड़ा है वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी हनी का बहुत बड़ा महत्व है। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि भारत में भी हम बी-कीपिंग को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में हनी प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी हुई है।

और आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो हनी आता है, वो गोल्ड क्या, डायमंड बनता जा रहा है। मैं समझता हूं, न्यूजीलैंड से हम हनी प्रोडक्शन और बढ़ाने के बारे में भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

इस साल इंडिया–न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशन्स के सौ साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी। उस टूर में मेजर ध्यानचंद के शानदार परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हुई थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का भी दिल जीत लिया था।

साथियों,

कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं, तो ये कोलैब का जमाना है। न्यूज़ीलैंड और भारत स्पोर्ट्स में भी बहुत ही शानदार कोलैब कर सकते हैं। जैसे एक उदाहरण रग्बी का है। मुझे अभी-अभी बताया गया है कि कुछ देर पहले ही ऑल ब्लैक ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए, इसमें न्यूज़ीलैंड इसमें हमारी बहुत help कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में “न्यूज़ीलैंड रग्बी” और “रग्बी इंडिया” के coaching program को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।

साथियों,

आज यहां आने से पहले, मैं यहाँ न्यूज़ीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप event में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन्स ने नए ideas ने वाकई मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि हम स्पोर्ट्स टेक में साथ मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं।

भारत और न्यूज़ीलैंड का फ्यूचर, आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण, स्पेस सेक्टर भी है। भारत का चंद्रयान जब मून के साउथ पोल पर लैंड किया, पूरा न्यूजीलैंड नाच रहा था उस दिन। और उस दिन हम सबको गर्व हुआ।

अब आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। आपको गर्व दिलाने में इस सक्सेस में न्यूजीलैंड की टेक्नॉलजी का भी योगदान रहा है। न्यूजीलैंड की स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया है। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं।

साथियों,

स्पेस सेक्टर ये बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी, एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती हैं। यही हमारे ट्रेड अग्रीमेंट की भी स्पिरिट है। ये ट्रेड अग्रीमेंट विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा। और भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों के बिजनेस को नए अवसर देगा।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच एक और बहुत बड़ी सम्मानता है। ये समानता, हमारे इंडिजनेस कल्चर की है, इंडिजनेस कल्चर को सेलिब्रेट करने, उसको संरक्षण देने की है। और आज मैं माओरी समाज को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं।

मैंने हाका को केवल एक performance के रूप में ही नहीं देखा। मैंने हाका में, एक समाज की आत्मा देखी है। उसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है, और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एहसास है।

साथियों,

माओरी संस्कृति में एक बहुत सुंदर शब्द है- मना-कितांगा। इसका मतलब है, सम्मान देना, अपनापन देना, और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं 'अतिथि देवो भवः।'

शब्द अलग हैं, परिवेश अलग हैं, पहनावा अलग हैं, भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है।

ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है—फानो यानि परिवार। इसमें कई पीढ़ियाँ होती हैं। रिश्ते होते हैं। पूरा समुदाय होता है। भारत भी, परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता, हमारे लिए फैमिली, एक इंस्टीट्यूशन है।

साथियों,

माओरी परंपरा का एक और सुंदर विचार है— काईत्या कितांगा। ये हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं हैं। हम उसके संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है— 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।' पृथ्वी हमारी माता है। इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए, एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं।

साथियों,

मैं जानता हूं, हजारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी आपके दिल के किसी न किसी कोने में, दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही रहता है, हिंदुस्तान बसता ही है। सही है कि नहीं है? शरीर यहां होगा, मन? और इसीलिए, आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नज़र रखते हैं।

और जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर के देखते हैं, तो बहुत सी चीज़ें देखने की छूट जाती हैं। लेकिन घर में टी.वी. पर बैठकर के जब देखते हैं, तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसा ही, आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। और यही बात हमें सबसे खास बनाती है।

