फिल्म कलाकार अक्षय कुमार के साथ एक अराजनीतिक-अनौपचारिक बातचीत में पीएम मोदी ने अपने जीवन के कई अनसुने-अनजाने पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने एक तरफ अपने पसंदीदा फल के बारे में बताया तो दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र संघ में अपने भाषण की तैयारी और अन्य मुद्दों पर बड़े ही सहज, सरल तरीके से अपनी बात रखी।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आध्यात्मिक विकास पर बल देने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया:
"आत्मोदयः परज्यानिर्द्वयं नीतिरितीयती।
तदूरीकृत्य कृतिभिर्वाचस्पत्यं प्रतायते।।"
श्री मोदी ने कहा कि आध्यात्मिक विकास व्यक्ति में सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करता है। श्री मोदी ने कहा, "इसी सिद्धांत से प्रेरित होकर, आज हमारी युवा शक्ति देश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रही है।"
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट लिखा:
आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करता है। इसी से प्रेरित होकर आज हमारी युवा शक्ति देश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रही है।
आत्मोदयः परज्यानिर्द्वयं नीतिरितीयती।
तदूरीकृत्य कृतिभिर्वाचस्पत्यं प्रतायते।।
आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करता है। इसी से प्रेरित होकर आज हमारी युवा शक्ति देश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रही है।
— Narendra Modi (@narendramodi) August 5, 2026
आत्मोदयः परज्यानिर्द्वयं नीतिरितीयती।
तदूरीकृत्य कृतिभिर्वाचस्पत्यं प्रतायते ।। pic.twitter.com/mubMNrYdQh


