प्रधानमंत्री मोदी की उजबेकिस्तान यात्रा समाप्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि दी
श्री मोदी ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता एवं मानवता स्मारक का दौरा किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग दिवस पर उजबेकिस्तान के लोगों के सक्रिय सहयोग और उत्साह के लिए उनकी प्रशंसा की #YogaDay  

7 जुलाई को उजबेकिस्तान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दूसरा दिन था। दिन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने ताशकंद में इंडोलॉजिस्ट्स, हिन्दी भाषा के छात्रों और भारतीय समुदाय को संबोधित किया एवं उनसे मुलाकात की।

Spoke on people to people connect & cultural ties at interaction with Indologists, Hindi students & Indian community https://nm4.in/1HJKOOj

Posted by Narendra Modi on Monday, July 6, 2015

प्रधानमंत्री ने ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्री मोदी ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता एवं मानवता स्मारक का भी दौरा किया और उनके प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया।

Paying tributes at the National Monument of Independence & Humanism.

Posted by Narendra Modi on Monday, July 6, 2015

श्री नरेन्द्र मोदी ने 21 जून को उजबेकिस्तान में योग दिवस के आयोजन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ताशकंद में बुन्योदकर फुटबॉल स्टेडियम में भारी संख्या में लोगों को योग करते देखना अद्भुत था। उन्होंने उजबेकिस्तान के लोगों के सक्रिय सहयोग और उत्साह के लिए उनकी प्रशंसा की।

Uzbekistan marked the 1st International Day of Yoga on 21st June with great enthusiasm. It was a very delightful sight...

Posted by Narendra Modi on Monday, July 6, 2015

कजाखस्तान के लिए रवाना होने से पहले श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि उजबेकिस्तान की उनकी यात्रा यादगार रही। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस यात्रा से भारत-उजबेकिस्तान संबंधों को मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने गर्मजोशी से स्वागत करने और स्नेह के लिए वहां के लोगों को धन्यवाद दिया।

A memorable visit to Uzbekistan. It will strengthen India-Uzbekistan ties. My gratitude to the people of Uzbekistan for...

Posted by Narendra Modi on Monday, July 6, 2015
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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों के साहस को किया याद
August 14, 2026
प्रधानमंत्री ने परिश्रम और पुरुषार्थ के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हम विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास का वह एक ऐसा क्षण था जिसने कई जिंदगियां तबाह कर दीं, लोगों के परिवार उजड़ गए, कई लोगों को अपनों को खोना पड़ा और लोगों ने अत्यधिक पीड़ा झेली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में भी लोगों ने शून्य से शुरू कर अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपरीत परिस्थितियों को उपलब्धियों में बदला और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों का जीवन सभी को मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाता है। श्री मोदी ने उम्मीद जताई कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने तथा विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने के हमारे संकल्प को और मजबूत करे।

प्रधानमंत्री ने उस भयावह दौर से उबरकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान देने वाले सभी देशवासियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने साहस और क्षमता से उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को साकार करने का उदाहरण प्रस्तुत किया। श्री मोदी ने सभी से सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने एक सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि परिश्रम, उद्यम और समर्पित प्रयासों से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प तथा नवाचार विकसित होते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसलिए, किसी को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्यों की ओर दृढ़ता से अग्रसर रहना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में लिखा:

आज हम #PartitionHorrorsRemembranceDay मना रहे हैं। विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को हम याद करते हैं। इतिहास का वह क्षण कई जिंदगियों को तहस-नहस कर देने वाला था…परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खोया और असहनीय पीड़ा सहनी पड़ी।
इन सब पर विजय प्राप्त करते हुए, लोगों ने शून्य से अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपत्ति को सफलता में परिवर्तित किया और राष्ट्र की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उनकी जीवन यात्राएं हमें मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाती हैं। आशा है कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा और हम सब मिलकर एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

"विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।

उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”

It is through hard work, enterprise and dedicated effort that diverse arts, science, technological skills, craftsmanship and innovations flourish, paving the way for success. Therefore, one should not remain dependent on fate; rather, one should move steadily towards one's goals with courage, diligence and persistent effort, for it is human endeavor that shapes destiny.