भारतीय देश से बाहर जिस देश में रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में मदद करते हैं, और अपने देश के विकास की भी जानकारी रखते हैं।

साथियों,

हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।

साथियों,

वैश्विक चुनौतियों के बीच, आज भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है वो अभूतपूर्व है। मैं आपके सामने देश की उपलब्धियों का भारत के सामर्थ्य का एक गुलदस्ता प्रस्तुत करुंगा। यह गुलदस्ता मैं आपके लिए लेकर के आया हूँ। और मैं पक्का मानता हूँ इस गुलदस्ते में आपकी पसंद का कोई न कोई फूल ज़रूर होगा, जो आपको सुंदर भी लगेगा और गर्व से भर भी देगा।

तो आप तैयार हैं? गुलदस्ता पेश करूँ? अब आपको ढूँढना है आपका फूल कहाँ है उसमें, या तो सारे के सारे फूल आपके हैं।

साथियों,

भारत आज दुनिया की fastest growing major economy है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा Vaccine Producer है। भारत Mobile Data Consumption में दुनिया के अग्रणी देशों में है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Mobile Manufacturer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Telecom Market है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Wheat Producer है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा Milk Producer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Fish Producer है।

साथियों,

इतना ही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Automobile Market है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है। भारत बहुत जल्द दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Renewable Energy Producer बनने जा रहा है। Solar Energy Capacity में भी भारत दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो चुका है।

साथियों,

आज का भारत, दुनिया को विकास के नए मॉडल भी दे रहा है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े Digital Identity Platform का सफल संचालन कर रहा है। आज भारत में UPI के माध्यम से हर महीने अरबों Digital Transactions हो रहे हैं। भारत के Digital Public Infrastructure में आज दुनिया के दर्जनों देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं। Drone Technology और Space Economy में भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

ये उस नए भारत की तस्वीर हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे भारत न्यूजीलैंड की तरह की इकॉलॉजी और इकॉनॉमी दोनों में बैलेंस बनाकर चल रहा है।

साथियों,

भारत की इस ग्रोथ का एक और पहलू भी है, ये पहलू हमारी विरासत है, हमारी हैरिटेज है। भारत, जितना महत्व अपनी इकॉनॉमी और इकॉलॉजी को देता है, उतना ही फोकस, अपनी हैरिटेज पर भी करता है।

साथियों,

भारत कैसे काम करता है, इसका उदाहरण श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूप हैं। जब अफगानिस्तान में संकट आया, तो हम गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे मान के साथ भारत लेकर आए।

साथियों,

हमारे महान सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, साहस, समानता और करुणा का संदेश दिया है। दुनिया के हर हिस्से में गुरुद्वारे, सेवा के सेंटर हैं। कोई भूखा आए, उसे भोजन मिलता है। कोई संकट में हो, उसे सहारा मिलता है।

इसी माहौल में सिख कम्युनिटी के कुछ भाइयों और बहनों ने हमें बताया था कि श्री हरमंदिर साहिब में सेवा के लिए FCRA से जुड़ी कुछ परेशानियां आ रही हैं। हमने उस समस्या का तुरंत समाधान किया।

साथियों,

आप सभी श्री हेमकुंड साहिब जी के बारे में भी जानते हैं। हैं। हिमालय की ऊंचाइयों पर है। साल का लंबा समय बर्फ की चोटियों से घिरा रहता है। वहाँ अगर कोई दर्शन करने के लिए जाना चाहे तो बड़ा कठिन मार्ग है, बहुत कम लोग जा पाते हैं। खास करके हमारे सिख भाई-बहन वहाँ यात्रा के लिए जाते हैं।

वहाँ दर्शन के लिए जाने में, खास करके हमारे बुज़ुर्गों को, हमारे सिख भाई-बहनों को सहूलियत हो, इसलिए सरकार हेमकुंड साहिब तक रोपवे भी बनवा रही है।

