प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति पार्क गुएन हाए को बारीक बुने हुए दो पश्मीना स्टोल भेंट किए जिस पर रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा कोरिया के लिए विशेष रूप से लिखी गई कविता हाथ से कढ़ाई करके अंग्रेजी और कोरियाई भाषा में लिखी हुई थी। टैगोर की यह कविता कोरियाई दैनिक डोंग-ए इबो में 1929 में प्रकाशित हुई थीः-

In the golden age of Asia

Korea was one of its lamp bearers

And that lamp is waiting

To be lighted once again

For the illumination of the East

Presented President Park Geun-hye two finely woven pashmina stoles in which Rabindranath Tagore's poem for Korea is hand embroidered. — Narendra Modi (@narendramodi) May 18, 2015 The poem Gurudev Tagore specially wrote for Korea is hand embroidered in English and Korean. https://t.co/XNOGkDxyMY pic.twitter.com/aLZMxM2qFY — Narendra Modi (@narendramodi) May 18, 2015

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प्रधानमंत्री ने निस्वार्थ सेवा और करुणा की भावना को उजागर करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 06, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसे कार्य न सिर्फ आत्मिक खुशी प्रदान करते हैं, बल्कि समाज के कल्याण में भी योगदान देते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।

अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”

सुभाषितम् यह संदेश देता है कि किसी भी जीव के प्रति मन, वचन और कर्म से द्वेष न रखना, सभी के प्रति करुणा भाव रखना और उदारतापूर्वक दान करना—इन्हें आचरण का सर्वोच्च रूप माना गया है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। इससे आत्मिक खुशी तो मिलती ही है, समाज का भी कल्याण होता है।

अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।

अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”