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प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ अम्बेडकर राष्ट्रीय स्मारक का शिलान्यास किया
केंद्र सरकार की आरक्षण नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा: प्रधानमंत्री
डॉ अम्बेडकर के सम्मान में पांच स्थलों को “पंचतीर्थ” के रूप में विकसित किया जाएगा
डॉ अम्बेडकर ने संविधान के माध्यम से समाज को एकसूत्र में पिरोया: प्रधानमंत्री मोदी
डॉ अम्बेडकर ने उन सभी लोगों के लिए आवाज उठाई जिन्हें अन्याय का सामना करना पड़ा: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज डॉ. भीमराव अम्‍बेडकर के महापरिनिर्वाण स्‍थल 26, अलीपुर रोड, दिल्‍ली में डॉ. अम्‍बेडकर राष्‍ट्रीय स्‍मारक के निर्माण संबंधी शिलान्‍यास किया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने विज्ञान भवन ने शिलान्‍यास के कार्यक्रम संबंधी पट्टिका का अनावरण किया। इसके पश्‍चात् छठे डॉ. अम्‍बेडकर स्‍मारक व्‍याख्‍यान देते हुए प्रधानमंत्री ने दृढ़तापूर्वक कहा कि केन्‍द्र सरकार की आरक्षण नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। इस नीति के अंतर्गत समाज के कमजोर वर्गों के पक्ष में कार्यक्रम चलते रहेंगे। उन्‍होंने इस संबंध में दुष्‍प्रचार कर झूठी सूचना प्रसारित करने वालों की कड़ी निंदा की। उन्‍होंने याद दिलाया कि ऐसे दुष्‍प्रचार तब भी हुए, जब श्री वाजपेयी प्रधानमंत्री थे।

डॉ. अम्‍बेडकर के योगदान को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. अम्‍बेडकर राष्‍ट्रीय स्‍मारक शीघ्र ही दिल्‍ली के महत्‍वपूर्ण भवनों में से एक होगा। उन्‍होंने घोषणा की कि वे स्‍वयं बाबासाहेब की जयंती 14 अप्रैल, 2018 को इसका उद्घाटन करेंगे।

प्रधानमंत्री ने स्‍पष्‍ट किया कि डॉ. अम्‍बेडकर के सम्‍मान में पांच स्‍थलों को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें से एक उनका लंदन के म्‍हाव स्थित जन्‍मस्‍थल भी है, जहां वे ब्रिटेन में अध्‍ययन के दौरान ठहरे थे, दूसरा नागपुर में दीक्षा भूमि है, दिल्‍ली में महापरिनिर्वाण स्‍थल और मुम्‍बई में चैतन्‍य भूमि है। इसके अतिरिक्‍त प्रधानमंत्री ने नई दिल्‍ली के जनपथ पर स्थित डॉ. अम्‍बेडकर फाउंडेशन भवन का भी जिक्र किया।

राष्‍ट्र के प्रति डॉ. अम्‍बेडकर के योगदान की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब सरदार पटेल देश को राजनी‍तिक रूप से एक कर रहे थे, तब डॉ. अम्‍बेडकर संविधान के माध्‍यम से समाज को एकसूत्र में पिरो रहे थे। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि किस तरह से डॉ. अम्‍बेडकर ने महिलाओं के समान अधिकारों की वकालत की थी, वह भी उस दौर में जब ऐसे विचारों को कड़े राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ता था। डॉ. अम्‍बेडकर ऐसे कर्म के चलते वैश्विक फलक पर छा गये थे। मार्टिन लूथर किंग ने अमरीका में यही किया था। डॉ. अम्‍बेडकर सिर्फ दलित श्रमिकों के ही नहीं, बल्कि सभी मेहनतकशों के मसीहा थे। इसके लिए प्रधानमंत्री ने आठ घंटे काम करने की समयसीमा तय करने में डॉ. अम्‍बेडकर के योगदान को याद किया।

हाल की नीतिगत पहल और विधायी कदमों का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. अम्‍बेडकर ने ही पहली बार भारत की सामुद्रिक क्षमता और अंतर्देशीय जलमार्ग के सपनों को देखा था। इसी तरह, सभी अछूते गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए केन्‍द्र सरकार ने 2018 तक यह कार्य संपन्‍न करने का वायदा किया। यह डॉ. अम्‍बेडकर के नजरिये को पूरा करने की दिशा में पहला कदम भी है।

 

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