साथियों,

हमारी ही सरकार ने साहिबजादों के शौर्य और बलिदान की अमर स्मृति में प्रति वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाना प्रारंभ किया है। आज यह दिवस पूरे देश के लिए, प्रेरणा का पर्व बन चुका है। आज केरलम से लेकर असम तक का बच्चा भी चारो साहिबजादों और माता गुजरी के बलिदान के बारे में जानने लगा है।

‘वीर बाल दिवस’ ने भारत के अनगिनत बच्चों के मन में युवाओं के हृदय में अटूट साहस का संचार किया है।

साथियों,

मैं आपसे पवित्र जोड़े साहब की भी बात करूंगा। मेरी सरकार में मेरे एक साथी हैं, श्रीमान हरदीप पुरी जी। पुरी परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सेवादार थे। हरदीप पुरी जी ने मुझे यह बताया था की उनके परिवार ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के “जोड़े साहब” 300 साल से संजो के रखे हैं।

बंटवारे के समय पुरी साहब के पूर्वज इन्हें सुरक्षित दिल्ली ले आए थे। पवित्र “जोड़े साहब” को उनका परिवार सिख संगत को सौंपना चाहता था जिससे की ज़्यादा से ज़्यादा लोग इनके दर्शन कर सकें।

फिर हमने एक समिति बनाई, जो सिख परंपराओं को जानते हैं, जानकारों की हमने advice ली और हमने निर्णय लिया कि इन पवित्र जोड़े साहब को वहां ले जाया जाए जहां श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पहली बार पावन भूमि पर आए, जहां उनका जन्म हुआ, यानी हमारे श्री पटना साहिब।

मुझे बहुत खुशी है कि अब यह पवित्र जोड़े साहब पटना साहिब की पावन भूमि पर है और यह मेरा सौभाग्य है कि उस पवित्र अवसर का मुझे साक्षी बनने का, वहां मौजूद रहने का सौभाग्य मिला था। मैं आपसे भी आग्रह करूंगा कि जब भी भारत जाएं, पटना साहिब में उनके दर्शन जरूर करें।

साथियों,

आज मैं यहां से बहुत सारा विश्वास, बहुत सारा प्यार, और बहुत सारी स्मृतियां लेकर जा रहा हूं। और मैं आपसे ये भी कहूंगा, इस बार भारतीय पीएम को न्यूज़ीलैंड आने में 40 साल लगे हैं, लेकिन अब इतना लंबा इंतज़ार आपको नहीं करना पड़ेगा। अब 40 साल नहीं लगेंगे, ये मोदी की गारंटी है।

और मोदी की गारंटी मतलब, गारंटी पूरा होने की गारंटी।

साथियों,

मैं आपसे एक आग्रह भी करना चाहता हूं। हमने कुछ समय पहले, हमारी इंडियन डायस्पोरा के बच्चों के लिए एक नया प्रयोग किया है। हमारे बच्चे भारत को समझें और भारत की विविधता की बात दुनिया तक पहुँचे, इसके लिए हमने भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। अभी इसका कर्टेन रेजर ही हुआ है, और हमारे साथियों ने इसमें ही जिस एनर्जी से पार्टिसिपेट किया है, मैं वही देखकर बहुत प्रभावित हूं।

अब हम इस इवेंट के सिक्स्थ एडिशन को और हाईटेक बना रहे हैं। बहुत सारे इवेंट्स इस बार ऐप के माध्यम से होने वाले हैं। मेरा आग्रह है कि यहाँ जितने भी युवा साथी हैं, वो इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। भारत को जाने और भारत की विरासत को न्यूजीलैंड के लोगों से जोड़ें।

साथियों,

मैं एक शानदार फ्यूचर सामने देख रहा हूं, जिसमें विकसित भारत की रोशनी भी है, और न्यूज़ीलैंड की प्रॉसपैरिटी भी है। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्राइम मिनिस्टर लक्सन और उनकी टीम का आभार! न्यूज़ीलैंड की जनता का धन्यवाद!

एक बार फिर मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय! वंदे मातरम्!

थैंक यू !
की ओरा !