चीन के चिंगदाओ में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आज कजाखस्तान, मंगोलिया और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति के साथ व्यापक वार्ता की।

कजाखस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव के साथ मुलाकात:

Prime Minister @narendramodi had a productive meeting with Mr. Nursultan Nazarbayev, the President of Kazakhstan, on the sidelines of the SCO Summit. pic.twitter.com/DFLZ9nAP6A

राष्ट्रपति खाल्तमागीन बात्तुल्गा के साथ चर्चा:

Strategic partnership based on deep civilizational, historical and cultural linkages! PM @narendramodi met the President of #Mongolia Khaltmaagiin Battulga on the sidelines of #SCOSummit in #Qingdao. pic.twitter.com/GXlmykyJCn

किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सूरोन्बे जीन्बेकोव के साथ बातचीत:

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India's new FTA playbook looks beyond trade and tariffs to investment ties

Media Coverage

India's new FTA playbook looks beyond trade and tariffs to investment ties
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
प्रधानमंत्री 15 जनवरी को राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों की 28वीं कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे
January 14, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 15 जनवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे संसद भवन परिसर, नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के केंद्रीय हॉल में राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री सभा को संबोधित भी करेंगे।

इस सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला करेंगे और इसमें विश्व के विभिन्न हिस्सों से 42 राष्ट्रमंडल देशों और 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों के 61 लोकसभा अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी भाग लेंगे।

यह सम्मेलन समकालीन संसदीय मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर विचार-विमर्श करेगा, जिसमें मजबूत लोकतांत्रिक संस्थानों को बनाए रखने में लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों की भूमिका, संसदीय कामकाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, संसद सदस्यों पर सोशल मीडिया का प्रभाव, संसद की सार्वजनिक समझ को बढ़ाने के लिए अभिनव कार्यनीतियां और मतदान से परे नागरिक भागीदारी आदि शामिल हैं।